06 Aug लोकसभा ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने वाला कराधान विधेयक पारित किया
✎ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और 'प्रक्रिया निश्चितता' प्रदान करना है, जबकि विनियोग विधेयक भारत की संचित निधि से सरकारी व्यय को अधिकृत करता…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार।
- Prelims: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, भारत की संचित निधि, लोक लेखा समिति, संसदीय प्रक्रिया नियम 235
- Essay: संसदीय कार्यवाही में व्यवधान: लोकतंत्र पर प्रभाव और समाधान, भारत में आर्थिक संवृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और ‘प्रक्रिया निश्चितता’ प्रदान करना है, जबकि विनियोग विधेयक भारत की संचित निधि से सरकारी व्यय को अधिकृत करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा ने कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक (Taxation and other Laws (Amendment) Bill) को बिना किसी बहस के पारित कर दिया। यह विधेयक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के उद्देश्य से लाया गया है। विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। इसी सत्र में राज्यसभा ने विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 (Appropriation (No.3) Bill, 2026) को भी मंजूरी दी, जो भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कुछ सेवाओं पर किए गए अतिरिक्त व्यय के प्राधिकरण से संबंधित है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और रोज़गार के अवसर सृजित हों।
- कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाना है, जिससे ‘प्रक्रिया निश्चितता’ (process certainty) प्रदान की जा सके।
- इस विधेयक के माध्यम से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में भी संशोधन किया गया है, जो देश में डिजिटल भुगतान प्रणालियों के विनियमन से संबंधित है।
- संसदीय कार्यवाही में व्यवधान एक सामान्य घटना बन गई है, जहां विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने के लिए नारेबाजी और हंगामे का सहारा लेता है, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा बाधित होती है।
- विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026, वित्तीय वर्ष 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए कुछ सेवाओं पर किए गए अतिरिक्त व्यय के लिए भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करने का प्रावधान करता है। यह लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) की 39वीं रिपोर्ट पर आधारित था।
- संसदीय कार्य मंत्री ने राज्यसभा में नियम 235 (Rule 235) का हवाला दिया, जो सदस्यों को कार्यवाही में बाधा डालने या बार-बार एक ही तर्क उठाने से रोकता है, जिससे सदन के सुचारु संचालन पर जोर दिया जा सके।
कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक तथा संबंधित अवधारणाएँ
- यह विधेयक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को प्रोत्साहन देने और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के सरकार के दृष्टिकोण का हिस्सा है।
- विधेयक का एक प्रमुख लक्ष्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना है, विशेषकर उन कंपनियों को जो भारत में अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित करना चाहती हैं।
- यह विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करने की प्रक्रिया को सरल बनाता है, जिससे डेटा स्थानीयकरण (data localization) और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके।
- ‘प्रक्रिया निश्चितता’ का अर्थ है कि निवेशकों को नियामक और कराधान नीतियों में स्थिरता और स्पष्टता प्रदान की जाएगी, जिससे निवेश का माहौल बेहतर हो सके।
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, भारत में भुगतान और निपटान प्रणालियों के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है, और इसमें संशोधन डिजिटल लेनदेन को और सुगम बना सकता है।
- भारत की संचित निधि (अनुच्छेद 266) वह निधि है जिसमें सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, बाजार से लिए गए ऋण और ट्रेजरी बिलों के माध्यम से जुटाए गए धन जमा होते हैं। सरकार के सभी खर्च इसी निधि से किए जाते हैं, सिवाय कुछ असाधारण खर्चों के।
- विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने और खर्च करने के लिए संसद की अनुमति प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। यह अनुच्छेद 114 के तहत आता है।
- लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) संसद की सबसे पुरानी वित्तीय समितियों में से एक है, जो सरकार के व्यय की जांच करती है और यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग संसद द्वारा अनुमोदित तरीके से किया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा | यह विधेयक भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। |
| विदेशी पूंजी आकर्षित करना | विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कर संबंधी प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन सके। |
| प्रक्रियागत निश्चितता (Process Certainty) | विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग आसान बनाने हेतु प्रक्रियागत निश्चितता प्रदान की गई है, जिससे व्यापार सुगमता बढ़ेगी। |
| भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन | यह संशोधन डिजिटल भुगतान प्रणालियों को सुदृढ़ करने और उनके विनियमन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा। |
| कर संबंधी अन्य कानूनों में संशोधन | विभिन्न कर कानूनों में संशोधन का उद्देश्य निवेश और आर्थिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल बनाना है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देकर ‘मेक इन इंडिया’ पहल को सशक्त करेगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा।
- विदेशी पूंजी आकर्षित करने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि होगी, जिससे रोज़गार सृजन और आर्थिक संवृद्धि को गति मिलेगी।
