ब्रिक्स संसदीय मंच 2026: लोकसभा अध्यक्ष ने किया उद्घाटन की घोषणा

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ब्रिक्स संसदीय मंच 2026: लोकसभा अध्यक्ष ने किया उद्घाटन की घोषणा

ब्रिक्स संसदीय मंच आयोजन प्रक्रियाघोषणालोकसभा अध्यक्षस्थान निश्चितसंविधान सदनतिथि निर्धारित26-27 अक्टूबर 2026सदस्य देशविधायी प्रतिनिधिविचार-विमर्शवैश्विक विषयआयोजनसंसदीय कूटनीति
ब्रिक्स संसदीय मंच आयोजन प्रक्रिया

✎ ब्रिक्स संसदीय मंच ब्रिक्स सदस्य देशों के विधायी प्रतिनिधियों का संवाद-मंच है, जो संसदीय कूटनीति के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को सशक्त करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय समूह, भारत के हित और संसदीय कूटनीति)  |  GS Paper II — राजनीति एवं शासन (संसद की संरचना, लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका, संविधान सदन)
  • Prelims: ब्रिक्स (BRICS) की सदस्यता और विस्तार, न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank — NDB), मुख्यालय शंघाई, ब्रिक्स में ‘साझेदार देश’ (Partner Countries) की श्रेणी, अनुच्छेद 79 — भारत की संसद की संरचना (राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा), लोकसभा अध्यक्ष की संवैधानिक और संसदीय भूमिका, अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union — IPU), मुख्यालय जिनेवा, संविधान सदन (पुराने संसद भवन का नाम) और नए संसद भवन का उद्घाटन (2023), अनुच्छेद 51 — अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने से संबंधित नीति-निदेशक तत्व
  • Essay: बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संसदीय कूटनीति की भूमिका, वैश्विक शासन-व्यवस्था के सुधार में ब्रिक्स जैसे मंचों की उपयोगिता और सीमाएँ

त्वरित पुनरावृत्ति: ब्रिक्स संसदीय मंच ब्रिक्स सदस्य देशों के विधायी प्रतिनिधियों का संवाद-मंच है, जो संसदीय कूटनीति के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को सशक्त करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा घोषणा की गई है कि 12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच 26-27 अक्तूबर 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित किया जाएगा। इस मंच में ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधि एक साथ आकर वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह आयोजन ब्रिक्स की कार्यकारी और शासनाध्यक्ष स्तर की बैठकों से अलग, विधायी स्तर पर होने वाला संवाद है, इसलिए इसे संसदीय कूटनीति के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। इसके साथ ही यह समाचार संविधान सदन के सार्वजनिक आयोजन-स्थल के रूप में उपयोग को भी रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • ब्रिक्स की शुरुआत ‘BRIC’ के रूप में हुई थी। यह शब्द 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह के लिए गढ़ा था। पहला राष्ट्राध्यक्ष स्तरीय शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग (रूस) में हुआ। दक्षिण अफ्रीका 2010 में इसमें शामिल हुआ, जिसके बाद इसका नाम ‘BRICS’ हो गया।
  • वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को सदस्य के रूप में जोड़ा गया, और वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी सदस्य बना। साथ ही ‘साझेदार देश’ की श्रेणी बनाई गई, जिससे समूह का विस्तार और उसकी भू-राजनीतिक पहुँच बढ़ी।
  • ब्रिक्स के आर्थिक आयामों में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) प्रमुख है, जिसकी स्थापना 2015 में हुई और जिसका मुख्यालय शंघाई में है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अवसंरचना और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराना है।
  • ब्रिक्स के अंतर्गत संसदीय आयाम का विकास विधायकों के बीच सीधे संवाद के लिए हुआ है, ताकि कानून-निर्माण के अनुभव और नीतिगत चुनौतियों पर साझा समझ बने। संसदीय मंच सदस्य देशों की विधायी संस्थाओं को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के नए मार्ग खोलने का अवसर देता है।
  • भारत की संसद का नया भवन 2023 में उद्घाटित हुआ, जबकि पुराने संसद भवन को अब संविधान सदन के नाम से जाना जाता है। इसमें स्थित केंद्रीय कक्ष ऐतिहासिक सभाओं और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों का स्थल रहा है।

ब्रिक्स संसदीय मंच क्या है?

