केरल के नौ तटीय पंचायतों को सुनामी-तैयार के लिए यूनेस्को मूल्यांकन हेतु प्रस्तुत

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केरल में सुनामी-तैयार प्रक्रियापंचायतों की पहचान9 तटीय पंचायतेंगतिविधियाँ आयोजितप्रशिक्षण, जागरूकताNTRB मूल्यांकनक्षेत्र सत्यापनUNESCO मान्यताअंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन
केरल में सुनामी-तैयार प्रक्रिया

✎ 'सुनामी-तैयार' कार्यक्रम IOC-UNESCO की एक पहल है जो तटीय समुदायों को सुनामी के खतरों के प्रति तैयार करने और उनके लचीलेपन को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसका मूल्यांकन भारत में राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB) द्वारा किया जाता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (आपदाएँ)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन
  • Prelims: सुनामी-तैयार कार्यक्रम, IOC-UNESCO, राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB), आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तटीय आपदा प्रबंधन, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
  • Essay: आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका, जलवायु परिवर्तन और तटीय समुदायों का लचीलापन

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम IOC-UNESCO की एक पहल है जो तटीय समुदायों को सुनामी के खतरों के प्रति तैयार करने और उनके लचीलेपन को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसका मूल्यांकन भारत में राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB) द्वारा किया जाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल सरकार ने राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB) को सूचित किया है कि राज्य की नौ तटीय पंचायतें यूनेस्को (UNESCO) के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (Intergovernmental Oceanographic Commission – IOC-UNESCO) द्वारा ‘सुनामी-तैयार’ (Tsunami Ready) के रूप में मूल्यांकन के लिए तैयार हैं। यह मान्यता सुनामी के प्रति लचीलापन (resilience) बनाने के उद्देश्य से नियोजित गतिविधियों की एक श्रृंखला के माध्यम से प्राप्त विशिष्ट संकेतकों पर आधारित है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद, तटीय समुदायों को ऐसी आपदाओं से बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों में तेजी आई है।
  • IOC-UNESCO का ‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम समुदायों को सुनामी के लिए तैयार करने और उनके जोखिम को कम करने के लिए एक स्वैच्छिक, प्रदर्शन-आधारित सामुदायिक प्रत्यायन कार्यक्रम है।
  • यह कार्यक्रम सुनामी के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, तैयारी में सुधार करने और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
  • भारत में, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • केरल में, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Kerala State Disaster Management Authority) ने इन नौ पंचायतों में प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल आयोजित करने में सहायता की है।
  • इन गतिविधियों में सुनामी प्रबंधन योजनाएँ तैयार करना, निकासी मार्ग (evacuation routes) की पहचान करना और सुनामी होर्डिंग तथा साइनेज (signages) स्थापित करना शामिल है।

‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम क्या है?

  • ‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम IOC-UNESCO द्वारा शुरू की गई एक वैश्विक पहल है।
  • इसका उद्देश्य सुनामी से प्रभावित होने वाले तटीय समुदायों की तैयारी और लचीलेपन को बढ़ाना है।
  • यह कार्यक्रम समुदायों को सुनामी के खतरों को समझने और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए सशक्त बनाता है।
  • मान्यता प्राप्त करने के लिए, समुदायों को विशिष्ट संकेतकों को पूरा करना होता है, जिनमें जोखिम मूल्यांकन, तैयारी योजनाएँ, जागरूकता कार्यक्रम और निकासी प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB) भारत में इन संकेतकों का मूल्यांकन करता है, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल होते हैं।
  • मूल्यांकन में स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत और क्षेत्र सत्यापन (field verification) शामिल है।
  • सफल मूल्यांकन के बाद, NTRB, IOC-UNESCO को संबंधित तटीय पंचायतों को ‘सुनामी-तैयार’ के रूप में मान्यता देने की सिफारिश करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
तैयारी का आकलन यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (IOC-UNESCO) द्वारा ‘सुनामी-तैयार’ मान्यता के लिए मूल्यांकन।
पहचान के संकेतक सुनियोजित गतिविधियों के माध्यम से प्राप्त विशिष्ट संकेतकों पर आधारित।
सामुदायिक भागीदारी प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल शामिल।
मूल्यांकन गतिविधियाँ सुनामी प्रबंधन योजनाएँ तैयार करना, निकासी मार्गों की पहचान और साइनबोर्ड लगाना।
क्षेत्र सत्यापन राष्ट्रीय सुनामी रेडी बोर्ड (NTRB) के सदस्यों द्वारा स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत।

महत्व

आपदा प्रबंधन

  • यह पहल तटीय समुदायों को सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सशक्त बनाती है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।
  • स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं के विकास और कार्यान्वयन को बढ़ावा मिलता है, जो आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के लिए महत्वपूर्ण है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

  • यूनेस्को की मान्यता भारत के आपदा प्रबंधन प्रयासों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करती है और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करती है।
  • यह पहल अन्य तटीय राज्यों और देशों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है, जिससे सुनामी तैयारी के वैश्विक मानकों में सुधार होगा।

स्थानीय शासन

  • ग्राम पंचायतों को आपदा तैयारी में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन और जवाबदेही मजबूत होती है।
  • समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देता है, जहाँ स्थानीय लोग अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं और कमजोरियों के अनुसार समाधान विकसित करने में शामिल होते हैं।

