05 Nov कोयला मंत्रालय का ‘विशेष अभियान 6’: कार्यस्थल सफाई व कबाड़ निस्तारण में रिकॉर्ड उपलब्धि
✎ कचरे से कंचन का मूल सूत्र है: अपशिष्ट को पुन: उपयोग, रीसाइक्लिंग और राजस्व-सृजन में बदलकर संसाधन-दक्ष और उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करना।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था (सार्वजनिक सेवा प्रदायगी, शिकायत निवारण तंत्र, प्रशासनिक सुधार, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों का शासन) | GS Paper III — पर्यावरण और अर्थव्यवस्था (अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन दक्षता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय सुरक्षा, कबाड़ निस्तारण से राजस्व)
- Prelims: कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनियाँ (ECL, NCL, SECL, NLC India), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) की अवधारणा, CPGRAMS (केंद्रीय लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली), लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) और राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India), पेस्ट-फिल माइनिंग (Paste-fill Mining) और फ्लाई ऐश (Fly Ash) का उपयोग, स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) और इसके प्रशासनिक आयाम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016)
- Essay: कचरे को संसाधन में बदलना: सरकारी कार्यालयों और उद्यमों में चक्रीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएँ, स्वच्छता और सुशासन का संबंध: कार्यस्थल की सफाई से प्रशासनिक दक्षता तक
त्वरित पुनरावृत्ति: कचरे से कंचन का मूल सूत्र है: अपशिष्ट को पुन: उपयोग, रीसाइक्लिंग और राजस्व-सृजन में बदलकर संसाधन-दक्ष और उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करना।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोयला मंत्रालय और उसके केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों ने ‘विशेष अभियान 6’ के दौरान सफाई, कबाड़ निस्तारण, जन शिकायत निपटान और फाइल प्रबंधन के लक्ष्यों को पार किया है। मंत्रालय के अनुसार 1,565 के लक्ष्य के मुकाबले 2,035 स्थलों की सफाई हुई (130 प्रतिशत), 10,909 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 17,686 मीट्रिक टन कबाड़ का निस्तारण हुआ (162 प्रतिशत), जिससे 61.41 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। 253 सार्वजनिक शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त 52 मामलों का शतप्रतिशत निपटान किया गया। इसके साथ ही ‘कचरे से कंचन’ की अवधारणा के तहत कई उद्यमों ने कबाड़ से कार्यात्मक और सांस्कृतिक संरचनाएँ बनाईं। यह समाचार प्रशासनिक सुधार, शिकायत निवारण और संसाधन दक्षता, तीनों के मेल का एक व्यावहारिक उदाहरण है।
पृष्ठभूमि
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) वर्ष 2014 में आरंभ हुआ। इसका उद्देश्य खुले में शौच से मुक्ति और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से स्वच्छता को जन-आंदोलन का रूप देना था। सरकारी कार्यालयों और उपक्रमों में कार्यस्थल-स्वच्छता इसी व्यापक सोच का प्रशासनिक विस्तार है।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) सरकार की पूर्ण या बहुसंख्यक स्वामित्व वाली कंपनियाँ हैं। इनकी कार्यप्रणाली में सार्वजनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और संसाधनों के उचित उपयोग का महत्व है, इसलिए कबाड़ और अप्रयुक्त संपत्ति का निस्तारण भी शासन का विषय बनता है।
- अभिलेख प्रबंधन के लिए लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) लागू है, जो केंद्र सरकार के अभिलेखों के रखरखाव और निपटान से संबंधित प्रावधान करता है। भौतिक और ई-फाइलों की छंटनी इसी प्रशासनिक ढाँचे के भीतर होती है।
- खनन क्षेत्र में खाली पड़ी भूमिगत खदानों को भरना भू-धंसाव रोकने का एक उपाय है। फ्लाई ऐश के उपयोग के लिए भारत में ताप विद्युत संयंत्रों से संबंधित नियम बने हैं, जो औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं।
- जन शिकायत निवारण के लिए CPGRAMS जैसी ऑनलाइन प्रणाली का उपयोग होता है, जिससे शिकायतों की ट्रैकिंग और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है। इस समाचार में शिकायत निपटान की शतप्रतिशत दर इसी तंत्र की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
विशेष अभियान और ‘कचरे से कंचन’ क्या है?
