08 Aug कर्नाटक में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत केवल 12 स्टेशनों पर पूरा हुआ काम, राज्यसभा में पेश आंकड़े चौंकाने वाले

✎ अमृत भारत स्टेशन योजना का लक्ष्य देश भर के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की गति धीमी रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय। | GS Paper III — आधारभूत संरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
- Prelims: अमृत भारत स्टेशन योजना, रेलवे अवसंरचना, संसद में प्रश्नकाल, राज्यों में विकास परियोजनाएँ, सार्वजनिक जवाबदेही, रेल मंत्रालय
- Essay: भारत में अवसंरचना विकास की चुनौतियाँ और समाधान, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: घोषणा से परिणाम तक की यात्रा
त्वरित पुनरावृत्ति: अमृत भारत स्टेशन योजना का लक्ष्य देश भर के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की गति धीमी रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी सामने आई है कि अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत देश भर में चिन्हित 1,340 रेलवे स्टेशनों में से केवल 261 स्टेशनों पर ही कार्य पूर्ण हुआ है। कर्नाटक में चिन्हित 61 स्टेशनों में से केवल 12 स्टेशनों पर ही कार्य पूरा हो पाया है। यह योजना के क्रियान्वयन की धीमी गति और पारदर्शिता की कमी पर चिंताएँ बढ़ाता है, विशेषकर जब परियोजना की घोषणा दिसंबर 2022 में की गई थी।
पृष्ठभूमि
- भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा है और यह प्रतिदिन लाखों यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करती है।
- रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने तथा यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सरकार ने देश भर में रेलवे अवसंरचना (Railway Infrastructure) के विकास और आधुनिकीकरण के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं।
- संसद में सांसदों द्वारा पूछे गए प्रश्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और सरकार को जवाबदेह ठहराने का एक महत्वपूर्ण संसदीय उपकरण हैं।
- परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी से लागत में वृद्धि और जनता के लिए अपेक्षित लाभों में विलंब होता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सरकारी योजना की सफलता के लिए आवश्यक है, खासकर जब सार्वजनिक धन का उपयोग किया जा रहा हो।
अमृत भारत स्टेशन योजना क्या है?
- अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य देश भर के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है।
- इस योजना का लक्ष्य दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ स्टेशनों के विकास के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ तैयार करना और उसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना है।
- योजना के तहत, स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में सुधार, पहुंच में वृद्धि, स्वच्छता, सौंदर्यशास्त्र और स्थानीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- इसमें स्टेशन भवनों का उन्नयन, प्लेटफॉर्मों पर आश्रय, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, साइनेज, लिफ्ट/एस्केलेटर, मुफ्त वाई-फाई, प्रतीक्षा कक्ष, कार्यकारी लाउंज और खुदरा आउटलेट जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
- यह योजना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्टेशनों पर रूफ प्लाजा, सिटी सेंटर और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (Multimodal Connectivity) जैसी सुविधाओं के विकास की भी परिकल्पना करती है।
- योजना में ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (One Station One Product) जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देकर स्थानीय उत्पादों के लिए विपणन अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया गया है।
- इसका उद्देश्य स्टेशनों को न केवल परिवहन हब के रूप में बल्कि शहरी विकास के केंद्र के रूप में भी विकसित करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्टेशनों का आधुनिकीकरण | यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना और विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना। |
| शहरी विकास से जुड़ाव | रेलवे स्टेशनों को शहर के केंद्र के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले। |
| स्थानीय संस्कृति का प्रदर्शन | स्टेशन भवनों के डिजाइन में स्थानीय कला और संस्कृति को एकीकृत करना। |
| दीर्घकालिक योजना | अगले 25 वर्षों के लिए रेलवे स्टेशनों के विकास की परिकल्पना। |
| बहु-हितधारक दृष्टिकोण | रेलवे, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना। |
महत्व
बुनियादी ढाँचा विकास
- यह योजना देश भर में रेलवे बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और उन्नयन पर केंद्रित है, जो आर्थिक गतिविधियों और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है।
- आधुनिक रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और पहुंच प्रदान करते हैं, जिससे यात्रा का अनुभव बेहतर होता है।
क्षेत्रीय असमानताएँ
- योजना के कार्यान्वयन की धीमी गति से क्षेत्रीय असमानताएं बढ़ सकती हैं, क्योंकि कुछ राज्यों में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं जबकि अन्य पिछड़ रहे हैं।
- कर्नाटक जैसे राज्यों में धीमी प्रगति से स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से लाभान्वित हो सकते हैं।
राजकोषीय जवाबदेही
- परियोजनाओं के पूरा होने में देरी से लागत में वृद्धि हो सकती है, जिससे सार्वजनिक धन का अक्षम उपयोग होता है।
- योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता की कमी से जवाबदेही के मुद्दे उठते हैं और सार्वजनिक विश्वास कमजोर होता है।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में देरी
- योजना की घोषणा दिसंबर 2022 में हुई थी, लेकिन तीन साल से अधिक समय बाद भी केवल 19% स्टेशनों पर काम पूरा हुआ है।
- परियोजनाओं के पूरा होने में देरी से लागत में वृद्धि और अपेक्षित लाभों की प्राप्ति में विलंब होता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. पारदर्शिता की कमी