  • ब्रिक्स संसदीय मंच ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों या विधायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का वार्षिक या समय-समय पर आयोजित होने वाला सम्मेलन है।
  • यह मंच ब्रिक्स की सरकारी और राष्ट्राध्यक्ष स्तरीय बैठकों से भिन्न है, क्योंकि इसमें विधायी प्रतिनिधि भाग लेते हैं और कार्यपालिका का प्रत्यक्ष निर्णय-निर्माण इसका विषय नहीं होता।
  • संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) का अर्थ है विधायी प्रतिनिधियों के माध्यम से देशों के बीच संवाद, विश्वास-निर्माण और सहयोग को बढ़ावा देना।
  • भारत में संसद के सदनों के सत्र और कार्य-संचालन की व्यवस्था संसद के अधिकारी और सचिवालय देखते हैं। लोकसभा सचिवालय ऐसे आयोजनों के व्यावहारिक प्रबंधन में भूमिका निभाता है।
  • संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष जैसे स्थानों का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय संसदीय सम्मेलनों के लिए होना भारत की संसदीय परंपरा और उसके आतिथ्य-क्षमता को प्रदर्शित करता है।
  • अंतर-संसदीय संघ (IPU) जैसे वैश्विक मंच भी संसदीय कूटनीति के उदाहरण हैं, जिनका मुख्यालय जिनेवा में है। ब्रिक्स संसदीय मंच को इसी व्यापक परंपरा के एक क्षेत्रीय-समूह आधारित रूप के रूप में समझा जा सकता है।
  • ऐसे मंचों के सामान्य विषय आर्थिक सहयोग, सतत विकास, वैश्विक शासन सुधार और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका से जुड़े होते हैं। परीक्षा की दृष्टि से इनका संबंध भारत की विदेश नीति के बहुपक्षीय आयाम से है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोजन (Event) 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum), जिसकी मेज़बानी भारत की लोक सभा द्वारा की जा रही है।
तिथि और स्थान 26–27 अक्तूबर 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजन प्रस्तावित है। पुराने संसद भवन को अब संविधान सदन कहा जाता है।
आयोजक संस्था लोक सभा सचिवालय और लोक सभा अध्यक्ष इस मंच की पहल और घोषणा से जुड़े हैं। यह कार्यकारी सरकार का नहीं, बल्कि विधायी संस्थाओं का मंच है।
मंच का स्वरूप ब्रिक्स सदस्य देशों की विधायी शाखाओं के बीच संवाद का मंच है। इसमें सदस्य देशों की संसदें अपने-अपने प्रतिनिधि भेजती हैं।
संस्थागत संदर्भ यह ब्रिक्स के राज्य-स्तरीय शिखर सम्मेलन और मंत्रिस्तरीय बैठकों से अलग, विधायी स्तर की समानांतर कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) का उदाहरण है।
प्रतीकात्मक महत्व संविधान सभा की बैठकें इसी केंद्रीय कक्ष (तत्कालीन संविधान सभा का सभा-कक्ष) में हुई थीं, इसलिए यह स्थान भारतीय संवैधानिक परंपरा से जुड़ा है।

महत्व

कूटनीतिक महत्व (Diplomatic Significance)

  • संसदीय मंच सरकारों के बीच औपचारिक वार्ता से अलग, विधायकों के स्तर पर सीधा संवाद स्थापित करता है, जिससे आपसी समझ और विश्वास बढ़ता है।
  • विधायी स्तर की कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को रेखांकित करती है।
  • ब्रिक्स के विस्तारित सदस्य-समूह में विभिन्न राजनीतिक प्रणालियों वाले देशों के बीच संवाद के लिए यह एक उपयोगी मंच है।

संस्थागत महत्व (Institutional Significance)

  • लोक सभा सचिवालय की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और आयोजन-क्षमता का परीक्षण होता है।
  • संसदीय समितियों और विधायी प्रक्रियाओं के तुलनात्मक अध्ययन के अवसर बनते हैं, जिससे विधायी क्षमता-निर्माण को बल मिलता है।

लोकतांत्रिक और प्रतीकात्मक महत्व (Democratic and Symbolic Significance)

  • संविधान सदन में आयोजन भारत के संवैधानिक इतिहास और संविधान सभा की विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है।
  • संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली, प्रतिनिधित्व और विधायी पारदर्शिता जैसे विषयों पर भारत का पक्ष रखने का अवसर मिलता है।

वैश्विक दक्षिण से जुड़ाव (Global South Linkage)

  • ब्रिक्स जैसे मंचों पर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विधायी आवाज़ एक साथ आती है, जिससे वैश्विक शासन के सुधार पर चर्चा को बल मिलता है।

चुनौतियाँ

1. सहमति-निर्माण की सीमा (Consensus Building)

  • सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएँ, आर्थिक हित और विदेश नीति की प्राथमिकताएँ भिन्न हैं, इसलिए साझा घोषणापत्र पर सहमति कठिन हो सकती है।
  • संसदीय मंच के निर्णय सामान्यतः सलाहकारी प्रकृति के होते हैं, इसलिए उनके क्रियान्वयन की बाध्यता सीमित रहती है।

2. संसदीय परिणामों का कार्यान्वयन (Implementation of Outcomes)

