21 Oct विशेष अभियान 6: सैन्य विभाग ने 2.46 लाख फाइलों की समीक्षा कर इतिहास रचा
✎ विशेष अभियान-6 (2–31 अक्टूबर, 2026) सैन्य विभाग द्वारा अभिलेख छंटाई, नियम सरलीकरण, कबाड़ निपटान और सार्वजनिक शिकायतों के लंबित मामलों में कमी के लिए चलाया गया एक समय-सीमा वाला प्रशासनिक अभियान है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था (Governance): प्रशासनिक सुधार, नागरिक-केंद्रित शासन और सार्वजनिक शिकायत निवारण | GS Paper II — राजव्यवस्था (Polity): संसद सदस्यों और संवैधानिक कार्यालयों से प्राप्त संदर्भों का प्रशासनिक निपटान
- Prelims: सैन्य विभाग (Department of Military Affairs) — रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत; रक्षा विभाग के साथ इसकी भूमिका का अंतर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) — सैन्य विभाग का प्रमुख पदेन रूप से CDS होता है, सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) — केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन और विनाश से संबंधित प्रावधान, राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) — केंद्रीय सरकारी अभिलेखों का संरक्षण, सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS) — लंबित शिकायतों की निगरानी, स्क्रैप निपटान से राजस्व — गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) का एक स्रोत, रक्षा प्रतिष्ठान और रक्षा बलों की भूमिका — छावनी और सैन्य स्थलों का प्रबंधन, केंद्रीय सरकारी अभिलेखों का वर्गीकरण और धारण अवधि (Record Retention) के नियम
- Essay: प्रशासनिक दक्षता में अभिलेख प्रबंधन और नियम सरलीकरण की भूमिका, सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और कार्य-संस्कृति: सार्वजनिक सेवा में अनुशासन का प्रश्न
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान-6 (2–31 अक्टूबर, 2026) सैन्य विभाग द्वारा अभिलेख छंटाई, नियम सरलीकरण, कबाड़ निपटान और सार्वजनिक शिकायतों के लंबित मामलों में कमी के लिए चलाया गया एक समय-सीमा वाला प्रशासनिक अभियान है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्रालय के सैन्य विभाग ने 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक विशेष अभियान-6 चलाया है। इसका उद्देश्य सामान्य स्वच्छता, बेहतर स्थान प्रबंधन, कबाड़ का निपटान, अभिलेखों की छंटाई और उपलब्ध स्थानों के सौंदर्यीकरण के माध्यम से कार्यस्थल को कार्य-अनुकूल बनाना है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अभियान के पहले दो सप्ताहों में 24.6 लाख से अधिक फाइलों की समीक्षा हुई, 3,553 अभियान स्थलों पर स्वच्छता कार्य हुआ, 158 नियमों की समीक्षा कर उन्हें सरल बनाया गया और स्क्रैप निपटान से अब तक 50.60 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अभियान की प्रगति की दैनिक निगरानी की जा रही है। सार्वजनिक शिकायतों के लंबित मामलों को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें सांसदों, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राज्य सरकारों से प्राप्त संदर्भ भी शामिल हैं। (परीक्षा की दृष्टि से ध्यान दें कि प्रेस विज्ञप्ति के शीर्षक में फाइलों की संख्या 2.46 लाख और मुख्य पाठ में 24.6 लाख लिखी गई है। आधिकारिक विवरण के लिए मूल स्रोत की पुष्टि अवश्य करें।)
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने 2019 में सैन्य मामलों के विभाग (DMA) का गठन किया और इसे रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत रखा। इसका प्रमुख CDS होता है, जिससे तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को बढ़ावा मिला।
- सरकारी कार्यालयों में फाइलों और अभिलेखों का बड़ा संग्रह जमा होता रहता है। इसके लिए सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 जैसे कानूनी ढांचे के अंतर्गत अभिलेखों के वर्गीकरण, धारण अवधि और विनाश की प्रक्रिया निर्धारित है।
- सार्वजनिक शिकायत निवारण और नागरिक-केंद्रित शासन के लिए प्रशासन पर लंबित मामलों को कम करने का दबाव रहता है। संसद सदस्यों और PMO के संदर्भों पर समय-सीमा में कार्रवाई शासन की जवाबदेही से जुड़ी है।
- अप्रचलित नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण ‘Ease of Doing Business’ और प्रशासनिक सुधार की व्यापक नीति का हिस्सा माना जाता है, जिसमें अनावश्यक नियमों को समाप्त या सरल किया जाता है।
- कबाड़ और अप्रयुक्त सामग्री का वैज्ञानिक निपटान सरकारी संपत्ति के प्रबंधन का एक अंग है। इससे राजस्व प्राप्त होता है और परिसरों में स्थान का बेहतर उपयोग संभव होता है।
विशेष अभियान क्या है और इसके मुख्य घटक क्या हैं?
