जलवायु संकट: वैश्विक आपदाओं का बढ़ता खतरा, जानिए कारण और समाधान

जलवायु संकट: वैश्विक आपदाओं का बढ़ता खतरा, जानिए कारण और समाधान

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (जलवायु विज्ञान, आपदाएँ)  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, संरक्षण), आपदा प्रबंधन
  • Prelims: जलवायु परिवर्तन, जीवाश्म ईंधन, वैश्विक तापन, जंगल की आग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, WMO, UNFCCC
  • Essay: जलवायु परिवर्तन: मानव अस्तित्व के लिए एक आसन्न खतरा, सतत विकास और जलवायु कार्रवाई: एक अनिवार्य संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट है, जिसके लिए जीवाश्म ईंधन से दूर हटकर स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करके तत्काल और समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने हाल ही में चेतावनी दी है कि जीवाश्म ईंधन पर मानवता की ‘लत’ के कारण जलवायु-जनित आपदाएँ ‘दुःस्वप्न के अनुपात’ तक पहुँच रही हैं। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन (UN Climate Change) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि ‘जलवायु अलार्म हर दिशा से बज रहा है’ और जलवायु संकट की मानवीय और आर्थिक लागत अब राष्ट्रीय आपातकाल के स्तर पर पहुँच रही है। यह चेतावनी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, चिली और जापान सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ जंगल की आग, अत्यधिक गर्मी और घातक तूफानों के बीच आई है।

पृष्ठभूमि

  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालिक परिवर्तन को संदर्भित करता है, जो मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों, विशेषकर जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के जलने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण होता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की रिपोर्टें लगातार इस बात पर जोर देती रही हैं कि वैश्विक तापन (Global Heating) के लिए मानवीय गतिविधियाँ ही प्रमुख कारण हैं।
  • पेरिस समझौता (Paris Agreement) एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसे 2015 में अपनाया गया था। इसका लक्ष्य वैश्विक तापन को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2°C से काफी नीचे, और अधिमानतः 1.5°C तक सीमित करना है।
  • जंगल की आग (Wildfires) और अत्यधिक गर्मी की लहरें (Heatwaves) जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष परिणाम हैं, जो पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचाती हैं, वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं और मानव जीवन तथा आजीविका को खतरे में डालती हैं।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) के महत्व पर जोर देता है, ताकि सरकारों और समुदायों को जलवायु-जनित आपदाओं के लिए समय पर तैयारी करने में मदद मिल सके।
  • विकासशील देश, विशेष रूप से छोटे द्वीप विकासशील राज्य (SIDS) और कम विकसित देश (LDCs), जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, जबकि ऐतिहासिक रूप से उनके उत्सर्जन में सबसे कम योगदान रहा है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसी पहलें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में भारत के प्रयासों को दर्शाती हैं।
  • भारत ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management Plan) के तहत जलवायु परिवर्तन से संबंधित आपदाओं के प्रबंधन के लिए भी कई कदम उठाए हैं।

जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन से तात्पर्य पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में होने वाले दीर्घकालिक परिवर्तनों से है, जिसमें तापमान, वर्षा पैटर्न और चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति शामिल है।
  • इसका प्राथमिक कारण कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों का वायुमंडल में उत्सर्जन है, जो मानवीय गतिविधियों जैसे जीवाश्म ईंधन के जलने, वनों की कटाई और औद्योगिक प्रक्रियाओं से होता है।
  • वैश्विक तापन (Global Warming) जलवायु परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें पृथ्वी के औसत सतह तापमान में वृद्धि होती है, जिससे ग्लेशियर पिघलते हैं और समुद्र का स्तर बढ़ता है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में अत्यधिक गर्मी की लहरें, सूखा, बाढ़, जंगल की आग, तूफान की तीव्रता में वृद्धि और समुद्र के अम्लीकरण शामिल हैं, जो कृषि, जल संसाधनों और जैव विविधता को प्रभावित करते हैं।
  • इन प्रभावों से खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिससे विस्थापन और आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।
  • शमन (Mitigation) के प्रयासों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना शामिल है, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों को अपनाना और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना।
  • अनुकूलन (Adaptation) के प्रयासों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होना शामिल है, जैसे कि प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना, जलवायु-लचीली अवसंरचना का निर्माण करना और जल प्रबंधन में सुधार करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वित्तपोषण जलवायु परिवर्तन से निपटने और विकासशील देशों को इसके प्रभावों के प्रति अधिक लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम घटनाओं का मुख्य चालक।
बढ़ते जंगल की आग यूरोप, उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विनाश, विस्थापन और आर्थिक क्षति।
रिकॉर्ड तोड़ तापमान मानव जीवन, आजीविका और बुनियादी ढांचे पर गंभीर दबाव, विशेषकर उत्तरी अफ्रीका और जापान में।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता जलवायु संकट से निपटने और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए वैश्विक समन्वय महत्वपूर्ण।
प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आपदाओं के प्रभावों को कम करने और समुदायों को तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते वैश्विक तापमान से पारिस्थितिक तंत्रों पर गंभीर दबाव पड़ रहा है, जिससे जैव विविधता का नुकसान हो रहा है और प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
  • जंगल की आग, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाएँ प्राकृतिक संसाधनों को ख़त्म कर रही हैं और पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ रही हैं।

आर्थिक महत्व

  • जलवायु-प्रेरित आपदाएँ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुँचा रही हैं, जिससे कृषि, पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
  • जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तन से नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी, लेकिन इसके लिए बड़े निवेश और नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है।

सामाजिक महत्व

  • चरम मौसम की घटनाएँ बड़े पैमाने पर विस्थापन, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य संकट पैदा कर रही हैं, जिससे कमजोर समुदायों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ और आपदा तैयारी उपाय जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल बनने में मदद मिलती है।

चुनौतियाँ

1. जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता

  • वैश्विक ऊर्जा प्रणालियों में जीवाश्म ईंधन का प्रभुत्व कार्बन उत्सर्जन का मुख्य स्रोत है, जिससे वैश्विक तापन बढ़ रहा है।
  • स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में संक्रमण की धीमी गति जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को बाधित कर रही है।

2. चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि

  • जंगल की आग, बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी की लहरें अधिक बार और तीव्र हो रही हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है।
  • इन आपदाओं से निपटने के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा और तैयारी कमजोर देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव

  • जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है जिसके लिए समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की आवश्यकता है, लेकिन विभिन्न देशों के बीच लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं में अंतर है।
  • विकासशील देशों को जलवायु अनुकूलन और शमन के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता की कमी एक बड़ी बाधा है।

4. प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की कमी

  • कई क्षेत्रों में विश्वसनीय निगरानी, पूर्वानुमान और सीमा-पार डेटा साझाकरण प्रणालियों की कमी है, जिससे आपदाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करना मुश्किल हो जाता है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि और वैश्विक तापन।
जंगल की आग का प्रसार पारिस्थितिक तंत्र का विनाश, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम।
अत्यधिक गर्मी की लहरें मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव, बिजली प्रणालियों पर दबाव और कृषि उत्पादकता में कमी।
कमजोर देशों की सहायता जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता की कमी।
प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की अपर्याप्तता आपदाओं के लिए तैयारी और प्रतिक्रिया में देरी, जिससे जान-माल का अधिक नुकसान।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • Early Warnings for All initiative

आगे की राह

  • जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा में तेजी से संक्रमण को बढ़ावा देना।
  • जलवायु अनुकूलन उपायों में निवेश बढ़ाना, विशेषकर कमजोर समुदायों और देशों के लिए।
  • जंगल की आग, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं की निगरानी, पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना।
  • वनों की कटाई को रोकना और वनीकरण तथा पुनर्वनीकरण प्रयासों को बढ़ावा देना।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वित्तीय सहायता को बढ़ाना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और स्थायी जीवन शैली को प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जलवायु परिवर्तन · जीवाश्म ईंधन · अक्षय ऊर्जा · वन संरक्षण · चरम मौसमी घटनाएँ · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · सतत विकास · आपदा जोखिम न्यूनीकरण · कार्बन उत्सर्जन

अवधारणा प्रवाह

जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक दहन  →  कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि  →  वैश्विक तापन और जलवायु परिवर्तन  →  चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि  →  मानव, आर्थिक और पर्यावरणीय संकट

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन (UN Climate Change) के कार्यकारी सचिव के अनुसार, जीवाश्म ईंधन पर मानवता की ‘लत’ के कारण जलवायु-जनित आपदाएँ ‘दुःस्वप्न’ के अनुपात तक पहुँच रही हैं।
2. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने ‘सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी’ (Early Warnings for All) पहल के माध्यम से मानकीकृत ढाँचे को बढ़ावा देकर और अंतर-संचालनीयता (interoperability) को बढ़ाकर इन प्रयासों को आगे बढ़ाया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा है कि जीवाश्म ईंधन पर मानवता की निर्भरता के कारण जलवायु-जनित आपदाएँ ‘दुःस्वप्न’ के अनुपात तक पहुँच रही हैं। कथन 2 सही है। WMO ‘सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी’ पहल के माध्यम से मानकीकृत ढाँचे को बढ़ावा देकर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर इन प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।

Q2. जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली अत्यधिक गर्मी की लहरें, गंभीर बाढ़ और हिंसक तूफान अधिक बारंबार, अधिक तीव्र और अधिक महंगे होते जा रहे हैं।
2. वनाग्नि (wildfire) से निकलने वाला धुआँ हजारों किलोमीटर की यात्रा कर सकता है, जिससे सीमाएँ, महासागर और महाद्वीप पार हो सकते हैं।
3. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए कोयला, तेल और गैस को तेजी से छोड़ना तथा अक्षय ऊर्जा को बढ़ाना आवश्यक है।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है। वैश्विक तापन (global heating) के कारण अत्यधिक गर्मी की लहरें, गंभीर बाढ़ और हिंसक तूफान अधिक बारंबार, तीव्र और महंगे होते जा रहे हैं। कथन 2 सही है। वनाग्नि से निकलने वाला धुआँ हजारों किलोमीटर की यात्रा कर सकता है, जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। कथन 3 सही है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जीवाश्म ईंधन से दूर जाना और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) को अपनाना महत्वपूर्ण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो रही ‘दुःस्वप्न’ जैसी आपदाओं के संदर्भ में, इसके प्रमुख कारणों और वैश्विक स्तर पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक समाधानों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों (जैसे जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग, वनोन्मूलन) और इसके वैश्विक प्रभावों (जैसे चरम मौसमी घटनाएँ, आर्थिक और मानवीय लागत) पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, इन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक समाधानों (जैसे अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना, वन संरक्षण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (जैसे WMO की पहल) की भूमिका को विस्तार से समझाएँ। निष्कर्ष में, सतत विकास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के महत्व पर बल दें।

स्रोत: news.un.org


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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