- विशेष अभियान (Special Campaign) सरकारी कार्यालयों और उपक्रमों में निर्धारित अवधि के भीतर सफाई, लंबित मामलों के निपटान और अभिलेख प्रबंधन पर केंद्रित लक्षित प्रशासनिक पहल होती है। इसमें मात्रात्मक लक्ष्य तय किए जाते हैं और उनकी प्रगति की निगरानी होती है।
- ‘कचरे से कंचन’ अवधारणा का आशय है कि उद्योगों और कार्यालयों से निकले बेकार सामान, कबाड़ और औद्योगिक अपशिष्ट को पुन: उपयोग, रीसाइक्लिंग या रचनात्मक रूपांतरण के माध्यम से मूल्यवान बनाया जाए।
- कबाड़ निस्तारण का एक पक्ष राजस्व-सृजन है। अप्रयुक्त लोहा, मशीनरी और अन्य सामग्री की नीलामी या बिक्री से सार्वजनिक उपक्रमों को आय होती है, जैसा इस अभियान में 61.41 करोड़ रुपये के राजस्व में दिखा।
- पेस्ट-फिल माइनिंग में खदान के खाली स्थानों को फ्लाई ऐश और औद्योगिक अपशिष्ट के गाढ़े मिश्रण से भरा जाता है। इससे भू-धंसाव का जोखिम घटता है और अपशिष्ट का सुरक्षित उपयोग होता है।
- फ्लाई ऐश कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों का उप-उत्पाद है। इसके उपयोग को ईंट, सीमेंट और सड़क निर्माण के साथ-साथ खनन भराव में भी बढ़ावा दिया जाता है, जिससे पर्यावरणीय दबाव कम होता है।
- फाइलों की समीक्षा और छंटनी से प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है और अभिलेखों के प्रबंधन में पारदर्शिता आती है। समयबद्ध निपटान नागरिक-केंद्रित शासन का भी आधार है।
- सार्वजनिक शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय से आए मामलों का शतप्रतिशत निपटान उत्तरदायी शासन का संकेत है। यह प्रशासनिक जवाबदेही और सेवा-प्रदायगी के मानकों को मजबूत करता है।
- कार्यस्थल का सौंदर्यीकरण, शिशु देखभाल केंद्र और स्मारक-निर्माण जैसी पहलें कर्मचारी कल्याण और संस्थागत पहचान से जुड़ती हैं, जिनसे कार्य-संस्कृति में सकारात्मक बदलाव आता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| विशेष अभियान 6 (Special Campaign 6) का स्वरूप | सफाई, कबाड़ निस्तारण, फाइल संचालन और जन शिकायत निवारण को एक साथ लक्ष्य बनाकर चलाया गया बहु-आयामी प्रशासनिक अभियान। इससे कार्यालयी दक्षता और कार्यस्थल सुधार एक ही ढाँचे में आगे बढ़े। |
| लक्ष्य-आधारित उपलब्धि | कार्यस्थल सफाई में 130 प्रतिशत, क्षेत्रफल की सफाई में 146 प्रतिशत और कबाड़ निस्तारण में 162 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त हुआ। मात्रात्मक लक्ष्यों की प्रगति का यह प्रत्यक्ष संकेतक है। |
| कबाड़ निस्तारण से राजस्व | 17,686 मीट्रिक टन कबाड़ के निस्तारण से 61.41 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अनुपयोगी सामग्री को संसाधन के रूप में बदलने का आर्थिक पक्ष सामने आया। |
| कचरे से कंचन पहल | कबाड़, फ्लाई ऐश (Fly Ash) और बेकार वस्तुओं के रचनात्मक पुन: उपयोग से इको पार्क, क्रेच, प्रवेश-द्वार और कलाकृतियाँ बनीं। संसाधन दक्षता और चक्रीय उपयोग की सोच को व्यवहार में उतारा गया। |
| फाइल संचालन में सुधार | 1,79,793 भौतिक और ई-फाइलों की समीक्षा तथा 1,70,336 फाइलों को छाँटकर बंद करने से अभिलेख प्रबंधन सुव्यवस्थित हुआ। प्रशासनिक लंबित कार्य घटाने का व्यावहारिक उदाहरण मिला। |
