13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक संसद में प्रस्तावित

Children under 13 could be barred from making accounts on social media, gaming platforms: Bill in Parliament — diagram

13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक संसद में प्रस्तावित

SHIELD Bill PlatformsSocial Media13+ age limitVerified consentGaming Platforms13+ age limitVerified consentPersonalized AdsBanned for kidsData misuse prevention
SHIELD Bill Platforms

✎ SHIELD विधेयक, 2025 का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है, जिसमें अभिभावकीय सहमति, आयु-सत्यापन और व्यक्तिगत विज्ञापनों पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान शामिल हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय, शासन; GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: SHIELD विधेयक, 2025, निजी सदस्य विधेयक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A, बाल अधिकार, ऑनलाइन गेमिंग विनियमन, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण
  • Essay: डिजिटल युग में बाल सुरक्षा और निजता का अधिकार, तकनीकी नवाचार और नैतिक चुनौतियाँ: भारत के लिए राह

त्वरित पुनरावृत्ति: SHIELD विधेयक, 2025 का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है, जिसमें अभिभावकीय सहमति, आयु-सत्यापन और व्यक्तिगत विज्ञापनों पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान शामिल हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भाजपा सांसद बैजयंत पांडा द्वारा ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) विधेयक, 2025’ नामक एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) संसद में पेश किया जाना था। इस विधेयक का उद्देश्य 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अभिभावकों की सत्यापित सहमति के बिना सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर खाता बनाने से रोकना है, साथ ही व्यक्तिगत विज्ञापनों (personalised advertising) के माध्यम से बच्चों को लक्षित करने पर प्रतिबंध लगाना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसमें बच्चों की भागीदारी भी शामिल है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और निजता एक वैश्विक चिंता का विषय बन गई है, जिसमें अनुचित सामग्री, साइबरबुलिंग और डेटा के दुरुपयोग का जोखिम शामिल है।
  • वर्तमान में, भारत में बच्चों के ऑनलाइन डेटा और गतिविधियों को विनियमित करने के लिए कोई विशिष्ट और व्यापक कानून नहीं है, हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2023 (Personal Data Protection Bill, 2023) जैसे कानून कुछ हद तक संबंधित हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन (UN Convention on the Rights of the Child) भारत द्वारा अनुमोदित है, जो बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा पर जोर देता है, जिसमें डिजिटल वातावरण भी शामिल है।
  • कई विकसित देशों ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए हैं, जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका का बाल ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण अधिनियम (Children’s Online Privacy Protection Act – COPPA)।
  • निजी सदस्य विधेयक संसद सदस्यों द्वारा पेश किए जाते हैं जो मंत्री नहीं होते हैं, और इन्हें कानून बनने की संभावना कम होती है, हालांकि ये महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्वजनिक बहस शुरू करने में सहायक होते हैं।

SHIELD विधेयक, 2025 क्या है?

  • यह विधेयक ‘बच्चे’ को 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है।
  • यह सोशल मीडिया सेवाओं, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल मध्यस्थों (digital intermediaries) पर बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष दायित्व (safety obligations) आरोपित करता है।
  • विधेयक 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अभिभावकों की सत्यापित सहमति के बिना खाता बनाने से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव करता है।
  • यह प्लेटफॉर्म्स को बच्चों की ट्रैकिंग, प्रोफाइलिंग या उन्हें व्यक्तिगत विज्ञापनों के साथ लक्षित करने से रोकता है।
  • विधेयक में प्लेटफॉर्म्स के लिए अनिवार्य आयु-सत्यापन प्रणाली (age-verification systems) और अभिभावकीय-नियंत्रण डैशबोर्ड (parental-control dashboards) का प्रावधान है।
  • प्लेटफॉर्म्स को बच्चों को अश्लीलता, जुआ, हिंसक या चरमपंथी सामग्री और नशीली दवाओं से संबंधित सामग्री के संपर्क में आने से रोकने के लिए कदम उठाने होंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए खाता बनाने पर प्रतिबंध नाबालिगों को ऑनलाइन खतरों से बचाने और उनकी गोपनीयता सुनिश्चित करने में सहायक।
माता-पिता की सत्यापित सहमति अनिवार्य बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता का नियंत्रण बढ़ेगा, जिससे सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनेगा।
व्यक्तिगत विज्ञापन पर रोक बच्चों को लक्षित विज्ञापनों से बचाएगा, जिससे उनके उपभोग पैटर्न पर अनुचित प्रभाव कम होगा।
आयु-सत्यापन प्रणाली अनिवार्य प्लेटफॉर्मों पर बच्चों की पहुंच को नियंत्रित करेगा और आयु-उपयुक्त सामग्री सुनिश्चित करेगा।
माता-पिता के नियंत्रण डैशबोर्ड अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधि, गोपनीयता सेटिंग्स और स्क्रीन समय को प्रबंधित करने की सुविधा देगा।
अश्लीलता, जुआ, हिंसक सामग्री से बचाव बच्चों को हानिकारक और अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क में आने से रोकेगा।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह विधेयक बच्चों को ऑनलाइन शोषण, साइबरबुलिंग और अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क में आने से बचाकर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • यह डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और ऑनलाइन सुरक्षा के महत्व के बारे में माता-पिता और बच्चों दोनों के बीच जागरूकता बढ़ाएगा।

