महाराष्ट्र: डीआरआई और सीबीएन ने वन्यजीव अभयारण्य में अवैध गांजा नष्ट किया

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महाराष्ट्र: डीआरआई और सीबीएन ने वन्यजीव अभयारण्य में अवैध गांजा नष्ट किया

अवैध गांजा नष्ट करने की प्रक्रियाखुफिया जानकारी मिलनाविशिष्ट खुफियासंयुक्त टीम गठनडीआरआई + सीबीएनकार्रवाई करना14 अक्टूबर 2026अवैध खेती पहचान2.87 हेक्टेयरफसल नष्ट करनारोटावेटर सेअगली जांचजारी है
अवैध गांजा नष्ट करने की प्रक्रिया

✎ NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 8 के अंतर्गत गांजे की खेती सामान्यतः प्रतिबंधित है, जबकि NCB नोडल प्रवर्तन एजेंसी है और DRI राजस्व-आसूचना आधारित तस्करी-विरोधी अभियानों का नेतृत्व करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और एजेंसियों की भूमिका)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं जैव विविधता (संरक्षित क्षेत्रों का संरक्षण और वन्यजीव अधिनियम, 1972 के प्रावधान)  |  GS Paper II — शासन (केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय; वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधीन संस्थाएं)
  • Prelims: नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेज (NDPS) अधिनियम, 1985 — धारा 8 (कैनेबिस पौधे की खेती पर प्रतिबंध) और धारा 20 (दंड), धारा 52A (जब्त मादक पदार्थों का निपटान और नष्ट करना), केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) — गृह मंत्रालय के अधीन नोडल एजेंसी, राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) — राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय के अधीन, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — अभयारण्य की घोषणा (धारा 18), गांजा (कैनेबिस) — एकल मादक पदार्थ सम्मेलन, 1961 की अनुसूची IV में शामिल, नशामुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) — सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, नारकोटिक्स के लिए विशेष न्यायालय — NDPS अधिनियम की धारा 36A
  • Essay: नशे का कारोबार और सीमाहीन अपराध: राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष चुनौती, पर्यावरण संरक्षण और अवैध गतिविधियां: संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा के प्रश्न

त्वरित पुनरावृत्ति: NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 8 के अंतर्गत गांजे की खेती सामान्यतः प्रतिबंधित है, जबकि NCB नोडल प्रवर्तन एजेंसी है और DRI राजस्व-आसूचना आधारित तस्करी-विरोधी अभियानों का नेतृत्व करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) को मिली विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर, डीआरआई और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के धुले जिले के शिरपुर क्षेत्र में जमनियापानी गांव के पास स्थित एक वन्यजीव अभयारण्य में कार्रवाई की। टीम ने दूरस्थ और घने वन क्षेत्र में पांच भूखंडों पर फैली, कुल 2.87 हेक्टेयर (7.08 एकड़) में अवैध गांजे की खेती का पता लगाया। दुर्गम भूभाग, वन्यजीवों के खतरे और मोबाइल नेटवर्क के अभाव के बावजूद अभियान पूरा किया गया। सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद पुलिस और वन विभाग की उपस्थिति में रोटावेटर से फसल नष्ट की गई और आगे की जांच जारी है। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दो केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों का समन्वित अभियान, संरक्षित वन क्षेत्र का दुरुपयोग और मादक पदार्थ नियंत्रण कानून का व्यावहारिक क्रियान्वयन एक साथ सामने आता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मादक पदार्थों से संबंधित कानून का मूल आधार NDPS अधिनियम, 1985 है, जिसमें 1989 और 2001 में संशोधन किए गए। इसमें 2001 के संशोधन से धारा 52A जोड़ी गई, जिसके तहत जब्त मादक पदार्थों के निपटान की प्रक्रिया निर्धारित की गई।
  • केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) की स्थापना 1986 में हुई थी और यह NDPS अधिनियम तथा अन्य संबंधित कानूनों के प्रवर्तन की नोडल एजेंसी है।
  • भारत संयुक्त राष्ट्र के एकल मादक पदार्थ सम्मेलन, 1961 और मनःप्रभावी पदार्थ सम्मेलन, 1971 का पक्षकार है। इन अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप ही भारत में गांजे की खेती पर सामान्यतः प्रतिबंध है।
  • नशामुक्त भारत अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2020 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा की गई थी, जिसमें नशे की मांग में कमी और जागरूकता पर बल दिया गया है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत अभयारण्य संरक्षित क्षेत्र हैं, जहां वन्यजीवों और उनके आवास की रक्षा के लिए कठोर नियम लागू होते हैं।

मादक पदार्थ कानून के अंतर्गत अवैध गांजा खेती क्या है?

  • NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 8 के अनुसार गांजे (कैनेबिस) के पौधे की खेती सामान्यतः प्रतिबंधित है; केवल चिकित्सा, वैज्ञानिक या औद्योगिक प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा अनुमति प्राप्त होने पर ही इसकी अनुमति दी जा सकती है।
  • अवैध खेती के लिए धारा 20 के अंतर्गत कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है, जिसकी सीमा मात्रा और अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है।
  • NDPS अधिनियम के अंतर्गत मादक पदार्थ-संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय (धारा 36A) गठित किए जाते हैं।
  • गांजा एकल मादक पदार्थ सम्मेलन, 1961 की अनुसूची IV में शामिल है, जो सबसे कठोर नियंत्रण वाली श्रेणी है।
  • प्रवर्तन में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) मादक पदार्थ-तस्करी और अंतर्राज्यीय नेटवर्क पर कार्रवाई करता है, जबकि राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) राजस्व और तस्करी से जुड़े खुफिया अभियानों का नेतृत्व करता है।
  • जब्त मादक पदार्थों और खड़ी फसल के निपटान में अदालत और जांच-अधिकारी की प्रक्रिया का पालन आवश्यक है; धारा 52A के अंतर्गत नमूने सुरक्षित रखकर शेष माल नष्ट करने की व्यवस्था है।
  • संरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध खेती से वन भूमि के अतिक्रमण, वन्यजीव आवास के क्षरण और पर्यावरणीय क्षति जैसे दोहरे प्रभाव उत्पन्न होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
कार्रवाई करने वाली एजेंसियां राजस्व आसूचना निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence – DRI) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (Central Bureau of Narcotics – CBN) की संयुक्त टीम। दोनों संस्थाएं वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करती हैं।
स्थान महाराष्ट्र के धुले जिले में शिरपुर तहसील के जमनियापानी गांव के पास स्थित वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) का दूरस्थ और घना वन क्षेत्र
क्षेत्र और भूखंड पांच भूखंडों पर फैली अवैध गांजा (Cannabis) की खेती, कुल क्षेत्र 2.87 हेक्टेयर (7.08 एकड़)
सूचना का स्रोत DRI को प्राप्त विशिष्ट खुफिया जानकारी (Specific Intelligence Input) के आधार पर कार्रवाई
नष्ट करने की विधि सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद पुलिस और वन विभाग की मौजूदगी में रोटावेटर (कृषि यंत्र) द्वारा फसल को नष्ट किया गया
वर्तमान स्थिति फसल नष्ट की जा चुकी है; खेती के संगठन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी आगे की जांच जारी है

महत्व

प्रवर्तन और विधिक

  • मादक पदार्थ और मनोदैहिक पदार्थ अधिनियम, 1985 (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 – NDPS Act) के अंतर्गत गांजे की खेती निषिद्ध है। सरकारी अनुमति के बिना इसकी खेती अपराध है, जबकि औषधीय, वैज्ञानिक या औद्योगिक प्रयोजन के लिए सरकार विशेष अनुमति दे सकती है (धारा 10)।
  • खुफिया सूचना पर आधारित संयुक्त कार्रवाई यह दर्शाती है कि राजस्व और नारकोटिक्स प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय से मादक पदार्थों के उत्पादन के स्रोत पर ही रोक लगाई जा सकती है।
  • कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद फसल नष्ट करना साक्ष्य संकलन और प्रक्रियागत वैधता के महत्व को रेखांकित करता है।

पर्यावरणीय

  • संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र में खेती से वन भूमि का अतिक्रमण और जैव विविधता को क्षति होती है। वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Protection) वन विभाग और प्रवर्तन एजेंसियों की संयुक्त जिम्मेदारी बन जाता है।
  • अवैध खेती में प्रायः रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग होता है, जिससे मिट्टी और भूजल प्रदूषित हो सकते हैं।

सामाजिक-स्वास्थ्य और आर्थिक

  • मादक पदार्थों की अवैध आपूर्ति युवाओं में नशे की लत को बढ़ाती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दबाव डालती है।
  • अवैध मादक अर्थव्यवस्था से प्राप्त धन संगठित अपराध को सहारा देता है। इसलिए ऐसी खेती पर रोक को आर्थिक अपराध नियंत्रण से भी जोड़ कर देखा जाता है।

संस्थागत और सुरक्षा

  • दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में अभियान चलाना यह दिखाता है कि प्रवर्तन क्षमता में भौगोलिक सूचना, सुरक्षा उपायों और अंतर-एजेंसी समन्वय की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. दुर्गम भूभाग और संचार की कमी

  • घने जंगल, खराब सड़क संपर्क और मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता के कारण अभियान का संचालन, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया कठिन हो जाती है।
  • सीमित संचार के कारण वास्तविक समय में सूचना साझा करना और बल की तैनाती धीमी पड़ सकती है।