- प्रक्रियागत निश्चितता से विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारत में परिचालन आसान होगा, जिससे डेटा सेंटर उद्योग का विकास होगा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
सामरिक महत्व
- घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह विधेयक भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा, जिससे भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी।
शासन संबंधी महत्व
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से देश की डिजिटल भुगतान अवसंरचना को मजबूती मिलेगी, जिससे वित्तीय समावेशन और पारदर्शिता बढ़ेगी।
चुनौतियाँ
1. संसदीय कार्यवाही में व्यवधान
- विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण विधेयक बिना बहस के पारित हुआ, जिससे विधायी प्रक्रिया की गुणवत्ता प्रभावित हुई।
- संसदीय नियमों, जैसे नियम 235 (जो कार्यवाही में बाधा डालने पर रोक लगाता है), का उल्लंघन देखा गया, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुँची।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संसद और उसकी कार्यप्रणाली
2. विधेयक की जाँच का अभाव
- बिना बहस के विधेयक पारित होने से इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाई, जिससे संभावित कमियाँ या अनपेक्षित परिणाम सामने आ सकते हैं।
- यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है जहाँ विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श और सार्वजनिक जाँच आवश्यक होती है।
यूपीएससी लिंक: संसद में कानून निर्माण प्रक्रिया
3. विपक्ष की भूमिका
- विपक्ष द्वारा ‘बाधा लोकतंत्र का हिस्सा है’ जैसे तर्क दिए गए, जो संसदीय कार्यवाही में व्यवधान को उचित ठहराते हैं, जिससे रचनात्मक बहस का माहौल बाधित होता है।
- विपक्ष का मुख्य कार्य सरकार को जवाबदेह ठहराना और विधेयकों की जाँच करना है, लेकिन हंगामे के कारण यह भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभाई जा सकी।
यूपीएससी लिंक: संसद में विपक्ष की भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संसदीय व्यवधान | विधेयक बिना बहस के पारित हुआ, जिससे विधायी प्रक्रिया की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा। |
| नियमों का उल्लंघन | संसदीय नियमों, जैसे नियम 235, का लगातार उल्लंघन देखा गया, जिससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई। |
| लोकतांत्रिक सिद्धांतों का हनन | बिना पर्याप्त चर्चा के महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। |
| विपक्ष की रचनात्मक भूमिका का अभाव | हंगामे के कारण विपक्ष सरकार को जवाबदेह ठहराने और विधेयकों की गहन जाँच करने में विफल रहा। |
आगे की राह
- संसदीय कार्यवाही में रचनात्मक बहस और चर्चा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श हो सके।
- विपक्ष को अपनी विरोध की रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और व्यवधान के बजाय नियमों के तहत प्रभावी ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए।
- सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेने और महत्वपूर्ण विधेयकों पर आम सहमति बनाने का प्रयास करना चाहिए।
- पीठासीन अधिकारियों को संसदीय नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए और सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
- विधेयकों को स्थायी समितियों (Standing Committees) को भेजने की प्रथा को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि उनकी विस्तृत जाँच हो सके।
- संसद सदस्यों को अपने आचरण में मर्यादा और गरिमा बनाए रखनी चाहिए, ताकि संसदीय संस्थानों में जनता का विश्वास बना रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संसदीय कार्यवाही में बाधा · विधेयक पारित करने की प्रक्रिया · घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम · राजकोषीय समेकन · संसद की भूमिका · लोकतांत्रिक विरोध · अध्यादेश की शक्ति · वित्तीय विधेयक · विनियामक सुधार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 107’, ‘note’: ‘विधेयकों को पुरःस्थापित और पारित करना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 108’, ‘note’: ‘कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 110’, ‘note’: ‘धन विधेयकों की विशेष प्रक्रिया’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 112’, ‘note’: ‘वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 114’, ‘note’: ‘विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 118’, ‘note’: ‘संसद की प्रक्रिया के नियम’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा कराधान विधेयक पेश → विपक्ष द्वारा लगातार हंगामा → बिना बहस के विधेयक पारित → घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा → विदेशी पूंजी आकर्षित करना → आर्थिक संवृद्धि और आत्मनिर्भरता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
2. यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में भी संशोधन करता है।
3. विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करने के लिए पारित किया गया था। कथन 3 भी सही है क्योंकि विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करता है।
Q2. अभिकथन (A): संसद में विपक्षी दलों द्वारा लगातार व्यवधान लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है।
कारण (R): संसदीय कार्यवाही के नियम सदस्यों को कार्यवाही बाधित करने या बार-बार एक ही तर्क उठाने से रोकते हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A असत्य है, लेकिन R सत्य है। — अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि विपक्ष द्वारा व्यवधान को कभी-कभी लोकतांत्रिक विरोध के एक रूप के रूप में देखा जाता है, जैसा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि नियम 235 जैसे संसदीय नियम सदस्यों को कार्यवाही बाधित करने से रोकते हैं। हालांकि, R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है क्योंकि नियम व्यवधान को रोकते हैं, जबकि A इसे लोकतंत्र का हिस्सा मानता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा विधेयक भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से अतिरिक्त व्यय को अधिकृत करता है?