| जन शिकायत और पीएमओ मामलों का निपटान | 253 जन शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त 52 मामलों का शतप्रतिशत निपटान हुआ। शिकायत निवारण की जवाबदेही और समयबद्धता का यह मापदंड है। |
महत्व
प्रशासनिक सुधार
- कार्यालयी अभिलेखों और फाइलों की छँटाई से प्रशासनिक पारदर्शिता और खोजने-योग्य अभिलेख व्यवस्था मजबूत होती है।
- लंबित फाइलों का निपटान सेवा वितरण की गति बढ़ाता है और निर्णय-प्रक्रिया को सरल बनाता है।
- जन शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त मामलों का शतप्रतिशत निपटान सार्वजनिक जवाबदेही के सिद्धांत को व्यवहार में दिखाता है।
आर्थिक
- कबाड़ निस्तारण से 61.41 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित होना अनुपयोगी सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मूल्य-संवर्धन का उदाहरण है।
- खनन क्षेत्र में उड़न राख और औद्योगिक अपशिष्ट का उपयोग खदानों के खाली स्थानों को भरने में हो सकता है, जिससे संसाधन की बचत और लागत में कमी संभव है।
पर्यावरणीय और संवहनीय विकास
- कबाड़ के पुन: उपयोग, रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट न्यूनीकरण से संवहनीय विकास के लक्ष्य को व्यावहारिक आधार मिलता है।
- खनन क्षेत्र में पेस्ट-फिल (Paste-fill) पद्धति से भूमि धंसने की घटनाओं को रोकने की संभावना, खनन पर्यावरण और सुरक्षा दोनों के लिए प्रासंगिक है।
श्रम कल्याण और कार्यस्थल सुधार
- खाली कमरे को क्रेच में बदलना कर्मचारियों, विशेषकर महिला श्रमिकों की सुविधा और कार्य-जीवन संतुलन से जुड़ा सामाजिक सुधार है।
- कबाड़ से बने इको पार्क और स्वागत बोर्ड जैसे उपाय कार्यस्थल के वातावरण और कर्मचारियों के मनोबल में सुधार लाते हैं।
चुनौतियाँ
1. लक्ष्य-आधारित अभियानों की निरंतरता
- विशेष अभियान अवधि में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि दिखती है, परंतु अभियान समाप्त होने के बाद सफाई और अभिलेख प्रबंधन की आदत बनाए रखना कठिन होता है।
- संख्यात्मक लक्ष्यों (स्थल, मीट्रिक टन, फाइल) पर ज़ोर से गुणात्मक सुधार की तुलना में औपचारिक उपलब्धि को प्राथमिकता मिलने का जोखिम रहता है।
यूपीएससी लिंक: लोक प्रशासन में प्रशासनिक सुधार और उत्तरदायित्व; शासन में परिणाम-आधारित मूल्यांकन
2. खनन क्षेत्र में उड़न राख और औद्योगिक अपशिष्ट का सुरक्षित उपयोग
- पेस्ट-फिल जैसी पद्धति में उड़न राख और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के लिए उसकी रासायनिक संरचना, भंडारण और रिसाव (Leaching) की जाँच आवश्यक है।
- भूमिगत खदानों में भराई-सामग्री की गुणवत्ता और कार्य-सुरक्षा के मानक खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) की निगरानी के दायरे में आते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; खनन क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव; औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन
3. सार्वजनिक परिसंपत्तियों और कबाड़ के निस्तारण की पारदर्शिता
- कबाड़ और अनुपयोगी सामग्री की नीलामी या निस्तारण में मूल्य-निर्धारण, पारदर्शी प्रक्रिया और लेखा-व्यवस्था का पालन अनिवार्य है ताकि राजस्व का लाभ सार्वजनिक हित में दिखे।
- निस्तारण के दौरान कबाड़ में निहित मूल्य का सही आकलन न होने पर राजस्व-हानि की आशंका रहती है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त प्रबंधन; सरकारी लेखा-परीक्षा और उत्तरदायित्व
