श्रेयस योजना: 3509 करोड़ रुपये से 1.18 लाख पिछड़े-दलित विद्यार्थियों को लाभ

श्रेयस योजना: उच्च शिक्षा में पिछड़े-दलित छात्रों को 3509 करोड़ की मदद, कहां-कितना खर्चा, कितनों को मिला लाभ? — diagram

श्रेयस योजना: 3509 करोड़ रुपये से 1.18 लाख पिछड़े-दलित विद्यार्थियों को लाभ

श्रेयस योजना घटकवित्तीय वर्ष 2014-15 से 203,509.39 करोड़ रुपये1,18,248 लाभार्थीअनुसूचित जाति (SC)उच्च शिक्षा सहायतालाभार्थी शामिलअन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)उच्च शिक्षा सहायतालाभार्थी शामिलप्रतियोगी परीक्षा कोचिंगउन्नत शोध सहायतामानव पूंजी निर्माणशैक्षणिक सशक्तिकरणसामाजिक समानताकौशल विकास
श्रेयस योजना घटक

✎ श्रेयस योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है जो अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई, विदेश में उच्च शिक्षा और शोध के लिए वित्तीय सहायता…

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय, शिक्षा, मानव संसाधन  |  GS Paper III — समावेशी विकास
  • Prelims: श्रेयस योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, एससी छात्रवृत्ति, ओबीसी छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग
  • Essay: समावेशी विकास और शिक्षा का महत्व, भारत में सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ और उनके समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: श्रेयस योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है जो अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई, विदेश में उच्च शिक्षा और शोध के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने श्रेयस योजना (Scholarships for Higher Education for Young Achievers Scheme) के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में सहायता प्रदान करने के लिए किए गए खर्च और लाभार्थियों की संख्या के संबंध में जानकारी दी है। वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक इस योजना के चार प्रमुख घटकों पर कुल 3,509.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिससे 1,18,248 विद्यार्थियों को लाभ मिला है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में शिक्षा, विशेषकर उच्च शिक्षा तक पहुँच, सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
  • सरकार विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से इन वर्गों के छात्रों को शिक्षा के मुख्यधारा में लाने का प्रयास करती है।
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य वंचित समूहों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू करता है।
  • शैक्षणिक सशक्तिकरण इन वर्गों के समग्र विकास और समाज में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।

श्रेयस योजना (SHREYAS Scheme) क्या है?

  • श्रेयस योजना का पूरा नाम ‘स्कॉलरशिप्स फॉर हायर एजुकेशन फॉर यंग अचीवर्स स्कीम’ है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • यह योजना केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य वंचित वर्गों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करके उनके शैक्षणिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
  • योजना के तहत चार प्रमुख घटक शामिल हैं: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता और उन्नत शोध के लिए फेलोशिप।
  • निःशुल्क कोचिंग घटक आर्थिक रूप से कमजोर एससी और ओबीसी विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी और व्यावसायिक परीक्षाओं की तैयारी में मदद करता है।
  • टॉप क्लास शिक्षा घटक प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति घटक उन छात्रों को सहायता देता है जो विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
  • राष्ट्रीय फेलोशिप घटक उन्नत शोध (Advanced Research) कर रहे छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिससे वे शोध कार्यों में संलग्न हो सकें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लक्ष्य समूह अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा में सहायता प्रदान करना।
वित्तीय परिव्यय वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक 3,509.39 करोड़ रुपये का व्यय।
लाभार्थी संख्या इसी अवधि में कुल 1,18,248 छात्रों को लाभ।
घटक प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई, विदेश में उच्च शिक्षा और उन्नत शोध के लिए फेलोशिप।
उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित कर सशक्त बनाना।

महत्व

सामाजिक सशक्तिकरण

  • यह योजना अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करके सामाजिक समानता और समावेश को बढ़ावा देती है।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करके इन वर्गों के छात्रों को मुख्यधारा में शामिल होने और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त करने में मदद करती है।

मानव पूंजी विकास

  • प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और उन्नत शोध के लिए सहायता प्रदान करके देश की मानव पूंजी को मजबूत करती है।
  • उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों से नवाचार, उद्यमिता और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

शैक्षणिक उत्कृष्टता

  • प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई और विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता देकर छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में सक्षम बनाती है।
  • शोध फेलोशिप के माध्यम से अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करती है, जिससे ज्ञान अर्थव्यवस्था को बल मिलता है।

चुनौतियाँ

1. योजना का प्रभावी क्रियान्वयन

  • योजना के लाभों को लक्षित लाभार्थियों तक कुशलतापूर्वक पहुंचाना एक चुनौती है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • फंड के उपयोग की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि दुरुपयोग को रोका जा सके।

2. गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और संस्थानों तक पहुंच

  • सभी छात्रों को समान रूप से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक अवसरों में असमानता को दूर करना आवश्यक है।

3. जागरूकता और सूचना का प्रसार

  • योजना के बारे में लक्षित समूह के बीच पर्याप्त जागरूकता की कमी हो सकती है, जिससे पात्र छात्र लाभ से वंचित रह सकते हैं।
  • योजना के घटकों और आवेदन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी सभी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

4. उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट दर

  • वित्तीय सहायता के बावजूद, सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा में छात्रों की ड्रॉपआउट दर एक चिंता का विषय बनी हुई है।
  • छात्रों को अकादमिक और भावनात्मक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
फंड का उपयोग आवंटित धनराशि का अधिकतम और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना।
लाभार्थियों की पहचान वास्तविक और पात्र छात्रों तक लाभ पहुंचाना।
क्षेत्रीय असमानता देश के विभिन्न क्षेत्रों में योजना के लाभों का समान वितरण सुनिश्चित करना।
योजना का प्रभाव योजना के दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार सुधार।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • श्रेयस योजना (Scholarships for Higher Education for Young Achievers Scheme)

आगे की राह

  • योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना।
  • छात्रों के बीच योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाना।
  • गुणवत्तापूर्ण कोचिंग संस्थानों और उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता में सुधार करना, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में।
  • छात्रों के प्रदर्शन और योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना ताकि आवश्यकतानुसार सुधार किए जा सकें।
  • छात्रों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ अकादमिक परामर्श और करियर मार्गदर्शन भी प्रदान करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

श्रेयस योजना · उच्च शिक्षा · सामाजिक न्याय · आर्थिक सशक्तिकरण · छात्रवृत्ति कार्यक्रम · अनुसूचित जाति (SC) · अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) · कौशल विकास · समावेशी विकास · सरकारी योजनाएँ

अवधारणा प्रवाह

सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SC/OBC)  →  उच्च शिक्षा तक सीमित पहुंच  →  श्रेयस योजना का शुभारंभ (वित्तीय सहायता)  →  प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, उच्च शिक्षा, शोध  →  शैक्षणिक सशक्तिकरण और कौशल विकास  →  सामाजिक समानता और मानव पूंजी निर्माण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. श्रेयस योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
2. इस योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग का प्रावधान है।
3. राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति घटक के अंतर्गत विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि श्रेयस योजना अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) दोनों के छात्रों को सहायता प्रदान करती है। कथन 2 सही है, योजना में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग शामिल है। कथन 3 भी सही है, राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति घटक विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा घटक श्रेयस योजना का हिस्सा नहीं है?

  1. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग
  2. प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता
  3. प्राथमिक शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति
  4. उन्नत शोध के लिए फेलोशिप

उत्तर: प्राथमिक शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति — श्रेयस योजना उच्च शिक्षा और संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित है। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता और उन्नत शोध के लिए फेलोशिप शामिल हैं। प्राथमिक शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति इस योजना का घटक नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के शैक्षिक सशक्तिकरण में श्रेयस योजना की भूमिका का परीक्षण कीजिए। क्या यह योजना समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रभावी रही है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: श्रेयस योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और लक्षित लाभार्थी (SC और OBC छात्र) बताते हुए।
2. योजना के प्रमुख घटक: निःशुल्क कोचिंग, टॉप क्लास शिक्षा, राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय फेलोशिप का विस्तार से वर्णन।
3. शैक्षिक सशक्तिकरण में भूमिका: यह कैसे इन वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और शोध में अवसर प्रदान करती है, इस पर प्रकाश डालना।
4. प्रभावशीलता का मूल्यांकन: योजना के तहत खर्च की गई राशि (3,509.39 करोड़ रुपये) और लाभान्वित छात्रों की संख्या (1,18,248) जैसे आंकड़ों का उल्लेख। प्रत्येक घटक के तहत लाभार्थियों और खर्च का विवरण।
5. समावेशी विकास के लक्ष्यों से संबंध: यह कैसे शिक्षा तक पहुंच बढ़ाकर सामाजिक असमानताओं को कम करने और आर्थिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में मदद करती है।
6. चुनौतियाँ और सुझाव (यदि कोई हों): योजना के कार्यान्वयन में संभावित बाधाएँ और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव (जैसे जागरूकता का अभाव, पहुंच की समस्या)।
7. निष्कर्ष: योजना के महत्व को दोहराते हुए और भविष्य के लिए इसकी क्षमता पर सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment