भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक 2026: लोकसभा में पेश होने को तैयार, जानें प्रमुख बदलाव

भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक 2026: लोकसभा में पेश होने को तैयार, जानें प्रमुख बदलाव

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), राष्ट्रीय महत्व का संस्थान, भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959, भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026, सांविधिक ढाँचा, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, अकादमिक परिषद, डेटा वैज्ञानिक
  • Essay: भारत में सांख्यिकीय शिक्षा और अनुसंधान का भविष्य, राष्ट्रीय विकास में सांविधिक निकायों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक कॉर्पोरेट निकाय के रूप में निगमित करके उसके शासन को मज़बूत करना, अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और सांख्यिकी तथा संबद्ध क्षेत्रों में उभरती ज़रूरतों को पूरा करना है, जिससे यह एक राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में वैश्विक पहचान बना सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute – ISI) के दायरे को व्यापक बनाने और इसके कानूनी ढाँचे को बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश करने जा रही है। भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026, संस्थान को ‘कॉर्पोरेट निकाय’ के रूप में निगमित करने का प्रयास करता है, ताकि इसके शासन को मज़बूत किया जा सके, अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सके तथा इसे सांख्यिकी एवं संबद्ध क्षेत्रों में उभरती ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाया जा सके।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 ने ISI को ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ (Institution of National Importance) घोषित किया था और इसे सांख्यिकी में डिग्री तथा डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार दिया था।
  • इस अधिनियम में 1995 में संशोधन किया गया था, ताकि संस्थान को सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और सांख्यिकी से संबंधित ऐसे अन्य विषयों में डिग्री तथा डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार मिल सके, जैसा कि वह समय-समय पर निर्धारित कर सकता है।
  • प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, 1959 के अधिनियम में संस्थान के शासन, प्रशासन, वित्त, जवाबदेही और कामकाज के संबंध में सीमित प्रावधान हैं, जो इसे बदलते अकादमिक और अनुसंधान परिवेश की आवश्यकताओं का जवाब देने में सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
  • सरकार ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को निरस्त करने का निर्णय लिया है, ताकि एक व्यापक कानून लाया जा सके, जो भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में निगमित करने का प्रावधान करता है, ताकि यह सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त कर सके।
  • यह कानूनी सुधार उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की एक नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करेगा, जिससे भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में वर्तमान में मौजूद बड़े प्रतिभा अंतराल को पाटा जा सकेगा।

भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) क्या है?

  • भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) भारत में सांख्यिकीय अनुसंधान, शिक्षण और अनुप्रयोग के लिए एक प्रमुख संस्थान है, जिसका मुख्यालय कोलकाता में है।
  • इसकी स्थापना 1931 में प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने की थी, जिन्हें भारत में आधुनिक सांख्यिकी का जनक माना जाता है।
  • ISI को भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 के तहत ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित किया गया था, जो इसे सांख्यिकी और संबद्ध विषयों में डिग्री प्रदान करने का अधिकार देता है।
  • संस्थान का उद्देश्य सांख्यिकी के सिद्धांत और अनुप्रयोग को बढ़ावा देना, सांख्यिकीय अनुसंधान करना और सांख्यिकीय शिक्षा प्रदान करना है।
  • यह सांख्यिकी, गणित, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है।
  • ISI भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
  • यह देश में सांख्यिकीय अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए ‘स्वर्ण मानक’ माना जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सांविधिक ढाँचा (Statutory Framework) भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) को ‘कॉर्पोरेट निकाय’ के रूप में शामिल करने से शासन मजबूत होगा और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा।
विज़िटर (Visitor) भारत के राष्ट्रपति संस्थान के विज़िटर होंगे, जो संस्थान के सर्वोच्च प्राधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) यह संस्थान का प्रमुख नीति-निर्धारक कार्यकारी निकाय होगा, जिसका नेतृत्व शिक्षा, उद्योग या सार्वजनिक नीति के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति करेंगे। यह केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह होगा।
अकादमिक परिषद (Academic Council) यह संस्थान का प्रमुख अकादमिक निकाय होगा, जिसका नेतृत्व संस्थान के निदेशक करेंगे। इसमें सभी पूर्णकालिक प्रोफेसर और संकाय सदस्य शामिल होंगे।
अकादमिक विस्तार संस्थान को सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और संबंधित विषयों में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार होगा।
वैश्विक मान्यता यह विधेयक संस्थान को सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह विधेयक भारत के तकनीकी (Tech) और वित्तीय क्षेत्रों में डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की भारी प्रतिभा की कमी को पूरा करने में मदद करेगा।
  • उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार होगा, जिससे देश की डेटा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

शैक्षणिक एवं अनुसंधान महत्व

  • भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक ‘कॉर्पोरेट निकाय’ के रूप में शामिल करने से इसके शासन, अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।
  • संस्थान को सांख्यिकी और संबद्ध क्षेत्रों में उभरती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाएगा, जिससे अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
  • संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाने में मदद मिलेगी, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक उत्कृष्ट केंद्र बन सकेगा।

शासन और जवाबदेही

  • बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की स्थापना से संस्थान के नीति-निर्माण और कार्यकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • केंद्र सरकार के प्रति बोर्ड की जवाबदेही सुनिश्चित होगी, जिससे सार्वजनिक धन का प्रभावी उपयोग और संस्थान के उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित होगी।

चुनौतियाँ

1. संसाधन आवंटन

  • संस्थान के विस्तारित जनादेश और वैश्विक उत्कृष्टता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता होगी।
  • यह सुनिश्चित करना एक चुनौती होगी कि संस्थान को आवश्यक बुनियादी ढाँचा और विशेषज्ञ संकाय सदस्य उपलब्ध हों।

2. प्रौद्योगिकी एकीकरण

  • डेटा विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के साथ तालमेल बिठाना महत्वपूर्ण होगा।
  • संस्थान को नवीनतम तकनीकों और उपकरणों को अपने पाठ्यक्रम और अनुसंधान में एकीकृत करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

3. प्रतिभा पलायन

  • उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों को प्रशिक्षित करने के बाद उन्हें देश में बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है, खासकर वैश्विक अवसरों की उपलब्धता को देखते हुए।
  • संस्थान को ऐसी नीतियां विकसित करनी होंगी जो प्रतिभाशाली व्यक्तियों को भारत में काम करने के लिए आकर्षित और प्रेरित करें।

4. पाठ्यक्रम अद्यतन

  • उभरती जरूरतों और अकादमिक तथा अनुसंधान के बदलते परिवेश के अनुरूप पाठ्यक्रम को नियमित रूप से अद्यतन करना आवश्यक होगा।
  • यह सुनिश्चित करना कि पाठ्यक्रम उद्योग की मांगों और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो, एक सतत चुनौती होगी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पुराना कानूनी ढाँचा भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959, संस्थान के शासन, प्रशासन, वित्त और कार्यप्रणाली के संबंध में सीमित प्रावधान प्रदान करता है, जो बदलते अकादमिक और अनुसंधान परिवेश की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त नहीं है।
शासन की कमी पुराने अधिनियम में एक ‘कॉर्पोरेट निकाय’ के रूप में संस्थान के समावेश के लिए प्रावधानों की कमी थी, जिससे इसकी स्वायत्तता और लचीलेपन में बाधा आ रही थी।
अकादमिक और अनुसंधान की बदलती आवश्यकताएँ डेटा विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में तेजी से विकास के लिए एक ऐसे कानूनी ढाँचे की आवश्यकता है जो संस्थान को इन उभरती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाए।
प्रतिभा अंतराल भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की भारी कमी है, जिसे मौजूदा ढाँचा प्रभावी ढंग से संबोधित नहीं कर पा रहा था।

आगे की राह

  • संस्थान को पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि यह अपने विस्तारित जनादेश और वैश्विक उत्कृष्टता के लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
  • डेटा विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकों और उपकरणों को पाठ्यक्रम और अनुसंधान में एकीकृत करने के लिए नियमित अद्यतन और निवेश सुनिश्चित किया जाए।
  • प्रतिभा पलायन को रोकने और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों को देश में बनाए रखने के लिए आकर्षक करियर अवसर और अनुसंधान प्रोत्साहन प्रदान किए जाएं।
  • उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत संबंध स्थापित किए जाएं ताकि पाठ्यक्रम उद्योग की मांगों के अनुरूप हो और छात्रों को प्रासंगिक कौशल प्राप्त हो सकें।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए ताकि संस्थान वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सके और अपनी अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ा सके।
  • संस्थान के भीतर एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित किया जाए ताकि इसकी प्रगति और प्रभावशीलता का नियमित आकलन किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक · राष्ट्रीय महत्व का संस्थान · सांविधिक ढाँचा · डेटा वैज्ञानिक · सांख्यिकी शिक्षा · शासन सुधार · शैक्षणिक उत्कृष्टता · अनुसंधान संवर्धन · आर्थिक संवृद्धि · डिजिटल अर्थव्यवस्था

