डीएवाई-एनआरएलएम ने गुरुग्राम में डिजिटल डेटा प्रणाली पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

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डीएवाई-एनआरएलएम ने गुरुग्राम में डिजिटल डेटा प्रणाली पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

दीनदयाल अंत्योदय योजना-एनआरएलएम कार्यशाला प्रक्रियाकार्यशाला आयोजनगुरुग्रामडेटा प्रणाली सुदृढ़ीकरलोकओएस विकासलखपति दीदी लक्ष्य87 लाख उद्यमऔपचारिक ऋण वृद्धि14 लाख करोड़ रुपयेनिगरानी एवं निर्णयडैशबोर्ड से आगे
दीनदयाल अंत्योदय योजना-एनआरएलएम कार्यशाला प्रक्रिया

✎ DAY-NRLM में साक्ष्य-आधारित शासन का आधार सत्यापित और अद्यतन डिजिटल डेटा है, और लोकओएस को निगरानी से आगे बढ़ाकर बैंकिंग से जुड़ी सामुदायिक-वित्त अवसंरचना बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय (ग्रामीण विकास, महिला सशक्तीकरण, गरीबी उन्मूलन से संबंधित सरकारी योजनाएँ)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (समावेशी आर्थिक संवृद्धि, वित्तीय समावेशन, सूक्ष्म वित्त और ग्रामीण ऋण)
  • Prelims: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का नोडल मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्राम संगठन (VO) और क्लस्टर स्तरीय संघ (CLF) का त्रि-स्तरीय ढाँचा, लखपति दीदी पहल और उसका लक्ष्य, नाबार्ड (NABARD) की स्वयं सहायता समूह-बैंक संपर्क कार्यक्रम (SHG-Bank Linkage Programme), क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनीज (विनियमन) अधिनियम, 2005 और ऋण इतिहास (Credit History), राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की भूमिका और डिजिटल भुगतान अवसंरचना, नीति आयोग की भूमिका: योजनाओं के मूल्यांकन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डेटा के स्वामित्व से जुड़े प्रश्न
  • Essay: ‘जो मापा जाता है, वह बेहतर होता है’: साक्ष्य-आधारित शासन में डिजिटल डेटा की भूमिका, ग्रामीण महिलाओं का सशक्तीकरण: वित्तीय समावेशन से आर्थिक स्वायत्तता तक

त्वरित पुनरावृत्ति: DAY-NRLM में साक्ष्य-आधारित शासन का आधार सत्यापित और अद्यतन डिजिटल डेटा है, और लोकओएस को निगरानी से आगे बढ़ाकर बैंकिंग से जुड़ी सामुदायिक-वित्त अवसंरचना बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 12 और 13 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम में ‘डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने और साक्ष्य-आधारित शिक्षा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों, नीति आयोग, विश्व बैंक, नाबार्ड, एनपीसीआई सहित अनेक संस्थाओं और विकास भागीदारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला में बताया गया कि लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित करीब 10 करोड़ महिलाओं ने लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ऋण प्राप्त किया है। अगले चरण में लगभग 87 लाख उद्यमों को सुदृढ़ करने और छह करोड़ के लक्ष्य की ओर लखपति दीदी की प्रगति पर निगरानी रखने पर बल दिया गया। कार्यशाला में लोकओएस (LoKOS) को केवल रिपोर्टिंग प्लैटफॉर्म के बजाय बैंकिंग पोर्टलों से जुड़ी परिचालन और सामुदायिक-वित्त अवसंरचना के रूप में विकसित करने, डेटा को पूर्ण, सुसंगत, अद्यतन और सत्यापित रखने तथा निगरानी डैशबोर्ड से आगे बढ़कर निर्णय-सहायक प्रणालियों की ओर जाने पर चर्चा हुई। यह विषय UPSC की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ग्रामीण आजीविका, वित्तीय समावेशन और प्रशासनिक डेटा के उपयोग से जुड़ा है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण गरीबी उन्मूलन के लिए स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूह आधारित मॉडल 1990 के दशक से विकसित होने लगे। नाबार्ड द्वारा वर्ष 1992 में शुरू किया गया स्वयं सहायता समूह-बैंक संपर्क कार्यक्रम इसका प्रारंभिक आधार बना।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (National Rural Livelihoods Mission) वर्ष 2011 में आरंभ हुआ और वर्ष 2015 में इसका नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ रखा गया।
  • ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं, के लिए स्थायी आजीविका और औपचारिक ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करना इस मिशन का केंद्रीय उद्देश्य है।
  • सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों के आँकड़ों की गुणवत्ता, दोहराव और अद्यतन न होने जैसी समस्याएँ पहले भी सामने आती रही हैं, इसलिए प्रशासनिक डेटासेट को जोड़ने और सत्यापित करने की आवश्यकता बढ़ी है।
  • भारत में डिजिटल भुगतान और डिजिटल पहचान की अवसंरचना के विकास के साथ सूक्ष्म ऋण और सामुदायिक वित्त में डिजिटल रिकॉर्ड का महत्व बढ़ा है।

DAY-NRLM और लोकओएस क्या है?

  • DAY-NRLM ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब ग्रामीण परिवारों की स्थायी आजीविका और सामाजिक-आर्थिक समावेशन सुनिश्चित करना है। इसमें महिलाओं को संगठित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • इस मिशन का संगठनात्मक ढाँचा स्वयं सहायता समूह (SHG) से शुरू होता है। कई SHG मिलकर ग्राम संगठन (VO) बनाते हैं और कई VO मिलकर क्लस्टर स्तरीय संघ (CLF) का गठन करते हैं।
  • राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) इस योजना के राज्य स्तरीय कार्यान्वयन की इकाइयाँ हैं। मंत्रालय इनके साथ और तकनीकी भागीदारों के साथ मिलकर काम करता है।
  • लखपति दीदी वे महिलाएँ हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो। यह पहल आजीविका के परिणामों को मापने का एक प्रमुख पैमाना है।
  • लोकओएस एक डिजिटल प्लैटफॉर्म है, जिस पर SHG, VO और CLF के प्रोफाइल, सदस्यों के आँकड़े और उनके वित्तीय लेनदेन दर्ज किए जाते हैं। इसका लक्ष्य इसे बैंकिंग पोर्टलों से जोड़कर डिजिटल ऋण प्रक्रिया को सहज बनाना है।
  • सदस्यों की बचत और ऋण चुकौती के व्यवहार से एक डिजिटल ऋण इतिहास तैयार किया जा सकता है, जो औपचारिक ऋण तक पहुँच में सहायक हो सकता है।
  • कार्यशाला में तीन रणनीतिक बदलाव रेखांकित किए गए: समावेश से समृद्धि की ओर, ऋण तक पहुँच से गुणवत्तापूर्ण ऋण की ओर और समर्थित संस्थानों से आत्मनिर्भर संस्थानों की ओर।
  • इस प्रणाली में यह सिद्धांत भी रेखांकित हुआ कि डेटा उन महिलाओं का है, जो इसे तैयार करती हैं, इसलिए इसका उपयोग उनके हित में ही होना चाहिए। यह डेटा संरक्षण और सहमति के प्रश्नों से जुड़ा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता (Feature) महत्व (Significance)
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण गरीब परिवारों की आजीविका और सामाजिक-आर्थिक समावेशन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रमुख योजना। कार्यशाला इसी के अगले चरण की रूपरेखा तय करने के लिए आयोजित हुई।
स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) का ढांचा लगभग 92 लाख SHG में करीब 10 करोड़ महिलाएं संगठित हैं। यह ढांचा ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक बचत, ऋण और उद्यम का आधार है।
औपचारिक ऋण का प्रवाह इन समूहों ने लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ऋण प्राप्त किया है। इससे साहूकारों जैसे अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता घटाने की दिशा में प्रगति का संकेत मिलता है।
लोकओएस (LokOS) SHG, ग्राम संगठन (Village Organisation – VO) और क्लस्टर स्तरीय संघ (Cluster Level Federation – CLF) के प्रोफाइल और वित्तीय लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रखने वाला प्लेटफॉर्म। इसे बैंकिंग पोर्टलों से जोड़ने की योजना है।
लखपति दीदी लक्ष्य लक्ष्य 6 करोड़ लखपति दीदी का है। यह आय-आधारित परिणाम सूचक है, जिसकी निगरानी के लिए विश्वसनीय डेटा आवश्यक है।
सहभागी संस्थाएं नीति आयोग, विश्व बैंक, नाबार्ड (NABARD), NPCI, गेट्स फाउंडेशन और BRAC जैसी संस्थाओं की भागीदारी से यह बहु-हितधारक (Multi-stakeholder) संवाद का स्वरूप दिखाती है।

