माईगॉव से बढ़ी नीति-निर्माण में नागरिक भागीदारी: बजट, एनईपी, आधार सुधार

माईगॉव से बढ़ी नीति-निर्माण में नागरिक भागीदारी: बजट, एनईपी, आधार सुधार

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय।  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता: शासन और नैतिकता में दार्शनिक आधार, सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, आचार संहिता, नागरिक चार्टर, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, सार्वजनिक धन का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।
  • Prelims: माईगॉव प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस, नागरिक सहभागिता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, आधार प्रमाणीकरण, पारदर्शिता, जवाबदेही
  • Essay: लोकतांत्रिक शासन में नागरिक सहभागिता का महत्व, डिजिटल इंडिया: शासन में नागरिकों को सशक्त बनाना

त्वरित पुनरावृत्ति: माईगॉव (MyGov) भारत सरकार का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो नागरिकों को नीति-निर्माण और शासन प्रक्रिया में सीधे भाग लेने और अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार के माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म ने नागरिक सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जिसमें 6.32 करोड़ से अधिक नागरिक पंजीकृत हैं और विभिन्न राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों जैसे केंद्रीय बजट, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP), डेटा संरक्षण और आधार (Aadhaar) सुधारों पर सार्वजनिक परामर्श में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिकों के विचारों और सुझावों को शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

पृष्ठभूमि

  • माईगॉव प्लेटफॉर्म को नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी निकायों और मंत्रालयों के साथ मिलकर नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
  • यह प्लेटफॉर्म जनहित और लोक कल्याण से जुड़े विषयों पर नागरिकों के विचार और सुझाव प्राप्त करता है, जिससे सरकार को अधिक समावेशी और प्रभावी नीतियाँ बनाने में मदद मिलती है।
  • नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए माईगॉव चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, पोल, सर्वेक्षण और जमीनी स्तर की गतिविधियों जैसी अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
  • प्लेटफॉर्म ने अपने उपयोगकर्ता आधार और जुड़ाव के आँकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, जो नागरिकों की शासन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की बढ़ती इच्छा को दर्शाता है।
  • माईगॉव ने बहुभाषी सहायता (12 भाषाओं में), मोबाइल एप्लिकेशन और मजबूत डिजिटल व सोशल मीडिया उपस्थिति के माध्यम से अपनी पहुँच और समावेशिता का विस्तार किया है।
  • प्लेटफॉर्म पर संकलित राय और सुझाव संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ नीतियों, योजनाओं या कार्यक्रमों को तैयार करने या उनकी समीक्षा करने के दौरान विचारार्थ साझा किए जाते हैं, हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित मंत्रालय का विशेषाधिकार रहता है।

माईगॉव प्लेटफॉर्म क्या है?

  • माईगॉव भारत सरकार का एक नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को नीति-निर्माण और शासन प्रक्रिया में सीधे भाग लेने के लिए एक मंच प्रदान करना है।
  • यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को सार्वजनिक परामर्श, चर्चा, सर्वेक्षण और पोल आयोजित करने में सक्षम बनाता है।
  • नागरिक विभिन्न राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपने विचार, सुझाव और प्रतिक्रिया साझा कर सकते हैं, जैसे कि बजट, नीतियाँ, योजनाएँ और कार्यक्रम।
  • यह प्लेटफॉर्म पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ावा देता है, क्योंकि यह नागरिकों को सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने का अवसर देता है।
  • माईगॉव ने अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए बहुभाषी समर्थन (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएँ) और एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन प्रदान किया है।
  • यह ‘जनभागीदारी’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि नागरिक सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं।
  • प्लेटफॉर्म पर प्राप्त सुझावों को संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करने या संशोधित करने के लिए विचार किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बहुभाषी सहायता भाषाई बाधाओं को दूर कर 12 भाषाओं में उपलब्धता सुनिश्चित करना, जिससे व्यापक नागरिक भागीदारी संभव हो सके।
मोबाइल पहुंच समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से देश के बड़े मोबाइल उपयोगकर्ता आधार तक पहुंच बनाना, जिससे सहभागिता सुगम हो।
विस्तारित पहुंच डिजिटल और सोशल मीडिया उपस्थिति को मजबूत करके शासन प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाना।
प्लेटफॉर्म की उपयोगिता उपयोगकर्ता अनुभव और सामान्य पहुंच को बेहतर बनाने के लिए वेब इंटरफ़ेस का नियमित अद्यतन।
विभिन्न सहभागिता प्रणालियाँ चर्चाएँ, रचनात्मक गतिविधियाँ, पोल, सर्वेक्षण और जमीनी स्तर की गतिविधियाँ प्रदान करना, जिससे नागरिकों को कई तरीकों से जुड़ने का अवसर मिले।

