2026 के मानसून सत्र: लोकसभा में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर आम सहमति की अपील, 6 घंटे की बहस प्रस्तावित

2026 के मानसून सत्र: लोकसभा में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर आम सहमति की अपील, 6 घंटे की बहस प्रस्तावित

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय
  • Prelims: सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024, पेपर लीक, संसद का मानसून सत्र, लोकसभा अध्यक्ष, संसदीय प्रक्रियाएँ
  • Essay: भारत में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, युवा असंतोष और शासन की चुनौतियाँ: समाधान के मार्ग

त्वरित पुनरावृत्ति: सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2024 का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों को और सख्त करना है, ताकि भारत की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

संसद के मानसून सत्र 2026 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2024 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2024) पर चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वसम्मति का आह्वान किया है और छह घंटे की बहस का प्रस्ताव दिया है। यह विधेयक पेपर लीक की घटनाओं से निपटने के लिए अधिक कड़े कानून प्रस्तावित करता है। विपक्षी दल NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा कर रहे हैं, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई है।

पृष्ठभूमि

  • हाल ही में NEET-UG सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, जिससे देश भर में व्यापक छात्र विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
  • इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
  • सरकार ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव किया है, ताकि पेपर लीक को रोकने के लिए कानूनों को और सख्त किया जा सके।
  • प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करने हेतु एक उच्च-शक्ति कार्य बल (high-powered task force) के गठन की घोषणा की है।
  • विपक्षी दल पुलिस की कथित बर्बरता और NEET परीक्षा पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर संसद में हंगामा कर रहे हैं, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई है।
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है, और सोमवार को उनका पहला प्रश्नकाल (Question Hour) होगा।

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 क्या है?

  • यह अधिनियम फरवरी 2024 में संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
  • यह अधिनियम पेपर लीक, धोखाधड़ी और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए कड़े प्रावधान करता है, जिसमें दोषी व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए दंड का प्रावधान है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और विश्वसनीयता को बनाए रखना है।
  • यह अधिनियम उन सभी सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है जो केंद्र सरकार या उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाती हैं।
  • संशोधन विधेयक, 2024 मौजूदा अधिनियम में और अधिक कड़े प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव करता है ताकि पेपर लीक की घटनाओं से अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
  • विधेयक में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ाने और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
  • इसमें संगठित अपराधों में शामिल व्यक्तियों और समूहों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें कारावास और भारी जुर्माना शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन विधेयक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए कड़े प्रावधानों का प्रस्ताव करता है, जिससे परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनी रहे।
उच्च-स्तरीय कार्य बल का गठन नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में यह कार्य बल परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगा, जिससे छात्रों का विश्वास बहाल हो सके।
संसद में लंबी बहस विधेयक पर 8 से 10 घंटे की बहस प्रस्तावित है, जो इस मुद्दे की गंभीरता और सरकार की इसे व्यापक रूप से संबोधित करने की इच्छा को दर्शाता है।
विपक्ष द्वारा विरोध प्रदर्शन विपक्ष NEET परीक्षा में अनियमितताओं और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहा है, जो सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव डालता है।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और नए मंत्री की नियुक्ति यह घटनाक्रम परीक्षा प्रणाली में व्याप्त समस्याओं और सार्वजनिक दबाव के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह विधेयक और कार्य बल लाखों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और उनमें विश्वास बहाल करने का प्रयास करते हैं, जो निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं।
  • पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों में निराशा और हताशा फैलती है, जिसे संबोधित करना सामाजिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

शासन और जवाबदेही

  • कड़े कानून और उच्च-स्तरीय जांच से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव बनेगा।
  • विपक्ष द्वारा पुलिस कार्रवाई और NEET अनियमितताओं पर चर्चा की मांग सरकार को अपनी नीतियों और कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराने का प्रयास है।

राजनीतिक निहितार्थ

  • यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाया जा रहा है, जो आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
  • सरकार द्वारा त्वरित कार्रवाई और सुधारों का प्रस्ताव विपक्ष के दबाव को कम करने और सार्वजनिक धारणा को बेहतर बनाने का प्रयास है।

चुनौतियाँ

1. परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना

  • लगातार पेपर लीक और अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली में गहरे अविश्वास को जन्म दिया है।
  • केवल कानून बनाने से ही नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता से ही यह विश्वास बहाल हो पाएगा।

2. कानून का प्रभावी क्रियान्वयन

  • सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन विधेयक के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।
  • इसमें तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सुधारों की आवश्यकता होगी।