नैतिक महत्व

  • यह बच्चों के डेटा गोपनीयता (Data Privacy) के अधिकार को मजबूत करेगा, जिससे प्लेटफॉर्मों द्वारा उनके डेटा के अनुचित उपयोग पर रोक लगेगी।
  • यह डिजिटल प्लेटफॉर्मों की नैतिक जिम्मेदारी को बढ़ाएगा कि वे अपने युवा उपयोगकर्ताओं के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता दें।

शासन और नियामक महत्व

  • यह भारत में ऑनलाइन सामग्री और प्लेटफॉर्मों के विनियमन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करेगा।
  • यह विधेयक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) के तहत डिजिटल मध्यस्थों (Digital Intermediaries) के दायित्वों को स्पष्ट करेगा, जिससे अनुपालन सुनिश्चित होगा।

चुनौतियाँ

1. आयु-सत्यापन की व्यवहार्यता

  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर प्रभावी और त्रुटिरहित आयु-सत्यापन प्रणालियों को लागू करना एक बड़ी तकनीकी और परिचालन चुनौती हो सकती है।
  • गोपनीयता का उल्लंघन किए बिना आयु-सत्यापन कैसे किया जाए, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

2. निजी सदस्य विधेयक का पारित होना

  • भारत में निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) शायद ही कभी कानून बन पाते हैं, जिससे इस विधेयक के पारित होने की संभावना कम हो जाती है।
  • सरकार को इस मुद्दे पर अपना स्वयं का विधेयक लाने की आवश्यकता हो सकती है।

3. प्रौद्योगिकी कंपनियों का प्रतिरोध

  • सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्मों को इन नए नियमों का पालन करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर व्यक्तिगत विज्ञापन पर प्रतिबंध के कारण राजस्व हानि के संबंध में।
  • प्लेटफॉर्मों द्वारा इन नियमों को दरकिनार करने के प्रयास किए जा सकते हैं।

4. अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ सामंजस्य

  • यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि यह विधेयक अंतर्राष्ट्रीय बाल सुरक्षा और डेटा गोपनीयता मानकों के अनुरूप हो, ताकि वैश्विक डिजिटल वातावरण में एकरूपता बनी रहे।
  • विभिन्न देशों में अलग-अलग आयु सीमाएं और नियम हैं, जिससे सामंजस्य स्थापित करना मुश्किल हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल पहचान और गोपनीयता बच्चों की ऑनलाइन पहचान की सुरक्षा और उनके डेटा का दुरुपयोग रोकना।
ऑनलाइन लत और मानसिक स्वास्थ्य सोशल मीडिया और गेमिंग की लत के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना।
साइबरबुलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न और बदमाशी से बचाना।
हानिकारक सामग्री तक पहुंच अश्लीलता, हिंसा और चरमपंथी सामग्री जैसी अनुपयुक्त सामग्री तक बच्चों की पहुंच को रोकना।
माता-पिता की निगरानी का अभाव कई माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी करने के लिए आवश्यक ज्ञान या उपकरण नहीं होते हैं।
कानूनी प्रवर्तन और दंड प्रस्तावित कानून का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना और उल्लंघनकर्ताओं के लिए पर्याप्त दंड का प्रावधान।