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद को संघ सूची पर कानून बनाने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 254’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों के बीच असंगति’}

अवधारणा प्रवाह

पुराना भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959, अपर्याप्त था।  →  सरकार ने नए भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026, को पेश करने का निर्णय लिया।  →  यह विधेयक संस्थान को एक ‘कॉर्पोरेट निकाय’ के रूप में शामिल करेगा।  →  इससे संस्थान का शासन मजबूत होगा और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा।  →  परिणामस्वरूप, उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद प्रशिक्षित होंगे।  →  यह भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में प्रतिभा अंतराल को कम करेगा।  →  संस्थान सांख्यिकीय विज्ञान में एक वैश्विक मान्यता प्राप्त केंद्र बन सकेगा।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) विधेयक, 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह विधेयक भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 का स्थान लेगा।
2. विधेयक के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति संस्थान के ‘विज़िटर’ होंगे।
3. संस्थान का अकादमिक परिषद (Academic Council) संस्थान की प्रमुख अकादमिक निकाय होगी और इसकी अध्यक्षता संस्थान के निदेशक करेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य 1959 के अधिनियम को निरस्त कर एक व्यापक कानून लाना है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राष्ट्रपति संस्थान के विज़िटर होंगे। कथन 3 भी सही है क्योंकि अकादमिक परिषद को प्रमुख अकादमिक निकाय के रूप में वर्णित किया गया है और इसकी अध्यक्षता निदेशक करेंगे।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) के महत्व को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?

  1. यह केवल सांख्यिकी में डिप्लोमा प्रदान करने वाला एक निजी संस्थान है।
  2. यह देश में सांख्यिकीय अनुसंधान का स्वर्ण मानक माना जाता है और इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त है।
  3. यह केवल कंप्यूटर विज्ञान में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला एक तकनीकी संस्थान है।
  4. यह भारत सरकार के अधीन एक नियामक निकाय है जो सांख्यिकीय डेटा एकत्र करता है।

उत्तर: यह देश में सांख्यिकीय अनुसंधान का स्वर्ण मानक माना जाता है और इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त है। — भारतीय सांख्यिकी संस्थान को देश में सांख्यिकीय अनुसंधान का स्वर्ण मानक माना जाता है और इसे भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। यह विधेयक भारत में सांख्यिकी शिक्षा और डेटा साइंस के क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने में किस प्रकार सहायक होगा? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के संक्षिप्त परिचय और विधेयक की आवश्यकता (1959 के अधिनियम को निरस्त करना) का उल्लेख।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:**
* संस्थान को ‘बॉडी कॉर्पोरेट’ के रूप में निगमित करना।
* शासन को मजबूत करना: राष्ट्रपति को ‘विज़िटर’ बनाना।
* बोर्ड ऑफ गवर्नर्स: प्रमुख नीति कार्यकारी निकाय, अध्यक्ष की योग्यता।
* अकादमिक परिषद: प्रमुख अकादमिक निकाय, निदेशक की अध्यक्षता।
* शैक्षणिक और अनुसंधान का विस्तार: सांख्यिकी और संबद्ध क्षेत्रों में डिग्री/डिप्लोमा प्रदान करने की शक्ति का आधुनिकीकरण।
* जवाबदेही और पारदर्शिता।
3. **चुनौतियों का समाधान:**
* **डेटा वैज्ञानिकों की कमी:** उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों को प्रशिक्षित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
* **तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में प्रतिभा अंतराल:** भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में मौजूदा प्रतिभा अंतराल को पाटना।
* **वैश्विक प्रतिस्पर्धा:** संस्थान को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में स्थापित करना।
* **आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप:** बदलते अकादमिक और अनुसंधान परिवेश की आवश्यकताओं के प्रति संस्थान को अधिक उत्तरदायी बनाना।
* **आर्थिक संवृद्धि में योगदान:** डेटा-संचालित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार करना।
4. **निष्कर्ष:** विधेयक के दूरगामी प्रभावों और भारत के सांख्यिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में इसकी भूमिका का संक्षिप्त सारांश।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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