यूपीएससी/पीसीएस परीक्षा हेतु: आरबीआई द्वारा 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी

यूपीएससी/पीसीएस परीक्षा हेतु: आरबीआई द्वारा 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी — ट्रेजरी बिलों की नीलामी विवरण

यूपीएससी/पीसीएस परीक्षा हेतु: आरबीआई द्वारा 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — सरकारी बजट और राजकोषीय नीति  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: ट्रेजरी बिल (T-Bills), सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities – G-Secs), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), मुद्रा बाज़ार (Money Market), खुला बाज़ार परिचालन (Open Market Operations – OMO), गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding), रिटेल डायरेक्ट पोर्टल (Retail Direct Portal)
  • Essay: भारत में राजकोषीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि की चुनौतियाँ, मौद्रिक नीति और वित्तीय बाज़ारों का विनियमन: भारतीय संदर्भ

त्वरित पुनरावृत्ति: ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक, शून्य-कूपन ऋण साधन हैं जिनकी नीलामी RBI द्वारा सरकार की अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की जाती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिलों (Treasury Bills – T-Bills) की नीलामी की घोषणा की है, जिसका कुल अधिसूचित मूल्य 24,000 करोड़ रुपये है। यह नीलामी केंद्र सरकार की अल्पकालिक उधारी आवश्यकताओं को पूरा करने और बाज़ार में तरलता (Liquidity) को प्रबंधित करने के लिए एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। इस नीलामी में खुदरा निवेशकों (Retail Investors) सहित विभिन्न संस्थागत निवेशक गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर भाग ले सकते हैं, जिससे सरकारी प्रतिभूतियों में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होती है।

पृष्ठभूमि

  • ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि (Maturity Period) एक वर्ष से कम होती है।
  • ये मुद्रा बाज़ार (Money Market) के महत्वपूर्ण घटक हैं और इनका उपयोग सरकार अपनी अल्पकालिक निधि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करती है।
  • भारत में ट्रेजरी बिल तीन परिपक्वता अवधियों में जारी किए जाते हैं: 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन।
  • ट्रेजरी बिल ‘शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ’ (Zero-Coupon Securities) होती हैं, जिसका अर्थ है कि इन पर कोई ब्याज भुगतान नहीं किया जाता है। इन्हें अंकित मूल्य (Face Value) से छूट पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भारत सरकार की ओर से ट्रेजरी बिलों की नीलामी का संचालन करता है, जो केंद्र सरकार के ऋण प्रबंधक के रूप में कार्य करता है।
  • ये सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities – G-Secs) देश की वित्तीय प्रणाली में एक सुरक्षित निवेश विकल्प मानी जाती हैं और बैंकों, वित्तीय संस्थानों तथा अन्य निवेशकों द्वारा तरलता प्रबंधन के लिए उपयोग की जाती हैं।

ट्रेजरी बिल क्या हैं?

  • ट्रेजरी बिल (T-Bills) भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं जिनकी परिपक्वता अवधि 364 दिनों से कम होती है।
  • ये भारतीय मुद्रा बाज़ार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और सरकार की अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं।
  • ट्रेजरी बिल शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ होती हैं, जिसका अर्थ है कि इन पर कोई आवधिक ब्याज भुगतान नहीं होता है। इन्हें अंकित मूल्य से कम पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है।
  • भारत में, ट्रेजरी बिल तीन मानक परिपक्वता अवधियों में उपलब्ध हैं: 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) केंद्र सरकार की ओर से इनकी नीलामी करता है, जो एक निर्धारित कैलेंडर के अनुसार आयोजित की जाती है।
  • नीलामी में प्रतिस्पर्धी (Competitive) और गैर-प्रतिस्पर्धी (Non-Competitive) दोनों तरह की बोलियाँ स्वीकार की जाती हैं, जिससे छोटे निवेशकों को भी भागीदारी का अवसर मिलता है।
  • ट्रेजरी बिल अत्यधिक तरल होते हैं और इन्हें द्वितीयक बाज़ार (Secondary Market) में आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है।
  • ये बैंकों के सांविधिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio – SLR) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी एक पात्र निवेश हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) की नीलामी सरकार के अल्पकालिक ऋण प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उपकरण।
91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय अवधि सरकार की विभिन्न अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु लचीलापन प्रदान करती है।
कुल अधिसूचित राशि ₹24,000 करोड़ सरकार की तात्कालिक नकदी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक धनराशि जुटाना।
गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding) का प्रावधान छोटे निवेशकों (जैसे खुदरा निवेशक, राज्य सरकारें) को नीलामी में भाग लेने और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने का अवसर प्रदान करता है।
RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से भागीदारी खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को सुलभ और सुविधाजनक बनाना।
एकाधिक मूल्य विधि (Multiple Price Method) का उपयोग बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करता है, जिससे निवेशकों को उनकी बोली के अनुसार प्रतिभूतियां प्राप्त होती हैं।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ट्रेजरी बिलों की नीलामी सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को वित्तपोषित करने और अल्पकालिक नकदी आवश्यकताओं को पूरा करने का एक प्राथमिक तरीका है।
  • यह सरकारी प्रतिभूति बाजार में तरलता (Liquidity) बनाए रखने में मदद करता है, जिससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित होती है।
  • ट्रेजरी बिलों की उपज (Yield) अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए एक बेंचमार्क के रूप में कार्य करती है, जो अर्थव्यवस्था में अन्य ऋण उत्पादों को प्रभावित करती है।

