28 Oct डीआरआई द्वारा कोलकाता बंदरगाह पर 55 हजार ई-सिगरेट जब्त, जानिए पूरा मामला
✎ ENDS अधिनियम, 2019 के तहत भारत में ई-सिगरेट का उत्पादन, आयात, बिक्री और विज्ञापन प्रतिबंधित है, और DRI सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अंतर्गत गलत घोषित कंटेनरों में छिपाई गई तस्करी को रोकता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य (ENDS अधिनियम, 2019 का प्रवर्तन, केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था (सीमा शुल्क, संगठित तस्करी, राजस्व क्षति)
- Prelims: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) — केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अधीन, वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग), इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 (ENDS अधिनियम) — उत्पादन, आयात, निर्यात, विज्ञापन सहित सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध, सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 — धारा 111 (अनुचित रूप से आयात/निर्यात माल की जब्ती) और धारा 112 (दंड), भारत-नेपाल पारगमन संधि (India-Nepal Treaty of Transit) — नेपाल के लिए बंधपत्र (bond) के अंतर्गत पारगमन व्यापार, श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता — हुगली नदी पर स्थित प्रमुख बंदरगाह (पूर्व नाम: कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट), अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (ICD) — कंटेनरों के संग्रह, निरीक्षण और सीमा शुल्क निकासी का केंद्र, WHO तंबाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन (FCTC) — भारत ने वर्ष 2004 में इसका अनुसमर्थन किया, निकोटीन और ई-सिगरेट: निकोटीन की लत एवं इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणाली (ENDS) की अवधारणा
- Essay: अवैध व्यापार और तस्करी: सीमा शुल्क प्रवर्तन की चुनौतियाँ और समाधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य बनाम नियामक प्रवर्तन: प्रतिबंध की सीमाएँ और कानून-व्यवस्था की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ENDS अधिनियम, 2019 के तहत भारत में ई-सिगरेट का उत्पादन, आयात, बिक्री और विज्ञापन प्रतिबंधित है, और DRI सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अंतर्गत गलत घोषित कंटेनरों में छिपाई गई तस्करी को रोकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने 24 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर दो कंटेनरों को विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर रोका, जिनमें ई-सिगरेट होने का संदेह था। ये कंटेनर नेपाल जा रहे थे और इनमें माल को गलत तरीके से ‘पानी के गिलास’ और ‘मिट्टी के मग’ के रूप में घोषित किया गया था। विस्तृत जांच में घोषित सामान के बीच छिपाई गई लगभग 55,000 ई-सिगरेट बरामद हुईं, जिनका मूल्य 13.50 करोड़ रुपये आँका गया है। इस कार्रवाई को सीमा शुल्क अधिनियम की संबंधित धाराओं के अंतर्गत किया गया। वित्त वर्ष 2026-27 में DRI ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में लगभग 3,00,000 ई-सिगरेट जब्त की हैं, जिनका मूल्य 120 करोड़ रुपये से अधिक है। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के लिए पारगमन व्यापार और गलत घोषणा के तरीके अपनाए जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में ई-सिगरेट का निर्माण, आयात, बिक्री, विज्ञापन और भंडारण प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध ENDS अधिनियम, 2019 के तहत लगाया गया है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और युवाओं को निकोटीन की लत से बचाना है।
- भारत ने WHO के FCTC पर अनुसमर्थन किया है, जो तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है। इसी ढांचे की पृष्ठभूमि में घरेलू नीति को सुदृढ़ किया गया है।
- सीमा शुल्क प्रवर्तन का मुख्य आधार सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 है। प्रतिबंधित या अनुचित रूप से आयातित माल की जब्ती और दंड की व्यवस्था इसी कानून में है।
- नेपाल भूमि से घिरा देश है और उसका समुद्री व्यापार भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से होता है। भारत-नेपाल पारगमन संधि के तहत बंधपत्र पर माल का पारगमन होता है, जिसका दुरुपयोग तस्करी के लिए किया जा सकता है।
- DRI वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन सीमा शुल्क से संबंधित खुफिया सूचना एकत्र करने, विश्लेषण करने और संगठित तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई करने वाली प्रमुख एजेंसी है।
ई-सिगरेट और ENDS अधिनियम, 2019 क्या है?
- इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (Electronic Cigarette) एक बैटरी-चालित उपकरण है, जो तरल निकोटीन या अन्य तरल पदार्थ को गर्म करके वाष्प (aerosol) उत्पन्न करता है। इसे सामान्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणाली (Electronic Nicotine Delivery Systems / ENDS) के अंतर्गत रखा जाता है।
- इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) अधिनियम, 2019 (Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019) के अंतर्गत इन सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध है।
- ENDS अधिनियम के अंतर्गत पहली बार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक का कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों, का प्रावधान है। पुनरावृत्ति की स्थिति में अधिक कठोर दंड का प्रावधान है।
- सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 111 के अंतर्गत प्रतिबंधित या अनुचित रूप से आयातित माल की जब्ती की जाती है, जबकि धारा 112 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है।
- गलत घोषणा (misdeclaration) तस्करी की एक प्रमुख विधि है, जिसमें कंटेनर में प्रतिबंधित वस्तु को वैध घोषित माल के बीच छिपाया जाता है। इसकी पहचान के लिए खुफिया सूचना और चयनित निरीक्षण (selective inspection) की भूमिका अहम होती है।
- ICD (अंतर्देशीय कंटेनर डिपो) वह स्थान है जहाँ कंटेनरों का संग्रह, सीमा शुल्क निरीक्षण और निकासी होती है। इसे सूचना और नियंत्रण केंद्र समझना सही नहीं है, क्योंकि ICD का अर्थ कंटेनर डिपो ही है।
- यह मामला प्रवर्तन के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। नियामक प्रतिबंध, सीमा शुल्क प्रवर्तन और जागरूकता अभियान एक-दूसरे के पूरक हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| घटना का स्वरूप | राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence – DRI) ने कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर दो कंटेनरों से लगभग 55,000 ई-सिगरेट जब्त कीं, जिनकी अनुमानित कीमत 13.50 करोड़ रुपये है। यह सीमा शुल्क प्रवर्तन की एक संगठित कार्रवाई है। |
| घोषणा में छल | एक कंटेनर को ‘पानी के गिलास’ और दूसरे को ‘मिट्टी के मग’ बताया गया था। सामान के बीच ई-सिगरेट छिपाई गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि तस्कर घोषित वस्तु और वास्तविक माल का अंतर छिपाने के लिए सामान्य व्यापार-दस्तावेज़ों का दुरुपयोग करते हैं। |
| गंतव्य और मार्ग | दोनों कंटेनर नेपाल जा रहे थे। इससे भारत के बंदरगाह को पारगमन (Transit) और सीमा-पार तस्करी के मार्ग के रूप में इस्तेमाल होने की संभावना सामने आती है। |
| बरामद ब्रांड और विविधता | आईजीईटी (IGET) सहित कई फ्लेवर वाले उत्पाद और वीटीवी (VTV), वोको (Voco), बैंग (Bang) तथा ईजॉय (Ezy) जैसे विभिन्न ब्रांड मिले। बाज़ार में उत्पादों की विविधता और उनकी तेज़ी से बदलती पहचान प्रवर्तन के लिए चुनौती है। |
| विधिक आधार | इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत ई-सिगरेट के उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर प्रतिबंध है। इसलिए ऐसे माल की जब्ती का कानूनी आधार यही अधिनियम तथा सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के संबंधित प्रावधान हैं। |
| राष्ट्रीय संदर्भ | वित्त वर्ष 2026-27 में DRI ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विभिन्न बंदरगाहों, हवाई अड्डों और सूचना एवं नियंत्रण केंद्र (ICD) से लगभग 3,00,000 ई-सिगरेट जब्त की हैं, जिनकी कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक है। यह समस्या एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं है। |
