37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना: उद्योग जगत की बड़ी भागीदारी

37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना: उद्योग जगत की बड़ी भागीदारी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, अवसंरचना  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (स्वच्छ ऊर्जा पहल)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (गैसीकरण तकनीक)
  • Prelims: सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना, कोयला गैसीकरण, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथनॉल, प्रत्यक्ष अपचयित लौह (DRI), ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: चुनौतियाँ और अवसर, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के उत्पादन के लिए घरेलू कोयले के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

कोयला मंत्रालय ने हाल ही में 37,500 करोड़ रुपये की सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक आवेदन-पूर्व सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और संभावित आवेदकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के प्रति उद्योग जगत की व्यापक रुचि को दर्शाता है। यह योजना घरेलू कोयले के स्वच्छ, दक्ष और मूल्य संवर्धित उपयोग को बढ़ावा देने तथा भारत की ऊर्जा एवं रासायनिक उत्पादों के आयात पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व में कोयले के सबसे बड़े उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है, और यह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा करता है।
  • पारंपरिक रूप से कोयले का उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता रहा है, लेकिन गैसीकरण जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियाँ इसके अधिक स्वच्छ और मूल्य संवर्धित उपयोग के अवसर प्रदान करती हैं।
  • कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को ऑक्सीजन, भाप और/या हवा के साथ उच्च तापमान और दबाव पर प्रतिक्रिया कराकर सिंथेटिक गैस (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है। इस सिंथेटिक गैस का उपयोग विभिन्न रसायनों, ईंधन और बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
  • भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आयात निर्भरता को कम करने के लिए कई पहल की हैं, जिनमें स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना शामिल है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को 37,500 करोड़ रुपये की इस योजना को अनुमोदित किया था, जिसका उद्देश्य सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के विकास को गति देना है।
  • यह योजना आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य देश को ऊर्जा और रासायनिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाना है।

सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना क्या है?

  • यह 37,500 करोड़ रुपये की एक केंद्रीय योजना है जिसे कोयला मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जा रहा है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहन देना है।
  • योजना का लक्ष्य सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथनॉल, प्रत्यक्ष अपचयित लौह (Direct Reduced Iron – DRI), सिंथेटिक ईंधन और रसायनों जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन करना है।
  • यह योजना घरेलू कोयले के स्वच्छ, दक्ष और मूल्य संवर्धित उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
  • इससे लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहन मिलने और प्रतिवर्ष लगभग 7.5 करोड़ टन कोयले के उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • योजना के माध्यम से लगभग 50,000 रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
  • यह भारत की ऊर्जा और रासायनिक उत्पादों के आयात पर निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
  • पात्र संस्थाओं को आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
योजना का परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये का विशाल निवेश, जो सरकार की इस क्षेत्र में प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
लक्ष्य सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं का विकास, उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन।
उत्पाद सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथनॉल, प्रत्यक्ष अपचयित लौह (DRI), सिंथेटिक ईंधन और रसायन।
अनुमानित निवेश 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश आकर्षित होने की संभावना।
रोजगार सृजन लगभग 50,000 नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होने का अनुमान।
कोयले का उपयोग प्रतिवर्ष लगभग 7.5 करोड़ टन कोयले के स्वच्छ और मूल्य संवर्धित उपयोग को बढ़ावा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहित करेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
  • उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया और मेथनॉल के उत्पादन से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
  • लगभग 50,000 रोजगार के अवसर सृजित होने से आय में वृद्धि होगी और गरीबी उन्मूलन में सहायता मिलेगी।

ऊर्जा सुरक्षा

  • सिंथेटिक ईंधन और रसायनों के घरेलू उत्पादन से ऊर्जा एवं रासायनिक उत्पादों के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी।
  • कोयले के गैसीकरण से पारंपरिक दहन की तुलना में स्वच्छ ऊर्जा विकल्प उपलब्ध होंगे, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं।

पर्यावरण और स्थिरता

  • सतही कोयला गैसीकरण स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में कमी आ सकती है, यदि कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) तकनीकों को एकीकृत किया जाए।
  • यह घरेलू कोयले के मूल्य संवर्धित उपयोग को बढ़ावा देता है, जिससे संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग होता है।

औद्योगिक विकास

  • यह योजना पेट्रोकेमिकल, उर्वरक और इस्पात जैसे उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण फीडस्टॉक (Feedstock) उपलब्ध कराएगी, जिससे इन क्षेत्रों का विकास होगा।
  • प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निजी कंपनियों की भागीदारी से नवाचार (Innovation) और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. उच्च पूंजी लागत

  • गैसीकरण परियोजनाओं की स्थापना के लिए प्रारंभिक पूंजी निवेश बहुत अधिक होता है, जो निवेशकों के लिए एक बाधा हो सकती है।
  • परियोजनाओं की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन और जोखिम-साझाकरण तंत्र की आवश्यकता है।

2. तकनीकी जटिलताएँ

  • कोयला गैसीकरण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें उन्नत प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीय क्षमता निर्माण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

3. पर्यावरणीय चिंताएँ

  • यद्यपि गैसीकरण पारंपरिक दहन से स्वच्छ है, फिर भी इसमें जल प्रदूषण और गैसीय उत्सर्जन का जोखिम होता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) और शमन उपायों का सख्त अनुपालन आवश्यक है।

4. बाजार की अस्थिरता

  • सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, मेथनॉल आदि के लिए बाजार की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों से प्रभावित होती हैं।
  • उत्पाद की कीमतों में अस्थिरता परियोजनाओं की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वित्तीय व्यवहार्यता उच्च पूंजीगत व्यय और लंबी गर्भधारण अवधि के कारण परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करना।
प्रौद्योगिकी उपलब्धता उन्नत गैसीकरण प्रौद्योगिकियों की उपलब्धता और उनका सफल कार्यान्वयन।
जल प्रबंधन गैसीकरण प्रक्रियाओं में आवश्यक बड़ी मात्रा में पानी की उपलब्धता और अपशिष्ट जल का उपचार।
कार्बन उत्सर्जन कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) तकनीकों के बिना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का प्रबंधन।
भूमि अधिग्रहण बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दे।
कुशल कार्यबल जटिल गैसीकरण संयंत्रों के संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)

आगे की राह

  • परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए आकर्षक और स्थिर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना और गैसीकरण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और कार्बन कैप्चर तथा स्टोरेज (CCS) जैसी तकनीकों को एकीकृत करना।
  • कुशल कार्यबल विकसित करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण पहलों में निवेश करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल को मजबूत करना ताकि जोखिमों को साझा किया जा सके और निवेश को आकर्षित किया जा सके।
  • उत्पाद विविधीकरण (Product Diversification) पर ध्यान केंद्रित करना ताकि बाजार की अस्थिरता के प्रभावों को कम किया जा सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कोयला गैसीकरण · लिग्नाइट गैसीकरण · स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी · ऊर्जा सुरक्षा · आयात निर्भरता में कमी · मूल्य संवर्धित उत्पाद · रोजगार सृजन · आर्थिक संवृद्धि

अवधारणा प्रवाह

कोयला गैसीकरण योजना की घोषणा  →  उद्योग जगत की रुचि और आवेदन-पूर्व सम्मेलन  →  उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन  →  आयात निर्भरता में कमी  →  ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य कोयले का उपयोग करके सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और अमोनिया जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन करना है।
2. यह योजना कोयला मंत्रालय द्वारा अनुमोदित की गई है और इसका कुल परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये है।
3. इस योजना से भारत की ऊर्जा एवं रासायनिक उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का उद्देश्य सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथनॉल आदि जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित की गई है, न कि केवल कोयला मंत्रालय द्वारा। कथन 3 सही है क्योंकि योजना से ऊर्जा और रासायनिक उत्पादों के आयात पर भारत की निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

Q2. कोयला गैसीकरण प्रक्रिया के संभावित लाभों में शामिल हैं:
1. कार्बन उत्सर्जन में कमी।
2. ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि।
3. विभिन्न रासायनिक फीडस्टॉक का उत्पादन।
4. रोजगार के अवसरों का सृजन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — कोयला गैसीकरण एक स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी है जो पारंपरिक दहन की तुलना में कम उत्सर्जन करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है (कथन 1 सही)। यह घरेलू कोयले का उपयोग करके ऊर्जा और रासायनिक उत्पादों का उत्पादन करके ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाती है (कथन 2 सही)। यह सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथनॉल जैसे विभिन्न रासायनिक फीडस्टॉक का उत्पादन करती है (कथन 3 सही)। साथ ही, ऐसी परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की भी उम्मीद है (कथन 4 सही)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आयात निर्भरता कम करने में कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, हाल ही में अनुमोदित सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना के प्रमुख उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों पर प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों के महत्व पर चर्चा करें, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता में कमी, पर्यावरणीय लाभ और आर्थिक संवृद्धि जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। दूसरे भाग में, सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना के मुख्य उद्देश्यों (जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन) और इसके अपेक्षित परिणामों (जैसे निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और आयात में कमी) का विस्तार से वर्णन करें। अंत में, इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर संक्षिप्त टिप्पणी करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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