हिमाचल में 60 सुरंगों वाली बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन का सर्वे शुरू, जानिए खासियतें

Himachal News: 60 सुरंगों से गुजरेगी बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन, सलापड़ से सरचू तक सर्वे — concept mind map

हिमाचल में 60 सुरंगों वाली बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन का सर्वे शुरू, जानिए खासियतें

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बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन

✎ बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना भारत की एक महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजना है, जो लद्दाख को हर मौसम में रेल संपर्क से जोड़ेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा व क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, मानव भूगोल)  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना (रेलवे), आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास
  • Prelims: बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन, सामरिक रेल परियोजनाएँ, हिमालयी भूविज्ञान, ऑल-वेदर कनेक्टिविटी, सीमावर्ती अवसंरचना, सुरंग निर्माण तकनीक
  • Essay: भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों में अवसंरचना निर्माण: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना भारत की एक महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजना है, जो लद्दाख को हर मौसम में रेल संपर्क से जोड़ेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा व क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी।

यह खबर चर्चा में क्यों?

बिलासपुर-मनाली-लेह ब्रॉडगेज रेललाइन परियोजना के अंतिम लोकेशन सर्वे का कार्य सलापड़ से सरचू तक शुरू हो गया है। इस सर्वे में लगभग 60 सुरंगों के निर्माण की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है, जो इस परियोजना को देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में से एक बनाती है। यह सर्वे 40 दिनों में पूरा कर रेलवे को रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परियोजना के अगले चरण की दिशा तय होगी।

पृष्ठभूमि

  • बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन 475 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित ब्रॉडगेज रेल परियोजना है जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह से जोड़ेगी।
  • यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए बनाई जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरंगें और पुल शामिल होंगे।
  • इस रेललाइन को देश की सबसे ऊँची रेललाइन में से एक माना जा रहा है, जो अत्यधिक ऊँचाई वाले दर्रों से होकर गुजरेगी।
  • परियोजना का मुख्य उद्देश्य लद्दाख क्षेत्र तक हर मौसम में (ऑल-वेदर) रेल संपर्क स्थापित करना है, जिससे सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति सुगम हो सके।
  • इसका निर्माण सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की सामरिक क्षमताओं को मजबूत करेगा और पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।
  • उत्तराखंड की पर्वतीय रेल परियोजनाओं में अपनाई गई सुरंग निर्माण तकनीक का उपयोग इस परियोजना में भी किया जाएगा, जो कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों से निपटने में सहायक होगी।

बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना क्या है?

  • यह भारतीय रेलवे की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर को लद्दाख के लेह से जोड़ना है।
  • इसकी कुल प्रस्तावित लंबाई लगभग 475 किलोमीटर है और यह ब्रॉडगेज लाइन होगी।
  • परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका एक बड़ा हिस्सा, लगभग 60 सुरंगों के माध्यम से गुजरेगा, ताकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों से बचा जा सके।
  • यह रेललाइन दुनिया की सबसे ऊँची रेललाइनों में से एक होगी, जो समुद्र तल से काफी ऊँचाई पर स्थित होगी।
  • इसका निर्माण हिमालयी क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय और मौसमी चुनौतियों के कारण अत्यधिक इंजीनियरिंग कौशल की मांग करता है।
  • परियोजना का सामरिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह भारतीय सेना को चीन सीमा के पास लद्दाख में त्वरित और विश्वसनीय आवाजाही तथा रसद सहायता प्रदान करेगी।
  • यह क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगी और स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसरों का सृजन करेगी, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
  • अंतिम लोकेशन सर्वे में सुरंगों की लंबाई, भूगर्भीय स्थिति, ट्रैक की एलाइनमेंट और पुलों के संभावित स्थानों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में से एक।
475 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज लाइन लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित करेगी।
लगभग 60 सुरंगें दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को पार करने और भूस्खलन व बर्फबारी से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक।
उत्तराखंड की पर्वतीय रेल परियोजनाओं की तकनीक हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल निर्माण सुनिश्चित करेगी।
सलापड़ से सरचू तक अंतिम लोकेशन सर्वे परियोजना के अगले चरण के लिए विस्तृत भूगर्भीय और तकनीकी जानकारी एकत्र करना।
पहाड़ों की कम कटाई पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में मदद।

महत्व

सामरिक महत्व

  • यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही को सुगम बनाएगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
  • लद्दाख जैसे दूरस्थ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र तक हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जो आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।

आर्थिक एवं पर्यटन महत्व

  • रेल संपर्क स्थापित होने से लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
  • क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय आबादी के जीवन स्तर में सुधार होगा।
  • सामानों की ढुलाई आसान और सस्ती होगी, जिससे व्यापार और वाणिज्य को प्रोत्साहन मिलेगा।

सामाजिक महत्व

  • दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए बेहतर परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे उनकी मुख्यधारा से जुड़ाव बढ़ेगा।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच में सुधार होगा।

पर्यावरणीय महत्व

  • सुरंगों के माध्यम से रेललाइन का निर्माण पहाड़ों की अनावश्यक कटाई को कम करेगा, जिससे पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
  • यह परियोजना सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन को भी कम करने में सहायक हो सकती है।

चुनौतियाँ

1. कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ

  • हिमालयी क्षेत्र की ऊँची पहाड़ियाँ, गहरी घाटियाँ और अस्थिर भूगर्भीय संरचनाएँ निर्माण कार्य को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
  • अत्यधिक ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी और कठोर मौसम की स्थिति श्रमिकों के लिए कठिनाइयाँ पैदा करती हैं।

2. तकनीकी चुनौतियाँ

  • 60 सुरंगों और कई पुलों का निर्माण, विशेष रूप से भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में, उन्नत इंजीनियरिंग और भूगर्भीय विशेषज्ञता की मांग करता है।
  • बर्फबारी, भूस्खलन और हिमस्खलन से बचाव के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग आवश्यक है।

3. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन

  • परियोजना के निर्माण से संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का सावधानीपूर्वक आकलन और शमन आवश्यक है।
  • वन्यजीवों के आवास और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना एक चुनौती है।

4. वित्तीय व्यवहार्यता

  • यह एक उच्च लागत वाली परियोजना है, जिसके लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होगी।
  • परियोजना की लागत-लाभ विश्लेषण और समय पर धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

5. मौसम संबंधी बाधाएँ

  • कठोर मौसम की स्थिति, विशेष रूप से सर्दियों में भारी बर्फबारी, निर्माण कार्य की गति को धीमा कर सकती है और समय सीमा को प्रभावित कर सकती है।
  • सर्वेक्षण और निर्माण के दौरान मौसम की अनिश्चितता एक बड़ी चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूगर्भीय अस्थिरता सुरंगों और पुलों के निर्माण में भूस्खलन, भूकंप और चट्टानों के गिरने का खतरा।
उच्च निर्माण लागत पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में निर्माण के लिए विशेष उपकरण और तकनीक की आवश्यकता से लागत में वृद्धि।
पर्यावरणीय संवेदनशीलता हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी पर निर्माण गतिविधियों का संभावित नकारात्मक प्रभाव।
मौसम की कठोरता अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और कम ऑक्सीजन स्तर निर्माण कार्य को बाधित कर सकते हैं।
सामरिक संवेदनशीलता सीमावर्ती क्षेत्र में निर्माण से सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ और बाहरी हस्तक्षेप का जोखिम।
भूमि अधिग्रहण पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और स्थानीय आबादी के विस्थापन से संबंधित मुद्दे।

आगे की राह

  • परियोजना के लिए उन्नत भूगर्भीय सर्वेक्षण और जोखिम मूल्यांकन तकनीकों का उपयोग किया जाए ताकि निर्माण संबंधी चुनौतियों को कम किया जा सके।
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) को सख्ती से लागू किया जाए और पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिए प्रभावी शमन रणनीतियाँ अपनाई जाएँ।
  • स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय जुड़ाव सुनिश्चित किया जाए और परियोजना के लाभों को उन तक पहुँचाया जाए, साथ ही विस्थापन के मुद्दों का उचित समाधान किया जाए।
  • परियोजना के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की संभावनाओं का पता लगाना शामिल हो सकता है।
  • निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग किया जाए, जैसे कि टनल बोरिंग मशीन (TBM) और भूस्खलन-रोधी उपाय, ताकि सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित हो सके।
  • परियोजना के सामरिक महत्व को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए ताकि निर्माण और भविष्य के संचालन के दौरान किसी भी खतरे से निपटा जा सके।
  • रेलवे लाइन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन और व्यापार से संबंधित सहायक बुनियादी ढाँचे के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन · सामरिक महत्व · पर्वतीय रेलवे परियोजनाएँ · बुनियादी ढाँचा विकास · सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास · पर्यटन संवर्धन · आर्थिक संवृद्धि · भूगर्भीय चुनौतियाँ · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन · ऑल-वेदर कनेक्टिविटी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रेलवे का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन का अंतिम लोकेशन सर्वे शुरू  →  दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में 60 सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित  →  लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित होगा  →  सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही सुगम होगी  →  पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा  →  राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित होगा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह परियोजना मुख्य रूप से मैदानी इलाकों से होकर गुजरेगी, जिससे सुरंगों की आवश्यकता कम होगी।
2. यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।
3. इस परियोजना का उद्देश्य लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह परियोजना दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जिसमें लगभग 60 सुरंगें शामिल होंगी। कथन 2 और 3 सही हैं, यह एक महत्वपूर्ण सामरिक परियोजना है जिसका लक्ष्य लद्दाख को हर मौसम में रेल से जोड़ना है।

Q2. अभिकथन (A): बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन का एक बड़ा हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा।
कारण (R): इससे पहाड़ों की अधिक कटाई से बचाव होगा और बर्फबारी व भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी रेल संचालन सुरक्षित और सुगम बनाया जा सकेगा।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रेललाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों से गुजरेगा। कारण (R) भी सही है और यह (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि सुरंगें पर्यावरणीय क्षति को कम करती हैं और प्रतिकूल मौसम में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन जैसी पर्वतीय रेलवे परियोजनाएँ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सामरिक सुरक्षा के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं? इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख भूगर्भीय और पर्यावरणीय चुनौतियों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व।
2. **सामरिक महत्व:**
* लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों तक त्वरित सैन्य आवाजाही और रसद आपूर्ति।
* चीन के साथ सीमा पर बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना।
* ऑल-वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना, विशेषकर सर्दियों में।
3. **विकास महत्व:**
* पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देना।
* स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।
* दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार से सामाजिक-आर्थिक विकास।
4. **प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **भूगर्भीय चुनौतियाँ:** अस्थिर हिमालयी भूभाग, भूकंपीय संवेदनशीलता, भूस्खलन का खतरा, सुरंगों और पुलों के निर्माण में तकनीकी जटिलताएँ।
* **पर्यावरणीय चुनौतियाँ:** संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव, वनों की कटाई, वन्यजीव आवासों का विखंडन, जल स्रोतों पर प्रभाव।
* **जलवायु संबंधी चुनौतियाँ:** अत्यधिक ठंड, भारी बर्फबारी, अप्रत्याशित मौसम की स्थिति जो निर्माण कार्य को बाधित करती है।
* **वित्तीय चुनौतियाँ:** उच्च निर्माण लागत और लंबी परियोजना अवधि।
5. **निष्कर्ष:** इन चुनौतियों का समाधान करते हुए सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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