22 Sep ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान: सरकारी विभागों में स्वच्छता क्रांति, जानिए मुख्य बिंदु
✎ 'स्वच्छता ही सेवा-2026' अभियान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा 'स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत' थीम के तहत व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन तथा नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया एक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (स्वच्छता से संबंधित स्वास्थ्य आपदाओं का निवारण) | GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता (सार्वजनिक सेवा के मूल्य)
- Prelims: स्वच्छता ही सेवा अभियान, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD), स्वच्छ भारत मिशन, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs), सफाई मित्र, व्यवहारिक परिवर्तन
- Essay: स्वच्छता: एक राष्ट्रीय कर्तव्य और विकास का आधार, नागरिक भागीदारी और जन आंदोलन के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ थीम के तहत व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन तथा नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया एक देशव्यापी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) तथा संबद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों के साथ मिलकर देशव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान का शुभारंभ किया है। यह अभियान ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ की थीम पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को बढ़ावा देना तथा स्वच्छता पहलों में नागरिकों व हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
पृष्ठभूमि
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक वार्षिक स्वच्छता अभियान है, जो महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर ‘स्वच्छ भारत दिवस’ से पहले आयोजित किया जाता है।
- यह अभियान शहरी विकास विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के दिशानिर्देशों के अनुरूप चलाया जाता है, जिसमें स्वच्छता और सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- अभियान का मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना और लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता तथा जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।
- यह ‘स्वच्छ भारत मिशन’ (Swachh Bharat Mission) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाना है।
- इस अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियाँ जैसे स्वच्छता शपथ, सफाई अभियान, नारा प्रतियोगिताएँ, चित्रकला प्रतियोगिताएँ, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- सफाई मित्रों (Sanitation Workers) के कल्याण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जो इस अभियान के छह स्तंभों में से एक है।
‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान क्या है?
- यह खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और संबद्ध कार्यालयों के साथ मिलकर शुरू किया गया एक देशव्यापी स्वच्छता अभियान है।
- अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ है, जो नागरिकों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर देती है।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को बढ़ावा देना है ताकि स्वच्छता एक व्यक्तिगत आदत और सामाजिक मूल्य बन सके।
- अभियान के तहत विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, सफाई मित्रों और छात्रों सहित व्यापक समुदाय को शामिल किया जाता है।
- प्रमुख गतिविधियों में स्वच्छता शपथ ग्रहण, परिसर में सफाई अभियान, नारा और चित्रकला प्रतियोगिताएँ, सफाई मित्रों के लिए कार्यशालाएँ और स्वास्थ्य जाँच शिविर शामिल हैं।
- यह अभियान ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के व्यापक उद्देश्यों के साथ संरेखित है, जिसका उद्देश्य भारत को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाना है।
- अभियान के छह स्तंभों में से एक ‘सफाई मित्रों का कल्याण’ है, जिसके तहत उनके स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभियान का नाम | ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ |
| आयोजक | खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) और उसके संबद्ध कार्यालय/PSU |
| थीम | ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ |
| लक्ष्य | व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को बढ़ावा देना, स्वच्छता पहलों में नागरिक भागीदारी बढ़ाना |
| प्रमुख गतिविधियाँ | स्वच्छता शपथ, स्वच्छता अभियान, नारा प्रतियोगिता, सफाई मित्रों के लिए कार्यशाला, स्वास्थ्य जांच शिविर, कला प्रतियोगिता, जल संचय संवाद |
| हितधारक | कर्मचारी, सफाई मित्र, छात्र, आम जनता |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह अभियान स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करता है, जिससे समाज में व्यवहारिक परिवर्तन आता है।
- सफाई मित्रों के कल्याण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करके, यह समाज के हाशिए पर पड़े वर्ग के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है।
- छात्रों और युवाओं को स्वच्छता गतिविधियों में शामिल करके, यह भविष्य की पीढ़ियों में स्वच्छता के मूल्यों को विकसित करता है।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह अभियान भारत सरकार की ‘स्वच्छ भारत’ पहल को मजबूत करता है और उसके लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान देता है।
- विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भागीदारी अंतर-विभागीय समन्वय और सहयोगात्मक शासन का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
- यह नागरिकों और हितधारकों की भागीदारी को बढ़ावा देकर ‘जनभागीदारी’ के सिद्धांत को साकार करता है, जो सुशासन का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
पर्यावरणीय महत्व
- स्वच्छता अभियान और जल संचय संवाद जैसी गतिविधियाँ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाती हैं।
- यह सार्वजनिक स्थानों और कार्यालय परिसरों की स्वच्छता सुनिश्चित करके स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देता है।
- अपशिष्ट प्रबंधन और सफाई प्रथाओं को प्रोत्साहित करके, यह पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में मदद करता है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहारिक परिवर्तन की चुनौती
- दीर्घकालिक और स्थायी व्यवहारिक परिवर्तन लाना एक सतत चुनौती है, जिसके लिए नियमित जागरूकता और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।
- लोगों की आदतों और मानसिकता को बदलना केवल अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत सामाजिक मानदंडों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शासन
2. संसाधनों का प्रभावी उपयोग
- स्वच्छता अभियानों के लिए पर्याप्त मानव और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिनका प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है।
- विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में, संसाधनों की कमी स्वच्छता पहलों को बाधित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक प्रशासन
3. निरंतर निगरानी और मूल्यांकन
- अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसकी प्रगति की निरंतर निगरानी और मूल्यांकन आवश्यक है।
- परिणामों को मापने और जवाबदेही तय करने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीति निर्माण
4. सफाई मित्रों का सशक्तिकरण
- सफाई मित्रों के कल्याण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए व्यापक नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
- उन्हें समाज में उचित सम्मान और पहचान दिलाना भी एक महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| स्थायी व्यवहार परिवर्तन | अभियान के बाद भी स्वच्छता की आदतों को बनाए रखना। |
| बुनियादी ढांचा | पर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता। |
| जागरूकता का अभाव | कुछ वर्गों में स्वच्छता के महत्व के प्रति कम जागरूकता। |
| सफाई कर्मियों की स्थिति | उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को सुनिश्चित करना। |
| निगरानी तंत्र | स्वच्छता पहलों की प्रभावशीलता का मापन और जवाबदेही। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)
आगे की राह
- स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल कर युवाओं को प्रारंभिक स्तर से ही संवेदनशील बनाना चाहिए।
- सफाई मित्रों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों, बीमा योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना चाहिए।
- स्वच्छता से संबंधित बुनियादी ढांचे, जैसे सार्वजनिक शौचालयों और अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों के निर्माण और रखरखाव में निवेश बढ़ाना चाहिए।
- स्वच्छता के क्षेत्र में नवाचारों और प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए, जैसे स्मार्ट अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियाँ।
- स्थानीय निकायों और सामुदायिक संगठनों को स्वच्छता पहलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाना चाहिए।
- स्वच्छता के मानकों का नियमित ऑडिट और मूल्यांकन कर, अच्छा प्रदर्शन करने वाले संस्थानों और व्यक्तियों को पुरस्कृत करना चाहिए।
- स्वच्छता को केवल एक अभियान के बजाय एक जीवन शैली के रूप में बढ़ावा देने के लिए व्यापक मीडिया अभियान चलाए जाने चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता ही सेवा अभियान · स्वच्छ भारत अभियान · व्यवहारिक परिवर्तन · सांस्कृतिक परिवर्तन · नागरिकों की भागीदारी · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग · सामाजिक कल्याण योजनाएँ · सतत विकास लक्ष्य · स्वच्छता और स्वास्थ्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान का शुभारंभ। → अभियान का उद्देश्य व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन लाना तथा नागरिक भागीदारी बढ़ाना। → विभिन्न गतिविधियों का आयोजन: स्वच्छता शपथ, अभियान, कार्यशालाएं, स्वास्थ्य शिविर। → सफाई मित्रों, कर्मचारियों, छात्रों और आम जनता की सक्रिय भागीदारी। → स्वच्छता, सफाई और सामूहिक जिम्मेदारी के संदेश का सुदृढ़ीकरण। → स्वच्छ भारत, विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में योगदान।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान का उद्देश्य केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
2. यह अभियान ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ की थीम पर आधारित है।
3. इस अभियान के तहत सफाई मित्रों के कल्याण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान देशव्यापी है और इसका उद्देश्य केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ है। कथन 3 भी सही है क्योंकि सफाई मित्रों के कल्याण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना अभियान के छह स्तंभों में से एक है।
Q2. अभिकथन (A): ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियान व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कारण (R): ये अभियान नागरिकों और हितधारकों की स्वच्छता पहलों में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि ऐसे अभियान लोगों की आदतों और सोच में बदलाव लाने का प्रयास करते हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि नागरिकों की भागीदारी के बिना व्यवहारिक और सांस्कृतिक परिवर्तन संभव नहीं है, और ये अभियान इसी पर केंद्रित होते हैं। अतः, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में स्वच्छता अभियानों के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों के माध्यम से व्यवहारिक परिवर्तन लाने में सरकार की भूमिका का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में स्वच्छता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसे प्रमुख अभियानों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव: स्वच्छता अभियानों के कारण समाज में आए सकारात्मक परिवर्तनों का विश्लेषण करें। इसमें खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति, स्वास्थ्य मानकों में सुधार, महिलाओं की गरिमा, बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रभाव और समग्र सामुदायिक भागीदारी जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
3. चुनौतियाँ और सीमाएँ: इन अभियानों की सीमाओं और चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे कि व्यवहारिक परिवर्तन की धीमी गति, रखरखाव की समस्याएँ, अपशिष्ट प्रबंधन की अपर्याप्तता, और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं का प्रभाव।
4. सरकार की भूमिका और व्यवहारिक परिवर्तन: ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों के माध्यम से सरकार द्वारा व्यवहारिक परिवर्तन लाने के प्रयासों का मूल्यांकन करें। इसमें जागरूकता कार्यक्रम, शपथ समारोह, नारा प्रतियोगिताएँ, सफाई मित्रों के लिए कार्यशालाएँ, और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की सहभागिता जैसे पहलुओं को उजागर करें।
5. आगे की राह/निष्कर्ष: स्थायी स्वच्छता के लिए निरंतर प्रयासों, नागरिक समाज की भागीदारी, प्रौद्योगिकी के उपयोग और शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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