3. राज्य और केंद्र के बीच समन्वय

  • कई परीक्षाएं राज्य स्तर पर आयोजित होती हैं, इसलिए केंद्र सरकार के कानूनों और सुधारों को राज्यों में लागू करने के लिए प्रभावी समन्वय आवश्यक होगा।
  • संघवाद के सिद्धांतों का पालन करते हुए एकरूपता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

4. तकनीकी सुरक्षा और साइबर खतरे

  • आधुनिक पेपर लीक अक्सर तकनीकी माध्यमों से होते हैं, इसलिए परीक्षा प्रणाली को साइबर हमलों और तकनीकी कमजोरियों से बचाना एक निरंतर चुनौती है।
  • नवीनतम तकनीकों का उपयोग करके सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना होगा।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पेपर लीक की बढ़ती घटनाएँ लाखों छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव, योग्यता आधारित चयन प्रणाली का क्षरण, सामाजिक असमानता में वृद्धि।
NEET परीक्षा में अनियमितताएँ चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की निष्पक्षता पर सवाल, छात्रों में व्यापक असंतोष और विरोध प्रदर्शन।
छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन, पुलिस बल के अत्यधिक उपयोग पर सवाल।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी परिणामों की विश्वसनीयता पर संदेह, भ्रष्टाचार की संभावना, छात्रों का व्यवस्था से मोहभंग।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उच्च स्तर पर जवाबदेही का अभाव, राजनीतिक दबाव के कारण नीतिगत अस्थिरता।

आगे की राह

  • सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन विधेयक को शीघ्र पारित कर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले कार्य बल की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, जिसमें परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत करना शामिल हो।
  • परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए और उनके प्रदर्शन की नियमित समीक्षा की जाए।
  • छात्रों और अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी चिंताओं को सुना जाए और पारदर्शी तरीके से समाधान प्रस्तुत किए जाएं।
  • पुलिस बल के अत्यधिक उपयोग की घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
  • शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को समग्रता से देखा जाए, जिसमें पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और प्रवेश प्रक्रिया सभी शामिल हों।
  • राज्यों के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति विकसित की जाए ताकि सभी सार्वजनिक परीक्षाओं में एकरूपता और शुचिता सुनिश्चित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सार्वजनिक परीक्षा विधेयक · पेपर लीक · अनुचित साधन · परीक्षा प्रणाली सुधार · संसदीय सत्र · लोकतंत्र में विरोध · न्यायिक आयोग · संघवाद

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(b)’, ‘note’: ‘शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘गरिमापूर्ण जीवन और शिक्षा का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 32’, ‘note’: ‘संवैधानिक उपचारों का अधिकार’}

अवधारणा प्रवाह

पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताएँ  →  छात्रों में असंतोष और विरोध प्रदर्शन  →  पुलिस द्वारा कार्रवाई और राजनीतिक हंगामा  →  सरकार द्वारा विधेयक और कार्य बल का गठन  →  संसद में बहस और कानून बनाने का प्रयास  →  परीक्षा प्रणाली में सुधार और विश्वास बहाली

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अधिनियम सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए लाया गया है।
2. इस अधिनियम के तहत, पेपर लीक के मामलों में अधिकतम 10 साल की कैद और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
3. यह अधिनियम केवल केंद्र सरकार की परीक्षाओं पर लागू होता है, राज्य सरकार की परीक्षाओं पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। यह अधिनियम सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान करता है, जिसमें अधिकतम 10 साल की कैद और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह अधिनियम केंद्र और राज्य दोनों स्तरों की सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है।

Q2. हाल ही में गठित नंदन नीलेकणि समिति का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?

  1. डिजिटल भुगतान प्रणाली में सुधार
  2. सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार
  3. कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उपयोग
  4. विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा

उत्तर: सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार — प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को ‘लीकप्रूफ’ बनाने और उसमें सुधारों की सिफारिश करने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कार्यबल के गठन की घोषणा की है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए हालिया विधायी और प्रशासनिक उपायों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। क्या ये उपाय परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और छात्रों की चिंताओं को दूर करने में पर्याप्त हैं? चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 जैसे विधायी उपायों और नंदन नीलेकणि समिति जैसे प्रशासनिक उपायों का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, इन उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें, उनकी सीमाओं पर प्रकाश डालें और बताएं कि क्या वे छात्रों की चिंताओं को पूरी तरह से संबोधित करते हैं। इसमें न्यायिक जांच की मांग और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जा सकता है। अंत में, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कुछ अतिरिक्त सुझाव दें।

स्रोत: Mint


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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