महत्व

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • महिलाओं के नेतृत्व वाले SHG नेटवर्क से परिवार-स्तर की आय और उद्यमिता को सहारा मिलता है।
  • सूत्रधार पर्याप्त डेटा और निर्णय-सहायक प्रणाली से लक्षित हस्तक्षेप संभव होता है, जिससे सामाजिक समावेश को मापने योग्य आधार मिलता है।
  • सचिव के अनुसार उद्यमों को मजबूत करने और लखपति दीदी लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए सटीक सदस्य-स्तरीय डेटा आवश्यक है।

वित्तीय समावेशन और ऋण गुणवत्ता

  • सदस्यों की बचत और ऋण-पुनर्भुगतान के व्यवहार से डिजिटल साख-रिकॉर्ड (Digital Credit Record) बनाने की संभावना है, जिससे औपचारिक वित्तीय संस्थाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
  • अतिरिक्त सचिव द्वारा रखे गए तीन बदलाव (समावेश से समृद्धि, ऋण तक पहुंच से गुणवत्तापूर्ण ऋण, समर्थित संस्थानों से आत्मनिर्भर संस्थान) ऋण की मात्रा से आगे बढ़कर ऋण की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • बैंकिंग पोर्टलों के साथ अंतर-संचालनीयता (Interoperability) से डिजिटल ऋण प्रक्रिया बिना रुकावट पूरी हो सकती है।

शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण

  • विभिन्न योजनाओं के प्रशासनिक डेटासेट को जोड़ने से नीति-निर्माण में साक्ष्य आधार मजबूत होता है और दोहराव घटता है।
  • निगरानी डैशबोर्ड से आगे बढ़कर निर्णय-सहायक प्रणाली की ओर जाना प्रशासन को परिणाम-उन्मुख बनाता है।
  • राज्यों की बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने से सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना में आपसी सीख को बढ़ावा मिलता है।

डिजिटल शासन और डेटा अधिकार

  • डेटा के स्वामित्व को लाभार्थी महिलाओं के हित से जोड़ना डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) में नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • डेटा पूर्ण, सुसंगत, अद्यतन और सत्यापित होना चाहिए, यह सिद्धांत डेटा गुणवत्ता को शासन की मूल शर्त बनाता है।

चुनौतियाँ

1. डेटा गोपनीयता और सहमति

  • व्यक्तिगत वित्तीय डेटा के संग्रह, भंडारण और साझाकरण के लिए स्पष्ट सहमति और सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता है।
  • साख-रिकॉर्ड का उपयोग किसी के विरुद्ध न हो, इसके लिए उपयोग-सीमा और अधिकार तय करने होंगे।

2. डेटा की गुणवत्ता और सत्यापन

  • सदस्य और संस्था के आंकड़ों में त्रुटि, दोहराव या अपूर्णता से नीति और लक्ष्य-निर्धारण प्रभावित होते हैं।
  • ज़मीनी स्तर पर डेटा-प्रविष्टि के लिए फील्ड कर्मियों और सामुदायिक कैडर का निरंतर प्रशिक्षण जरूरी है।

