30 Jul संसद ने पारित किया ‘वंदे मातरम’ बिल, राज्यसभा में गरमागरम बहस
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय | GS Paper II — कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य—सरकार के मंत्रालय एवं विभाग; प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका | GS Paper I — भारतीय संस्कृति में प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।
- Prelims: वंदे मातरम, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, अनुच्छेद 51A (मौलिक कर्तव्य), संसद की विधायी प्रक्रिया, लोकसभा, राज्यसभा
- Essay: राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता: एक संतुलित परिप्रेक्ष्य, संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका और विधायी प्रक्रियाएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण प्रदान करता है, जिससे इसके अपमान को दंडनीय अपराध बनाया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ (Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है, जिससे इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है। इस विधेयक को लेकर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें विपक्ष ने इसे ‘हिंदुत्व एजेंडा’ बताया, जबकि सरकार ने इसे राष्ट्रीय गीत को उसका उचित सम्मान दिलाने का प्रयास करार दिया।
पृष्ठभूमि
- वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी और यह उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ था।
- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह देशभक्ति का प्रतीक बन गया।
- संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था।
- वर्तमान में, ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है।
- इस अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान का जानबूझकर अपमान करने पर तीन साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
- यह नया विधेयक ‘वंदे मातरम’ को भी इसी कानूनी दायरे में लाता है, जिससे इसके गायन को जानबूझकर रोकना या किसी सभा को बाधित करना, जहाँ इसे गाया जा रहा हो, एक आपराधिक कृत्य बन जाएगा।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में संशोधन करता है, ताकि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी इसके दायरे में लाया जा सके।
- इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण प्रदान करना है।
- विधेयक के अनुसार, जानबूझकर वंदे मातरम के गायन को रोकना या किसी ऐसी सभा को बाधित करना, जहाँ इसे गाया जा रहा हो, एक आपराधिक अपराध होगा।
- इस अपराध के लिए अधिकतम तीन साल की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
- बार-बार अपराध करने वालों के लिए न्यूनतम एक वर्ष की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।
- सरकार का तर्क है कि यह विधेयक राष्ट्रीय गीत को उसका उचित सम्मान बहाल करेगा, जबकि विपक्ष ने इसे धर्मनिरपेक्षता और संघवाद की भावना के विरुद्ध बताया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 | यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है। |
| राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण | यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ को वही कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है जो पहले से ही राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। |
| दंड का प्रावधान | जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ गाने से रोकना या किसी सभा को बाधित करना जहाँ इसे गाया जा रहा हो, एक आपराधिक अपराध होगा। |
| सजा | अपराधियों को तीन साल तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बार-बार अपराध करने वालों को न्यूनतम एक वर्ष की जेल होगी। |
| संसदीय कार्यवाही | यह विधेयक मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पारित होने वाला पहला विधेयक है। |
महत्व
राष्ट्रीय एकता और पहचान
- यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करके राष्ट्रीय एकता और पहचान को मजबूत करने का प्रयास करता है।
- यह राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देता है, जो देश की सामूहिक चेतना के लिए महत्वपूर्ण है।
कानूनी ढाँचा
- यह राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा प्रदान करता है, जिससे इसके अपमान के खिलाफ एक मजबूत कानूनी ढाँचा तैयार होता है।
- यह उन कृत्यों को दंडित करने का प्रावधान करता है जो राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर दर्शाते हैं, जिससे ऐसे कृत्यों पर रोक लगेगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
- यह विधेयक राष्ट्रीय गीत के महत्व पर सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देता है और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बीच इसके स्थान पर चर्चा को प्रोत्साहित करता है।
- यह सरकार के इस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राष्ट्रीय एजेंडा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चुनौतियाँ
1. धर्मनिरपेक्षता और संघवाद पर बहस
- विधेयक के विरोधियों का तर्क है कि ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों को अनिवार्य बनाना धर्मनिरपेक्षता (Secularism) और संघवाद (Federalism) की भावना के खिलाफ है।
- यह चिंता व्यक्त की गई है कि यह विधेयक एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा दे सकता है और धार्मिक अल्पसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: धर्मनिरपेक्षता, संघवाद
2. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित प्रभाव
- कुछ आलोचकों का मानना है कि यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) पर अंकुश लगा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो राष्ट्रीय गीत के कुछ पहलुओं से असहमत हैं।
- यह सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असहमति को आपराधिक कृत्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: मौलिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
3. संसदीय मर्यादा और गतिरोध
- विधेयक के पारित होने के दौरान और उसके बाद संसद में नारेबाजी और हंगामे ने संसदीय मर्यादाओं पर सवाल उठाए हैं।
- विपक्षी दलों द्वारा लगातार व्यवधान और सरकार द्वारा महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के प्रयासों के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संसद की कार्यप्रणाली
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राष्ट्रीय गीत के छंदों की अनिवार्यता | धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन। |
| अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असहमति को आपराधिक बनाना। |
| राजनीतिक ध्रुवीकरण | राष्ट्रीय प्रतीकों पर राजनीतिक बहस और विभाजन का बढ़ना। |
| संसदीय व्यवधान | विधेयकों के पारित होने के दौरान हंगामे और गतिरोध। |
आगे की राह
- सरकार को राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को बढ़ावा देने के साथ-साथ धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के सिद्धांतों का भी ध्यान रखना चाहिए।
- विधेयक के प्रावधानों पर व्यापक सार्वजनिक परामर्श और राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश विकसित किए जाने चाहिए।
- संसद में रचनात्मक बहस और चर्चा के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना महत्वपूर्ण है, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक विचार-विमर्श हो सके।
- राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और उनके इतिहास के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षिक अभियान चलाए जा सकते हैं।
- विधेयक के कार्यान्वयन के बाद इसके सामाजिक और कानूनी प्रभावों की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए ताकि किसी भी अनपेक्षित परिणाम को संबोधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 · वंदे मातरम · राष्ट्रीय गीत · राष्ट्रीय प्रतीक · संसदीय कार्यवाही · लोकसभा · राज्यसभा · संघवाद · धर्मनिरपेक्षता · संवैधानिक नैतिकता · अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता · कानूनी संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(1)(a): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
- अनुच्छेद 25-28: धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
- अनुच्छेद 51A(a): मौलिक कर्तव्य – संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया। → विधेयक का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा देना है। → लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित हुआ, राज्यसभा में बहस जारी रही। → विधेयक के प्रावधानों में ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर दंड का प्रावधान है। → विधेयक के पारित होने पर धर्मनिरपेक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छिड़ी।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है।
2. यह विधेयक वंदे मातरम को वही कानूनी संरक्षण प्रदान करता है जो पहले से ही राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है।
3. इस विधेयक के तहत, वंदे मातरम के गायन को जानबूझकर रोकना या किसी ऐसे समारोह को बाधित करना जहाँ इसे गाया जा रहा हो, एक आपराधिक अपराध होगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक का मुख्य उद्देश्य वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय बनाना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि विधेयक राष्ट्रगान के समान ही कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विधेयक जानबूझकर गायन को रोकने या बाधित करने को आपराधिक अपराध बनाता है।
Q2. अभिकथन (A): राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा द्वारा पारित किया गया है।
कारण (R): यह विधेयक वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किया गया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देना है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या भी है क्योंकि विधेयक को पारित करने का एक मुख्य कारण यही है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। क्या आपको लगता है कि यह विधेयक संघवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के साथ सामंजस्य बिठाता है? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: विधेयक का संक्षिप्त परिचय और इसका उद्देश्य।
2. विधेयक के प्रमुख प्रावधान: वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय बनाना, राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण, दंड का प्रावधान (3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों, बार-बार अपराध करने पर न्यूनतम 1 साल की कैद)।
3. संघवाद के सिद्धांत पर प्रभाव: राज्यों पर राष्ट्रीय गीत के गायन से संबंधित नियमों को लागू करने का संभावित दबाव, विविधता और स्थानीय स्वायत्तता पर बहस।
4. धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर प्रभाव: कुछ वर्गों द्वारा ‘हिंदुत्व एजेंडा’ के रूप में देखे जाने की आलोचना, सभी छह छंदों को अनिवार्य करने पर विवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद का मुद्दा।
5. संवैधानिक नैतिकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन, न्यायिक समीक्षा की संभावना।
6. निष्कर्ष: राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के महत्व को स्वीकार करते हुए, संघवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के साथ संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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