21 Oct सितंबर 2026 में कोर उद्योग सूचकांक में 7.9% वृद्धि, लौह अयस्क सर्वाधिक प्रभावी

✎ ICI नौ आधारभूत उद्योगों का भार-भारित मासिक सूचकांक है, जिसे OEA (DPIIT) तैयार करता है; सितंबर 2026 में इसकी वार्षिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही और इसका सबसे बड़ा भार बिजली (30.932) का है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, सांख्यिकी और आर्थिक संकेतक)
- Prelims: कोर उद्योग सूचकांक (Core Industries Index — ICI), ICI में शामिल नौ अवयव और उनके भार (बिजली सर्वाधिक भार वाला अवयव), आर्थिक सलाहकार कार्यालय (Office of Economic Adviser — OEA) और इसका DPIIT से संबंध, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production — IIP) और इसमें ICI की भूमिका, सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा IIP का संकलन, अनंतिम और अंतिम आंकड़ों में संशोधन की प्रक्रिया, आधार वर्ष (Base Year) परिवर्तन का अर्थ और तुलनीयता पर प्रभाव
- Essay: औद्योगिक संकेतकों से अर्थव्यवस्था की वास्तविक गति का आकलन: सीमाएँ और संभावनाएँ, आधारभूत उद्योगों की वृद्धि और समावेशी विकास के बीच संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: ICI नौ आधारभूत उद्योगों का भार-भारित मासिक सूचकांक है, जिसे OEA (DPIIT) तैयार करता है; सितंबर 2026 में इसकी वार्षिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही और इसका सबसे बड़ा भार बिजली (30.932) का है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने सितंबर 2026 के लिए कोर उद्योग सूचकांक (ICI) का अनंतिम आंकड़ा और अगस्त 2026 का अंतिम आंकड़ा जारी किया है। इस बार सूचकांक का आधार वर्ष 2022-23 है। सितंबर 2026 में ICI की वार्षिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही, जो अगस्त 2026 की संशोधित दर 5.9 प्रतिशत से अधिक है। अप्रैल-सितंबर 2026 की संचयी वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 2.5 प्रतिशत थी। अगस्त 2026 के सूचकांक को 119.2 (अस्थायी) से संशोधित कर 120.4 किया गया, जिससे उसकी वार्षिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 5.9 प्रतिशत हो गई। सितंबर में लौह अयस्क (18.4 प्रतिशत), बिजली (11.4 प्रतिशत), कोयला (10.7 प्रतिशत), रिफाइनरी उत्पाद (10.3 प्रतिशत), सीमेंट (9.8 प्रतिशत) और इस्पात (4.9 प्रतिशत) में वृद्धि दर्ज हुई, जबकि उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल में ऋणात्मक वृद्धि रही।
पृष्ठभूमि
- कोर उद्योग सूचकांक का उद्देश्य प्रमुख आधारभूत उद्योगों के उत्पादन में मासिक परिवर्तन को मापना है। यह सूचकांक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के पूर्वानुमान और विश्लेषण में प्रमुख भूमिका निभाता है, क्योंकि इसके अवयव IIP में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
- आधार वर्ष समय-समय पर संशोधित किया जाता है ताकि सूचकांक की संरचना वर्तमान उत्पादन ढाँचे को प्रतिबिंबित करे। आधार वर्ष बदलने पर भार और सूचकांक मान बदल जाते हैं, इसलिए पुराने और नए आधार वर्ष के आंकड़ों की सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए।
- अनंतिम आंकड़े संदर्भ माह के अगले माह की 20 तारीख को जारी किए जाते हैं, और बाद में उपलब्ध पूर्ण आंकड़ों के आधार पर उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है। इस प्रकार अगस्त 2026 के आंकड़े में संशोधन इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
- अप्रैल-सितंबर 2026 की संचयी वृद्धि दर वर्ष के पहले छमाही प्रदर्शन का संकेत देती है। इसकी तुलना पिछले वर्ष की इसी अवधि से करने पर आधारभूत उद्योगों में गति का अंदाज़ा मिलता है।
कोर उद्योग सूचकांक (ICI) क्या है?