महत्व

शासन में नागरिक भागीदारी

  • माईगॉव प्लेटफॉर्म नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे शासन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) बढ़ती है।
  • यह सरकार और नागरिकों के बीच एक सीधा संवाद स्थापित करता है, जिससे नीतियों को जमीनी हकीकत के अधिक करीब लाया जा सके।

लोकतंत्र का सशक्तिकरण

  • नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) मजबूत होता है, जहाँ नागरिक केवल मतदाता नहीं बल्कि नीति-निर्माता भी होते हैं।
  • यह नागरिकों में अपने देश के शासन के प्रति स्वामित्व की भावना को बढ़ावा देता है।

नीति-निर्माण की गुणवत्ता में सुधार

  • विभिन्न पृष्ठभूमि और अनुभवों वाले नागरिकों के सुझावों से नीतियों को अधिक समावेशी (Inclusive) और प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।
  • यह सरकार को विभिन्न मुद्दों पर जनमत को समझने और उसके अनुसार नीतियों को ढालने में सहायता करता है।

डिजिटल साक्षरता और समावेशन

  • यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके सरकारी प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) को बढ़ावा मिलता है।
  • बहुभाषी समर्थन और मोबाइल पहुंच के माध्यम से यह डिजिटल विभाजन (Digital Divide) को कम करने का प्रयास करता है।

चुनौतियाँ

1. प्रतिनिधित्व की समस्या

  • माईगॉव पर सक्रिय नागरिक एक विशिष्ट वर्ग का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिससे सभी वर्गों की आवाज़ें समान रूप से नहीं सुनी जा सकतीं।
  • डिजिटल पहुंच और साक्षरता की कमी वाले ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

2. सुझावों का प्रभावी कार्यान्वयन

  • नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों को संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा कितनी गंभीरता से लिया जाता है और उन्हें नीतियों में कितना शामिल किया जाता है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
  • कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report – ATR) की पारदर्शिता और सार्वजनिक उपलब्धता की कमी से नागरिकों का विश्वास कम हो सकता है।

3. गलत सूचना और दुष्प्रचार

  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना (Misinformation) और दुष्प्रचार (Disinformation) का प्रसार नागरिक परामर्श की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
  • विचारों की भीड़ में सार्थक और रचनात्मक सुझावों को पहचानना एक चुनौती हो सकती है।

4. डिजिटल विभाजन

  • भारत में अभी भी एक बड़ा वर्ग इंटरनेट और स्मार्टफोन से वंचित है, जिससे उनकी भागीदारी सीमित हो जाती है।
  • तकनीकी ज्ञान की कमी भी कुछ नागरिकों को प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से रोक सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमित प्रतिनिधित्व प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नागरिक समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं करते, जिससे समावेशिता प्रभावित होती है।
सुझावों का कार्यान्वयन नागरिकों के सुझावों को नीति-निर्माण में कितनी प्रभावी ढंग से शामिल किया जाता है, इस पर स्पष्टता की कमी।
डिजिटल साक्षरता का अभाव ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण भागीदारी में बाधा।
गलत सूचना का प्रसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना और दुष्प्रचार की संभावना, जो परामर्श की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
प्रतिक्रिया तंत्र की कमी नागरिकों को उनके सुझावों पर की गई कार्रवाई के बारे में पर्याप्त प्रतिक्रिया न मिलना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP)-2020
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक (Digital Personal Data Protection Bill)-2022
  • आधार प्रमाणीकरण नियम (Aadhaar Authentication Rules)-2020

