उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना: 83% गांवों में 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड, जानिए पूरा अपडेट

उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना: 83% गांवों में 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड, जानिए पूरा अपडेट — उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना: प्रॉपर्टी कार्ड वितरण स्थिति

उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना: 83% गांवों में 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड, जानिए पूरा अपडेट

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष  |  GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ  |  GS Paper III — भूमि सुधार
  • Prelims: स्वामित्व योजना, पंचायती राज मंत्रालय, ड्रोन सर्वेक्षण, प्रॉपर्टी कार्ड, CORS तकनीक, ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्र, भूमि अभिलेख, ई-ग्राम स्वराज
  • Essay: ग्रामीण भारत में भूमि सुधार और संपत्ति अधिकारों का महत्व, डिजिटल तकनीक का उपयोग कर सुशासन और समावेशी विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग करके संपत्ति मालिकों को कानूनी प्रॉपर्टी कार्ड प्रदान कर उनके अधिकारों को सशक्त करती है, जिससे भूमि विवाद कम होते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 90,573 अधिसूचित गांवों में 13 जुलाई 2026 तक ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। राज्य के लगभग 67,000 गांवों में 1.01 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 75,000 गांवों को कवर करते हुए लगभग 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं, जो उत्तर प्रदेश के अधिसूचित गांवों का लगभग 83 प्रतिशत है। स्वामित्व योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को उनके अधिकारों का रिकॉर्ड प्रदान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अभिलेखों (Land Records) का अद्यतन और डिजिटलीकरण एक बड़ी चुनौती रही है, जिससे संपत्ति विवाद और कानूनी मुकदमेबाजी बढ़ती है।
  • पारंपरिक सर्वेक्षण विधियाँ समय लेने वाली, महंगी और त्रुटि-प्रवण होती हैं, जिससे सटीक भूमि मापन और सीमा निर्धारण में बाधा आती है।
  • ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व अधिकारों की कमी के कारण संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने में कठिनाई होती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को उनके अधिकारों का रिकॉर्ड प्रदान करने के उद्देश्य से 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) का शुभारंभ किया।
  • यह योजना ग्रामीण नियोजन, संपत्ति कर संग्रह और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक आधार प्रदान करती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन को बढ़ावा मिलता है।
  • योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत में ‘ग्राम स्वराज’ की अवधारणा को मजबूत करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।

स्वामित्व योजना क्या है?

  • स्वामित्व योजना (ग्रामों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण) पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ प्रदान करना है, जिससे उन्हें अपनी संपत्ति का कानूनी स्वामित्व मिल सके।
  • यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि पार्सल की मैपिंग और सीमा निर्धारण के लिए ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण और ‘कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन’ (CORS) तकनीक का उपयोग करती है।
  • प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने से पहले, संबंधित राज्य अधिकारियों द्वारा ज़मीनी स्तर पर सत्यापन (Ground-level verification) किया जाता है और आपत्तियों/विवादों का समाधान किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होती है।
  • यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों को कम करने, ग्रामीण नियोजन को बेहतर बनाने और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने के लिए संपत्ति को एक संपार्श्विक (Collateral) के रूप में उपयोग करने में मदद करती है।
  • स्वामित्व योजना ‘ई-ग्राम स्वराज’ पोर्टल के साथ एकीकृत है, जो ग्रामीण विकास और पंचायती राज के डिजिटल सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देती है।
  • योजना का कार्यान्वयन पंचायती राज मंत्रालय, राज्य राजस्व विभाग, राज्य पंचायती राज विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के सहयोग से किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति का सटीक मानचित्रण और सीमा निर्धारण सुनिश्चित करता है।
कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) तकनीक उच्च सटीकता के साथ संपत्ति की मैपिंग और सीमा निर्धारण में सहायक।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनके अधिकारों का आधिकारिक रिकॉर्ड प्रदान करता है।
राज्य अधिकारियों द्वारा जमीनी जांच पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और संपत्ति विवादों के समाधान में मदद करता है।
आपत्तियों/विवादों का समाधान योजना की विश्वसनीयता बढ़ाता है और कानूनी विवादों को कम करता है।
योजना का विस्तार अधिक ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करने और लाभार्थियों तक पहुँच बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व से ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण (Credit) तक पहुँच आसान होती है, जिससे कृषि और संबंधित गतिविधियों में निवेश को बढ़ावा मिलता है।
  • संपत्ति विवादों में कमी से अदालतों पर बोझ कम होता है और कानूनी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय व धन की बचत होती है।
  • संपत्ति के रिकॉर्ड से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी धोखाधड़ी और अनधिकृत कब्जों पर रोक लगती है, जिससे संपत्ति बाजार में विश्वास बढ़ता है।

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण संपत्ति मालिकों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाता है, क्योंकि उन्हें अपनी संपत्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त होता है।
  • संपत्ति के स्पष्ट अधिकार ग्रामीण समुदायों में सामाजिक स्थिरता और शांति को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि विवादों की संभावना कम होती है।
  • योजना के तहत प्राप्त प्रॉपर्टी कार्ड ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति दस्तावेज के रूप में कार्य करता है, जिससे उनकी सामाजिक सुरक्षा बढ़ती है।

प्रशासनिक महत्व

  • ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर (Property Tax) संग्रह में मदद मिलती है, जिससे स्थानीय स्वशासन को वित्तीय रूप से मजबूत किया जा सकता है।
  • ग्राम स्तर पर बेहतर नियोजन और विकास गतिविधियों के लिए सटीक भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध होते हैं।
  • पारदर्शी संपत्ति रिकॉर्ड से भ्रष्टाचार में कमी आती है और सरकारी सेवाओं की दक्षता में सुधार होता है।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी चुनौतियाँ

