22 Jul पिछले 2 वर्षों में अश्लील कंटेंट के कारण बंद हुए 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म: सरकार
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, ओटीटी प्लेटफॉर्म, महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986, डिजिटल मीडिया विनियमन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
- Essay: डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विनियमन के बीच संतुलन, भारत में ऑनलाइन कंटेंट विनियमन की चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट के विनियमन के लिए एक त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र और आचार संहिता प्रदान करते हैं, जिसका उद्देश्य अश्लील और गैर-कानूनी सामग्री पर अंकुश लगाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में अश्लील कंटेंट दिखाने और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 तथा अन्य लागू कानूनों का उल्लंघन करने के कारण भारत में 50 ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक पहुंच के लिए बंद कर दिया गया है। यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत की गई है, जो डिजिटल मीडिया पर कंटेंट के विनियमन के लिए एक संस्थागत व्यवस्था प्रदान करते हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने डिजिटल मीडिया पर समसामयिक मामलों के प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (ओटीटी प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से 25 फरवरी, 2021 को ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ अधिसूचित किए थे।
- इन नियमों का भाग-III विशेष रूप से डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (ओटीटी प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों के लिए एक आचार संहिता का प्रावधान करता है।
- इन नियमों के तहत शिकायतों का समाधान किया जाता है, जिसमें कंटेंट की निगरानी और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के प्रावधान शामिल हैं।
- आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) मध्यस्थों को गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने या उस तक पहुंच को बंद करने के लिए सूचित करने का प्रावधान करती है।
- सरकार ने अश्लील कंटेंट दिखाने और आईटी अधिनियम की धारा 67 व 67ए, और महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की है।
- यह कदम ऑनलाइन कंटेंट के विनियमन और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, विशेषकर बच्चों और युवाओं पर अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के प्रभाव को लेकर।
सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 क्या हैं?
- ये नियम आईटी अधिनियम, 2000 के तहत अधिसूचित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट के विनियमन के लिए एक ढांचा स्थापित करना है।
- इन नियमों का मुख्य लक्ष्य डिजिटल कंटेंट के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, साथ ही उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना भी है।
- नियमों में डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए एक त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र (grievance redressal mechanism) का प्रावधान है।
- पहले स्तर पर, प्रकाशक स्वयं शिकायत का समाधान करते हैं; दूसरे स्तर पर, उद्योग द्वारा गठित स्व-नियामक निकाय (self-regulatory body) होते हैं; और तीसरे स्तर पर, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की देखरेख समिति होती है।
- इन नियमों के तहत, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कंटेंट का वर्गीकरण (classification) करना होता है, ताकि उपयोगकर्ता अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट का चयन कर सकें और बच्चों को अनुपयुक्त सामग्री से बचाया जा सके।
- नियमों में मध्यस्थों (intermediaries) के लिए ‘ड्यू डिलिजेंस’ (due diligence) का पालन करने और गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
- धारा 67 और 67ए आईटी अधिनियम, 2000 के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण से संबंधित हैं।
- महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 महिलाओं के अश्लील चित्रण को प्रतिबंधित करता है और इसके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 | डिजिटल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म पर सामग्री के नियमन हेतु एक संस्थागत व्यवस्था स्थापित करता है। |
| भाग-III | डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (OTT प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों के लिए आचार संहिता का प्रावधान करता है। |
| शिकायत निवारण तंत्र | आईटी नियम, 2021 के तहत शिकायतों का समाधान किया जाता है, जिससे गैर-कानूनी सामग्री पर कार्रवाई संभव होती है। |
| आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) | मध्यस्थों को गैर-कानूनी सामग्री हटाने या उस तक पहुंच को बंद करने के लिए सूचित करने का प्रावधान करती है। |
| 50 OTT प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध | अश्लील सामग्री और विभिन्न कानूनों के उल्लंघन के कारण सरकार द्वारा की गई कठोर कार्रवाई को दर्शाता है। |
महत्व
सामाजिक प्रभाव
- अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री से समाज, विशेषकर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- नैतिक मूल्यों और सार्वजनिक शालीनता के मानकों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
- ऑनलाइन सामग्री के उपभोग के लिए एक सुरक्षित और जिम्मेदार वातावरण को बढ़ावा मिलता है।
कानूनी और नियामक महत्व
- आईटी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के प्रभावी कार्यान्वयन को प्रदर्शित करता है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री के नियमन में सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
- कानूनों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करके एक मिसाल कायम करता है, जिससे अन्य प्लेटफॉर्म को भी नियमों का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।
शासन और पारदर्शिता
- शिकायत-आधारित कार्रवाई तंत्र की प्रभावशीलता को दर्शाता है, जिससे नागरिकों को आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्ट करने का अधिकार मिलता है।
- डिजिटल क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
- लोकसभा में दी गई जानकारी सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और संसदीय जवाबदेही को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम विनियमन