  • विधायी सहयोग के प्रस्ताव अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाते हैं, जब तक उन्हें राष्ट्रीय विधायी या नीतिगत कदमों में नहीं बदला जाता।
  • सदस्य देशों की संसदों के बीच नियमित अनुवर्ती तंत्र (Follow-up Mechanism) का अभाव प्रभाव को सीमित कर सकता है।

3. आयोजन-व्यवस्था और सुरक्षा

  • संसद परिसर जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक स्थान पर बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा, प्रोटोकॉल और प्रबंधन जटिल कार्य है।
  • विरासत भवन में आयोजन के दौरान संरक्षण-मानकों और सार्वजनिक सुविधाओं के बीच संतुलन आवश्यक है।

4. पारदर्शिता और जन-सहभागिता

  • ऐसे मंचों की चर्चाएँ प्रायः बंद-दरवाज़ा (Closed-door) स्वरूप की होती हैं, जिससे आम नागरिकों की जानकारी और भागीदारी सीमित रहती है।
  • अंतरराष्ट्रीय संसदीय सहयोग के निर्णयों को जनता तक सरल भाषा में पहुँचाने की चुनौती बनी रहती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
साझा घोषणापत्र पर सहमति सदस्य देशों के भिन्न राजनीतिक और आर्थिक हितों के कारण निष्कर्षों की व्यापकता सीमित हो सकती है।
सलाहकारी प्रकृति संसदीय मंच के प्रस्ताव बाध्यकारी न होने से उनका प्रभाव नीतिगत कदमों पर निर्भर रहता है।
अनुवर्ती तंत्र का अभाव निर्णयों की निगरानी और प्रगति-मूल्यांकन की नियमित व्यवस्था न होने से परिणाम धीमे पड़ सकते हैं।
आयोजन की जटिलता विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा, प्रोटोकॉल और विरासत भवन के संरक्षण में संतुलन आवश्यक है।
सार्वजनिक सहभागिता बंद-सत्र स्वरूप के कारण आम जनता तक चर्चा के निष्कर्ष पहुँचाने में कमी रह सकती है।

आगे की राह

  • संसदीय मंच के निष्कर्षों को स्पष्ट और कार्य-योग्य सिफ़ारिशों के रूप में प्रस्तुत किया जाए, ताकि उनका अनुसरण सरल हो।
  • सदस्य देशों की संसदों के बीच नियमित अनुवर्ती बैठकों और सूचना-आदान-प्रदान का तंत्र विकसित हो।
  • विधायी सहयोग के क्षेत्र, जैसे संसदीय समितियों का अनुभव-साझाकरण और विधायी क्षमता-निर्माण, पहले से तय किए जाएँ।
  • संविधान सदन जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर आयोजन के लिए सुरक्षा, प्रोटोकॉल और संरक्षण-मानकों की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए।
  • मंच की चर्चाओं में नागरिक-समाज और शोध संस्थानों की भागीदारी के लिए सार्वजनिक सत्र या प्रकाशन की व्यवस्था हो।
  • भारत की संसदीय परंपरा, संविधान सभा की विरासत और लोकतांत्रिक शासन के अनुभव को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया जाए।
  • निर्णयों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए स्पष्ट संकेतक (Indicators) तय किए जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ब्रिक्स (BRICS) · संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) · अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union) · बहुपक्षवाद (Multilateralism) · दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) · संविधान सदन (Samvidhan Sadan) · वैश्विक शासन सुधार (Global Governance Reform) · सॉफ्ट पावर (Soft Power) · संधि-निर्माण और अनुच्छेद 253 (Treaty-making and Article 253) · न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank)

अवधारणा प्रवाह

ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों के बीच विधायी संवाद की आवश्यकता उत्पन्न होती है।  →  लोक सभा अध्यक्ष की पहल पर लोक सभा सचिवालय 12वें संसदीय मंच की तैयारी करता है।  →  मंच का आयोजन 26–27 अक्तूबर 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में प्रस्तावित है।  →  सदस्य देशों के प्रतिनिधि विधायी सहयोग, लोकतांत्रिक शासन और साझा चुनौतियों पर चर्चा करते हैं।  →  चर्चा के निष्कर्ष सलाहकारी घोषणाओं के रूप में सामने आते हैं।  →  इन निष्कर्षों का प्रभाव राष्ट्रीय विधायी और नीतिगत कदमों के क्रियान्वयन पर निर्भर करता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिक्स समूह की मूल अवधारणा ‘BRIC’ के रूप में उभरी थी, और दक्षिण अफ्रीका इसमें बाद में सम्मिलित हुआ।
2. न्यू डेवलपमेंट बैंक का मुख्यालय शंघाई में स्थित है।
3. अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union) की स्थापना वर्ष 1899 में हुई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: समूह का प्रारंभिक नाम BRIC था और दक्षिण अफ्रीका 2010 में जुड़ा। कथन 2 सही है: न्यू डेवलपमेंट बैंक का मुख्यालय शंघाई में है। कथन 3 गलत है, क्योंकि अंतर-संसदीय संघ की स्थापना 1889 में हुई थी, 1899 में नहीं। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): बहुपक्षीय मंचों पर संसदीय कूटनीति, कार्यपालिका की कूटनीति की पूरक भूमिका निभा सकती है।
कारण (R): ब्रिक्स संसदीय मंच की घोषणाएँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के निर्णयों की तरह सदस्य राज्यों पर बाध्यकारी होती हैं।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(b) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(c) A सही है, परंतु R गलत है।
(d) A गलत है, परंतु R सही है।