आगे की राह

  • सरकार को इस निजी सदस्य विधेयक के प्रावधानों पर विचार करते हुए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक व्यापक सरकारी विधेयक लाना चाहिए।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्मों के लिए मजबूत और प्रभावी आयु-सत्यापन प्रणालियों को विकसित करने और लागू करने के लिए तकनीकी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • माता-पिता और शिक्षकों के लिए डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए, ताकि वे बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार सिखा सकें।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्मों को बच्चों के डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिए कड़े दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य करना चाहिए, जिसमें व्यक्तिगत विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हो।
  • ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम प्रबंधन और सामग्री फिल्टर जैसे माता-पिता के नियंत्रण उपकरणों को अनिवार्य करना चाहिए।
  • बच्चों के ऑनलाइन अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र नियामक निकाय स्थापित करने पर विचार करना चाहिए, जो शिकायतों का निवारण कर सके और नियमों का प्रवर्तन कर सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करना और उन्हें भारत के संदर्भ में अनुकूलित करना, ताकि बच्चों के लिए एक सुरक्षित वैश्विक डिजिटल वातावरण बनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

निजी सदस्य विधेयक · बाल संरक्षण · डिजिटल निजता · आयु सत्यापन प्रणाली · माता-पिता की सहमति · लक्षित विज्ञापन · ऑनलाइन गेमिंग · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम · साइबर सुरक्षा · डिजिटल साक्षरता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार, जिसमें सुरक्षित वातावरण शामिल’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर सुनिश्चित करना’}

अवधारणा प्रवाह

बच्चों की ऑनलाइन असुरक्षा  →  सोशल मीडिया/गेमिंग प्लेटफॉर्म पर पहुंच  →  हानिकारक सामग्री/व्यक्तिगत विज्ञापन का जोखिम  →  SHIELD विधेयक का प्रस्ताव  →  बच्चों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना  →  डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर दायित्व

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में निजी सदस्य विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किए जा सकते हैं।
2. निजी सदस्य विधेयक को संसद में पेश करने के लिए कम से कम एक महीने का नोटिस देना अनिवार्य है।
3. स्वतंत्रता के बाद से, केवल कुछ ही निजी सदस्य विधेयक अधिनियम बन पाए हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। निजी सदस्य विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पेश किए जा सकते हैं। कथन 2 सही है। निजी सदस्य विधेयक पेश करने के लिए एक महीने का नोटिस देना अनिवार्य है। कथन 3 सही है। स्वतंत्रता के बाद से बहुत कम निजी सदस्य विधेयक ही अधिनियम बन पाए हैं, जो उनकी सफलता की कम दर को दर्शाता है।

Q2. अभिकथन (A): ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) बिल, 2025’ बच्चों के लिए लक्षित विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव करता है।
कारण (R): यह विधेयक बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री जैसे पोर्नोग्राफी, जुआ और हिंसक सामग्री से बचाने का भी प्रयास करता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि SHIELD बिल बच्चों के लिए लक्षित विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव करता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री से बचाना है। ये दोनों प्रावधान बच्चों के ऑनलाइन अनुभव को सुरक्षित बनाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा हैं, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रस्तावित ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) बिल, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। क्या आपको लगता है कि यह विधेयक भारत में बच्चों के डिजिटल अधिकारों और ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने में सफल होगा? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: SHIELD बिल, 2025 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और एक निजी सदस्य विधेयक के रूप में इसकी स्थिति।
2. प्रमुख प्रावधानों का परीक्षण: विधेयक के मुख्य बिंदुओं का विस्तार से उल्लेख करें, जैसे:
* 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता-पिता की सत्यापित सहमति अनिवार्य।
* लक्षित विज्ञापन (personalised advertising) पर प्रतिबंध।
* आयु-सत्यापन प्रणाली (age-verification systems) की अनिवार्यता।
* माता-पिता के नियंत्रण डैशबोर्ड (parental-control dashboards) का प्रावधान।
* हानिकारक सामग्री (पोर्नोग्राफी, जुआ, हिंसक सामग्री) से बच्चों को बचाने के उपाय।
* उल्लंघन पर दंड (₹10 करोड़ तक का जुर्माना, सेवाओं का अस्थायी निलंबन)।
3. संतुलन का विश्लेषण (सफलता/असफलता): विधेयक की संभावित सफलता और चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण करें।
* सकारात्मक पक्ष: बच्चों की निजता और सुरक्षा में वृद्धि, हानिकारक सामग्री से बचाव, माता-पिता को अधिक नियंत्रण।
* चुनौतियाँ/कमियाँ: निजी सदस्य विधेयक के रूप में पारित होने की संभावना कम, आयु सत्यापन प्रणालियों को लागू करने की व्यवहार्यता, निजता बनाम निगरानी पर चिंताएं, डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता, तकनीकी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ।
4. निष्कर्ष: बच्चों के डिजिटल अधिकारों और ऑनलाइन सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें, जिसमें आगे के मार्ग और नीतिगत सुझाव शामिल हों।

स्रोत: Hindustan Times


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment