14वां इंडिया केम 2026: मुंबई में वैश्विक रसायन उद्योग का महाकुंभ

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14वां इंडिया केम 2026: मुंबई में वैश्विक रसायन उद्योग का महाकुंभ

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इंडिया केम 2026 आयोजन प्रक्रिया

✎ रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग और FICCI द्वारा आयोजित द्विवार्षिक इंडिया केम (14वाँ संस्करण, 22–24 अक्टूबर 2026, मुंबई; भागीदार देश: जापान) में भारत विश्व में रसायनों का छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत-जापान आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग)  |  GS Paper II — शासन: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप (औद्योगिक नीति, नियामक ढांचा)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था: औद्योगिक विकास, विनिर्माण और विदेशी निवेश
  • Prelims: रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (Department of Chemicals and Petrochemicals) — रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत, FICCI (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) — इंडिया केम का सह-आयोजक, पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR), NESCO, मुंबई (बॉम्बे प्रदर्शनी केंद्र) — आयोजन स्थल, मेक इन इंडिया (Make in India) पहल, भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (India-Japan CEPA, 2011), भारत: रसायन उत्पादन में विश्व में छठा और एशिया में चौथा स्थान, जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend)
  • Essay: रसायन क्षेत्र और भारत का औद्योगिक भविष्य: विनिर्माण, निर्यात और आत्मनिर्भरता का संबंध, वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका: अवसर, प्रतिस्पर्धा और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग और FICCI द्वारा आयोजित द्विवार्षिक इंडिया केम (14वाँ संस्करण, 22–24 अक्टूबर 2026, मुंबई; भागीदार देश: जापान) में भारत विश्व में रसायनों का छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग और FICCI द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 14वाँ इंडिया केम 2026 मुंबई के NESCO स्थित बॉम्बे प्रदर्शनी केंद्र में 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक होगा। इसका विषय “एडवांटेज भारत: एक उभरता हुआ वैश्विक रसायन केंद्र” है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा इसका उद्घाटन करेंगे, जबकि राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित रहेंगी। इस द्विवार्षिक आयोजन में जापान भागीदार देश के रूप में भाग लेगा। सरकार के अनुसार भारत विश्व में रसायनों का छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है, तथा रसायन उद्योग के 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इसी संदर्भ में यह आयोजन नीति-निर्माताओं, निवेशकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को एक मंच पर लाकर निवेश, व्यापार और सहयोग के अवसर तलाशने का प्रयास है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में रसायन उद्योग को सामान्यतः तीन प्रमुख उप-खंडों में देखा जाता है: मूलभूत (basic) रसायन, विशेष (specialty) रसायन और पेट्रोकेमिकल। इनकी आपूर्ति श्रृंखला कृषि, औषधि, वस्त्र, प्लास्टिक और निर्माण जैसे अनेक उद्योगों से जुड़ी है।
  • रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग इस क्षेत्र की नीति और समन्वय के लिए नोडल विभाग है, जो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR) की अवधारणा के अंतर्गत बड़े एकीकृत औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाते हैं, जहाँ अवसंरचना, उपयोगिताएँ और उद्योग एक साथ विकसित हों। इस आयोजन में गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य अपने रसायन केंद्रों का प्रदर्शन करेंगे।
  • भारत-जापान संबंध 2014 में ‘विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी’ के स्तर तक पहुँचे हैं, और दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) 2011 से लागू है। जापान की भागीदार-देश भूमिका इसी आर्थिक सहयोग को गहरा करने से जुड़ी है।
  • ‘मेक इन इंडिया’ पहल (2014) का उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, घरेलू मूल्य संवर्धन और निवेश आकर्षित करना है। रसायन क्षेत्र इस नीति के लक्ष्यों, विशेषकर मध्यवर्ती (intermediate) उत्पादों के घरेलू उत्पादन, के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश, अपेक्षाकृत कम प्रति व्यक्ति रसायन खपत और निर्यात की संभावनाएँ इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि के प्रमुख आधार माने जाते हैं।

रसायन उद्योग और इंडिया केम क्या है?

  • रसायन उद्योग आधुनिक अर्थव्यवस्था की आधारभूत कड़ी है, क्योंकि यह कच्चे माल से लेकर मध्यवर्ती और अंतिम उत्पाद तक विभिन्न उद्योगों को आपूर्ति करता है।
  • पेट्रोकेमिकल (Petrochemical) उद्योग कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से प्राप्त हाइड्रोकार्बन से प्लास्टिक, सिंथेटिक रेशे और रबर जैसे उत्पाद बनाता है; इसलिए इसका ऊर्जा क्षेत्र से गहरा संबंध है।
  • इंडिया केम (India Chem) रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का प्रमुख द्विवार्षिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन है, जिसका आयोजन रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग और FICCI संयुक्त रूप से करते हैं।
  • इस आयोजन में प्रदर्शनी के साथ-साथ नीति-संवाद, ग्लोबल सीईओ फोरम और खरीदार-विक्रेता बैठकें होती हैं, जिनका उद्देश्य व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाना है।
  • ‘भागीदार देश’ (Partner Country) की अवधारणा के तहत एक विदेशी देश इस आयोजन का विशेष केंद्र बनता है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहन मिलता है।
  • रसायन उद्योग के लिए ‘वैश्विक विनिर्माण और सोर्सिंग गंतव्य’ बनने का अर्थ है कि भारत न केवल घरेलू माँग पूरी करे, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विश्वसनीय विकल्प के रूप में भी उभरे।
  • इस क्षेत्र में विकास की चुनौतियों में कच्चे माल की निर्भरता, ऊर्जा लागत, पर्यावरणीय मानक और उच्च तकनीकी क्षमता का विकास शामिल हैं, जिनका समाधान नीति और निवेश दोनों के माध्यम से खोजा जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आयोजन का स्वरूप रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (Department of Chemicals and Petrochemicals) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) का संयुक्त आयोजन है, जो द्विवार्षिक रूप से होता है। इससे सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी का स्वरूप स्पष्ट होता है।
आयोजन स्थल और अवधि 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक मुंबई के NESCO स्थित बॉम्बे प्रदर्शनी केंद्र में होगा। बड़े प्रदर्शनी केंद्र में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन एक साथ चलेंगे।
मुख्य विषय “एडवांटेज भारत: एक उभरता हुआ वैश्विक रसायन केंद्र” विषय भारत को वैश्विक विनिर्माण और सोर्सिंग गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करता है। यह विषय नीति और निवेश, दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
भागीदार देश जापान इस संस्करण का भागीदार देश है। इससे भारत-जापान आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है।
भारत की स्थिति भारत विश्व में रसायनों का छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। यही पृष्ठभूमि इस आयोजन को विशेष बनाती है।
उद्योग-लक्ष्य रसायन उद्योग के 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर और 2040 तक 1 खरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। यह दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि का संकेत है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • रसायन और पेट्रो-रसायन क्षेत्र घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने का आधार है।
  • निर्यात के अवसरों और बढ़ती घरेलू मांग से इस क्षेत्र में आर्थिक संवृद्धि की संभावना बढ़ती है।
  • मध्यवर्ती रसायनों के आयात पर निर्भरता घटाने से व्यापार संतुलन पर दबाव कम हो सकता है।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश और अपेक्षाकृत कम प्रति व्यक्ति खपत इस क्षेत्र की दीर्घकालिक क्षमता को बढ़ाते हैं।

निवेश और अवसंरचना

  • पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR) जैसे ढाँचे निवेश को एक जगह केंद्रित करने में सहायक हैं।
  • विश्व स्तरीय अवसंरचना, स्थिर नियामक ढाँचा और प्रतिस्पर्धी लागत निवेशकों के लिए आकर्षण बढ़ाते हैं।
  • प्रदर्शनी में 100 से अधिक देशों की भागीदारी से विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के अवसर खुल सकते हैं।

