15 Oct दिल्ली में 3 सप्ताह में 77 हजार घरों ने रूफटॉप सोलर योजना में किया पंजीकरण

✎ पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 3 किलोवाट तक के छत पर सौर संयंत्र पर केंद्रीय सहायता अधिकतम 78,000 रुपये है, और बिजली समवर्ती सूची का विषय होने से राज्य सरकारें अतिरिक्त सब्सिडी और नियमन की भूमिका निभाती हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण एवं आर्थिक विकास (नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा संक्रमण) | GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य संबंध, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, नियामक संस्थाएँ)
- Prelims: पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana), किलोवाट-पीक (kWp) और मेगावाट-पीक (MWp) का अंतर, नेट मीटरिंग (Net Metering), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT), नवीकरणीय क्रय दायित्व (Renewable Purchase Obligation, RPO), विद्युत अधिनियम, 2003 और दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC), राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance, ISA)
- Essay: ऊर्जा संक्रमण में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका और शहरी घरों की भागीदारी, सब्सिडी आधारित नीतियाँ: उपभोक्ता-व्यवहार, वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक लक्ष्यों के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 3 किलोवाट तक के छत पर सौर संयंत्र पर केंद्रीय सहायता अधिकतम 78,000 रुपये है, और बिजली समवर्ती सूची का विषय होने से राज्य सरकारें अतिरिक्त सब्सिडी और नियमन की भूमिका निभाती हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दिल्ली में छत पर सौर ऊर्जा योजना शुरू होने के लगभग तीन सप्ताह के भीतर 77,000 से अधिक घरों ने पंजीकरण कराया है। 21 सितंबर से अब तक पोर्टल पर 77,614 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो 31 मार्च अगले वर्ष तक 2.3 लाख सौर विद्युत इकाइयाँ स्थापित करने के सरकारी लक्ष्य का लगभग एक-तिहाई है। योजना से पहले बीएसईएस और टाटा पावर द्वारा केवल 29,718 सौर कनेक्शन स्थापित थे, जिनकी संयुक्त क्षमता 472 मेगावाट-पीक थी। क्षेत्रवार पंजीकरण में बीएसईएस यमुना (पूर्वी एवं मध्य दिल्ली) सबसे आगे रहा, जबकि टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन (उत्तर एवं उत्तर-पश्चिम दिल्ली) और बीएसईएस राजधानी (दक्षिण एवं पश्चिम दिल्ली) में भी बड़ी संख्या में आवेदन आए। अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों और अनधिकृत कॉलोनियों से मिली प्रतिक्रिया को बढ़ती रुचि का संकेत माना है। यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र की पीएम सूर्य घर योजना के साथ दिल्ली सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी मिलाकर कुल सहायता लगभग पूरी लागत के बराबर हो जाती है।
पृष्ठभूमि
- दिल्ली में बिजली वितरण का कार्य 2002 में निजी वितरण कंपनियों को सौंपा गया था। वर्तमान में उत्तर-पश्चिम और उत्तर दिल्ली में टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन, दक्षिण-पश्चिम में बीएसईएस राजधानी और पूर्वी-मध्य दिल्ली में बीएसईएस यमुना वितरण सेवा देती हैं। इसी कारण छत पर सौर संयंत्रों के आवेदन और नेट मीटरिंग की प्रक्रिया इन कंपनियों के माध्यम से संचालित होती है।
- दिल्ली में 200 यूनिट मासिक तक की मुफ्त बिजली और 201 से 400 यूनिट तक 50 प्रतिशत सब्सिडी की व्यवस्था है। अधिकारियों के अनुसार इससे उपभोक्ता के लिए सौर संयंत्र में निवेश का प्रोत्साहन कम हो जाता था, जो धीमी अपनाने का एक प्रमुख कारण रहा है।
- राष्ट्रीय सौर मिशन की शुरुआत 2010 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के रूप में हुई थी। इसके बाद फरवरी 2024 में पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई, जिसका उद्देश्य आवासीय उपभोक्ताओं को छत पर सौर संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय सहायता देना है।
- समूह आवास सोसाइटियों में सामान्य सुविधाओं के लिए सौर संयंत्र लगाने में निवासियों के बीच सहमति बनाना कठिन रहा है। इसी बाधा को देखते हुए सामान्य उपयोग वाले संयंत्रों की सब्सिडी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति किलोवाट (500 किलोवाट तक) कर दी गई है।
- दिल्ली में 2024-25 में लगभग 73 लाख बिजली उपभोक्ता थे, जिनमें से लगभग 61 लाख घरेलू उपभोक्ता थे। लगभग 48 लाख परिवारों को बिजली सब्सिडी का लाभ मिलता था, जो इस योजना के लिए संभावित लाभार्थियों का बड़ा आधार है।
छत पर सौर ऊर्जा क्या है?