- कोर उद्योग सूचकांक (ICI) प्रमुख आधारभूत उद्योगों के भौतिक उत्पादन में मासिक परिवर्तन का मापक है। इसे आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) तैयार करता है, जो भारतीय उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के अंतर्गत कार्य करता है।
- वर्तमान आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित ICI में नौ अवयव शामिल हैं: कोयला, प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क।
- भार की दृष्टि से बिजली (30.932) और रिफाइनरी उत्पाद (22.572) सबसे बड़े अवयव हैं, जबकि इस्पात का भार 17.584 है। कुल भार 100 है।
- ICI का अनंतिम आंकड़ा अगले माह की 20 तारीख को जारी होता है, यदि वह कार्य दिवस हो, अन्यथा अगले कार्य दिवस को। इसके आंकड़े OEA के वेब पोर्टल पर उपलब्ध रहते हैं।
- वृद्धि दर की गणना में सूचकांक मान की तुलना उसी माह के पिछले वर्ष के सूचकांक मान से की जाती है। इसे वर्ष-दर-वर्ष (year-on-year) वृद्धि दर कहते हैं।
- संचयी वृद्धि दर किसी वित्तीय वर्ष के आरंभ से अब तक के कुल औसत प्रदर्शन को दर्शाती है, जिससे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र प्रवृत्ति समझी जा सकती है।
- ICI को आर्थिक गतिविधि का शीघ्र संकेतक माना जाता है, क्योंकि इसके आंकड़े IIP और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमानों से पहले उपलब्ध हो जाते हैं। यह अंतिम आकलन का स्थान नहीं लेता, केवल प्रवृत्ति का संकेत देता है।
- ICI का लाभ यह है कि इसके अवयव ऊर्जा, आधारभूत संरचना और निर्माण से जुड़े हैं, इसलिए यह अर्थव्यवस्था की ठोस भौतिक गतिविधि को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सितंबर 2026 में ICI की वृद्धि दर (अनंतिम) | सितंबर 2025 की तुलना में 7.9 प्रतिशत, जो अगस्त 2026 की संशोधित दर 5.9 प्रतिशत से अधिक है |
| सितंबर 2026 का सूचकांक (अनंतिम) | 118.3, जबकि सितंबर 2025 में यह 109.6 था |
| अप्रैल-सितंबर 2026 की संचयी वृद्धि दर (अस्थायी) | 5.1 प्रतिशत, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में 2.5 प्रतिशत थी |
| सबसे अधिक वृद्धि वाले क्षेत्र (सितंबर 2026) | लौह अयस्क (18.4 प्रतिशत), बिजली (11.4 प्रतिशत), कोयला (10.7 प्रतिशत), रिफाइनरी उत्पाद (10.3 प्रतिशत) |
| संकुचन वाले क्षेत्र (सितंबर 2026) | उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई |
| अगस्त 2026 के आंकड़ों का संशोधन | सूचकांक 119.2 (अस्थायी) से संशोधित होकर 120.4 हुआ और वार्षिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 5.9 प्रतिशत हो गई |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ICI औद्योगिक उत्पादन का अग्रिम संकेतक है। इसे सामान्यतः औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) के विनिर्माण आंकड़ों से पहले जारी किया जाता है, इसलिए यह अर्थव्यवस्था की अल्पकालिक दिशा समझने में सहायक है।
- सितंबर 2026 की वृद्धि दर पिछले महीनों से अधिक रहना यह दर्शाता है कि ऊर्जा, खनन और आधारभूत धातु क्षेत्रों में गतिविधि बढ़ी है।
- ICI में कुल भार का बड़ा हिस्सा बिजली (30.932), रिफाइनरी उत्पाद (22.572) और इस्पात (17.584) का है। इसलिए इन क्षेत्रों की गति समग्र सूचकांक को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
ऊर्जा और संसाधन सुरक्षा के संदर्भ में महत्व
- कोयला, बिजली और रिफाइनरी उत्पादों की वृद्धि ऊर्जा मांग में वृद्धि का संकेत देती है।
- कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस में ऋणात्मक वृद्धि आयात पर निर्भरता की ओर संकेत करती है, क्योंकि घरेलू उत्पादन में कमी की भरपाई आयात से की जाती है।
- लौह अयस्क में तेज़ वृद्धि इस्पात उत्पादन की आपूर्ति श्रृंखला के लिए अनुकूल संकेत है।
सांख्यिकीय और नीति-प्रक्रिया संबंधी महत्व