- रेल मंत्रालय ने स्टेशन-वार परियोजना लागत, अनुबंध आवंटन की तारीखें और वर्ष-वार प्रगति जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान नहीं की है।
- जानकारी की अनुपलब्धता संसद और जनता के लिए योजना के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना मुश्किल बनाती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. परियोजना प्रबंधन
- बड़ी संख्या में स्टेशनों (1,340) पर एक साथ काम शुरू करने के लिए कुशल परियोजना प्रबंधन और समन्वय की आवश्यकता होती है।
- संसाधनों के आवंटन और निगरानी में चुनौतियां धीमी प्रगति का कारण बन सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे आदि
4. जवाबदेही का अभाव
- सांसद द्वारा उठाए गए सवालों के बावजूद, मंत्रालय द्वारा विशिष्ट जानकारी प्रदान न करना जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
- यह सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व पर सवाल उठाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| धीमी प्रगति | देश भर में केवल 19% स्टेशनों पर काम पूरा हुआ है, जिससे योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति में देरी हो रही है। |
| पारदर्शिता का अभाव | परियोजना लागत और प्रगति विवरण का खुलासा न करना सार्वजनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है। |
| लागत में वृद्धि | परियोजनाओं के पूरा होने में देरी से अनुमानित लागत में वृद्धि हो सकती है। |
| क्षेत्रीय असंतुलन | कुछ राज्यों में धीमी प्रगति से विकास में क्षेत्रीय असमानताएं बढ़ सकती हैं। |
| सार्वजनिक विश्वास | बार-बार घोषणाओं और शिलान्यास समारोहों के बावजूद वास्तविक प्रगति की कमी से सार्वजनिक विश्वास कमजोर होता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme)
आगे की राह
- परियोजना कार्यान्वयन की गति में तेजी लाना और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूरा करना।
- योजना के तहत सभी परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और समय-सीमा सार्वजनिक करना।
- परियोजना लागत, अनुबंध आवंटन और वर्ष-वार प्रगति सहित सभी प्रासंगिक जानकारी का सक्रिय रूप से खुलासा करके पारदर्शिता बढ़ाना।
- परियोजना प्रबंधन इकाइयों को मजबूत करना और नियमित निगरानी तंत्र स्थापित करना।
- राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि भूमि अधिग्रहण और अन्य बाधाओं को दूर किया जा सके।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की संभावनाओं का पता लगाना ताकि संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके।
- कार्यान्वयन में देरी के लिए जवाबदेही तय करना और सुधारात्मक उपाय करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अमृत भारत स्टेशन योजना · रेलवे अवसंरचना · परियोजना कार्यान्वयन · जवाबदेही और पारदर्शिता · सार्वजनिक व्यय · बुनियादी ढाँचा विकास · संसदीय निगरानी · समयबद्ध परियोजना · राज्यों में विकास · रेल मंत्रालय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा किए गए व्यय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 112’, ‘note’: ‘वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 150’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के खातों का प्रारूप’}
अवधारणा प्रवाह
अमृत भारत स्टेशन योजना की घोषणा → स्टेशनों की पहचान और विकास कार्य शुरू → कार्यान्वयन में धीमी प्रगति और पारदर्शिता की कमी → संसद में प्रश्न और सरकार का जवाब → सार्वजनिक जवाबदेही और परियोजना प्रबंधन पर चिंता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का उद्देश्य देश भर के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है।
2. यह योजना दिसंबर 2022 में शुरू की गई थी।
3. योजना के तहत केवल बड़े शहरों के स्टेशनों को ही शामिल किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना का उद्देश्य देश भर के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है, जिसमें छोटे और बड़े दोनों तरह के स्टेशन शामिल हैं। यह योजना दिसंबर 2022 में शुरू की गई थी। कथन 3 गलत है क्योंकि इसमें छोटे स्टेशनों को भी शामिल किया गया है।
Q2. अभिकथन (A): अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन की गति धीमी रही है।
कारण (R): रेल मंत्रालय ने परियोजना लागत, अनुबंध की तारीखों और वर्ष-वार प्रगति जैसे विवरणों का खुलासा नहीं किया है, जिससे पारदर्शिता की कमी है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि राज्यसभा में दिए गए जवाब से पता चलता है कि कार्यान्वयन की गति धीमी है। कारण (R) भी सही है क्योंकि मंत्रालय ने पारदर्शिता से संबंधित जानकारी नहीं दी है, जिससे परियोजना की धीमी गति का मूल्यांकन करना कठिन हो जाता है। अतः, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अमृत भारत स्टेशन योजना जैसी महत्वाकांक्षी केंद्रीय योजनाओं के धीमे कार्यान्वयन के क्या कारण हो सकते हैं? ऐसी परियोजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अमृत भारत स्टेशन योजना का संक्षिप्त परिचय और इसके धीमे कार्यान्वयन का संदर्भ (राज्यसभा में प्रस्तुत डेटा)।
2. धीमे कार्यान्वयन के संभावित कारण (लगभग 4-5 बिंदु):
• निधि आवंटन और वितरण में देरी।
• भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी संबंधी मुद्दे।
• ठेकेदारों के चयन और कार्य निष्पादन में अक्षमता।
• अंतर-विभागीय समन्वय की कमी।
• तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियाँ।
• स्थानीय प्रतिरोध या राजनीतिक हस्तक्षेप।
3. जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय (लगभग 5-6 बिंदु):
• परियोजना-वार लागत, अनुबंध विवरण और समय-सीमा का सार्वजनिक प्रकटीकरण।
• स्वतंत्र ऑडिट और मूल्यांकन तंत्र की स्थापना।
• नागरिक समाज और स्थानीय निकायों की भागीदारी को बढ़ावा देना।
• सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम का प्रभावी उपयोग।
• डिजिटल निगरानी प्रणाली (जैसे डैशबोर्ड) का कार्यान्वयन।
• समय-समय पर संसदीय समितियों द्वारा समीक्षा।
• प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन और दंड प्रणाली।
4. निष्कर्ष: अवसंरचना परियोजनाओं के महत्व पर जोर देते हुए समयबद्ध और पारदर्शी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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