महत्व
प्रवर्तन और विधि-व्यवस्था
- यह कार्रवाई 2019 के इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण है, क्योंकि प्रतिबंध तभी सार्थक होता है जब सीमा पर उत्पाद का प्रवेश रोका जाए।
- खुफिया सूचना पर आधारित जब्ती यह दिखाती है कि जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection) पूरे कंटेनरों की जाँच से अधिक प्रभावी होता है।
- छिपाए गए माल का पता लगाना सीमा शुल्क अधिकारियों की तकनीकी और परिचालन क्षमता की परीक्षा है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य
- ई-सिगरेट और इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणालियों (ENDS) पर प्रतिबंध का मूल आधार जनस्वास्थ्य की रक्षा है, विशेषकर युवाओं को निकोटीन की लत से बचाने के संदर्भ में।
- तस्करी से उपलब्ध सस्ते और अनियमित उत्पाद गुणवत्ता-नियंत्रण के बाहर होते हैं, इसलिए उनसे स्वास्थ्य-जोखिम और बढ़ जाता है।
राजस्व और अंतरराष्ट्रीय आयाम
- तस्करी से सरकार को सीमा शुल्क और कर का नुकसान होता है तथा वैध व्यापार की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
- नेपाल की ओर जा रहे माल से पता चलता है कि सीमा-पार तस्करी नेटवर्क क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय हैं, जिनके लिए समन्वित सीमा-पार प्रवर्तन आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. घोषणा और दस्तावेज़ों में छल
- सामान को ‘पानी के गिलास’ या ‘मिट्टी के मग’ जैसे सामान्य नामों से घोषित करना सतही जाँच में पकड़ में नहीं आता।
- वास्तविक माल को घोषित माल के बीच छिपाने से भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता बढ़ जाती है, जो समय और संसाधन दोनों लेता है।
यूपीएससी लिंक: सीमा शुल्क प्रवर्तन और आंतरिक सुरक्षा में तस्करी की चुनौती (GS-3)
2. पारगमन मार्ग का दुरुपयोग
- नेपाल जा रहे माल का भारतीय बंदरगाह से गुजरना पारगमन व्यापार व्यवस्था की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
- पारगमन में माल पर निगरानी कठिन होती है, इसलिए गंतव्य-देश तक उसके वास्तविक उपयोग का सत्यापन चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सीमावर्ती क्षेत्र प्रबंधन और भारत-नेपाल संबंध (GS-2, GS-3)
3. नियामक प्रतिबंध बनाम बाज़ार का दबाव
- प्रतिबंध के बावजूद माँग बनी रहने से अवैध आपूर्ति श्रृंखला फलती-फूलती है।
- जब वैध बाज़ार बंद होता है, तो तस्करी का लाभ बढ़ता है और अपराधी नेटवर्क मज़बूत होते हैं।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक नीति में प्रतिबंध और प्रवर्तन की प्रभावशीलता (GS-2)
4. ऑनलाइन और सीमा-पार बिक्री
- डिजिटल माध्यमों से विज्ञापन और बिक्री पर नियंत्रण कठिन है, जबकि अधिनियम विज्ञापन पर भी प्रतिबंध लगाता है।
- छोटे पार्सल और बहु-चरणीय आपूर्ति श्रृंखला के कारण उत्पाद का स्रोत पहचानना कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल युग में नियामक चुनौतियाँ (GS-3)
5. प्रवर्तन क्षमता और समन्वय
- सीमा शुल्क, DRI, पुलिस और राज्य प्रशासन के बीच सूचना-साझाकरण की आवश्यकता है।
- बड़ी संख्या में बंदरगाह, हवाई अड्डे और ICD होने से निगरानी का विस्तार कठिन है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य समन्वय और संस्थागत क्षमता (GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता का विषय |
|---|---|
| घोषणा में छल | सामान्य नामों वाली घोषणाएँ सतही जाँच को विफल कर देती हैं |
| सीमा-पार पारगमन | नेपाल की ओर जाने वाले माल का दुरुपयोग घरेलू नियंत्रण से परे जा सकता है |
| अवैध बाज़ार का विस्तार | प्रतिबंध के बावजूद माँग और तस्करी नेटवर्क की निरंतरता |