- अंतिम आंकड़ों में संशोधन दर्शाता है कि अनंतिम आंकड़ों का पुनरीक्षण नीति-निर्माण में सावधानी से देखा जाना चाहिए।
- आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित सूचकांक से तुलनीय आधार और भार की संरचना अद्यतन होती है, जिससे आर्थिक संरचना में हुए बदलाव सूचकांक में परिलक्षित होते हैं।
चुनौतियाँ
1. अनंतिम और अंतिम आंकड़ों में अंतर
- अगस्त 2026 के सूचकांक में संशोधन से स्पष्ट है कि अनंतिम आंकड़े अंतिम आंकड़ों से भिन्न हो सकते हैं।
- इससे तत्काल नीति-निर्णय लेने में अनिश्चितता बनी रहती है और अल्पकालिक रुझानों की व्याख्या सीमित हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: सांख्यिकी और आर्थिक नियोजन; सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता
2. क्षेत्रीय असमानता और कुछ क्षेत्रों पर निर्भरता
- समग्र वृद्धि मुख्य रूप से लौह अयस्क, बिजली, कोयला और रिफाइनरी उत्पादों पर टिकी है, जबकि उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल में गिरावट है।
- किसी एक या कुछ क्षेत्रों पर अधिक निर्भरता से औद्योगिक विकास का आधार संकीर्ण रहता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना; औद्योगिक विकास और विविधीकरण
3. ऊर्जा आयात पर निर्भरता
- कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन में ऋणात्मक वृद्धि से भारत की आयात पर निर्भरता बढ़ने की आशंका रहती है।
- विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटा पर इसका दबाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा सुरक्षा; भुगतान संतुलन और चालू खाता घाटा
4. उर्वरक क्षेत्र में संकुचन
- उर्वरक उत्पादन में ऋणात्मक वृद्धि कृषि आदानों की उपलब्धता और सब्सिडी व्यय के प्रबंधन से जुड़ी चुनौती है।
- आयातित कच्चे माल पर निर्भरता के कारण वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि आदान और खाद्य सुरक्षा; सब्सिडी प्रबंधन
5. उच्च आधार प्रभाव और मौसमी उतार-चढ़ाव
- बिजली और कोयला की मांग मौसम पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए एक महीने की वृद्धि दर को स्थायी रुझान मानना उचित नहीं है।
- पिछले वर्ष के निम्न आधार से तुलना में वृद्धि दर बढ़ी हुई दिखाई दे सकती है, जिसकी व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक आंकड़ों की व्याख्या; मौसमी समायोजन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| अनंतिम आंकड़ों का संशोधन | अल्पकालिक आकलन में त्रुटि की संभावना और नीति-निर्णय में अनिश्चितता |
| ऊर्जा उत्पादन में ऋणात्मक वृद्धि | कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर बढ़ती निर्भरता और भुगतान संतुलन पर दबाव |
| उर्वरक उत्पादन में गिरावट | कृषि आदानों की आपूर्ति और सब्सिडी व्यय पर प्रभाव |
| कुछ क्षेत्रों पर केंद्रित वृद्धि | औद्योगिक आधार का संकीर्ण होना और समग्र वृद्धि का असमान वितरण |
| मौसमी और आधार-प्रभाव | महीनेवार वृद्धि दर को स्थायी प्रवृत्ति मानने से भ्रामक निष्कर्ष निकलने का खतरा |
आगे की राह
- अनंतिम और अंतिम आंकड़ों के बीच अंतर का विश्लेषण करते समय संशोधन की दिशा और परिमाण दोनों को ध्यान में रखा जाए।
- कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन में सुधार के लिए अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाए।
- उर्वरक क्षेत्र में उत्पादन स्थिरता के लिए कच्चे माल की आपूर्ति और उत्पादन क्षमता के उपयोग का विश्लेषण किया जाए।
- औद्योगिक वृद्धि के आधार को विस्तृत करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र में विविधीकरण पर बल दिया जाए।
- ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाकर आयात निर्भरता को संतुलित करने की दिशा में नीतिगत प्रयास किए जाएं।