- छत पर सौर ऊर्जा से आशय है कि भवन की छत पर सौर पैनल लगाकर सूर्य के प्रकाश से बिजली बनाई जाए और उसका उपयोग उसी भवन में किया जाए। यह ऊर्जा उत्पादन का विकेंद्रीकृत मॉडल है, जिसमें उपभोक्ता स्वयं उत्पादक भी बनता है (Prosumer)।
- क्षमता मापने के लिए किलोवाट-पीक (kWp) इकाई का प्रयोग होता है, जो पैनलों की अधिकतम उत्पादन क्षमता दर्शाती है। बड़ी परियोजनाओं के लिए मेगावाट-पीक (MWp) इकाई प्रयोग होती है।
- नेट मीटरिंग में उपभोक्ता के मीटर को दो दिशाओं में मापा जाता है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को जाती है और आवश्यकता पड़ने पर ग्रिड से ली जाती है। उपभोक्ता द्वारा ग्रिड को दी गई अतिरिक्त बिजली का समायोजन बिल में होता है, या नियमों के अनुसार वितरण कंपनी को बेचा जा सकता है।
- पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार 3 किलोवाट तक के आवासीय संयंत्रों पर पहले 2 किलोवाट के लिए 30,000 रुपये प्रति किलोवाट और तीसरे किलोवाट के लिए 18,000 रुपये की सहायता देती है, जिससे अधिकतम केंद्रीय सहायता 78,000 रुपये होती है। सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से दी जाती है।
- बिजली विषय संविधान की समवर्ती सूची में आता है, इसलिए वितरण, नियमन और राज्य-स्तरीय सब्सिडी में राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत राज्य विद्युत नियामक आयोग दरें और नियम तय करते हैं।
- नवीकरणीय क्रय दायित्व (RPO) वितरण कंपनियों और बड़े उपभोक्ताओं पर नवीकरणीय स्रोतों से एक निश्चित हिस्सा बिजली खरीदने की बाध्यता डालता है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के बाज़ार को सहारा देता है।
- भारत ने पेरिस समझौते के तहत गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के विस्तार का लक्ष्य रखा है और सौर ऊर्जा इसका प्रमुख स्तंभ है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भारत की पहल पर स्थापित अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।
- छत पर सौर संयंत्रों की सफलता के लिए प्रारंभिक लागत, तकनीकी मानकों की अनुपालना, छत की संरचना, और समूह आवास में सामूहिक निर्णय जैसी व्यावहारिक बाधाएँ भी दूर करनी होती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| योजना का स्वरूप | प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (Pradhan Mantri Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) के अंतर्गत केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों अनुदान देते हैं, जिससे घरेलू छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र की लागत काफी घट जाती है। |
| पंजीकरण की स्थिति | 21 सितंबर से अब तक पोर्टल पर 77,614 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो 2.3 लाख सौर इकाइयों के लक्ष्य का लगभग एक-तिहाई से अधिक है। लक्ष्य की समय-सीमा 31 मार्च (अगले वर्ष) है। |
| वितरण कंपनी-वार आवेदन | BYPL (पूर्वी और मध्य दिल्ली) में 27,197, TPDDL (उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली) में 26,788 और BRPL (दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली) में 23,925 आवेदन दर्ज हुए। यह विद्युत वितरण के क्षेत्रीय ढाँचे के माध्यम से कार्यान्वयन को दर्शाता है। |
| पहले की स्थापित क्षमता | योजना शुरू होने से पहले BSES और TPDDL द्वारा 29,718 सौर कनेक्शन लगाए गए थे, जिनकी कुल क्षमता 472 MWp थी। इससे आधार-स्तर और नई रुचि की तुलना संभव होती है। |
| अनुदान का ढाँचा | 3 kW तक के संयंत्रों पर केंद्र का अनुदान 78,000 रुपये तक है और दिल्ली सरकार का अतिरिक्त अनुदान भी 78,000 रुपये तक है, यानी कुल 1.56 लाख रुपये तक। समूह आवास सोसाइटी के सामान्य सुविधाओं वाले संयंत्रों के लिए राज्य अनुदान 11,000 रुपये प्रति kW (500 kW तक) है। |
| उपभोक्ता आधार | दिल्ली में 2024-25 में लगभग 73 लाख बिजली उपभोक्ता थे, जिनमें लगभग 61 लाख घरेलू उपभोक्ता थे। लगभग 48 लाख घरों को बिजली अनुदान मिलता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आती है और अतिरिक्त बिजली को वितरण कंपनियों को बेचने का अवसर मिलता है।
- अनुदान के बाद प्रारंभिक लागत घटने से निवेश की वापसी (payback) अवधि कम होती है, जिससे मध्यम आय वर्ग की भागीदारी बढ़ सकती है।
ऊर्जा और पर्यावरणीय महत्व
- छत पर सौर ऊर्जा से पारंपरिक ताप-विद्युत स्रोतों पर निर्भरता घटती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी में योगदान मिलता है।
