24 Sep 11वें आयुर्वेद दिवस पर नागपुर में भव्य राष्ट्रीय समारोह; जानें आयुष मंत्रालय की प्रमुख पहलें
✎ आयुर्वेद दिवस भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करता है, जो स्वस्थ जीवनशैली, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और साक्ष्य-आधारित नवाचार के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य में योगदान दे रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति एवं विरासत | GS Paper II — स्वास्थ्य, सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
- Prelims: आयुर्वेद दिवस, आयुष मंत्रालय, आयुष वीज़ा, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, CCRAC-AGNI पोर्टल, आयुष विजन 2030
- Essay: भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ और वैश्विक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली और निवारक स्वास्थ्य देखभाल: एक जन आंदोलन
त्वरित पुनरावृत्ति: आयुर्वेद दिवस भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करता है, जो स्वस्थ जीवनशैली, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और साक्ष्य-आधारित नवाचार के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य में योगदान दे रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में 11वां आयुर्वेद दिवस देश और दुनिया भर में उत्साह के साथ मनाया गया, जिसका राष्ट्रीय समारोह महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित किया गया। इस वर्ष का विषय “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” था। इस अवसर पर आयुष सेवा क्षेत्र पर रिपोर्ट, “आयुष विजन 2030” और सीसीआरएएस-एजीएनआई वेब पोर्टल सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और पोर्टल जारी किए गए।
पृष्ठभूमि
- आयुर्वेद दिवस प्रतिवर्ष धनवंतरी जयंती (धनतेरस) के अवसर पर मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद को मुख्यधारा में लाना और इसकी उपचार क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
- आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) भारत में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों जैसे आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के विकास और प्रचार के लिए जिम्मेदार है।
- प्रधानमंत्री ने ‘परंपरा से ज्ञान, साक्ष्य और नवाचार तक’ आयुर्वेद की यात्रा पर जोर दिया, जो भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- आयुष वीज़ा (AYUSH Visa) सुविधा विदेशी नागरिकों को भारत में आयुष पद्धतियों के तहत उपचार प्राप्त करने में सक्षम बनाती है, जिससे पारंपरिक चिकित्सा का अंतर्राष्ट्रीयकरण हो रहा है।
- जामनगर में स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (WHO Global Traditional Medicine Centre) और WHO ICD-11 वर्गीकरण (WHO ICD-11 Classification) में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा को शामिल किया जाना पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
- केंद्रीय मंत्री ने ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्’ के सिद्धांत का उल्लेख किया, जो आयुर्वेद के निवारक और उपचारात्मक पहलुओं को रेखांकित करता है।
आयुर्वेद क्या है?
- आयुर्वेद भारत की एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘जीवन का विज्ञान’ है। यह विश्व की सबसे पुरानी समग्र चिकित्सा प्रणालियों में से एक है।
- यह प्रणाली शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है, जिसमें व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखने और रोगों का उपचार करने के लिए प्राकृतिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
- आयुर्वेद ‘त्रिदोष’ सिद्धांत पर आधारित है – वात, पित्त और कफ – जो शरीर में विभिन्न शारीरिक और मानसिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं। इन दोषों का असंतुलन रोग का कारण बनता है।
- इसमें उपचार के लिए जड़ी-बूटियों, आहार, जीवनशैली में बदलाव, योग और ध्यान जैसी पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।
- आयुर्वेद केवल रोगों का इलाज नहीं करता, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर भी जोर देता है ताकि व्यक्ति दीर्घायु और स्वस्थ जीवन जी सके।
- हाल के वर्षों में, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ एकीकृत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- आयुष विजन 2030 का लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मजबूत करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और उन्हें वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में एकीकृत करना है।
- सीसीआरएएस-एजीएनआई (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences – AYUSH Grid for Networking and Innovation) पोर्टल आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 11वां आयुर्वेद दिवस समारोह | देश और दुनिया भर में आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करता है, नागपुर में राष्ट्रीय समारोह आयोजित। |
| विषय: “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” | आयुर्वेद को भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में स्थापित करने पर जोर, निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित। |
| आयुष सेवा क्षेत्र रिपोर्ट और आयुष विजन 2030 का अनावरण | आयुष क्षेत्र के विकास और भविष्य की रणनीतियों के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है। |
| सीसीआरएएस-एजीएनआई वेब पोर्टल का शुभारंभ | आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल मंच, ज्ञान साझाकरण को सुगम बनाता है। |