- विशेष अभियान एक समय-सीमा वाला प्रशासनिक अभियान होता है, जिसमें किसी विभाग या मंत्रालय के भीतर लक्ष्य तय करके विशेष प्रयास किए जाते हैं। ‘विशेष अभियान-6’ इस श्रृंखला का छठा संस्करण है।
- इस अभियान की अवधि 2 से 31 अक्टूबर, 2026 है, अर्थात लगभग एक महीना।
- मुख्य घटकों में सामान्य स्वच्छता, स्थान प्रबंधन, कबाड़ निपटान, अभिलेखों की छंटाई और परिसरों का सौंदर्यीकरण शामिल हैं।
- फाइलों की समीक्षा का उद्देश्य पुराने और अनावश्यक अभिलेखों की पहचान करना, आवश्यक अभिलेखों को व्यवस्थित रखना और लंबित मामलों को कम करना है।
- नियमों की समीक्षा और सरलीकरण से प्रक्रियागत बाधाएं कम होती हैं और निर्णय-प्रक्रिया तेज़ होती है।
- दैनिक निगरानी और लक्ष्य-आधारित रिपोर्टिंग से अभियान की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है, जो प्रशासनिक जवाबदेही का एक साधन है।
- अभियान में रक्षा बलों और रक्षा प्रतिष्ठानों की सक्रिय भागीदारी होती है, जिससे देश भर के स्तर पर एक समान कार्यप्रणाली लागू होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अभियान की अवधि | 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक विशेष अभियान-6 (Special Campaign-6) का संचालन |
| मुख्य उद्देश्य | स्वच्छ कार्यस्थल, बेहतर स्थान प्रबंधन, कबाड़ निपटान, अभिलेखों की छंटनी और परिसरों का सौंदर्यीकरण |
| पहले दो सप्ताह की प्रगति | फाइलों की समीक्षा, 3,553 अभियान स्थलों पर स्वच्छता कार्य और 158 नियमों का सरलीकरण |
| वित्तीय पक्ष | कबाड़ के निपटान से अब तक 50.60 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त |
| निगरानी तंत्र | अभियान की प्रगति की दैनिक आधार पर समीक्षा और निगरानी |
| संस्थागत भागीदारी | देश भर के रक्षा बल और रक्षा प्रतिष्ठान, जिनकी देखरेख सैन्य विभाग (Department of Military Affairs) के समन्वय में है |
महत्व
प्रशासनिक सुधार
- अभिलेखों की छंटनी और पुराने कागजात के निपटान से फाइलों का बोझ घटता है और निर्णय-प्रक्रिया तेज होती है।
- 158 नियमों की समीक्षा और सरलीकरण से प्रक्रियागत जटिलता कम होती है, जो प्रशासनिक सुधार के व्यापक एजेंडे से जुड़ता है।
- सैन्य विभाग का गठन 2019 में रक्षा मंत्रालय के भीतर किया गया था, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के बीच समन्वय और प्रशासनिक एकरूपता को बढ़ाना है।
शासन और जवाबदेही
- सार्वजनिक शिकायतों के लंबित मामलों को कम करना नागरिक-केंद्रित प्रशासन का प्रमुख लक्ष्य है।
- सांसदों, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राज्य सरकारों से प्राप्त संदर्भों पर प्राथमिकता से कार्रवाई संसदीय और संघीय संपर्क-तंत्र की व्यावहारिक भूमिका दर्शाती है।
- दैनिक निगरानी से लक्ष्य-आधारित प्रशासन का स्वरूप उभरता है, जिसमें प्रगति का मापन और समय-सीमा तय की जाती है।
राजकोषीय पक्ष
- अनुपयोगी सामग्री (कबाड़) के निपटान से गैर-कर राजस्व प्राप्त होता है, जो सरकारी परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग का एक उदाहरण है।
- यद्यपि राजस्व की मात्रा सीमित है, यह दिखाता है कि अनुत्पादक संसाधनों के प्रबंधन से भी सार्वजनिक धन में योगदान संभव है।
परिचालन और रणनीतिक पक्ष
- स्वच्छ और व्यवस्थित कार्यस्थल तथा सुव्यवस्थित परिसर सैन्य प्रतिष्ठानों की परिचालन तत्परता और कार्य-अनुशासन को बढ़ाते हैं।
- स्थान प्रबंधन से उपलब्ध भूमि और भवनों का अधिक दक्षता से उपयोग संभव होता है।
चुनौतियाँ
1. अभिलेख प्रबंधन और गोपनीयता का संतुलन
- रक्षा संबंधी अभिलेखों में कई दस्तावेज वर्गीकृत (classified) होते हैं, इसलिए छंटनी और निपटान में गोपनीयता के नियमों का कठोर पालन आवश्यक है।
- शासकीय गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों, जैसे शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923 (Official Secrets Act, 1923), के उल्लंघन का जोखिम रहता है।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता बनाम गोपनीयता; आंतरिक सुरक्षा
2. नियम-सरलीकरण और जवाबदेही
- नियमों को सरल बनाना प्रक्रिया-विलंब घटाता है, किंतु इससे उत्तरदायित्व की स्पष्टता प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना होगा।
- सरलीकृत नियमों का प्रभाव-मूल्यांकन और समय-समय पर पुनरीक्षण आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: प्रशासनिक सुधार; सिविल सेवा में जवाबदेही
3. अभियान-आधारित बनाम सतत कार्य-संस्कृति
- विशेष अभियान एक निश्चित अवधि में ऊर्जा और ध्यान केंद्रित करता है, परंतु अभियान समाप्त होते ही शिथिलता लौटने का खतरा रहता है।
- स्वच्छता और अभिलेख-प्रबंधन को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बनाना ही दीर्घकालिक समाधान है।
यूपीएससी लिंक: लोक प्रशासन में सुधार; कार्य-संस्कृति और मानव संसाधन
4. सार्वजनिक शिकायत निवारण की गुणवत्ता
- लंबित मामलों की संख्या घटाने का लक्ष्य तभी सार्थक है जब शिकायतों का वास्तविक समाधान हो, केवल फाइलों का बंद होना पर्याप्त नहीं।
- संदर्भों की प्राथमिकता से यह आशंका भी उठ सकती है कि सामान्य शिकायतों की तुलना में कुछ मामलों को अधिक प्राथमिकता मिले।
यूपीएससी लिंक: नागरिक-केंद्रित प्रशासन; शिकायत निवारण तंत्र
5. कबाड़ निपटान में पारदर्शिता
- कबाड़ की नीलामी या निपटान में निष्पक्ष मूल्य-निर्धारण और पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक है, ताकि राजस्व-हानि या अनियमितता न हो।
- राजस्व के आंकड़ों का सार्वजनिक और नियमित प्रकाशन विश्वास बढ़ाता है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त प्रबंधन; गैर-कर राजस्व
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| आंकड़ों की विसंगति | शीर्षक में 2.46 लाख फाइलों का उल्लेख है, जबकि विज्ञप्ति के मुख्य भाग में पहले दो सप्ताह में 24.6 लाख फाइलों की समीक्षा बताई गई है। परीक्षा और लेखन के लिए मूल स्रोत से पुष्टि करें। |
| गोपनीय अभिलेखों का निपटान | वर्गीकृत दस्तावेजों के गलत निपटान से सुरक्षा-जोखिम उत्पन्न हो सकता है। |
| नियम-सरलीकरण की जवाबदेही | नियम सरल करते समय नियंत्रण और निगरानी के प्रावधान कमजोर न हों। |
| अभियान की निरंतरता | अभियान समाप्त होने के बाद स्वच्छता और अभिलेख-प्रबंधन का स्तर बना रहना अनिश्चित है। |
| कबाड़ निपटान की पारदर्शिता | नीलामी-प्रक्रिया और मूल्य-निर्धारण पर स्वतंत्र निगरानी की आवश्यकता है। |
| शिकायत निवारण की गुणवत्ता | लंबित मामलों में कमी को केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि समाधान की गुणवत्ता के आधार पर परखना होगा। |
आगे की राह
- अभिलेखों का डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक फाइल प्रबंधन प्रणाली अपनाई जाए, ताकि भौतिक फाइलों का भार और खोने का जोखिम घटे।
- सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) के अनुरूप अभिलेख-धारण अनुसूची तय की जाए और उसका पालन सुनिश्चित हो।
- वर्गीकृत अभिलेखों के निपटान के लिए स्पष्ट सुरक्षा-प्रोटोकॉल बने और उसकी लेखा-परीक्षा की जाए।
- सरलीकृत 158 नियमों का समय-समय पर प्रभाव-मूल्यांकन हो और जवाबदेही-तंत्र यथावत रखा जाए।
- कबाड़ निपटान के लिए ई-नीलामी जैसी पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए और राजस्व के आंकड़े नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाएं।
- सार्वजनिक शिकायतों का समाधान-आधारित मापन हो, जिसमें शिकायतकर्ता की संतुष्टि और समय-सीमा दोनों को शामिल किया जाए।
- स्वच्छता और अभिलेख-प्रबंधन को नियमित कार्य-प्रणाली का हिस्सा बनाया जाए, ताकि अभियान के बाद भी परिणाम बने रहें।
- आंकड़ों के मिलान और सत्यापन की व्यवस्था हो, ताकि प्रकाशित संख्याएं स्रोत-स्तर पर सुसंगत रहें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विशेष अभियान · स्वच्छता अभियान · अभिलेख प्रबंधन · ई-गवर्नेंस · प्रशासनिक सुधार · सार्वजनिक शिकायत निवारण · कार्यस्थल दक्षता · कबाड़ निपटान
अवधारणा प्रवाह