- शहरी क्षेत्र में, जहाँ भूमि सीमित है, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (Distributed Renewable Energy) एक व्यावहारिक विकल्प है।
प्रशासनिक और संघीय महत्व
- केंद्र की योजना और राज्य की नीति का संयुक्त अनुदान मॉडल सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण है।
- ग्रामीण क्षेत्रों और अनधिकृत कॉलोनियों से बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि नीति का दायरा शहरी केंद्र से आगे बढ़ रहा है।
चुनौतियाँ
1. बिजली अनुदान से उत्पन्न प्रोत्साहन-विरोधाभास
- 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने से उपभोक्ता के पास सौर संयंत्र लगाने का आर्थिक प्रोत्साहन कम हो जाता है, क्योंकि उसका बिल लगभग शून्य रहता है।
- मौजूदा अनुदान ढाँचे और नए सौर अनुदान के बीच तालमेल बिठाना नीति-निर्माण की चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: ऊर्जा सुरक्षा, सब्सिडी की प्रभावशीलता और नवीकरणीय ऊर्जा
2. ऊँची प्रारंभिक लागत और वित्तीय पहुँच
- सौर संयंत्र की प्रारंभिक लागत अधिक होने से निम्न आय वर्ग के लिए इसे अपनाना कठिन रहता है।
- अनुदान के बाद भी ऋण की सुलभता और ग्रामीण तथा अनधिकृत कॉलोनियों तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच सीमित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: समावेशी विकास और वित्तीय समावेशन
3. समूह आवास सोसाइटी में सहमति की समस्या
- बहुमंजिला आवास सोसाइटी में छत साझा होती है, इसलिए संयंत्र लगाने के लिए निवासियों के बीच सहमति आवश्यक है।
- सामान्य सुविधाओं के लिए संयंत्र लगाने में निवासी संघ (Resident Welfare Association) की भूमिका और निर्णय-प्रक्रिया बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: स्थानीय शासन और शहरी प्रशासन
4. विद्युत क्षेत्र का संस्थागत ढाँचा
- बिजली संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिससे केंद्र, राज्य और विनियामक संस्थाओं के बीच समन्वय आवश्यक होता है।
- वितरण कंपनियों को अतिरिक्त बिजली खरीदने और नेट मीटरिंग से जुड़े नियमों का पालन करना होता है, जिससे प्रशासनिक जटिलता बढ़ती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघीय ढाँचा और विद्युत क्षेत्र के नियामक
5. राजकोषीय दायित्व और अनुदान की स्थिरता
- बड़े पैमाने पर अनुदान से राज्य के वित्तीय दायित्व बढ़ते हैं, इसलिए लक्ष्य के अनुरूप बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- अनुदान पर निर्भरता के कारण योजना की दीर्घकालिक स्थिरता तभी संभव है जब लागत में और कमी लाई जाए।
यूपीएससी लिंक: GS-3: राजकोषीय नीति और सार्वजनिक व्यय प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| बिजली अनुदान | मुफ्त बिजली की सीमा (200 यूनिट) सौर अपनाने का प्रोत्साहन घटाती है। |
| प्रारंभिक लागत | अधिक लागत निम्न और मध्यम आय वर्ग को बाहर रख सकती है। |
| समूह आवास | साझा छत पर सर्वसम्मति न बन पाने से परियोजना रुक सकती है। |
| वितरण व्यवस्था | अतिरिक्त बिजली की खरीद और नेट मीटरिंग नियमों का पालन जटिल है। |
| राजकोषीय भार | केंद्र और राज्य दोनों के अनुदान से सार्वजनिक व्यय बढ़ता है। |
| लक्ष्य की समय-सीमा | 2.3 लाख इकाइयों का लक्ष्य 31 मार्च तक पूरा करने के लिए तेज़ क्रियान्वयन आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (Pradhan Mantri Surya Ghar: Muft Bijli Yojana)
- दिल्ली सौर नीति (Delhi Solar Policy)
आगे की राह
- प्रारंभिक लागत घटाने के लिए सौर संयंत्रों के मानकीकृत मूल्य और तेज़ स्वीकृति प्रक्रिया (Single Window) अपनाई जाए।
- समूह आवास सोसाइटी के लिए सामान्य सुविधा संयंत्रों पर सर्वसम्मति की प्रक्रिया सरल की जाए और आवास कल्याण संघों को तकनीकी सहायता दी जाए।
- नेट मीटरिंग और अतिरिक्त बिजली की खरीद के नियम स्पष्ट और पारदर्शी बनाए जाएँ, ताकि उपभोक्ता का विश्वास बना रहे।
- मुफ्त बिजली की सीमा और सौर प्रोत्साहन के बीच संतुलन के लिए विद्युत अनुदान ढाँचे की समीक्षा की जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों और अनधिकृत कॉलोनियों तक जागरूकता और वित्तीय सुविधा पहुँचाने के लिए स्थानीय स्तर पर अभियान चलाए जाएँ।
- केंद्र, राज्य और वितरण कंपनियों के बीच नियमित समन्वय के लिए संस्थागत तंत्र मज़बूत किया जाए।