4. अभिलेख प्रबंधन और डिजिटल-भौतिक समन्वय
- भौतिक और ई-फाइलों का एक साथ छँटाई-कार्य तभी प्रभावी होता है जब अभिलेखों की प्रतिधारण-अवधि और विनष्टीकरण के नियम स्पष्ट हों।
- बड़ी संख्या में फाइलें बंद करते समय महत्वपूर्ण अभिलेख गलती से नष्ट होने का जोखिम रहता है, इसलिए सूची और सत्यापन की व्यवस्था आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन और डिजिटल प्रशासन; सूचना का अधिकार और अभिलेख प्रबंधन
5. जन शिकायत निवारण की गुणवत्ता
- शिकायतों का शतप्रतिशत निपटान तभी सार्थक है जब शिकायतकर्ता की संतुष्टि और समाधान की गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो।
- निपटान की समय-सीमा और अपील की व्यवस्था न होने पर औपचारिक बंद होने और वास्तविक समाधान में अंतर रह सकता है।
यूपीएससी लिंक: लोक शिकायत निवारण तंत्र; प्रशासनिक जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| अभियान-आधारित सफाई की स्थिरता | अभियान समाप्त होते ही सफाई और अभिलेख-व्यवस्था में शिथिलता आने की आशंका। |
| उड़न राख के उपयोग से भूजल प्रदूषण | भराई-सामग्री से भारी धातुओं के रिसाव की संभावना, जिसके लिए नियमित परीक्षण आवश्यक है। |
| खनन में भूमि धंसने का जोखिम | भराई की गुणवत्ता कमजोर होने पर संरचनात्मक अस्थिरता और कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा। |
| कबाड़ निस्तारण में मूल्य-निर्धारण | कम मूल्यांकन या अपारदर्शी प्रक्रिया से सार्वजनिक राजस्व की हानि की आशंका। |
| फाइल छँटाई में अभिलेख-सुरक्षा | महत्वपूर्ण दस्तावेजों के अनजाने में नष्ट होने का जोखिम, विशेषकर बड़े पैमाने पर बंदी के दौरान। |
| लक्ष्य बनाम गुणवत्ता | संख्यात्मक उपलब्धि (स्थल, टन, फाइल) से वास्तविक सुधार के प्रभाव का आकलन अधूरा रहना। |
आगे की राह
- विशेष अभियान की उपलब्धियों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि सफाई और फाइल प्रबंधन सतत गतिविधि बने।
- कबाड़ निस्तारण के लिए पारदर्शी ई-नीलामी और स्वतंत्र मूल्यांकन की व्यवस्था अपनाई जाए, जिससे राजस्व अधिकतम हो।
- फ्लाई ऐश और औद्योगिक अपशिष्ट से भराई-सामग्री की गुणवत्ता, रासायनिक परीक्षण और भूजल निगरानी के मानक निर्धारित किए जाएँ।
- खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पेस्ट-फिल पद्धति के व्यापक उपयोग से पहले पायलट परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाए।
- फाइल छँटाई के लिए अभिलेख प्रतिधारण-नीति, सूची-सत्यापन और डिजिटल प्रतिलिपि की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए।
- जन शिकायतों के निपटान में समाधान की गुणवत्ता जाँचने हेतु शिकायतकर्ता की प्रतिक्रिया और पुनरीक्षण तंत्र जोड़ा जाए।
- कर्मचारी-भागीदारी से ‘कचरे से कंचन’ जैसी पहलों को संस्थागत नवाचार का रूप दिया जाए, जिसमें पुरस्कार और मान्यता की व्यवस्था हो।