  • ड्रोन और CORS जैसी उन्नत तकनीकों के संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी बुनियादी ढांचे (जैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी) की कमी।

2. जागरूकता और स्वीकार्यता

  • ग्रामीण आबादी के बीच योजना के लाभों और प्रक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी।
  • पारंपरिक भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से नई डिजिटल प्रणाली में संक्रमण के प्रति प्रतिरोध।

3. विवादों का समाधान

  • पुराने और जटिल संपत्ति विवादों को सुलझाने में लगने वाला समय और संसाधन।
  • विवादों के समाधान के लिए एक प्रभावी और निष्पक्ष तंत्र स्थापित करना।

4. संसाधन और क्षमता

  • सर्वेक्षण, सत्यापन और कार्ड वितरण के लिए पर्याप्त मानव और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता।
  • राज्य और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पुराने और अस्पष्ट रिकॉर्ड कई ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के रिकॉर्ड पुराने, अधूरे या अस्पष्ट हैं, जिससे नए रिकॉर्ड बनाने में जटिलता आती है।
सीमा विवाद पड़ोसी भूस्वामियों के बीच सीमा संबंधी विवादों का समाधान करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए गहन जांच की आवश्यकता होती है।
तकनीकी पहुंच दूरदराज के क्षेत्रों में ड्रोन और CORS तकनीक के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे (जैसे बिजली, इंटरनेट) की कमी हो सकती है।
जनभागीदारी योजना की सफलता के लिए स्थानीय समुदायों और संपत्ति मालिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
डेटा सुरक्षा बड़ी मात्रा में संवेदनशील संपत्ति डेटा के संग्रह और भंडारण में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना।
योजना का विस्तार योजना को देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों तक सफलतापूर्वक विस्तारित करने के लिए राज्यों के बीच समन्वय और संसाधनों का आवंटन।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme)

आगे की राह

  • ड्रोन और CORS जैसी तकनीकों के संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जाए।
  • योजना के लाभों और प्रक्रिया के बारे में ग्रामीण आबादी के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिसमें स्थानीय भाषाओं का उपयोग हो।
  • पुराने और जटिल संपत्ति विवादों के समाधान के लिए विशेष न्यायाधिकरणों या फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की जाए।
  • राज्य और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि वे योजना को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
  • डिजिटल संपत्ति रिकॉर्ड की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
  • योजना के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायतों की भूमिका को और मजबूत किया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर स्वामित्व और जवाबदेही बढ़े।
  • योजना के तहत जारी प्रॉपर्टी कार्ड को विभिन्न सरकारी सेवाओं और वित्तीय संस्थानों से जोड़ा जाए ताकि इसके उपयोगिता मूल्य में वृद्धि हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वामित्व योजना · ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्र · संपत्ति कार्ड · ड्रोन सर्वेक्षण · कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) · संपत्ति का अधिकार · भूमि अभिलेख · पारदर्शिता · पंचायती राज मंत्रालय · ग्रामीण विकास · संपत्ति विवाद · डिजिटल इंडिया

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 300A’, ‘note’: ‘संपत्ति का अधिकार (कानूनी अधिकार)’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान  →  ड्रोन और CORS तकनीक से सर्वेक्षण  →  संपत्ति का मानचित्रण और सीमांकन  →  जमीनी सत्यापन और आपत्तियों का समाधान  →  प्रॉपर्टी कार्ड का निर्माण और वितरण  →  संपत्ति मालिकों को कानूनी अधिकार प्रदान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्वामित्व योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को अधिकारों का रिकॉर्ड प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
2. इसमें संपत्ति की मैपिंग और सीमा निर्धारण के लिए केवल पारंपरिक सर्वेक्षण विधियों का उपयोग किया जाता है।
3. संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले, संबंधित राज्य अधिकारियों द्वारा ज़मीनी स्तर पर जांच और आपत्तियों का समाधान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को अधिकारों का रिकॉर्ड देना है। कथन 2 गलत है, क्योंकि इसमें ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण और CORS (कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। कथन 3 सही है, क्योंकि योजना में पारदर्शिता और सही निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए ज़मीनी स्तर पर जांच और विवादों का समाधान शामिल है।

Q2. कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) तकनीक का उपयोग निम्नलिखित में से किस संदर्भ में किया जाता है?

  1. कृषि उपज का अनुमान लगाने में
  2. मौसम पूर्वानुमान जारी करने में
  3. संपत्ति की सटीक मैपिंग और सीमा निर्धारण में
  4. समुद्री नेविगेशन में

उत्तर: संपत्ति की सटीक मैपिंग और सीमा निर्धारण में — CORS तकनीक का उपयोग स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति की सटीक मैपिंग और सीमा निर्धारण के लिए किया जाता है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों को औपचारिक रूप देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में किस प्रकार सहायक है? इस योजना के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में स्वामित्व योजना के उद्देश्यों और ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को औपचारिक रूप देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके सकारात्मक प्रभावों को समझाना होगा। इसमें संपत्ति कार्ड के लाभ, विवादों में कमी, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। दूसरे भाग में, योजना के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों जैसे तकनीकी बाधाएं, जागरूकता की कमी, भूमि विवादों की जटिलता और अंतर-विभागीय समन्वय की कमी का विश्लेषण करना होगा। अंत में, इन चुनौतियों के समाधान के लिए प्रभावी उपाय सुझाने होंगे, जैसे क्षमता निर्माण, जन जागरूकता अभियान, डिजिटल बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण और कानूनी ढांचे में सुधार।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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