3. प्रशासनिक और अंतर-संचालनीयता की चुनौतियां

  • विभिन्न योजनाओं के डेटासेट, बैंकिंग पोर्टल और राज्य प्रणालियों के बीच तकनीकी मानक एक जैसे न होने से एकीकरण कठिन होता है।
  • केंद्र और राज्यों की भूमिका और जिम्मेदारियां स्पष्ट न हों तो समस्या-समाधान में देरी होती है।

4. ऋण की गुणवत्ता और अति-ऋणग्रस्तता का जोखिम

  • ऋण की मात्रा बढ़ने के साथ अति-ऋणग्रस्तता (Over-indebtedness) का जोखिम भी बढ़ता है, इसलिए ऋण का उपयोग और पुनर्भुगतान क्षमता देखना आवश्यक है।
  • उद्यम-स्तर पर समर्थन के बिना केवल ऋण-पहुंच से स्थायी आय वृद्धि सुनिश्चित नहीं होती।

5. क्षमता निर्माण और संस्थागत आत्मनिर्भरता

  • SHG, VO और CLF को प्रशिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम बनाए बिना आत्मनिर्भर संस्थान का लक्ष्य पूरा नहीं होता।
  • राज्य मिशनों की प्रशासनिक क्षमता में असमानता से नीति का एकसमान क्रियान्वयन कठिन होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा (Issue) चिंता (Concern)
डेटा गोपनीयता महिलाओं की वित्तीय जानकारी का दुरुपयोग या अनधिकृत साझाकरण
डेटा सत्यापन अपूर्ण या पुराने आंकड़ों से गलत लक्ष्य-निर्धारण और मूल्यांकन
तकनीकी एकीकरण LokOS, बैंकिंग पोर्टल और अन्य योजना-डेटासेट के बीच मानकों की असंगति
ऋण की गुणवत्ता ऋण बढ़ने के साथ अति-ऋणग्रस्तता और पुनर्भुगतान दबाव का जोखिम
क्षमता निर्माण फील्ड कर्मियों और सामुदायिक कैडर के प्रशिक्षण में राज्यवार असमानता
उत्तरदायित्व जिम्मेदारियों और समय-सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण न होने से क्रियान्वयन में देरी

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)

आगे की राह

  • डेटा संरक्षण के लिए स्पष्ट सहमति-आधारित ढांचा और उपयोग-सीमा तय की जाए, ताकि डेटा का स्वामित्व लाभार्थी महिलाओं के पास रहे।
  • LokOS को बैंकिंग पोर्टलों से मानकीकृत API के माध्यम से जोड़ा जाए, जिससे डिजिटल ऋण प्रक्रिया बिना रुकावट पूरी हो।
  • सभी योजनाओं के प्रशासनिक डेटासेट के बीच अंतर-संचालनीयता के लिए तकनीकी मानक और डेटा-शासन नियम एक साथ अपनाए जाएं।
  • फील्ड कर्मियों और सामुदायिक कैडर के लिए नियमित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की व्यवस्था हो, ताकि डेटा-प्रविष्टि और सत्यापन की गुणवत्ता बनी रहे।
  • जिम्मेदारियां और समय-सीमाएं स्पष्ट रूप से तय हों, और केंद्र व राज्य मिशनों के बीच नियमित समीक्षा तंत्र बने।
  • राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों का दस्तावेजीकरण और साझाकरण हो, ताकि सहकारी संघवाद की भावना से आपसी सीख को बढ़ावा मिले।
  • ऋण की गुणवत्ता के लिए उद्यम-समर्थन, वित्तीय साक्षरता और पुनर्भुगतान-आधारित मूल्यांकन को लखपति दीदी लक्ष्य के साथ जोड़ा जाए।
  • मूल्यांकन में केवल प्रक्रिया-सूचकों के बजाय परिवारों, संस्थाओं और उद्यमों के परिणामों को केंद्र में रखकर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