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परंतु R गलत है।
  4. A गलत है, परंतु R सही है।

उत्तर: A सही है, परंतु R गलत है। — कथन (A) सही है: संसदीय मंच विधायी प्रतिनिधियों के बीच संवाद का माध्यम बनकर कार्यपालिका की कूटनीति को पूरक बनाते हैं। कारण (R) गलत है, क्योंकि संसदीय मंचों के निष्कर्ष प्रायः सिफारिशी या विचार-विमर्श-आधारित होते हैं और उन पर कोई बाध्यता नहीं होती; बाध्यकारी निर्णय सरकारों और शिखर सम्मेलन स्तर पर लिए जाते हैं। अतः उत्तर (c) है।

Q3. निम्नलिखित संस्थाओं को उनके मुख्यालय के स्थान से सुमेलित कीजिए:
सूची I (संस्था)
1. अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union)
2. न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank)
3. राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (Commonwealth Parliamentary Association)

सूची II (मुख्यालय)
a. जिनेवा
b. शंघाई
c. लंदन

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c
  2. 1-b, 2-a, 3-c
  3. 1-c, 2-b, 3-a
  4. 1-a, 2-c, 3-b

उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c — अंतर-संसदीय संघ का मुख्यालय जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में है, न्यू डेवलपमेंट बैंक का शंघाई (चीन) में और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का सचिवालय लंदन में है। अतः सही सुमेलन 1-a, 2-b, 3-c है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संसदीय कूटनीति को बहुपक्षीय मंचों पर कार्यपालिका की कूटनीति का पूरक मानना कहाँ तक उचित है? भारतीय संविधान में संधि-निर्माण की व्यवस्था और ब्रिक्स जैसे मंचों के उदाहरण के संदर्भ में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि संसदीय मंचों के निष्कर्ष बाध्यकारी न हों, तो उनकी वैधता और प्रभाव का आकलन किस आधार पर किया जाना चाहिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर संकेत:
1. भूमिका: 26-27 अक्टूबर 2026 को संविधान सदन (पूर्व संसद भवन, 2023 में पुनर्नामित) के केंद्रीय कक्ष में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन; यह भवन संविधान सभा की बैठकों से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा है।
2. संसदीय कूटनीति की अवधारणा: विधायी प्रतिनिधियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय संवाद; अंतर-संसदीय संघ (1889, जिनेवा) का उदाहरण; सॉफ्ट पावर की अवधारणा (जोसेफ नाई) के संदर्भ में संसदीय मंचों की भूमिका।
3. संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति और संधि-दायित्वों के सम्मान का निर्देश); अनुच्छेद 73 (संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, जिसमें संधि-निर्माण शामिल है); संघ सूची की प्रविष्टि 14 (संधियों और करारों का प्रवर्तन); अनुच्छेद 253 (संसद द्वारा संधियों के क्रियान्वयन हेतु विधि-निर्माण)।
4. संसद की भूमिका का विश्लेषण: संधि-निर्माण पर कार्यपालिका का प्रमुख नियंत्रण, जबकि संसदीय समितियों द्वारा विदेश-नीति पर विचार-विमर्श और विधायी अनुमोदन की आवश्यकता पड़ने पर संसद की सक्रिय भूमिका।
5. ब्रिक्स का संदर्भ: 2006 में BRIC के रूप में आरंभ; 2010 में दक्षिण अफ्रीका का प्रवेश; न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसी संस्थाओं के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग; संसदीय मंच की सिफारिशी प्रकृति।
6. संतुलित दृष्टिकोण: (क) समर्थक तर्क: पारदर्शिता, जनमत का प्रतिनिधित्व, विश्वास-निर्माण; (ख) आलोचक तर्क: गैर-बाध्यकारी निष्कर्ष, कार्यपालिका की सीमित जवाबदेही, प्रतीकात्मकता।
7. निष्कर्ष: संसदीय कूटनीति की वैधता उसके संवाद, नीति-परिवर्तन पर प्रभाव, और संसदीय समितियों से संस्थागत अनुवर्ती तंत्र पर निर्भर करती है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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