| वैज्ञानिक सत्र | भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल, जन स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) के प्रबंधन में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा। |
| आयुष वीज़ा सुविधा | भारत में पारंपरिक चिकित्सा उपचार के लिए विदेशी नागरिकों को आकर्षित करने हेतु, चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- आयुर्वेद दिवस का आयोजन जन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाता है और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) पर जोर देकर, यह बीमारियों के बोझ को कम करने और नागरिकों के समग्र कल्याण में योगदान देता है।
- आयुर्वेद को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार हो सकता है, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
आर्थिक महत्व
- आयुष वीज़ा सुविधा चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) को बढ़ावा देती है, जिससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होती है और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।
- आयुर्वेद उत्पादों और सेवाओं के बढ़ते उपयोग से संबंधित उद्योगों जैसे औषधीय पौधों की खेती, फार्मास्यूटिकल्स और वेलनेस सेंटरों को बढ़ावा मिलता है।
- अनुसंधान और नवाचार में निवेश से आयुर्वेद आधारित उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का विकास होता है, जो घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात क्षमता रखते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महत्व
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (Global Traditional Medicine Centre) की स्थापना और डब्ल्यूएचओ आईसीडी-11 वर्गीकरण में आयुर्वेद को शामिल करना पारंपरिक चिकित्सा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
- आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार से भारत की सॉफ्ट पावर (Soft Power) में वृद्धि होती है और यह सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन जाता है।
- विभिन्न देशों के साथ पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग से ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान होता है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिलती है।
शासन और नीतिगत महत्व
- आयुष विजन 2030 और आयुष सेवा क्षेत्र रिपोर्ट जैसे दस्तावेज आयुष मंत्रालय की दीर्घकालिक रणनीतियों और लक्ष्यों को दर्शाते हैं, जिससे नीति निर्माण में स्पष्टता आती है।
- साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और मानकीकरण पर जोर आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ एकीकृत करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
- सीसीआरएएस-एजीएनआई पोर्टल जैसे डिजिटल पहल आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा देने और हितधारकों के बीच सूचना के आदान-प्रदान को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण हैं।
चुनौतियाँ
1. वैज्ञानिक सत्यापन और मानकीकरण का अभाव
- आयुर्वेद में कई उपचारों और दवाओं के लिए कठोर वैज्ञानिक साक्ष्य और मानकीकृत प्रोटोकॉल की कमी है।
- यह आधुनिक चिकित्सा समुदाय के बीच आयुर्वेद की स्वीकार्यता को सीमित करता है और गुणवत्ता नियंत्रण में चुनौतियां पैदा करता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य
2. आधारभूत संरचना और मानव संसाधन की कमी
- आयुर्वेदिक अस्पतालों, अनुसंधान केंद्रों और शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त आधारभूत संरचना और प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी है।
- यह आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण सेवा वितरण को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाएँ, स्वास्थ्य
3. जन जागरूकता और स्वीकार्यता
- आधुनिक चिकित्सा की तुलना में आयुर्वेद के बारे में जन जागरूकता और स्वीकार्यता अभी भी सीमित है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में।
- गलत सूचनाएं और भ्रांतियां भी आयुर्वेद को अपनाने में बाधा डालती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाएँ, स्वास्थ्य
4. अनुसंधान और नवाचार में निवेश
- आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार में पर्याप्त सार्वजनिक और निजी निवेश की कमी है।
- यह नई दवाओं, उपचार पद्धतियों और प्रौद्योगिकियों के विकास को धीमा करता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य
5. औषधीय पौधों की उपलब्धता और गुणवत्ता
- आयुर्वेदिक दवाओं के लिए आवश्यक औषधीय पौधों की निरंतर उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- अवैध कटाई, पर्यावास विनाश और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी इस समस्या को बढ़ाती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, जैव विविधता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वैज्ञानिक साक्ष्य की कमी | आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकरण में बाधा, विश्वसनीयता पर प्रश्न। |
| मानकीकरण का अभाव | आयुर्वेदिक उत्पादों और उपचारों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में कठिनाई। |
| अनुसंधान एवं विकास में निवेश | नए नवाचारों और प्रौद्योगिकियों के विकास की धीमी गति। |
| प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी | गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में बाधा। |
| औषधीय पौधों की उपलब्धता | कच्चे माल की कमी और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी मुद्दे। |
| अंतर्राष्ट्रीय मान्यता | कुछ देशों में आयुर्वेद को अभी भी मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। |
आगे की राह