- ICI जैसे उच्च-आवृत्ति संकेतकों को IIP, GDP और अन्य संकेतकों के साथ मिलाकर देखा जाए, ताकि अर्थव्यवस्था की समग्र तस्वीर बने।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कोर उद्योग सूचकांक (Index of Core Industries — ICI) · आधार वर्ष संशोधन (Base Year Revision) · अनंतिम और अंतिम आंकड़े (Provisional and Final Estimates) · औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production — IIP) · अग्रगामी संकेतक (Leading Indicator) · आर्थिक वृद्धि का असमान स्वरूप (Uneven Pattern of Growth) · आयात-निर्भरता (Import Dependence) · पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) · राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline — NIP) · पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) · सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added — GVA) · पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy — NBS)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 52–54: उद्योग, तेल क्षेत्र और खनिज संसाधनों का संघीय विनियमन
- सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची प्रविष्टि 38: बिजली उत्पादन और वितरण पर संघ-राज्य साझा अधिकार
अवधारणा प्रवाह
आधार वर्ष 2022-23 और 100 भार वाले नौ क्षेत्रों के उत्पादन आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। → क्षेत्रवार उत्पादन सूचकांकों को उनके भार के आधार पर भारित औसत में जोड़कर समग्र ICI बनाया जाता है। → सितंबर 2026 का अनंतिम सूचकांक 118.3 रहा, जिसमें सितंबर 2025 की तुलना में 7.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। → लौह अयस्क, बिजली, कोयला और रिफाइनरी उत्पादों की वृद्धि ने समग्र सूचकांक को ऊपर खींचा, जबकि उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल में गिरावट रही। → अगस्त 2026 के अंतिम आंकड़ों में संशोधन से वार्षिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 5.9 प्रतिशत हुई, जिससे पिछले अनुमानों का पुनरीक्षण हुआ। → अप्रैल-सितंबर 2026 की संचयी वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रही, और अक्टूबर 2026 के ICI का अनंतिम आंकड़ा 20 नवंबर 2026 को जारी होगा।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो कोर उद्योग सूचकांक (ICI) से संबंधित हैं:
1. इसका वर्तमान आधार वर्ष 2022-23 है।
2. इसमें शामिल क्षेत्रों में बिजली का भार सबसे अधिक है।
3. इसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संकलित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: वर्तमान श्रृंखला का आधार वर्ष 2022-23 है। कथन 2 सही है: तालिका में बिजली का भार 30.932 है, जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक है। कथन 3 गलत है: ICI को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) द्वारा संकलित किया जाता है, RBI द्वारा नहीं।
Q2. नीचे दिए गए कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): किसी संदर्भ माह का कोर उद्योग सूचकांक पहले अनंतिम रूप में जारी होता है और बाद में संशोधित किया जाता है।
कारण (R): अंतिम आंकड़ों में उत्तरदाता इकाइयों की देर से प्राप्त रिपोर्टें और आंकड़ों का मिलान शामिल होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
- (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अनंतिम सूचकांक संदर्भ माह के बाद की 20 तारीख को जारी होता है, इसलिए उसमें सभी रिपोर्टें नहीं होतीं। अंतिम आंकड़ों में देर से प्राप्त रिपोर्टें और मिलान शामिल होने से संशोधन होता है, जैसा अगस्त 2026 के सूचकांक में 119.2 से 120.4 के संशोधन से स्पष्ट है। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलित कीजिए (सितंबर 2026, अनंतिम आंकड़ों के अनुसार वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि):