| डिजिटल बिक्री | ऑनलाइन विज्ञापन और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण कठिन |
| संसाधन और समन्वय | कई बंदरगाहों और एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी का जोखिम |
| जनस्वास्थ्य जोखिम | अनियमित और गैर-मानक उत्पादों से उपभोक्ताओं को नुकसान |
आगे की राह
- जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली को और मज़बूत किया जाए, ताकि घोषणा की विसंगतियों और खुफिया संकेतों के आधार पर उच्च-जोखिम कंटेनरों की प्राथमिकता तय हो।
- ICEGATE जैसे इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्लेटफ़ॉर्म पर घोषणा और जब्ती के आँकड़ों का विश्लेषण बढ़ाया जाए, ताकि तस्करी के पैटर्न समय पर पहचाने जा सकें।
- भारत-नेपाल सीमा पर सीमा-पार सूचना-साझाकरण और संयुक्त प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
- पारगमन माल के लिए गंतव्य-सत्यापन और ट्रैकिंग की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए।
- ऑनलाइन मंचों पर ई-सिगरेट के विज्ञापन और बिक्री की निगरानी के लिए डिजिटल निगरानी क्षमता विकसित की जाए।
- केंद्रीय एजेंसियों (DRI, सीमा शुल्क) और राज्य पुलिस के बीच नियमित समन्वय बैठकें और साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ।
- जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से युवाओं में निकोटीन उत्पादों के स्वास्थ्य-जोखिमों के प्रति समझ बढ़ाई जाए।
- प्रतिबंध के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाए, ताकि प्रवर्तन रणनीति को साक्ष्य के आधार पर संशोधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47: जनस्वास्थ्य सुधार का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 19(6): व्यापार पर सार्वजनिक हित में उचित प्रतिबंध
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 83: सीमा शुल्क पर संघ का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
ई-सिगरेट पर इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत प्रतिबंध लागू है। → तस्करी नेटवर्क सामान्य नामों से घोषित कंटेनरों में ई-सिगरेट छिपाकर नेपाल की ओर भेजता है। → खुफिया सूचना के आधार पर DRI उच्च-जोखिम कंटेनरों को रोकती है। → विस्तृत जाँच में घोषित माल के बीच छिपी लगभग 55,000 ई-सिगरेट बरामद होती हैं। → सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत माल की जब्ती और कार्यवाही की जाती है। → जब्ती से तस्करी का नेटवर्क कमजोर होता है और जनस्वास्थ्य तथा राजस्व की रक्षा होती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
West Bengal PCS (WBPSC / WBCS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: डीआरआई (डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) द्वारा हाल ही में कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर आयोजित दो अभियानों में लगभग 55,000 ई-सिगरेट जब्त की गईं। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A. तस्करी रोकना और राजस्व की हानि को रोकना
- B. ई-सिगरेट के अवैध व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करना
- C. पश्चिम बंगाल में ई-सिगरेट के वैध उपयोग को बढ़ावा देना
- D. ई-सिगरेट के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना
उत्तर: A. तस्करी रोकना और राजस्व की हानि को रोकना — डीआरआई द्वारा ई-सिगरेट की जब्ती मुख्य रूप से तस्करी रोकने और राजस्व की हानि को रोकने के उद्देश्य से की गई थी।
Mains: पश्चिम बंगाल में ई-सिगरेट के अवैध व्यापार और तस्करी पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए सुझाव भी प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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