राजकोषीय प्रबंधन

  • भारत सरकार के लिए यह अपनी व्यय आवश्यकताओं को पूरा करने और राजस्व संग्रह तथा व्यय के बीच के अंतर को पाटने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
  • यह सरकार को बाजार से धन उधार लेने की अनुमति देता है, जिससे उसे विकासात्मक परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं के लिए धन उपलब्ध होता है।

मौद्रिक नीति

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा ट्रेजरी बिलों की नीलामी खुले बाजार परिचालन (Open Market Operations – OMO) का एक अप्रत्यक्ष हिस्सा है, जिसके माध्यम से वह अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को प्रभावित करता है।
  • यह बाजार में तरलता को अवशोषित या इंजेक्ट करने में मदद करता है, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

निवेशकों के लिए

  • ट्रेजरी बिल सुरक्षित और जोखिम-मुक्त निवेश विकल्प प्रदान करते हैं, क्योंकि वे भारत सरकार द्वारा समर्थित होते हैं।
  • यह खुदरा निवेशकों सहित विभिन्न प्रकार के निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में भाग लेने और अपनी बचत पर प्रतिफल अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

1. बढ़ता सरकारी ऋण

  • लगातार ट्रेजरी बिलों की नीलामी सरकार के बढ़ते ऋण भार को दर्शाती है, जो भविष्य में ब्याज भुगतान के बोझ को बढ़ा सकता है।
  • उच्च ऋण-से-GDP अनुपात देश की वित्तीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

2. बाजार तरलता पर प्रभाव

  • बड़ी मात्रा में ट्रेजरी बिलों की नीलामी बाजार से तरलता को अवशोषित कर सकती है, जिससे निजी क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है (क्राउडिंग आउट प्रभाव)।
  • यह ब्याज दरों पर ऊपर की ओर दबाव डाल सकता है, जिससे निवेश और आर्थिक संवृद्धि बाधित हो सकती है।

3. ब्याज दर जोखिम

  • ब्याज दरों में अप्रत्याशित वृद्धि सरकार के लिए उधार लेने की लागत को बढ़ा सकती है, जिससे राजकोषीय प्रबंधन पर दबाव पड़ सकता है।
  • उच्च ब्याज दरें निवेशकों के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं, क्योंकि यह उनकी प्रतिभूतियों के मूल्य को प्रभावित कर सकती हैं।

4. खुदरा भागीदारी की सीमाएं

  • गैर-प्रतिस्पर्धी बोली और RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के बावजूद, खुदरा निवेशकों की भागीदारी अभी भी संस्थागत निवेशकों की तुलना में सीमित है।
  • जागरूकता की कमी और प्रक्रियात्मक जटिलताएँ छोटे निवेशकों के लिए बाधाएँ उत्पन्न कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च अधिसूचित राशि सरकार के बढ़ते राजकोषीय घाटे और ऋण संचयन का संकेत।
बाजार से तरलता का अवशोषण निजी क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता में कमी (क्राउडिंग आउट) और ब्याज दरों में वृद्धि का जोखिम।
ब्याज दर में उतार-चढ़ाव सरकार के लिए उधार लेने की लागत में अनिश्चितता और निवेशकों के लिए मूल्य जोखिम।
खुदरा निवेशकों की सीमित पहुंच वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा और पूंजी बाजार की गहराई में कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • RBI रिटेल डायरेक्ट योजना (RBI Retail Direct Scheme)