अभिलेखों, पुरानी फाइलों और कबाड़ का संचय, जिससे स्थान, कार्यक्षमता और शिकायत-निवारण पर दबाव बढ़ता है। → रक्षा मंत्रालय के सैन्य विभाग द्वारा 2 से 31 अक्टूबर, 2026 तक विशेष अभियान-6 का आरंभ। → फाइलों की समीक्षा, छंटनी, कबाड़ निपटान और परिसर की सफाई के माध्यम से कार्यस्थलों का व्यवस्थापन। → नियमों की समीक्षा और सरलीकरण से प्रक्रियागत विलंब में कमी और लंबित सार्वजनिक शिकायतों व संदर्भों पर कार्रवाई। → दैनिक निगरानी और कबाड़ निपटान से राजस्व-प्राप्ति, जिससे लक्ष्य-आधारित प्रशासन और पारदर्शिता को बल मिलता है। → अभियान की सफलता का मूल्यांकन और उसे नियमित प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी रूप से समाहित करने की चुनौती।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विशेष अभियान-6 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान रक्षा मंत्रालय के सैन्य विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
2. इसका उद्देश्य केवल कबाड़ का निपटान और राजस्व प्राप्त करना है।
3. अभियान के तहत नियमों की समीक्षा कर उन्हें सरल बनाया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अभियान रक्षा मंत्रालय के सैन्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका उद्देश्य स्वच्छता, स्थान प्रबंधन, अभिलेखों को छांटना और कार्यस्थल को कार्य के अनुकूल बनाना भी है। कथन 3 सही है क्योंकि अभियान के तहत नियमों की समीक्षा कर उन्हें सरल बनाया जा रहा है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से विशेष अभियान-6 का/के उद्देश्य है/हैं?
1. सार्वजनिक शिकायतों के लंबित मामलों को कम करना।
2. सांसदों और प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त संदर्भों पर ध्यान केंद्रित करना।
3. स्वच्छ कार्यस्थल और आसपास के वातावरण को कार्य के अनुकूल बनाना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1 और 2
- केवल 3
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी उद्देश्य विशेष अभियान-6 के अंतर्गत आते हैं, जिसमें सार्वजनिक शिकायतों का निवारण, महत्वपूर्ण संदर्भों पर ध्यान देना और कार्यस्थल की स्वच्छता व अनुकूलता शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में प्रशासनिक दक्षता और सुशासन को बढ़ावा देने में विशेष अभियानों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। क्या ये अभियान स्थायी प्रशासनिक सुधारों के लिए एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: विशेष अभियानों (जैसे विशेष अभियान-6) का संक्षिप्त परिचय और उनके मुख्य उद्देश्य (स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन, शिकायत निवारण, नियमों का सरलीकरण)।
मुख्य भाग:
1. प्रशासनिक दक्षता में भूमिका:
– अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण का महत्व।
– कबाड़ निपटान से राजस्व प्राप्ति और स्थान का बेहतर उपयोग।
– नियमों का सरलीकरण और प्रक्रियाओं का युक्तिकरण।
– लंबित मामलों का निपटान (सार्वजनिक शिकायतें, PMO/सांसद संदर्भ)।
– कार्यस्थल के वातावरण में सुधार और कर्मचारियों की उत्पादकता पर प्रभाव।
2. सुशासन को बढ़ावा देने में भूमिका:
– पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि।
– नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में कदम।
– सरकारी विभागों में कार्य संस्कृति में बदलाव।
– ई-गवर्नेंस (e-Governance) और डिजिटल इंडिया (Digital India) पहल से संबंध।
3. स्थायी प्रशासनिक सुधारों के लिए प्रभावशीलता का मूल्यांकन:
– सकारात्मक पक्ष: त्वरित परिणाम, जागरूकता बढ़ाना, विशिष्ट समस्याओं का समाधान।
– चुनौतियाँ/सीमाएँ: क्या ये अल्पकालिक उत्साह हैं या दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन लाते हैं? क्या ये अभियान नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का स्थान ले सकते हैं? संसाधनों का सतत आवंटन और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता।
– स्थायी सुधारों के लिए आवश्यक तत्व: संस्थागत तंत्र, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी का निरंतर उपयोग, नियमित निगरानी और मूल्यांकन।
निष्कर्ष: विशेष अभियानों की महत्ता को स्वीकार करते हुए, उन्हें व्यापक और स्थायी प्रशासनिक सुधारों के एक बड़े ढांचे का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दें, ताकि वे केवल तात्कालिक समाधान न होकर दीर्घकालिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बन सकें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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