- सीपीएसई (CPSE) स्तर पर अभियान-परिणामों का तुलनात्मक आँकड़ा सार्वजनिक किया जाए, ताकि उत्तरदायित्व और सीख दोनों का आधार बने।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कचरे से कंचन · कबाड़ निस्तारण · संसाधन दक्षता · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · पेस्ट-फिल खनन (Paste-fill Mining) · फ्लाई ऐश उपयोग · खनन-पश्चात भू-पुनर्स्थापन · भूमि धंसाव की रोकथाम · केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम · संवहनीय खनन · प्रशासनिक सुधार और फाइल प्रबंधन · CPGRAMS और जन शिकायत निवारण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और सुधार का राज्य दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का नागरिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
प्रशासनिक और कार्यस्थल सुधार के लिए ‘विशेष अभियान 6’ का संचालन, जिसमें सफाई, कबाड़ निस्तारण, फाइल छँटाई और शिकायत निवारण के लक्ष्य तय हुए। → लक्ष्य से अधिक उपलब्धि: 2,035 स्थलों की सफाई, 14.84 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई और 17,686 मीट्रिक टन कबाड़ का निस्तारण। → कबाड़ निस्तारण से 61.41 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होना, जो अनुपयोगी सामग्री के मूल्य-संवर्धन का परिणाम है। → ‘कचरे से कंचन’ पहल के अंतर्गत कबाड़, उड़न राख और बेकार वस्तुओं का पुन: उपयोग, जिससे इको पार्क, क्रेच और खदान-भराई के नवाचार बने। → फाइलों की समीक्षा और छँटाई से अभिलेख-व्यवस्था सुव्यवस्थित होना और प्रशासनिक लंबित कार्य में कमी आना। → जन शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय के मामलों का शतप्रतिशत निपटान, जो प्रशासनिक जवाबदेही को सुदृढ़ करता है। → संस्थागत सुधार की दीर्घकालिक सफलता के लिए अभियान-परिणामों का मूल्यांकन और नियमित व्यवस्था में एकीकरण।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पेस्ट-फिल खनन में भूमिगत खदान के खाली स्थानों को भरने के लिए फ्लाई ऐश और औद्योगिक कचरे का उपयोग किया जा सकता है।
2. फ्लाई ऐश खनन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला उप-उत्पाद है।
3. फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट और ईंट निर्माण में किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पेस्ट-फिल या स्टोइंग पद्धति में खाली खदान-स्थानों को फ्लाई ऐश और अन्य औद्योगिक अपशिष्ट से भरा जाता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि फ्लाई ऐश ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला जलाने से उत्पन्न होती है, न कि खनन से। कथन 3 सही है, क्योंकि इसका उपयोग सीमेंट और ईंट उद्योग में व्यापक रूप से होता है। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): खाली पड़ी भूमिगत खदानों को फ्लाई ऐश जैसे सामग्री से भरने (स्टोइंग) से भूमि धंसाव का जोखिम घटता है।
कारण (R): भराव सामग्री ऊपरी चट्टानी परतों (overburden strata) को सहारा देकर उनके ढहने की संभावना कम करती है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (b) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) A सही है, परंतु R गलत है।
- (d) A गलत है, परंतु R सही है।
उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — स्टोइंग या पेस्ट-फिल पद्धति में खाली स्थानों को भरने से छत और ऊपरी स्तरों को संरचनात्मक सहारा मिलता है। इससे भूमि धंसाव जैसी घटनाएँ रोकने में मदद मिलती है। इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
Q3. स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission-Urban) का शुभारंभ किस वर्ष हुआ था?