- धन विधेयक (Money Bill)
- वित्त विधेयक (Finance Bill)
- विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)
- संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill)
उत्तर: विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) — विनियोग विधेयक भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करता है, विशेष रूप से सरकार द्वारा किए गए अतिरिक्त अनुदानों और व्यय को कवर करने के लिए।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संसदीय कार्यवाही में व्यवधानों के बढ़ते उदाहरणों के आलोक में, भारत में कानून बनाने की प्रक्रिया पर इसके प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ऐसे व्यवधान लोकतांत्रिक विरोध का एक वैध रूप हैं या वे संसदीय लोकतंत्र की प्रभावशीलता को कमजोर करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संसदीय कार्यवाही में व्यवधानों की वर्तमान प्रवृत्ति का संक्षिप्त परिचय दें, विशेष रूप से कराधान विधेयक के पारित होने के संदर्भ में।
2. **कानून बनाने की प्रक्रिया पर प्रभाव:**
* **बहस और चर्चा का अभाव:** विधेयकों का बिना बहस के पारित होना (जैसे कराधान विधेयक)।
* **विधेयकों की गुणवत्ता पर प्रभाव:** गहन जांच और संशोधन की कमी।
* **संसदीय समितियों की भूमिका का क्षरण:** विधेयकों को समितियों के पास भेजने में कमी।
* **अध्यादेशों पर निर्भरता:** व्यवधानों के कारण सरकार द्वारा अध्यादेशों का अधिक उपयोग।
* **जनता के विश्वास में कमी:** संसद की कार्यप्रणाली पर जनता के विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव।
3. **लोकतांत्रिक विरोध के रूप में व्यवधान:**
* **विपक्ष का अधिकार:** सरकार को जवाबदेह ठहराने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने का अधिकार (जैसा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा)।
* **अंतिम उपाय:** जब अन्य सभी रास्ते बंद हो जाते हैं तो विरोध का एक रूप।
* **अल्पसंख्यकों की आवाज:** अल्पमत के विचारों को व्यक्त करने का माध्यम।
4. **संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करना:**
* **नियमों का उल्लंघन:** संसदीय नियमों (जैसे नियम 235) का उल्लंघन।
* **करदाताओं के पैसे की बर्बादी:** व्यवधानों के कारण सत्रों का बर्बाद होना।
* **महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में बाधा:** आवश्यक विधेयकों और नीतियों के पारित होने में देरी।
* **संसद की गरिमा में कमी:** संस्थागत सम्मान और प्रभावशीलता का क्षरण।
5. **निष्कर्ष:** व्यवधानों और उत्पादक बहस के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दें। संसदीय नियमों के पालन, रचनात्मक संवाद और विपक्ष के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डालें ताकि संसदीय लोकतंत्र की प्रभावशीलता बनी रहे।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- महा जल मिशन: जल संकट समाधान हेतु अनुसंधान एवं नवाचार की शुरुआत - August 6, 2026
- UPSC Focus: MAHA Jal Mission & ANRF’s Role in Water Governance - August 6, 2026
- गंगा नदी संरक्षण: नमामि गंगे अभियान से प्रमुख उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ 2025 - August 6, 2026

No Comments