- अनुदान के प्रभाव का मूल्यांकन स्थापित क्षमता, उत्सर्जन में कमी और उपभोक्ता बचत के संकेतकों पर किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रूफटॉप सौर योजना · नवीकरणीय ऊर्जा · ऊर्जा संक्रमण · जलवायु परिवर्तन · सब्सिडी · ऊर्जा सुरक्षा · वितरण कंपनियाँ · कार्बन उत्सर्जन · सतत विकास · प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 239AA: दिल्ली की विधानमंडल और सरकार की संवैधानिक व्यवस्था
- अनुच्छेद 246: संघ और राज्य सूची के साथ समवर्ती सूची (विद्युत) का विधायी आधार
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और सुधार का राज्य का दायित्व
अवधारणा प्रवाह
सौर संयंत्र की ऊँची प्रारंभिक लागत और मुफ्त बिजली की सीमा से उपभोक्ता का प्रोत्साहन कम होना → केंद्र की PM सूर्य घर योजना और दिल्ली सौर नीति के अंतर्गत कुल 1.56 लाख रुपये तक अनुदान → पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से 21 सितंबर से 77,614 आवेदन प्राप्त होना → वितरण कंपनियों (BYPL, TPDDL, BRPL) द्वारा स्थापना और नेट मीटरिंग की प्रक्रिया का संचालन → छत पर सौर ऊर्जा की वृद्धि से बिजली मांग का आंशिक पूरण और कार्बन उत्सर्जन में कमी की संभावना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ का लक्ष्य आवासीय उपभोक्ताओं को रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रणालियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
3. भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सौर ऊर्जा का योगदान सबसे अधिक है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात में आत्मनिर्भर बनाना है। कथन 2 सही है। ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ का प्राथमिक लक्ष्य आवासीय क्षेत्र में रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। कथन 3 सही नहीं है। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सौर ऊर्जा का योगदान महत्वपूर्ण है, लेकिन जलविद्युत और पवन ऊर्जा का भी बड़ा हिस्सा है।
Q2. रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- ये कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होती हैं।
- इनके लिए प्रारंभिक स्थापना लागत अपेक्षाकृत कम होती है।
- अतिरिक्त बिजली को वितरण कंपनियों को बेचा जा सकता है।
- ये ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करती हैं।
उत्तर: इनके लिए प्रारंभिक स्थापना लागत अपेक्षाकृत कम होती है। — रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रणालियों की प्रारंभिक स्थापना लागत अक्सर अधिक होती है, जो उपभोक्ताओं के लिए एक बाधा हो सकती है। हालांकि, सरकारी सब्सिडी और योजनाओं से इस लागत को कम करने में मदद मिलती है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शमन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में रूफटॉप सौर ऊर्जा की क्षमता का विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, सरकार द्वारा अपनाई गई प्रमुख नीतियों और चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: रूफटॉप सौर ऊर्जा की परिभाषा और भारत के ऊर्जा परिदृश्य में इसका महत्व।
2. ऊर्जा सुरक्षा में क्षमता:
– जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी।
– विकेन्द्रीकृत ऊर्जा उत्पादन।
– ग्रिड स्थिरता में योगदान।
– आयात बिल में कमी।
3. जलवायु परिवर्तन शमन में क्षमता:
– कार्बन उत्सर्जन में कमी।
– स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन।
– पेरिस समझौते के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक।
4. सरकार की प्रमुख नीतियाँ और योजनाएँ:
– ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ (Pradhan Mantri Surya Ghar: Muft Bijli Yojana)।
– राज्य-स्तरीय सौर नीतियाँ (जैसे दिल्ली सौर नीति)।
– सब्सिडी और प्रोत्साहन।
– नेट मीटरिंग (Net Metering) नीतियाँ।
5. चुनौतियाँ:
– उच्च प्रारंभिक स्थापना लागत।
– उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता और प्रोत्साहन की कमी।
– वितरण कंपनियों (Discoms) के साथ समन्वय।
– तकनीकी और नियामक बाधाएँ।
– समूह आवास समितियों में सहमति की समस्या।
6. निष्कर्ष: रूफटॉप सौर ऊर्जा की क्षमता का दोहन करने के लिए नीतिगत समर्थन, वित्तीय प्रोत्साहन और जन जागरूकता के महत्व पर बल।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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