2. वन्यजीव संरक्षण और प्रवर्तन के बीच संतुलन

  • संरक्षित क्षेत्र में तलाशी, फसल नष्ट करने और मानव गतिविधि से वन्यजीवों के आवास पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • वन्यजीवों से जोखिम के कारण सुरक्षा उपाय अनिवार्य हो जाते हैं, जिससे अभियान की लागत और जटिलता बढ़ती है।

3. खेती का स्थानांतरण और पुनरावृत्ति

  • ऐसी खेती अक्सर अलग-अलग भूखंडों में फैली होती है और प्रवर्तन के बाद उत्पादन अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो सकता है।
  • केवल फसल नष्ट करने से आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह समाप्त नहीं होती, इसलिए निरंतर निगरानी और जांच आवश्यक है।

4. वित्तीय और संगठित तंत्र का पता लगाना

  • खेती के पीछे के वित्तपोषण, बीज और उत्पाद के बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं की जांच जटिल होती है।
  • सीमा-पार या अंतर-राज्य आपूर्ति श्रृंखला को जोड़ने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच डेटा साझाकरण आवश्यक है।

5. प्रवर्तन और सामाजिक आजीविका का प्रश्न

  • ग्रामीण और वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में कुछ लोग आर्थिक दबाव में ऐसी खेती से जुड़ते हैं। केवल दंडात्मक उपाय पर्याप्त नहीं माने जाते।
  • वैकल्पिक आजीविका और जागरूकता कार्यक्रमों के बिना प्रवर्तन की स्थायी सफलता सीमित रहती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
संचार और अवसंरचना मोबाइल नेटवर्क के अभाव से वास्तविक समय में समन्वय और सूचना साझा करने में बाधा
वन्यजीव सुरक्षा वन्यजीवों से खतरा और संरक्षित क्षेत्र में मानव हस्तक्षेप से पारिस्थितिक असंतुलन की आशंका
पर्यावरणीय प्रभाव रासायनिक इनपुट और वन भूमि के उपयोग से मिट्टी, जल और जैव विविधता पर दुष्प्रभाव
पुनरावृत्ति का खतरा भूखंडों के स्थानांतरण और नई जगह खेती शुरू होने से अभियान का प्रभाव सीमित
संगठित आपूर्ति श्रृंखला उत्पादन, परिवहन और वित्तपोषण के नेटवर्क का पूरी तरह उजागर न होना
सामाजिक आजीविका आर्थिक विकल्पों के अभाव में स्थानीय लोगों का ऐसी खेती की ओर जाना

आगे की राह

  • सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी से वन क्षेत्रों में अवैध खेती की प्रारंभिक पहचान की जाए।
  • DRI, CBN, राज्य पुलिस और वन विभाग के बीच नियमित समन्वय तंत्र और साझा डेटाबेस विकसित किया जाए।
  • वन्यजीव अभयारण्यों में गश्त और तलाशी अभियानों के दौरान वन्यजीव संरक्षण संबंधी मानक प्रक्रिया का सख्ती से पालन हो।
  • आपूर्ति श्रृंखला के वित्तीय पहलुओं की जांच के लिए धनशोधन और आर्थिक अपराध से जुड़ी एजेंसियों को शामिल किया जाए।
  • ग्रामीण और वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में वैकल्पिक आजीविका और कृषि विविधीकरण के कार्यक्रम प्रभावी रूप से लागू हों।
  • नशा निरोध और जन-जागरूकता अभियानों को स्थानीय स्तर पर प्रवर्तन के साथ जोड़ा जाए।
  • फसल नष्ट करने, साक्ष्य संकलन और अभिलेखन की प्रक्रिया को मानकीकृत किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया मजबूत रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 47: मादक पदार्थों के सेवन पर रोक का राज्य का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 48क: वन और वन्यजीव संरक्षण का राज्य दायित्व
  • अनुच्छेद 51क(छ): प्राकृतिक पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का मूल कर्तव्य
  • सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची: वन (प्रविष्टि 17क), वन्यजीव (प्रविष्टि 17ख), मादक पदार्थ (प्रविष्टि 19)