- 2011
- 2014
- 2016
- 2019
उत्तर: 2014 — स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2014 को हुआ था, जिसके शहरी घटक को स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) कहा गया। यह मिशन खुले में शौच-मुक्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी स्वच्छता पर केंद्रित है। यह मंत्रालय की कार्यस्थल-सफाई पहल से अलग राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ‘कचरे से कंचन’ जैसी पहलें कोयला क्षेत्र में खनन-पश्चात पर्यावरणीय प्रबंधन और संसाधन दक्षता को किस प्रकार आगे बढ़ा सकती हैं? इस संदर्भ में फ्लाई ऐश के उपयोग से जुड़ी पेस्ट-फिल खनन पद्धति के लाभों और सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या ऐसे विशेष अभियानों की उपलब्धियों को संस्थागत ढाँचे में स्थायी कार्य-संस्कृति के रूप में बदला जा सकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा (मॉडल उत्तर के मुख्य बिंदु):
1. भूमिका: समाचार के तथ्य — ‘विशेष अभियान 6’ के तहत लक्ष्य से अधिक उपलब्धि: 2,035 स्थलों की सफाई (1,565 लक्ष्य), 14.84 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई, 17,686 मीट्रिक टन कबाड़ निस्तारण (10,909 लक्ष्य) से 61.41 करोड़ रुपये का राजस्व, 253 जन शिकायतों और 52 प्रधानमंत्री कार्यालय मामलों का शतप्रतिशत निपटान, 1,70,336 फाइलों को बंद करना।
2. विधिक और संस्थागत ढाँचा: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957; कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957; कोयला खान (विशेष उपबंध) अधिनियम, 2015 (कोयला ब्लॉकों का आवंटन और अंतिम उपयोग); कोयला नियंत्रक का कार्यालय; महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS); पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ताप विद्युत संयंत्रों के फ्लाई ऐश उपयोग संबंधी अधिसूचनाएँ। खनन-पश्चात भूमि पुनर्स्थापन की योजना (mine closure plan) पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्त के रूप में विचारणीय है।
3. न्यायिक संदर्भ: सर्वोच्च न्यायालय का मनोहर लाल शर्मा बनाम प्रधान सचिव (2014) निर्णय, जिसमें कोयला ब्लॉक आवंटन में पारदर्शिता और नीति-निर्माण की विधिक कमियाँ उजागर हुईं; इससे खनन-संसाधन प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही का सिद्धांत मजबूत हुआ।
4. पेस्ट-फिल खनन के लाभ: भूमि धंसाव और सतही क्षति में कमी; फ्लाई ऐश व औद्योगिक अपशिष्ट का निस्तारण; ऐश बाँधों (ash ponds) पर दबाव में कमी; संरचनात्मक स्थिरता; चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांत का व्यावहारिक प्रयोग।
5. सीमाएँ: लागत और तकनीकी क्षमता; ढुलाई-दूरी और परिवहन का बोझ; अपशिष्ट की रासायनिक संरचना से भूजल-प्रदूषण का जोखिम; पूर्ण प्रदर्शन-मॉडल और वाणिज्यिक पैमाने के बीच अंतर; अभी प्रदर्शनात्मक स्तर पर सीमित उपयोग।
6. अभियान-आधारित बनाम संस्थागत दृष्टिकोण: ‘मिशन मोड’ से अल्पकालिक उपलब्धियाँ तो मिलती हैं, परंतु स्थायित्व के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), कार्य-निष्पादन मूल्यांकन और प्रोत्साहन-तंत्र आवश्यक हैं। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) जैसे दीर्घकालिक कार्यक्रमों के अनुभव से सीख लेना प्रासंगिक है। प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फाइल प्रबंधन का डिजिटलीकरण और शिकायत निवारण के लिए CPGRAMS जैसी प्रणालियों का नियमित मूल्यांकन उपयोगी है।
7. संतुलित दृष्टिकोण: उत्पादन-लक्ष्य और पर्यावरणीय दायित्व के बीच संतुलन; ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसी स्थानीय नवाचार-पहलों का विस्तार; कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक सहभागिता को शामिल करना।
8. निष्कर्ष: विशेष अभियान उपलब्धि-संकेतक तो देते हैं, पर स्थायी परिवर्तन तभी आता है जब विधिक दायित्व, वित्तीय प्रोत्साहन, डिजिटल निगरानी और संस्थागत जवाबदेही एक साथ लागू हों।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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