आगे की राह

  • राजकोषीय सुदृढ़ीकरण (Fiscal Consolidation) के प्रयासों को जारी रखना ताकि सरकार की उधार लेने की आवश्यकता कम हो सके।
  • सरकारी व्यय को तर्कसंगत बनाना और राजस्व संग्रह में सुधार करना ताकि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित किया जा सके।
  • सरकारी प्रतिभूति बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान और सरल प्रक्रियाएं लागू करना।
  • एक मजबूत और पारदर्शी सरकारी प्रतिभूति बाजार विकसित करना जो विभिन्न प्रकार के निवेशकों को आकर्षित कर सके।
  • दीर्घकालिक ऋण प्रबंधन रणनीतियों को अपनाना ताकि अल्पकालिक ऋण पर निर्भरता कम हो सके और ब्याज दर जोखिमों का प्रबंधन किया जा सके।
  • मौद्रिक नीति और राजकोषीय नीति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि आर्थिक स्थिरता और संवृद्धि को बढ़ावा मिल सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) · अल्पकालिक ऋण साधन · राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) · भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) · सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities) · मुद्रा बाजार (Money Market) · खुले बाजार परिचालन (Open Market Operations) · सरकारी ऋण प्रबंधन · गैर-प्रतिस्पर्धी बोली · खुदरा निवेशक · तरलता प्रबंधन (Liquidity Management) · सार्वजनिक ऋण कार्यालय (Public Debt Office)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 266(1)’, ‘note’: ‘भारत की संचित निधि से संबंधित प्रावधान’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार को धन की आवश्यकता होती है (राजकोषीय घाटा)  →  भारतीय रिज़र्व बैंक ट्रेजरी बिलों की नीलामी की घोषणा करता है  →  निवेशक (बैंक, वित्तीय संस्थान, खुदरा) बोली लगाते हैं  →  सफल बोलीदाताओं को ट्रेजरी बिल आवंटित किए जाते हैं  →  सरकार को धन प्राप्त होता है, निवेशक प्रतिफल अर्जित करते हैं  →  यह सरकार के अल्पकालिक ऋण का प्रबंधन करता है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. ट्रेजरी बिलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं।
2. वे केवल 364 दिनों की परिपक्वता अवधि के लिए जारी किए जाते हैं।
3. ट्रेजरी बिलों पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज का भुगतान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है। कथन 2 गलत है। ट्रेजरी बिल 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन की विभिन्न परिपक्वता अवधियों के लिए जारी किए जाते हैं। कथन 3 गलत है। ट्रेजरी बिल ‘शून्य-कूपन प्रतिभूति’ (Zero-Coupon Security) होते हैं, जिसका अर्थ है कि उन पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। उन्हें अंकित मूल्य से छूट पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है, जिससे निवेशक को लाभ होता है।

Q2. भारत में सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के संदर्भ में, ‘गैर-प्रतिस्पर्धी बोली’ (Non-Competitive Bidding) का क्या अर्थ है?

  1. यह एक ऐसी बोली है जिसमें निवेशक प्रतिभूति के लिए अपनी पसंदीदा कीमत और मात्रा निर्दिष्ट करते हैं।
  2. यह एक ऐसी बोली है जिसमें छोटे निवेशक और संस्थाएँ बिना कीमत निर्दिष्ट किए बोली लगा सकते हैं, और उन्हें औसत नीलामी मूल्य पर आवंटन प्राप्त होता है।
  3. यह एक ऐसी बोली है जो केवल विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित होती है।
  4. यह एक ऐसी बोली है जिसमें केवल भारतीय रिज़र्व बैंक ही भाग ले सकता है।

उत्तर: यह एक ऐसी बोली है जिसमें छोटे निवेशक और संस्थाएँ बिना कीमत निर्दिष्ट किए बोली लगा सकते हैं, और उन्हें औसत नीलामी मूल्य पर आवंटन प्राप्त होता है। — गैर-प्रतिस्पर्धी बोली योजना छोटे निवेशकों (जैसे खुदरा निवेशक, राज्य सरकारें, भविष्य निधि) को सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में भाग लेने की अनुमति देती है, बिना कीमत की प्रतिस्पर्धा में शामिल हुए। उन्हें नीलामी के भारित औसत मूल्य पर प्रतिभूतियाँ आवंटित की जाती हैं, जिससे उनकी भागीदारी आसान हो जाती है और बाजार में विविधता आती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सरकार के राजकोषीय घाटे के प्रबंधन में ट्रेजरी बिलों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, भारतीय अर्थव्यवस्था में तरलता प्रबंधन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ट्रेजरी बिलों के उपयोग पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, ट्रेजरी बिलों को सरकार के अल्पकालिक ऋण साधन के रूप में परिभाषित करें और बताएं कि वे राजकोषीय घाटे को कैसे वित्तपोषित करते हैं। इसके लाभों (कम लागत, लचीलापन) और संभावित कमियों (अल्पकालिक प्रकृति, रोलओवर जोखिम) पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तरलता प्रबंधन के लिए ट्रेजरी बिलों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करें, विशेष रूप से खुले बाजार परिचालन (OMO) और तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के संदर्भ में। निष्कर्ष में, राजकोषीय और मौद्रिक नीति के बीच संबंध स्थापित करते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।

स्रोत: RBI


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment