जुलाई 31 की अंतिम तिथि: फसल बीमा योजना में किसानों की आखिरी कोशिश

July 31 enrolment deadline triggers last-minute rush for crop insurance scheme — concept mind map

जुलाई 31 की अंतिम तिथि: फसल बीमा योजना में किसानों की आखिरी कोशिश

Map of Andhra Pradesh highlighted on the map of India — crop insurance scheme enrolment deadline Rayalaseema
मानचित्र व माइंड-मैप: Last-minute rush for crop insurance in Rayalaseema districts

✎ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति के विरुद्ध किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य कृषि जोखिमों को कम करना और किसानों की आय को स्थिर करना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय  |  GS Paper III — कृषि, मुख्य फसलें, विभिन्न प्रकार की सिंचाई प्रणालियाँ, कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी
  • Prelims: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS), कृषि बीमा, एल् नीनो, लघु एवं सीमांत किसान, फसल विविधीकरण
  • Essay: भारत में कृषि संकट और किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि: अनुकूलन एवं शमन रणनीतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति के विरुद्ध किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य कृषि जोखिमों को कम करना और किसानों की आय को स्थिर करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

फसल बीमा योजनाओं, विशेषकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी, जिसके कारण आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में किसानों द्वारा अंतिम समय में नामांकन कराने की होड़ देखी गई। यह क्षेत्र मानसून पर अत्यधिक निर्भर है और एल् नीनो के संभावित प्रभाव से उत्पन्न संकट के कारण किसानों के लिए फसल बीमा का महत्व और बढ़ गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे यह सूखे, बाढ़ और बेमौसम बारिश जैसी मौसमी अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील हो जाती है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव आए हैं, जिससे कृषि जोखिम और बढ़ गए हैं।
  • लघु एवं सीमांत किसान, जो भारतीय कृषि का बड़ा हिस्सा हैं, प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल क्षति होने पर सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
  • फसल क्षति से किसानों की आय में कमी आती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • सरकार ने किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने और कृषि जोखिमों को कम करने के लिए विभिन्न फसल बीमा योजनाएँ शुरू की हैं।
  • रायसीना जैसे क्षेत्र, जहाँ कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, फसल बीमा को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय के रूप में देखते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) क्या है?

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) को वर्ष 2016 में लॉन्च किया गया था।
  • इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • यह योजना किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करने के लिए एक समान प्रीमियम दर लागू करती है: खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5%।
  • शेष प्रीमियम लागत केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वहन की जाती है।
  • यह योजना बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक के जोखिमों को कवर करती है, जिसमें स्थानीय आपदाएँ और कटाई के बाद के नुकसान भी शामिल हैं।
  • योजना का कार्यान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
  • पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Restructured Weather-Based Crop Insurance Scheme – RWBCIS) भी PMFBY के साथ संचालित होती है, जो विशिष्ट मौसम मापदंडों (जैसे वर्षा, तापमान) के आधार पर बीमा कवरेज प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अंतिम तिथि पर नामांकन में वृद्धि किसानों में योजना के प्रति जागरूकता और अंतिम समय में लाभ उठाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
मानसून पर निर्भरता वाले क्षेत्रों पर ध्यान रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में कृषि की भेद्यता (vulnerability) को उजागर करता है, जहाँ फसल बीमा एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है।
एल नीनो (El Nino) का प्रभाव मौसम संबंधी अनिश्चितताओं और फसल क्षति के जोखिम को बढ़ाता है, जिससे बीमा की आवश्यकता और बढ़ जाती है।
छोटे और सीमांत किसानों की भागीदारी फसल बीमा की आवश्यकता को रेखांकित करता है, क्योंकि ये किसान मौसम की मार से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
बागवानी फसलों का समावेश योजना के व्यापक दायरे को दर्शाता है, जो केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि विविध कृषि उत्पादों को कवर करती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • फसल बीमा किसानों को प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे उनकी आय स्थिर रहती है।
  • यह कृषि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करता है, क्योंकि किसान जोखिम कम होने के कारण नई तकनीकों और उच्च उपज वाली किस्मों को अपनाने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं।
  • कृषि अर्थव्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो मौसमी वर्षा पर अत्यधिक निर्भर हैं।

सामाजिक महत्व

  • किसानों को अनिश्चितताओं से बचाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और ऋणग्रस्तता कम होती है।
  • छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल प्रदान करता है, जो अक्सर मौसम की मार से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और जिनके पास सीमित वित्तीय संसाधन होते हैं।
  • ग्रामीण आजीविका (livelihoods) को बनाए रखने और क्षेत्रीय आर्थिक संवृद्धि (economic growth) में योगदान देता है।

शासनिक महत्व

  • सरकार की किसान कल्याण नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य कृषि जोखिमों को कम करना है।
  • कृषि और बागवानी विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है ताकि अधिक से अधिक किसानों को बीमा योजनाओं के तहत नामांकित किया जा सके।
  • नीति निर्माताओं को कृषि क्षेत्र की भेद्यता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में मदद करता है।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और पहुंच की कमी

  • कई किसानों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, को अभी भी फसल बीमा योजनाओं और उनके लाभों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।
  • नामांकन प्रक्रिया की जटिलता और डिजिटल साक्षरता की कमी भी पहुंच में बाधा डालती है।

2. मौसम संबंधी अनिश्चितताएँ

  • जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मानसून, सूखे और बेमौसम बारिश जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे फसल नुकसान का जोखिम बढ़ रहा है।
  • एल नीनो जैसे वैश्विक मौसमी पैटर्न का प्रभाव क्षेत्रीय कृषि को और अधिक अस्थिर बना रहा है।

3. छोटे और सीमांत किसानों की भागीदारी

  • इन किसानों के पास अक्सर आवश्यक दस्तावेज और तकनीकी जानकारी की कमी होती है, जिससे नामांकन प्रक्रिया कठिन हो जाती है।
  • प्रीमियम भुगतान की वहनीयता (affordability) भी एक मुद्दा हो सकता है, भले ही सरकार सब्सिडी प्रदान करती हो।

4. दावा निपटान प्रक्रिया

  • दावा निपटान में देरी और पारदर्शिता की कमी किसानों के बीच अविश्वास पैदा कर सकती है।
  • फसल नुकसान के आकलन की सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अंतिम समय में नामांकन की भीड़ यह दर्शाता है कि किसान पूरे वर्ष योजना में रुचि नहीं लेते हैं, जिससे संभावित रूप से कवरेज छूट सकता है।
मौसम पर अत्यधिक निर्भरता रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में कृषि की अंतर्निहित भेद्यता को उजागर करता है, जहाँ जलवायु परिवर्तन का प्रभाव गंभीर हो सकता है।
एल नीनो का प्रभाव मौसम की अनिश्चितताओं को बढ़ाता है, जिससे फसल नुकसान का जोखिम और बीमा दावों की संख्या बढ़ सकती है।
छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या इन किसानों के लिए बीमा कवरेज सुनिश्चित करने में विशेष प्रयासों और अनुकूलित नीतियों की आवश्यकता है।
बागवानी फसलों के लिए बीमा इन फसलों के लिए नुकसान का आकलन और दावा निपटान पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY)
  • पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Restructured Weather-Based Crop Insurance Scheme – RWBCIS)