वैश्विक मूल्य श्रृंखला और रणनीतिक महत्व

  • वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी बढ़ने से आपूर्ति के स्रोतों का विविधीकरण संभव होता है।
  • रसायन क्षेत्र औषधि, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को आधार सामग्री देता है, इसलिए इसकी आपूर्ति सुरक्षा रणनीतिक महत्व रखती है।

कूटनीतिक और तकनीकी महत्व

  • जापान के भागीदार देश होने से भारत-जापान आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देने का अवसर मिलता है।
  • प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और शोधकर्ताओं की उपस्थिति से नवाचार और कौशल हस्तांतरण को बल मिल सकता है।

चुनौतियाँ

1. आयात पर निर्भरता

  • पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और कई विशेष रसायनों के लिए भारत का आयात पर निर्भर रहना एक बड़ी चुनौती है।
  • कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उत्पादन लागत और प्रतिस्पर्धा दोनों प्रभावित होते हैं।

2. पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ

  • रसायन उद्योग से प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन और औद्योगिक दुर्घटनाओं का जोखिम जुड़ा रहता है।
  • सतत और हरित रसायन (Green Chemistry) अपनाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।

3. केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय

  • रसायन उद्योग से जुड़े भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और अवसंरचना का अधिकांश दायित्व राज्यों पर होता है।
  • एक समान नीति और निवेश प्रक्रिया के अभाव में विभिन्न राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो सकती है।

4. कौशल और मानव संसाधन

  • उन्नत रसायन और प्रक्रिया प्रौद्योगिकी के लिए कुशल श्रमिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है।
  • छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) के पास आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने की क्षमता सीमित हो सकती है।

5. वैश्विक प्रतिस्पर्धा और व्यापार बाधाएँ

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन जैसे बड़े उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा तीव्र है।
  • पर्यावरण मानकों से जुड़े व्यापार नियम और कार्बन सीमा समायोजन जैसे उपाय निर्यात की लागत बढ़ा सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कच्चे माल की आपूर्ति फीडस्टॉक और विशेष रसायनों के आयात पर निर्भरता से लागत और आपूर्ति सुरक्षा पर जोखिम है।
पर्यावरणीय प्रभाव प्रदूषण, अपशिष्ट और औद्योगिक जोखिम का प्रबंधन सतत विकास के लक्ष्यों के अनुरूप होना आवश्यक है।
भूमि और स्वीकृतियाँ भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृति में विलंब से परियोजनाओं की समय-सीमा प्रभावित होती है।
कौशल की कमी उन्नत प्रौद्योगिकी के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता अभी सीमित है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा बड़े उत्पादक देशों की लागत और पैमाने के लाभ के सामने भारतीय उत्पादकों को कठिनाई हो सकती है।
MSME की तकनीकी क्षमता छोटे उद्यमों की वित्तीय और तकनीकी सीमाएँ उनके आधुनिकीकरण में बाधा बन सकती हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (Petroleum, Chemicals and Petrochemicals Investment Regions – PCPIR)

आगे की राह

  • PCPIR क्षेत्रों में भूमि, जल, ऊर्जा और परिवहन की अवसंरचना को समयबद्ध तरीके से विकसित किया जाए।
  • कच्चे माल के स्रोतों का विविधीकरण कर आयात निर्भरता को चरणबद्ध रूप से कम किया जाए।
  • हरित रसायन और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की प्रौद्योगिकियों के लिए शोध एवं विकास को प्रोत्साहन दिया जाए।
  • पर्यावरणीय स्वीकृति और पर्यवेक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
  • रसायन क्षेत्र के लिए कुशल श्रमिकों और तकनीकी विशेषज्ञों का प्रशिक्षण उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाए।
  • केंद्र और राज्यों के बीच निवेश नीतियों में समन्वय सुनिश्चित कर सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत किया जाए।
  • MSME के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और वित्त की सुलभता बढ़ाई जाए।
  • जापान जैसे भागीदार देशों के साथ संयुक्त शोध, निवेश और कौशल विकास की परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

इंडिया केम 2026 · रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र · पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR) · चीन+1 रणनीति · जनसांख्यिकीय लाभांश · वैश्विक मूल्य श्रृंखला · भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (India-Japan CEPA) · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 · पूर्ण दायित्व सिद्धांत (Absolute Liability) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) · हरित रसायन (Green Chemistry)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: केंद्र और राज्यों की विधायी शक्तियों का आधार
  • सातवीं अनुसूची: उद्योगों पर संघ और राज्य सूची के विषय

अवधारणा प्रवाह

भारत का रसायन और पेट्रो-रसायन क्षेत्र विश्व में छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है।  →  घरेलू मांग, निर्यात अवसर और जनसांख्यिकीय लाभांश से उद्योग की विकास संभावना बढ़ती है।  →  नीतिगत सुधार, विश्व स्तरीय अवसंरचना और PCPIR जैसे ढाँचे निवेश को आकर्षित करते हैं।  →  अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन (इंडिया केम 2026) में नीति निर्माता, निवेशक और प्रौद्योगिकी प्रदाता एक मंच पर आते हैं।  →  सहयोग, व्यापार और निवेश के समझौते बनते हैं, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी बढ़ती है।  →  अंततः घरेलू विनिर्माण सुदृढ़ होता है और 2030 तक 300 अरब व 2040 तक 1 खरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य की ओर प्रगति होती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत विश्व में रसायनों का छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है।
2. पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR) रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग की नीति के अंतर्गत चिह्नित किए जाते हैं।
3. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना संसद के अधिनियम द्वारा हुई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भारत विश्व में छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक है। कथन 2 सही है: PCPIR रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग की नीति से जुड़े चिह्नित निवेश क्षेत्र हैं। कथन 3 गलत है: FICCI एक स्वैच्छिक, गैर-सरकारी औद्योगिक संगठन है, संवैधानिक या वैधानिक निकाय नहीं।

Q2. अभिकथन (A): रसायन उद्योग के विस्तार के साथ पर्यावरण और औद्योगिक दुर्घटना संबंधी नियमन का महत्व बढ़ जाता है।
कारण (R): रासायनिक आपदा (आपातकालीन योजना, तैयारी और अनुक्रिया) नियम, 1996 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परन्तु R गलत है।
  4. A गलत है, परन्तु R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — A सही है, क्योंकि खतरनाक रसायनों के उत्पादन में दुर्घटना का जोखिम अधिक होता है। R भी सही है: रासायनिक आपदा नियम, 1996 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 8 के अंतर्गत बने हैं, और यही A की व्याख्या करते हैं।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची-I (संकल्पना/व्यवस्था)
A. पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR)
B. भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (India-Japan CEPA)
C. प्रदूषक भुगतान सिद्धांत

सूची-II (विवरण)
1. प्रदूषण से हुई क्षति की लागत प्रदूषक पर डालने का सिद्धांत
2. औद्योगिक निवेश हेतु चिह्नित रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र
3. भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश और सेवाओं से जुड़ा समझौता, जो 2011 में लागू हुआ

  1. A-2, B-3, C-1
  2. A-1, B-2, C-3
  3. A-3, B-1, C-2
  4. A-2, B-1, C-3

उत्तर: A-2, B-3, C-1 — A-2: PCPIR औद्योगिक निवेश हेतु चिह्नित क्षेत्र हैं। B-3: भारत-जापान CEPA 2011 में लागू हुआ। C-1: प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के अनुसार प्रदूषण की क्षति की लागत प्रदूषक को वहन करनी होती है, जिसे न्यायालयों ने भी स्वीकार किया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत विश्व में रसायनों का छठा और एशिया में चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है, और ‘चीन+1’ रणनीति इस क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण व सोर्सिंग गंतव्य के रूप में उभरने का अवसर देती है। इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्पादन-वृद्धि और पर्यावरणीय तथा औद्योगिक सुरक्षा दायित्वों के बीच संतुलन की व्याख्या कीजिए और बताइए कि यदि नियामक ढांचा कमज़ोर रहे तो दुर्घटना से होने वाली क्षति का दायित्व किस पर और किस सिद्धांत से तय होगा। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. संदर्भ: इंडिया केम 2026 (14वां संस्करण), 22–24 अक्टूबर 2026, मुंबई के NESCO स्थित बॉम्बे प्रदर्शनी केंद्र में; रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग और FICCI का संयुक्त आयोजन; विषय ‘एडवांटेज भारत: एक उभरता हुआ वैश्विक रसायन केंद्र’; जापान भागीदार देश। भारत का स्थान: विश्व में छठा, एशिया में चौथा उत्पादक; अनुमान 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर।
2. अवसर का पक्ष: जनसांख्यिकीय लाभांश, अपेक्षाकृत कम प्रति व्यक्ति खपत, निर्यात की संभावना; ‘चीन+1’ रणनीति के तहत बहु-देशीय सोर्सिंग में भारत का विकल्प; भारत-जापान CEPA (2011) के माध्यम से निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग; PCPIR नीति (2007) के अंतर्गत चिह्नित क्षेत्र, जैसे दहेज (गुजरात) और पारादीप (ओडिशा), जहाँ अवसंरचना और उद्योग एक साथ विकसित होते हैं।
3. चुनौतियों का आलोचनात्मक पक्ष: कच्चे माल और विशेष रसायनों पर आयात-निर्भरता; मूल्य श्रृंखला में ऊपर की ओर बढ़ने की क्षमता; हरित रसायन और चक्रीय अर्थव्यवस्था को अपनाने की गति; छोटे और मध्यम उद्यमों की प्रौद्योगिकीय क्षमता।
4. पर्यावरण और सुरक्षा दायित्व: भोपाल गैस त्रासदी (1984) और भोपाल गैस रिसाव आपदा (दावों का प्रसंस्करण) अधिनियम, 1985; दिल्ली में ओलियम गैस रिसाव पर M.C. Mehta बनाम भारत संघ (1986) में ‘पूर्ण दायित्व सिद्धांत’ (Absolute Liability) का प्रतिपादन; Indian Council for Enviro-Legal Action बनाम भारत संघ (1996) में प्रदूषक भुगतान सिद्धांत; Vellore Citizens Welfare Forum बनाम भारत संघ (1996) में सावधानी सिद्धांत; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; रासायनिक आपदा नियम, 1996; लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991; राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010; ब्रुंटलैंड रिपोर्ट (1987) का सतत विकास।
5. संतुलित मत: विकास और पर्यावरण विरोधी नहीं हैं, यदि उत्पादन-वृद्धि के साथ नियामक क्षमता, PCPIR क्षेत्रों में सामूहिक अपशिष्ट प्रबंधन और हरित प्रौद्योगिकी में निवेश हो। कथन आंशिक रूप से सही है: अवसर वास्तविक हैं, पर उन्हें मूल्य श्रृंखला और सुरक्षा ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर निर्भर करना होगा।
6. उप-प्रश्न का उत्तर: कमज़ोर नियामक ढांचे में पूर्ण दायित्व सिद्धांत के अंतर्गत उद्यम पर बिना दोष सिद्ध किए क्षति-पूर्ति का दायित्व बनता है; राज्य का दायित्व यह सुनिश्चित करने का है कि नियामक संस्थाएं सक्रिय रहें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: 14वां इंडिया केम 2026 मुंबई में आयोजित होने वाला वैश्विक रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग का शिखर सम्मेलन निम्नलिखित में से किस संगठन द्वारा आयोजित किया जाता है?

  1. A. भारतीय रसायन परिषद (ICC)
  2. B. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI)
  3. C. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII)
  4. D. राष्ट्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

उत्तर: A. भारतीय रसायन परिषद (ICC) — 14वां इंडिया केम 2026 मुंबई का आयोजन भारतीय रसायन परिषद (ICC) द्वारा किया जाता है, जो रसायन उद्योग का प्रमुख संगठन है।

Mains: वैश्विक रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए मुंबई में आयोजित होने वाले ‘इंडिया केम 2026’ शिखर सम्मेलन के महाराष्ट्र राज्य के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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