समावेशी वित्त (Financial Inclusion) · स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group – SHG) · बैंक-सहबद्धता कार्यक्रम (SHG-Bank Linkage Programme) · दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (Deendayal Antyodaya Yojana-National Rural Livelihoods Mission – DAY-NRLM) · लखपति दीदी पहल (Lakhpati Didi Initiative) · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) · गुणवत्तापूर्ण ऋण बनाम ऋण तक पहुंच (Quality Credit versus Access to Credit) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-Based Policymaking) · पंचायती राज संस्थाएं और अनुच्छेद 243G (Panchayati Raj Institutions and Article 243G) · क्रेडिट सूचना ब्यूरो (Credit Information Bureau) · निगरानी एवं मूल्यांकन ढांचा (Monitoring and Evaluation Framework)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: डेटा गोपनीयता और निजता का अधिकार
  • अनुच्छेद 46: दुर्बल वर्गों के आर्थिक हितों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 243G: ग्राम पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं सौंपना

अवधारणा प्रवाह

डिजिटल डेटा प्रणाली (LokOS) में SHG, VO और CLF के प्रोफाइल और वित्तीय लेनदेन दर्ज होते हैं।  →  सत्यापित डेटा से सदस्यों की बचत और ऋण-पुनर्भुगतान व्यवहार का साख-रिकॉर्ड बनता है।  →  साख-रिकॉर्ड बैंकिंग पोर्टलों के माध्यम से औपचारिक ऋण की पहुंच को आसान बनाता है।  →  औपचारिक ऋण से उद्यम विकास होता है और परिवारों की आय बढ़ती है।  →  आय और उद्यम के परिणामों की निगरानी से लखपति दीदी जैसे लक्ष्यों की प्रगति मापी जाती है।  →  निगरानी के परिणाम प्रशासनिक डेटासेट के एकीकरण और राज्य की साक्ष्य-क्षमता में निवेश से नीति-सुधार के लिए उपयोग होते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 243G पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से संबंधित योजनाएं तैयार करने की शक्ति देता है।
3. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से जुड़े विषय सूचीबद्ध हैं, जिन्हें 73वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त कोई नहीं

उत्तर: उपर्युक्त कोई नहीं — कथन 1 सही है: DAY-NRLM का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 243G पंचायतों की आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय संबंधी शक्तियों से संबंधित है। कथन 3 भी सही है: ग्यारहवीं अनुसूची को 73वें संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया और उसमें 29 विषय हैं।

Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बैंक-सहबद्धता ने ग्रामीण महिलाओं की औपचारिक ऋण तक पहुंच बढ़ाई है।
कारण (R): समूह-आधारित ऋण में सदस्य एक-दूसरे की पारस्परिक जमानत के आधार पर ऋण प्राप्त करते हैं, इसलिए व्यक्तिगत संपार्श्विक (Collateral) की शर्त अपेक्षाकृत कम कठोर रहती है।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — स्वयं सहायता समूह बैंक-सहबद्धता कार्यक्रम में समूह को एकल इकाई मानकर ऋण दिया जाता है और सदस्यों की पारस्परिक जिम्मेदारी ही मुख्य सुरक्षा होती है। इसीलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
स्तंभ I (संस्था/विधि): 1. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2. के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ निर्णय 3. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) 4. नीति आयोग
स्तंभ II (वर्ष/स्थापना): A. 2023 B. 2017 C. 1982 D. 2015

सही सुमेलित कूट चुनिए:

  1. 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
  2. 1-B, 2-A, 3-C, 4-D
  3. 1-A, 2-C, 3-B, 4-D
  4. 1-D, 2-B, 3-C, 4-A

उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D — डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 में पारित हुआ। के.एस. पुट्टस्वामी निर्णय (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार माना गया। NABARD की स्थापना 1982 में और नीति आयोग की स्थापना 2015 में हुई।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के डिजिटल डेटा को अब केवल निगरानी-प्रतिवेदन के साधन के बजाय सामुदायिक वित्तीय अवसंरचना के रूप में विकसित करने की दिशा में बढ़ा जा रहा है। महिला सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण ऋण तक पहुंच दिलाने में ऐसे डेटा-आधारित ढांचे की संभावनाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी स्पष्ट कीजिए कि इस डेटा का उपयोग उन्हीं महिलाओं के हित में हो, इसके लिए कौन-से विधिक और संस्थागत सुरक्षा-उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु:
1. भूमिका: DAY-NRLM (2011 में आरंभ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का वर्तमान स्वरूप) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों, बैंक-सहबद्धता और लखपति दीदी पहल का संक्षिप्त परिचय। गुरुग्राम कार्यशाला (12-13 अक्टूबर 2026) में 92 लाख समूह, लगभग 10 करोड़ महिलाएं और लगभग 14 लाख करोड़ रुपये के औपचारिक ऋण का उल्लेख। लोकओएस को रिपोर्टिंग प्लैटफॉर्म से सामुदायिक-वित्त अवसंरचना में बदलने का प्रस्ताव।
2. संभावनाएं: (क) डिजिटल क्रेडिट इतिहास से संपार्श्विक-रहित ऋण का आधार बनना; (ख) बैंकिंग पोर्टलों से जुड़ाव द्वारा ऋण प्रक्रिया में रुकावट कम होना; (ग) साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, जैसे परिवार, संस्था और उद्यम स्तर के परिणामों की ट्रैकिंग; (घ) विभिन्न प्रशासनिक डेटासेट के अंतरसंचालन से लक्षित हस्तक्षेप। अनुच्छेद 243G और ग्यारहवीं अनुसूची (आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय) के संदर्भ में पंचायतों की भूमिका।
3. चुनौतियां: डेटा की गुणवत्ता व सत्यापन की समस्या; डिजिटल विभाजन और निरक्षरता से बहिष्करण; अति-ऋणग्रस्तता का जोखिम, जैसा 2010 के आंध्र प्रदेश माइक्रोफाइनेंस संकट में देखा गया; एजेंसी और सहमति का प्रश्न; सामुदायिक डेटा का निजी वित्तीय संस्थाओं द्वारा दुरुपयोग।
4. सुरक्षा-उपाय: (क) डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत सहमति, उद्देश्य-सीमा और डेटा प्रिंसिपल के अधिकार; (ख) के.एस. पुट्टस्वामी निर्णय (2017) द्वारा निजता को अनुच्छेद 21 में मौलिक अधिकार मानने का संदर्भ; (ग) क्रेडिट सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 और RBI के विनियम; (घ) RBI की Account Aggregator व्यवस्था में सहमति-आधारित डेटा साझा करना; (ङ) रंगराजन समिति (2008) की वित्तीय समावेशन सिफारिशों से संगति; (च) डेटा स्वामित्व समूह की महिलाओं का होने का सिद्धांत, जैसा मंत्रालय के वक्तव्य में बल दिया गया।
5. संतुलित निष्कर्ष: डेटा को सशक्तीकरण का साधन तभी माना जा सकता है जब पारदर्शिता, सहमति, त्रुटि-सुधार का अधिकार और स्वतंत्र निगरानी हो। अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण के अनुसार वित्तीय समावेशन का लक्ष्य केवल ऋण-वितरण नहीं, बल्कि महिलाओं की निर्णय-क्षमता का विस्तार होना चाहिए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Haryana PCS (HPSC / HCS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हरियाणा में ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत 12-13 अक्टूबर, 2026 को गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. A. ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल साक्षरता प्रदान करना
  2. B. ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करना
  3. C. किसानों को कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देना
  4. D. शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना

उत्तर: B. ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करना — इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करना था, ताकि ग्रामीण महिलाओं और समुदायों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सके।

Mains: हरियाणा में ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने के महत्व और इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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