आगे की राह

  • किसानों के बीच फसल बीमा योजनाओं के लाभों और नामांकन प्रक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएँ।
  • नामांकन प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जाए, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए, जिसमें डिजिटल और ऑफ़लाइन दोनों माध्यमों का उपयोग हो।
  • दावा निपटान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, जिससे किसानों का विश्वास बढ़े और उन्हें समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।
  • फसल नुकसान के आकलन के लिए प्रौद्योगिकी (जैसे ड्रोन और उपग्रह इमेजरी) का उपयोग बढ़ाया जाए ताकि सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए कृषि पद्धतियों में सुधार और अनुकूलन रणनीतियों (adaptation strategies) को बढ़ावा दिया जाए।
  • कृषि ऋण के साथ फसल बीमा को एकीकृत करने के तरीकों का पता लगाया जाए ताकि अधिक से अधिक किसानों को स्वचालित रूप से कवर किया जा सके।
  • बागवानी फसलों के लिए विशिष्ट बीमा उत्पादों और मूल्यांकन विधियों को विकसित किया जाए, जो उनकी अनूठी प्रकृति को ध्यान में रखें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · फसल बीमा · कृषि जोखिम प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन · किसानों की आय · मौसम आधारित फसल बीमा · सूखा · वित्तीय सुरक्षा · कृषि क्षेत्र · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · सरकारी योजनाएँ · एकीकृत कृषि विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}

अवधारणा प्रवाह

अनिश्चित मौसम पैटर्न (जैसे एल नीनो)  →  फसल क्षति का बढ़ता जोखिम  →  किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव  →  फसल बीमा की आवश्यकता में वृद्धि  →  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसे उपाय  →  किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना  →  कृषि अर्थव्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल खरीफ फसलों को कवर करती है, रबी फसलों को नहीं।
2. इस योजना के तहत किसानों द्वारा भुगतान किया जाने वाला प्रीमियम सभी फसलों के लिए एक समान है।
3. यह योजना फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान के लिए भी कवरेज प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है क्योंकि PMFBY खरीफ, रबी और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों को कवर करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि खरीफ, रबी और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए प्रीमियम दरें अलग-अलग (क्रमशः 2%, 1.5% और 5%) हैं। कथन 3 सही है क्योंकि PMFBY फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान के लिए भी कवरेज प्रदान करती है, विशेषकर चक्रवात और बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान के लिए।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का/के उद्देश्य है/हैं?
1. प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के परिणामस्वरूप फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
2. किसानों को कृषि में नवाचार और आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
3. कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह सुनिश्चित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — PMFBY का प्राथमिक उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के लिए वित्तीय सहायता देना है। यह किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि यह जोखिम को कम करता है। साथ ही, यह योजना कृषि ऋण के लिए एक शर्त के रूप में कार्य करती है, जिससे कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह सुनिश्चित होता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से बचाने में फसल बीमा योजनाओं की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की प्रमुख विशेषताओं और चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में कृषि की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और फसल बीमा की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. फसल बीमा की भूमिका: कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने में फसल बीमा की सामान्य भूमिका (जैसे वित्तीय सुरक्षा, आय स्थिरीकरण, निवेश प्रोत्साहन) का विश्लेषण।
3. PMFBY की प्रमुख विशेषताएँ:
* उद्देश्य (किसानों को वित्तीय सहायता, ऋण पात्रता)।
* कवरेज (प्राकृतिक आपदाएँ, कीट, बीमारियाँ, फसल कटाई के बाद के नुकसान)।
* प्रीमियम दरें (खरीफ, रबी, वाणिज्यिक फसलों के लिए)।
* अनिवार्य/स्वैच्छिक प्रावधान।
* प्रौद्योगिकी का उपयोग (रिमोट सेंसिंग, स्मार्टफोन)।
4. PMFBY की चुनौतियाँ:
* कम नामांकन दर (विशेषकर गैर-ऋणी किसानों में)।
* दावों के निपटान में देरी।
* बीमा कंपनियों की उदासीनता।
* जोखिम मूल्यांकन और उपज अनुमान में समस्याएँ।
* जागरूकता की कमी।
* आधारभूत संरचना की कमी (जैसे मौसम स्टेशन)।
5. आलोचनात्मक मूल्यांकन: योजना की सफलताओं और सीमाओं का संतुलित विश्लेषण। यह कैसे जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन में सहायक है और कहाँ सुधार की आवश्यकता है।
6. निष्कर्ष: फसल बीमा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव (जैसे जागरूकता बढ़ाना, दावों का त्वरित निपटान, प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग) और कृषि क्षेत्र की समग्र स्थिरता में इसकी भूमिका पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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