- ऑनलाइन सामग्री के विनियमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(ए)) के बीच संतुलन स्थापित करना एक चुनौती है।
- अश्लीलता की परिभाषा व्यक्तिपरक हो सकती है, जिससे सेंसरशिप के आरोप लग सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान – मूल अधिकार
2. तकनीकी चुनौतियाँ
- ऑनलाइन सामग्री की विशाल मात्रा और इसकी त्वरित प्रकृति के कारण सभी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करना और उसे हटाना मुश्किल है।
- प्लेटफॉर्म अक्सर विभिन्न देशों में होस्ट किए जाते हैं, जिससे क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दे उत्पन्न होते हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी
3. कानूनी प्रवर्तन और क्षमता
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए डिजिटल सामग्री के उल्लंघन की जांच और मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधन सुनिश्चित करना।
- तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के साथ कानूनों को अद्यतन रखना।
यूपीएससी लिंक: शासन – ई-गवर्नेंस
4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव
- सीमा पार से संचालित होने वाले OTT प्लेटफॉर्म के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है, जो अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अश्लीलता की परिभाषा | कानूनी रूप से अश्लीलता को परिभाषित करने में व्यक्तिपरकता और सांस्कृतिक भिन्नताएँ। |
| अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव | अत्यधिक विनियमन से रचनात्मकता और आलोचनात्मक विचारों पर अंकुश लगने का डर। |
| तकनीकी प्रगति की गति | कानूनों और नियमों का तकनीकी नवाचारों के साथ तालमेल बिठाने में कठिनाई। |
| वैश्विक पहुंच और क्षेत्राधिकार | अंतर्राष्ट्रीय OTT प्लेटफॉर्म पर भारतीय कानूनों को लागू करने में चुनौतियाँ। |
| संसाधन और विशेषज्ञता | डिजिटल सामग्री की निगरानी और प्रवर्तन के लिए पर्याप्त मानव और तकनीकी संसाधनों की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021
आगे की राह
- अश्लीलता और आपत्तिजनक सामग्री की परिभाषा को स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ बनाना, ताकि कानूनी अस्पष्टता कम हो।
- डिजिटल साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, ताकि उपयोगकर्ता स्वयं जिम्मेदार सामग्री का चयन कर सकें।
- OTT प्लेटफॉर्म के साथ सहयोग को मजबूत करना, ताकि वे स्वेच्छा से आचार संहिता का पालन करें और आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाएं।
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों को डिजिटल फोरेंसिक और साइबर सुरक्षा में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करना।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग तंत्र विकसित करना, ताकि सीमा पार से संचालित होने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
- नियमों का नियमित रूप से मूल्यांकन और अद्यतन करना, ताकि वे तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के अनुकूल रहें।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामग्री विनियमन के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिले और समाज सुरक्षित रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 · आईटी नियम, 2021 · ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (ओटीटी) प्लेटफॉर्म · डिजिटल मीडिया आचार संहिता · अश्लील कंटेंट · मध्यस्थ दिशानिर्देश · महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 · अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता · सामग्री विनियमन · डिजिटल इंडिया
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(ए)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लील/गैर-कानूनी सामग्री का प्रदर्शन → नागरिकों/संस्थाओं द्वारा शिकायतें दर्ज करना → आईटी नियम, 2021 के तहत शिकायत निवारण प्रक्रिया → आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) का उपयोग → सरकार द्वारा OTT प्लेटफॉर्म को बंद करने की कार्रवाई → सार्वजनिक पहुंच से सामग्री को हटाना/प्रतिबंधित करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये नियम केवल सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए लागू होते हैं, ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नहीं।
2. इन नियमों का भाग-III डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट के प्रकाशकों के लिए आचार संहिता का प्रावधान करता है।
3. इन नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत अधिसूचित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि ये नियम ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रकाशकों पर भी लागू होते हैं। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि इन नियमों का भाग-III डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (ओटीटी प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों के लिए आचार संहिता का प्रावधान करता है, और इन्हें आईटी अधिनियम, 2000 के तहत अधिसूचित किया गया था।
Q2. भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट के विनियमन से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-सा/से अधिनियम और धाराएँ प्रासंगिक हैं?
1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67A
2. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294
3. महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए समाचार के अनुसार, ये सभी अधिनियम और धाराएँ भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट के विनियमन से संबंधित हैं। आईटी अधिनियम की धारा 67 व 67ए, बीएनएस की धारा 294, और महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करने के कारण ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की गई है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विनियमन के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। क्या ये कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मकता को प्रभावित करते हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 और आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) जैसे सरकारी उपायों का विस्तार से वर्णन करें। दूसरे भाग में, इन नियमों के तहत ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करें। अश्लील कंटेंट को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित अंकुश और रचनात्मकता पर पड़ने वाले प्रभावों का भी उल्लेख करें। अंत में, एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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