आगे की राह

  • डिजिटल साक्षरता अभियान चलाकर और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाकर डिजिटल विभाजन को कम करना।
  • माईगॉव प्लेटफॉर्म को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी तकनीकी समझ सीमित है।
  • नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों पर की गई कार्रवाई के संबंध में एक पारदर्शी और सुलभ प्रतिक्रिया तंत्र (Feedback Mechanism) स्थापित करना।
  • विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को नागरिक सुझावों को नीति-निर्माण में शामिल करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना और दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना।
  • नागरिक भागीदारी के प्रभाव का नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन कराना, ताकि प्लेटफॉर्म की प्रभावशीलता में सुधार किया जा सके।
  • विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लक्षित आउटरीच कार्यक्रम चलाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नागरिक सहभागिता · ई-शासन · लोक नीति निर्माण · माईगॉव प्लेटफॉर्म · डिजिटल इंडिया · पारदर्शिता · जवाबदेही · सुशासन

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा माईगॉव प्लेटफॉर्म की शुरुआत  →  नागरिकों द्वारा विभिन्न नीतियों पर सुझाव/विचार प्रस्तुत करना  →  माईगॉव द्वारा सुझावों का संकलन  →  संकलित सुझावों को संबंधित मंत्रालयों/विभागों को भेजना  →  मंत्रालयों/विभागों द्वारा नीति-निर्माण में सुझावों पर विचार  →  नागरिकों की भागीदारी से बेहतर और समावेशी नीतियों का निर्माण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केंद्र सरकार द्वारा नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
2. यह केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ताकि एकरूपता बनी रहे।
3. यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रस्तावित चर्चाओं, पोल और सर्वेक्षणों की मेजबानी करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि माईगॉव का उद्देश्य नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह प्लेटफॉर्म 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं) में उपलब्ध है। कथन 3 सही है क्योंकि यह विभिन्न सरकारी निकायों के साथ मिलकर कार्य करता है।

Q2. भारत में नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए माईगॉव प्लेटफॉर्म द्वारा अपनाई गई पहलों में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल हैं?
1. बहुभाषी सहायता प्रदान करना।
2. एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च करना।
3. डिजिटल और सोशल मीडिया उपस्थिति को मजबूत करना।
4. केवल सरकारी अधिकारियों के लिए चर्चा मंच उपलब्ध कराना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — कथन 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि ये सभी माईगॉव द्वारा समावेशिता और सुगम पहुंच बढ़ाने के लिए किए गए सुधार हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि माईगॉव का उद्देश्य नागरिकों को चर्चा मंचों में शामिल करना है, न कि केवल सरकारी अधिकारियों को।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ माईगॉव (MyGov) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत में नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को किस प्रकार सुदृढ़ कर रहे हैं? इस संदर्भ में, सुशासन को बढ़ावा देने में इन पहलों के महत्व का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत माईगॉव प्लेटफॉर्म के परिचय और उसके उद्देश्यों से करें। बताएं कि यह चर्चाओं, पोल और सर्वेक्षणों के माध्यम से नागरिकों को नीति-निर्माण में कैसे शामिल करता है। इसके बाद, सुशासन के विभिन्न पहलुओं जैसे पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें। बहुभाषी समर्थन और मोबाइल पहुंच जैसे सुधारों का उल्लेख करें। अंत में, इसकी सीमाओं और चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें, जैसे कि सुझावों को अंतिम नीतियों में शामिल करने में मंत्रालयों का विशेषाधिकार और डिजिटल विभाजन की समस्या, और एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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