लोकसभा ने पास किया अनुदान (संख्या 3) विधेयक 2026, राज्यसभा ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक पारित किया

Parliament Monsoon Session Day 12 updates: Lok Sabha passes Appropriation (No. 3) Bill, 2026; RS passes Births and Death — concept mind map

लोकसभा ने पास किया अनुदान (संख्या 3) विधेयक 2026, राज्यसभा ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक पारित किया

✎ विनियोग विधेयक सरकारी खर्चों के लिए संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है, जबकि जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 विलंबित पंजीकरण को अधिक कठोर बनाकर नागरिक पंजीकरण प्रणाली को सुदृढ़ करता है।

विधेयक कानून बनने की प्रक्रियाविधेयक प्रस्तुतसरकार द्वारासंसद में चर्चादोनों सदनों मेंविधेयक पारितदोनों सदनों द्वाराराष्ट्रपति स्वीकृतिअनिवार्यविधेयक कानूनअंतिम चरण
विधेयक कानून बनने की प्रक्रिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय  |  GS Paper III — सरकारी बजट
  • Prelims: विनियोग विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969, राजकोषीय उत्तरदायित्व, संसद की विधायी प्रक्रिया, धन विधेयक, साधारण विधेयक
  • Essay: भारत में विधायी प्रक्रिया की चुनौतियाँ और समाधान, सुशासन में विधायी सुधारों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: विनियोग विधेयक सरकारी खर्चों के लिए संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है, जबकि जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 विलंबित पंजीकरण को अधिक कठोर बनाकर नागरिक पंजीकरण प्रणाली को सुदृढ़ करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन लोकसभा ने विनियोग (सं. 3) विधेयक, 2026 पारित किया, जबकि राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। ये विधेयक देश के वित्तीय प्रबंधन और नागरिक पंजीकरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विपक्षी दलों के विरोध के बीच दोनों सदनों में कई मुद्दों पर गतिरोध भी देखा गया, लेकिन महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपन्न हुए।

पृष्ठभूमि

  • संसद का मानसून सत्र विधायी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है, जिसमें सरकार विभिन्न विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करती है।
  • विनियोग विधेयक सरकार को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने की अनुमति देता है, जो सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 भारत में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • हाल के वर्षों में, जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की चुनौतियों को दूर करने के लिए इस अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।
  • संसदीय कार्यवाही में अक्सर विपक्षी दलों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन देखे जाते हैं, जिससे विधायी कार्यों में बाधा आती है।
  • किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जाना और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है।

विनियोग विधेयक और जन्म तथा मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक क्या हैं?

  • विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) एक धन विधेयक (Money Bill) है जो सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है ताकि वह अपने खर्चों को पूरा कर सके।
  • संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत, सरकार संसद की अनुमति के बिना संचित निधि से कोई भी पैसा नहीं निकाल सकती है।
  • यह विधेयक प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा किए जाने वाले व्यय के लिए आवश्यक होता है और इसे लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करता है।
  • इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण को और अधिक कठोर बनाना है, विशेष रूप से दो साल से अधिक की देरी के मामलों में।
  • संशोधित विधेयक के अनुसार, दो साल से अधिक की देरी से पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के आदेश की आवश्यकता होगी।
  • यह संशोधन नागरिक पंजीकरण प्रणाली की सटीकता और विश्वसनीयता में सुधार करेगा, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं के लिए डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 यह विधेयक सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने और व्यय करने की अनुमति देता है, जो वित्तीय प्रशासन के लिए आवश्यक है।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 यह विधेयक जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण को अधिक कठोर बनाता है, जिससे डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
विलंबित पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश दो वर्ष से अधिक के विलंबित पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के आदेश की आवश्यकता होगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
एक से दो वर्ष के विलंबित पंजीकरण एक से दो वर्ष के विलंबित पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होगी।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि करता है, जिससे न्यायिक कार्यभार को कम करने और मामलों के त्वरित निपटान में मदद मिलेगी।

महत्व

विधायी प्रक्रिया और शासन

  • संसद द्वारा महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना देश के शासन और प्रशासन के लिए आवश्यक विधायी ढांचे को मजबूत करता है।
  • विनियोग विधेयक सरकार को अपने व्यय को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुँचने में सक्षम बनाता है, जो सार्वजनिक सेवाओं और विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक सटीक जनसांख्यिकीय डेटा सुनिश्चित करता है, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए आधार प्रदान करता है।

न्यायिक प्रशासन

  • उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ को कम करने में मदद करेगी, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
  • यह कदम न्याय तक पहुँच में सुधार और न्यायिक देरी को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

  • जन्म और मृत्यु के सटीक पंजीकरण से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद मिलती है।
  • माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (संशोधन) विधेयक, 2026 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के विकास को बढ़ावा देगा, जो रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं।