अवधारणा प्रवाह

DRI को विशिष्ट खुफिया सूचना प्राप्त होती है कि वन्यजीव अभयारण्य में गांजे की अवैध खेती हो रही है।  →  DRI और CBN की संयुक्त टीम 14.10.2026 को दूरस्थ वन क्षेत्र में पहुंचकर पांच भूखंडों की पहचान करती है।  →  कुल 2.87 हेक्टेयर (7.08 एकड़) क्षेत्र में फैली खेती का सत्यापन और सुरक्षा उपायों के साथ अभियान संचालन होता है।  →  कानूनी औपचारिकताओं के बाद पुलिस और वन विभाग की उपस्थिति में रोटावेटर से फसल नष्ट की जाती है।  →  नष्ट की गई फसल और घटनास्थल से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी रहती है।  →  जांच से आपूर्ति श्रृंखला और संबंधित नेटवर्क का पता लगाकर भविष्य की खेती की रोकथाम का प्रयास होता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
2. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) केवल अवैध मादक पदार्थों की खेती को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार है।
3. नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों को नियंत्रित करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। DRI वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है और यह तस्करी विरोधी मामलों में प्रमुख खुफिया एजेंसी है। कथन 2 गलत है। CBN मादक पदार्थों की खेती को नष्ट करने के साथ-साथ मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य संबंधित अपराधों को रोकने के लिए भी जिम्मेदार है। कथन 3 सही है। NDPS अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्ज़े, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और उपभोग को नियंत्रित करता है।

Q2. राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. DRI मुख्य रूप से सीमा शुल्क चोरी और तस्करी से संबंधित है, जबकि CBN मादक पदार्थों की तस्करी और खेती पर केंद्रित है।
  2. दोनों एजेंसियां केवल वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए जिम्मेदार हैं।
  3. DRI गृह मंत्रालय के अधीन आता है, जबकि CBN वित्त मंत्रालय के अधीन आता है।
  4. दोनों एजेंसियां केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी को नियंत्रित करती हैं।

उत्तर: DRI मुख्य रूप से सीमा शुल्क चोरी और तस्करी से संबंधित है, जबकि CBN मादक पदार्थों की तस्करी और खेती पर केंद्रित है। — DRI वित्त मंत्रालय के तहत एक प्रमुख तस्करी विरोधी खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी है, जो सीमा शुल्क चोरी, वाणिज्यिक धोखाधड़ी और तस्करी जैसे अपराधों से निपटती है। CBN भी वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है और भारत में मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन, तस्करी और संबंधित अपराधों को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। इसलिए, विकल्प A सही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में अवैध मादक पदार्थों की खेती और तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सामाजिक कल्याण के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है। इस संदर्भ में, कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ऐसे अपराधों से निपटने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोणों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अवैध मादक पदार्थों की खेती और तस्करी की समस्या का संक्षिप्त परिचय दें और इसके राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक कल्याण पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करें। (उदाहरण: हाल ही में महाराष्ट्र के धुले जिले में वन्यजीव अभयारण्य में गांजे की खेती का मामला)
2. कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ:
क. दुर्गम भूभाग और भौगोलिक बाधाएँ (जैसे वन्यजीव अभयारण्यों में खेती)।
ख. जंगली जानवरों का खतरा और परिचालन संबंधी कठिनाइयाँ।
ग. मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी और संचार बाधाएँ।
घ. वित्तीय संसाधनों और उन्नत तकनीक की कमी।
ङ. सीमा पार तस्करी और अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।
च. भ्रष्टाचार और स्थानीय समर्थन का मुद्दा।
छ. न्यायिक प्रक्रिया में देरी और अपर्याप्त दंड।
ज. मादक पदार्थों के उत्पादन के लिए नए तरीकों का विकास।
3. बहु-आयामी दृष्टिकोणों पर चर्चा:
क. खुफिया जानकारी साझाकरण और समन्वय: DRI, CBN, पुलिस, वन विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय।
ख. तकनीकी उन्नयन: ड्रोन, उपग्रह इमेजरी और अन्य निगरानी तकनीकों का उपयोग।
ग. क्षमता निर्माण: कानून प्रवर्तन कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और उपकरण।
घ. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सहयोग।
ङ. सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को शामिल करना और जागरूकता कार्यक्रम चलाना।
च. वैकल्पिक आजीविका: अवैध खेती में शामिल किसानों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
छ. कठोर कानूनी ढाँचा और त्वरित न्याय: NDPS अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन और न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी।
ज. मांग में कमी: नशामुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
4. निष्कर्ष: एक नशामुक्त और सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए एक समग्र और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) द्वारा महाराष्ट्र के धुले जिले में वन्यजीव अभयारण्य में पकड़ी गई अवैध खेती को रोकने के लिए कौन-सा अधिनियम मुख्य रूप से लागू होता है?

  1. A. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  2. B. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985
  3. C. जैव विविधता अधिनियम, 2002
  4. D. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

उत्तर: B. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 — नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 अवैध नशीली दवाओं की खेती और तस्करी को नियंत्रित करता है।

Mains: महाराष्ट्र में अवैध नशीली दवाओं की खेती और वन्यजीव अभयारण्यों में इसके प्रभावों को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विश्लेषण कीजिए। महाराष्ट्र की वन्यजीव संरक्षण नीति और नशीली दवाओं के विरुद्ध कानूनी ढांचे के बीच समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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