सूची-I (क्षेत्र)
1. लौह अयस्क
2. बिजली
3. प्राकृतिक गैस
4. इस्पात
सूची-II (वृद्धि दर)
a. 11.4 प्रतिशत
b. 4.9 प्रतिशत
c. नकारात्मक वृद्धि
d. 18.4 प्रतिशत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- 1-d, 2-a, 3-c, 4-b
- 1-a, 2-d, 3-b, 4-c
- 1-d, 2-b, 3-a, 4-c
- 1-c, 2-a, 3-d, 4-b
उत्तर: 1-d, 2-a, 3-c, 4-b — लौह अयस्क में 18.4 प्रतिशत (d), बिजली में 11.4 प्रतिशत (a), प्राकृतिक गैस में नकारात्मक वृद्धि (c) और इस्पात में 4.9 प्रतिशत (b) दर्ज हुई। अतः सही सुमेलन 1-d, 2-a, 3-c, 4-b है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कोर उद्योग सूचकांक (ICI) में सितंबर 2026 में वर्ष-दर-वर्ष 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसे कोयला, बिजली, लौह अयस्क और रिफाइनरी उत्पादों ने आगे बढ़ाया, जबकि उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल में संकुचन रहा। इस असमान संरचना से भारत की औद्योगिक वृद्धि की गुणवत्ता के बारे में क्या संकेत मिलते हैं, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि कोर उद्योग सूचकांक को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और समग्र आर्थिक वृद्धि के अग्रगामी संकेतक के रूप में उपयोग करने की कौन-सी सीमाएँ हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर बिंदु):
1. प्रस्तावना: ICI का परिचय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) द्वारा मासिक संकलित; वर्तमान आधार वर्ष 2022-23; नौ क्षेत्र, भार कुल 100; सर्वाधिक भार बिजली (30.932), रिफाइनरी उत्पाद (22.572) और इस्पात (17.584) का है। अनंतिम सूचकांक अगले माह की 20 तारीख को जारी होता है।
2. तथ्यात्मक विश्लेषण: सितंबर 2026 में समग्र वृद्धि 7.9 प्रतिशत (अगस्त 2026 अंतिम: 5.9 प्रतिशत); लौह अयस्क 18.4, बिजली 11.4, कोयला 10.7, रिफाइनरी उत्पाद 10.3, सीमेंट 9.8, इस्पात 4.9 प्रतिशत; उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल में नकारात्मक वृद्धि। अप्रैल-सितंबर 2026 की संचयी वृद्धि 5.1 प्रतिशत बनाम 2.5 प्रतिशत (पिछले वर्ष)।
3. असमान वृद्धि की व्याख्या: (क) अवसंरचना और पूंजीगत व्यय से इस्पात, सीमेंट और बिजली की मांग; राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) और PM Gati Shakti राष्ट्रीय मास्टर प्लान की भूमिका; (ख) उर्वरक, गैस और कच्चे तेल में घरेलू उत्पादन की स्थिति और आयात-निर्भरता; उर्वरक पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) का प्रभाव; (ग) ऊर्जा सुरक्षा बनाम उत्पादन क्षमता का प्रश्न।
4. गुणवत्ता का मूल्यांकन: क्या वृद्धि व्यापक है या कुछ क्षेत्रों तक सीमित; उत्पादन मात्रा बनाम मूल्य वर्धन; मूल्य वर्धन का परिमाप सकल मूल्य वर्धन (GVA) में होता है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी होता है।
5. सीमाएँ: (क) ICI केवल उत्पादन मात्रा मापता है, सेवा क्षेत्र शामिल नहीं; (ख) IIP के साथ तुलना: ICI का कवरेज मुख्यतः आधारभूत उद्योगों तक सीमित है, जबकि IIP में विनिर्माण का बड़ा भार है; (ग) अनंतिम संशोधन का प्रभाव (अगस्त 2026 में 4.8 से 5.9 प्रतिशत का संशोधन); (घ) भार स्थिर होने के कारण बिजली जैसे क्षेत्र का प्रभाव सूचकांक पर अधिक दिखता है; (ङ) GDP पूर्वानुमान के लिए अन्य संकेतकों की आवश्यकता।
6. संतुलित निष्कर्ष: वृद्धि का लाभ और उसकी स्थिरता; नीतिगत सुझाव: घरेलू गैस और उर्वरक उत्पादन क्षमता में निवेश, ऊर्जा संक्रमण और अवसंरचना निवेश के साथ उत्पादन विविधीकरण; अंत में बहु-संकेतक दृष्टिकोण की आवश्यकता।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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