चुनौतियाँ

1. संसदीय कार्यवाही में व्यवधान

  • विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण संसद के दोनों सदनों में कई बार कार्यवाही बाधित हुई, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा प्रभावित हुई।
  • यह विधायी प्रक्रिया की दक्षता और गुणवत्ता को प्रभावित करता है, क्योंकि विधेयकों पर पर्याप्त बहस और जांच नहीं हो पाती है।

2. विधेयकों पर चर्चा का अभाव

  • उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक को बिना किसी चर्चा के पारित किया गया, जो संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।
  • यह महत्वपूर्ण कानूनों के निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।

3. राजकोषीय अनुशासन

  • विनियोग विधेयक के माध्यम से सरकार द्वारा किए जाने वाले व्यय को राजकोषीय अनुशासन के साथ संतुलित करना महत्वपूर्ण है ताकि राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) न बढ़े।
  • सार्वजनिक धन का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।

4. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण डेटा के संग्रह और उपयोग में डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक चुनौती है, खासकर जब इसे विभिन्न सरकारी डेटाबेस के साथ जोड़ा जा रहा हो।
  • नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
संसदीय कार्यवाही में व्यवधान महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और जांच का अभाव, विधायी गुणवत्ता में कमी।
बिना चर्चा के विधेयक पारित करना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन, कानून निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी।
विरोध प्रदर्शन के मुद्दे राम मंदिर दान के गबन, पुलिस कार्रवाई और कावेरी जल विवाद जैसे मुद्दों पर विपक्ष का विरोध, जिससे संसद का समय बर्बाद होता है।
राजकोषीय प्रबंधन विनियोग विधेयक के माध्यम से व्यय को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करते हुए प्रबंधित करना।

आगे की राह

  • संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  • महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और बहस के लिए समय आवंटित किया जाना चाहिए ताकि कानून निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
  • विपक्ष को अपने विरोध प्रदर्शनों को इस तरह से आयोजित करना चाहिए जिससे विधायी कार्य बाधित न हो और महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण डेटा की सटीकता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाने चाहिए।
  • न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम करने और न्याय तक पहुँच में सुधार के लिए न्यायिक सुधारों को जारी रखना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विनियोग विधेयक · जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक · संसदीय प्रक्रियाएँ · लोकसभा · राज्यसभा · विधायी प्रक्रिया · अध्यादेश · न्यायिक मजिस्ट्रेट · संघवाद · संसद की संप्रभुता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 114’, ‘note’: ‘विनियोग विधेयक से संबंधित’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण पर कानून बनाने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 124’, ‘note’: ‘उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होना।  →  विनियोग विधेयक सरकार को वित्तीय व्यय की अनुमति देता है।  →  जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक डेटा सटीकता बढ़ाता है।  →  उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि न्यायिक दक्षता में सुधार करती है।  →  संसदीय व्यवधान विधायी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) एक धन विधेयक (Money Bill) है जो भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने की अनुमति देता है।
2. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण को अधिक कठोर बनाने का प्रयास करता है।
3. धन विधेयक केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। विनियोग विधेयक भारत की संचित निधि से धन निकालने के लिए आवश्यक है और यह एक धन विधेयक होता है। कथन 2 भी सही है, विधेयक का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को सख्त करना है। कथन 3 गलत है। धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं।

Q2. अभिकथन (A): विनियोग विधेयक को लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा में चर्चा के लिए भेजा जाता है, लेकिन राज्यसभा इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती।
कारण (R): विनियोग विधेयक एक धन विधेयक है और धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित हैं।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती, केवल सिफारिशें कर सकती है जिन्हें लोकसभा मानने के लिए बाध्य नहीं है। कारण (R) भी सही है क्योंकि विनियोग विधेयक एक धन विधेयक है और संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित हैं। R, A की सही व्याख्या भी करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विनियोग विधेयक क्या है और भारतीय संसद में इसकी पारित होने की प्रक्रिया का वर्णन करें। जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों पर भी चर्चा करें और बताएं कि यह मौजूदा कानून से किस प्रकार भिन्न है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. विनियोग विधेयक की परिभाषा: संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत, भारत की संचित निधि से धन निकालने के लिए आवश्यक विधेयक। यह एक धन विधेयक है।
2. पारित होने की प्रक्रिया: लोकसभा में प्रस्तुति (केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर), सामान्य बहस, विस्तृत चर्चा, मतदान, लोकसभा द्वारा पारित। राज्यसभा की भूमिका (केवल सिफारिशें, 14 दिन की समय-सीमा)। राष्ट्रपति की सहमति।
3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधान: विलंबित पंजीकरण को सख्त बनाना। दो साल से अधिक के विलंबित पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के आदेश की आवश्यकता। एक से दो साल के विलंबित पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति।
4. मौजूदा कानून से भिन्नता: पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में संशोधन। वर्तमान में, एक वर्ष से अधिक के विलंबित पंजीकरण के लिए DM, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है। नया विधेयक दो साल से अधिक के मामलों के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की आवश्यकता को जोड़कर इसे और सख्त बनाता है।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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