पर्यावरण सुरक्षा

  • तटीय क्षेत्रों में आपदा तैयारी से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बुनियादी ढाँचे और पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा में भी मदद मिलती है।

चुनौतियाँ

1. दीर्घकालिक स्थिरता

  • प्रशिक्षण, जागरूकता और बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के लिए निरंतर धन और संसाधनों की आवश्यकता।
  • स्थानीय नेतृत्व में बदलाव के साथ तैयारी के स्तर को बनाए रखना।

2. सामुदायिक जुड़ाव

  • सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर और हाशिए पर पड़े समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित रूप से अद्यतन करना और समुदाय की बदलती जरूरतों के अनुसार अनुकूलित करना।

3. तकनीकी बुनियादी ढाँचा

  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) और संचार नेटवर्क की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
  • दूरदराज के तटीय क्षेत्रों में आवश्यक उपकरणों और साइनबोर्डों की स्थापना और रखरखाव।

4. समन्वय और सहयोग

  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों (राज्य, जिला, स्थानीय) और गैर-सरकारी संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय।
  • वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मानव संसाधन प्रशिक्षित कर्मियों की कमी और उनका नियमित नवीनीकरण।
वित्तीय बाधाएँ तैयारी गतिविधियों और बुनियादी ढाँचे के लिए पर्याप्त और निरंतर धन की उपलब्धता।
जलवायु परिवर्तन समुद्र के बढ़ते स्तर और चरम मौसम की घटनाओं से उत्पन्न नई चुनौतियाँ।
सूचना का प्रसार सभी समुदायों तक समय पर और सटीक चेतावनी सूचना पहुँचाना।
निकासी प्रबंधन बड़ी आबादी की सुरक्षित और व्यवस्थित निकासी सुनिश्चित करना।

आगे की राह

  • तटीय क्षेत्रों में आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन समितियों को मजबूत करना और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को और अधिक उन्नत और सुलभ बनाना, विशेषकर अंतिम छोर तक।
  • आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम को स्कूली शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण में एकीकृत करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और पड़ोसी देशों के साथ सुनामी तैयारी पर सहयोग बढ़ाना।
  • नियमित रूप से मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियानों का आयोजन करना ताकि समुदाय की तैयारी का स्तर बना रहे।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को आपदा प्रबंधन योजनाओं में शामिल करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आपदा प्रबंधन · सुनामी तैयारी · तटीय समुदाय · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण · UNESCO · अंतरसरकारी समुद्र विज्ञान आयोग · समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन · आपदा न्यूनीकरण · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण · भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र · स्थानीय स्वशासन

अवधारणा प्रवाह

केरल के 9 तटीय पंचायतों की पहचान  →  राष्ट्रीय सुनामी रेडी बोर्ड (NTRB) को सूचना  →  प्रशिक्षण, जागरूकता, मॉक ड्रिल का आयोजन  →  NTRB द्वारा क्षेत्र सत्यापन और मूल्यांकन  →  IOC-UNESCO को ‘सुनामी-तैयार’ मान्यता की सिफारिश  →  अंतर्राष्ट्रीय ‘सुनामी-तैयार’ मान्यता प्राप्त करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के अंतरसरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (IOC-UNESCO) द्वारा शुरू किया गया है।
2. भारत में, राष्ट्रीय सुनामी रेडी बोर्ड (NTRB) ‘सुनामी रेडी’ मान्यता के लिए तटीय समुदायों का मूल्यांकन करता है।
3. ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सुनामी के बाद राहत कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम IOC-UNESCO द्वारा शुरू किया गया है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारत में NTRB मूल्यांकन करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि इसका उद्देश्य तैयारी और लचीलापन बनाना है, न कि केवल राहत कार्य।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम के तहत मूल्यांकन की जाने वाली गतिविधियों में शामिल है/हैं?
1. सुनामी प्रबंधन योजनाओं की तैयारी
2. निकासी मार्गों की पहचान
3. सुनामी होर्डिंग और साइनेज की स्थापना
4. सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम के तहत मूल्यांकन की जाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सुनामी के प्रति समुदाय के लचीलेपन और तैयारी को बढ़ाना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में तटीय आपदा प्रबंधन में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ‘सुनामी रेडी’ जैसी पहलों के संदर्भ में उनकी प्रभावशीलता को भी स्पष्ट कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत तटीय आपदाओं और भारत के लिए उनके महत्व के संक्षिप्त परिचय से करें। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (पंचायतों/नगरपालिकाओं) की संवैधानिक स्थिति और आपदा प्रबंधन में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालें (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत उनकी जिम्मेदारियां)। ‘सुनामी रेडी’ जैसी पहलों में उनकी भागीदारी का उल्लेख करें, जिसमें प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता, मॉक ड्रिल, निकासी योजनाओं का विकास और बुनियादी ढांचे की स्थापना शामिल है। उनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें, जिसमें उनकी शक्तियों, संसाधनों और जमीनी स्तर पर पहुंच के लाभों के साथ-साथ वित्तीय बाधाओं, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी और समन्वय संबंधी चुनौतियों जैसी सीमाओं पर भी चर्चा करें। सुधार के लिए सुझाव दें, जैसे कि क्षमता निर्माण में वृद्धि, वित्तीय सशक्तिकरण और बहु-हितधारक समन्वय। निष्कर्ष में, आपदा लचीलेपन के लिए स्थानीय निकायों के महत्व को दोहराएं।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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