- आयुर्वेदिक उपचारों और दवाओं के लिए कठोर वैज्ञानिक सत्यापन और मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित करने हेतु अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
- आयुर्वेदिक शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार करना और प्रशिक्षित पेशेवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाना।
- आयुर्वेद के लाभों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
- आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करने के लिए नीतिगत ढांचे को मजबूत करना, जिससे ‘एकीकृत चिकित्सा’ (Integrated Medicine) को बढ़ावा मिले।
- औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना, स्थायी कटाई प्रथाओं को लागू करना और कच्चे माल की गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना।
- आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) को प्रोत्साहित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडे में शामिल करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाना।
- आयुष वीज़ा सुविधा का प्रभावी ढंग से प्रचार करना और चिकित्सा पर्यटन के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का विकास करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: जन स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
आयुर्वेद दिवस का आयोजन → आयुर्वेद के महत्व पर जागरूकता → निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर → स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा → जन स्वास्थ्य में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. 11वां आयुर्वेद दिवस नागपुर में ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ विषय के साथ मनाया गया।
2. आयुष वीजा सुविधा विदेशी नागरिकों को भारत में आयुष पद्धतियों के तहत उपचार प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
3. जामनगर में स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता दी गई है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि 11वां आयुर्वेद दिवस नागपुर में ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ विषय के साथ मनाया गया। कथन 2 सही है क्योंकि आयुष वीजा सुविधा विदेशी नागरिकों को भारत में आयुष पद्धतियों के तहत उपचार प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। कथन 3 सही है क्योंकि जामनगर में स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता दी गई है।
Q2. अभिकथन (A): आयुर्वेद उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य के संरक्षण को प्राथमिकता देता है।
कारण (R): ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्’ आयुर्वेद का एक प्रमुख सिद्धांत है।
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि आयुर्वेद न केवल बीमारियों का इलाज करता है बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने पर भी जोर देता है। कारण (R) भी सही है और यह ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्’ के सिद्धांत का उल्लेख करके अभिकथन की सही व्याख्या करता है, जिसका अर्थ है ‘स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोगों को दूर करना’।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता में भारत की भूमिका का विश्लेषण करें। साथ ही, सार्वजनिक स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन में आयुर्वेद की क्षमता पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: आयुर्वेद दिवस के संदर्भ में आयुर्वेद के महत्व और वैश्विक स्वीकार्यता का संक्षिप्त परिचय।
2. वैश्विक स्वीकार्यता में भारत की भूमिका:
क. आयुष वीजा सुविधा: विदेशी नागरिकों के लिए भारत में उपचार हेतु।
ख. WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, जामनगर: पारंपरिक चिकित्सा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में योगदान।
ग. WHO ICD-11 वर्गीकरण में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा का समावेश।
घ. साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और नवाचार पर जोर।
ङ. सांस्कृतिक कूटनीति और योग के साथ आयुर्वेद का प्रचार।
3. सार्वजनिक स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों (NCDs) में आयुर्वेद की क्षमता:
क. निवारक स्वास्थ्य देखभाल: ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्’ सिद्धांत।
ख. जीवनशैली प्रबंधन: आहार, दिनचर्या और योग के माध्यम से।
ग. गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप) के प्रबंधन में सहायक भूमिका।
घ. समग्र दृष्टिकोण: शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर ध्यान।
ङ. जन स्वास्थ्य आंदोलन के रूप में आयुर्वेद दिवस का उपयोग।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ एकीकरण।
5. निष्कर्ष: स्वस्थ भविष्य और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: 11वां आयुर्वेद दिवस 2024 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) आयुर्वेद दिवस 2024 का मुख्य विषय ‘वन हेल्थ, वन आयुर्वेद’ था। 2) महाराष्ट्र में आयुर्वेद दिवस का राष्ट्रीय समारोह नागपुर में आयोजित किया गया। 3) आयुर्वेद दिवस का आयोजन केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा किया जाता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — आयुर्वेद दिवस 2024 का मुख्य विषय ‘वन हेल्थ, वन आयुर्वेद’ था, महाराष्ट्र में राष्ट्रीय समारोह नागपुर में आयोजित किया गया, और इसका आयोजन केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
Mains: महाराष्ट्र में आयुर्वेद के विकास और संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने में महाराष्ट्र की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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