महिला आरक्षण विधेयक पर शिअद का समर्थन, केंद्र से तत्काल लागू करने की मांग

महिला आरक्षण विधेयक को अकाली दल का समर्थन: शिअद ने केंद्र से की ये मांग, BJP से गठबंधन पर क्या बोले गुलजार? — concept mind map

महिला आरक्षण विधेयक पर शिअद का समर्थन, केंद्र से तत्काल लागू करने की मांग

Map of Punjab highlighted on the map of India — महिला आरक्षण विधेयक 2026
मानचित्र व माइंड-मैप: SAD demands Women Reservation Bill implementation

✎ नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है, जिसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना  |  GS Paper II — संसद और राज्य विधानमंडल—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय  |  GS Paper II — संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध
  • Prelims: महिला आरक्षण विधेयक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, परिसीमन, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 330A, अनुच्छेद 332A, संवैधानिक संशोधन
  • Essay: भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में विधायी पहलें, भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का सिद्धांत और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है, जिसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को तत्काल लागू करने की मांग की है। पार्टी ने सभी राज्यों में संसदीय सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के केंद्र के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है, जिसे परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया जाना है। अकाली दल ने इन विधेयकों को पंजाब के हित, शांति और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

पृष्ठभूमि

  • महिला आरक्षण विधेयक, जिसे अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है।
  • यह विधेयक पहली बार 1996 में पेश किया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से पारित नहीं हो सका। इसे कई बार संसद में प्रस्तुत किया गया, लेकिन राजनीतिक सहमति के अभाव में यह लंबित रहा।
  • सितंबर 2023 में, संसद ने 128वें संवैधानिक संशोधन विधेयक, 2023 के रूप में इसे पारित किया, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के रूप में अधिसूचित किया गया।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, महिला आरक्षण जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होगा।
  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या एक विधायी निकाय वाले प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना। इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर सभी नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
  • भारत में परिसीमन का कार्य परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसका गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया जाता है।
  • परिसीमन आयोग के आदेशों को कानून का बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।

महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) और परिसीमन क्या है?

  • महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम): यह अधिनियम भारतीय संविधान में अनुच्छेद 330A और 332A जोड़कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कुल सीटों का एक-तिहाई (33 प्रतिशत) आरक्षित करता है। यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण का भी प्रावधान करता है।
  • आरक्षण का प्रावधान: यह आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए होगा, जिसे संसद द्वारा कानून बनाकर बढ़ाया जा सकता है। आरक्षित सीटें प्रत्येक आम चुनाव के बाद रोटेशन (चक्रानुक्रम) द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
  • परिसीमन: परिसीमन का शाब्दिक अर्थ है ‘सीमाओं का निर्धारण’। भारत में, यह एक निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं या सीटों की संख्या को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया है, ताकि जनसंख्या में परिवर्तन को दर्शाया जा सके और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बनाए रखा जा सके।
  • संवैधानिक आधार: संविधान का अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है। इसी प्रकार, अनुच्छेद 170 राज्यों को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करने का अधिकार देता है।
  • परिसीमन आयोग: परिसीमन आयोग का गठन भारत सरकार द्वारा किया जाता है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं।
  • वर्तमान स्थिति: 2002 के परिसीमन अधिनियम के तहत, लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया गया था। महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के लिए अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन का इंतजार करना होगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान कर लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
परिसीमन प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्गठन, जिससे सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिले।
संसदीय सीटों में 50% वृद्धि राज्यों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना और जनसंख्या परिवर्तनों को समायोजित करना।
तत्काल कार्यान्वयन की मांग महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन को बिना किसी देरी के लागू करने पर जोर।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह विधेयक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
  • राजनीतिक सशक्तिकरण से महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा, जिससे समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।

राजनीतिक महत्व

  • महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ने से संसद और विधानसभाओं में विविध दृष्टिकोणों का समावेश होगा, जिससे बेहतर नीतियां बनेंगी।
  • परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से सीटों का निष्पक्ष पुनर्गठन सुनिश्चित होगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
  • यह विधेयक भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी तथा प्रतिनिधिमूलक बनाएगा।

शासनिक महत्व

  • महिला आरक्षण और परिसीमन का तत्काल कार्यान्वयन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • संसदीय सीटों में वृद्धि से जनप्रतिनिधियों पर कार्यभार कम हो सकता है और वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

चुनौतियाँ

1. परिसीमन की निष्पक्षता

  • परिसीमन प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है कि यह निष्पक्ष हो और किसी भी राज्य या समुदाय के साथ अन्याय न हो।
  • जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन करते समय राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

2. आरक्षण का कार्यान्वयन

  • महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में तकनीकी और प्रक्रियात्मक चुनौतियां आ सकती हैं, जैसे कि सीटों का रोटेशन और आरक्षित सीटों का निर्धारण।
  • राजनीतिक दलों के भीतर महिलाओं को टिकट देने और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की चुनौती।

3. राजनीतिक सहमति का अभाव

  • महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों के बीच पूर्ण सहमति बनाना एक चुनौती हो सकती है।
  • विभिन्न राज्यों की अलग-अलग मांगों और चिंताओं को समायोजित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परिसीमन की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करना कि प्रक्रिया निष्पक्ष हो और किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो।
महिला आरक्षण का कार्यान्वयन आरक्षित सीटों के रोटेशन और निर्धारण से संबंधित तकनीकी और प्रक्रियात्मक जटिलताएं।
राजनीतिक दलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व आरक्षण के बावजूद राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को पर्याप्त अवसर न देना।
राज्यों के बीच असंतुलन जनसंख्या वृद्धि के आधार पर सीटों के पुनर्गठन से कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होने की आशंका।

आगे की राह

  • महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन प्रक्रिया को बिना किसी देरी के लागू करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
  • परिसीमन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कार्य करने के लिए पर्याप्त स्वायत्तता और संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
  • महिला आरक्षण के कार्यान्वयन के लिए एक पारदर्शी और सुसंगत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें सीटों के रोटेशन और आवंटन के नियम स्पष्ट हों।
  • राजनीतिक दलों को महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने के लिए आंतरिक नीतियां बनानी चाहिए।
  • परिसीमन प्रक्रिया के दौरान सभी राज्यों और हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए ताकि उनकी चिंताओं को दूर किया जा सके।
  • जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में परिसीमन के कारण राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में बड़े असंतुलन से बचा जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

महिला आरक्षण विधेयक · नारी शक्ति वंदन अधिनियम · संवैधानिक संशोधन · परिसीमन · समान प्रतिनिधित्व · पंचायती राज संस्थाएँ · स्थानीय स्वशासन · राजनीतिक सशक्तिकरण · संघवाद · लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 330A’, ‘note’: ‘लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 332A’, ‘note’: ‘राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 334A’, ‘note’: ‘आरक्षण के कार्यान्वयन की अवधि’}

अवधारणा प्रवाह

महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन पर चर्चा  →  शिरोमणि अकाली दल द्वारा समर्थन  →  केंद्र से तत्काल कार्यान्वयन की मांग  →  लोकसभा सीटों में 50% वृद्धि का प्रस्ताव  →  महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
2. यह आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण का भी प्रावधान करता है।
3. यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण भी शामिल है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह विधेयक जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा।

Q2. अभिकथन (A): महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
कारण (R): भारत में महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से कम रहा है, जिससे उन्हें नीति-निर्माण में पर्याप्त आवाज नहीं मिल पाई है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण विधेयक लाया गया है, क्योंकि भारत में महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व वास्तव में कम रहा है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए। यह विधेयक भारत में लैंगिक समानता और राजनीतिक सशक्तिकरण को किस हद तक बढ़ावा दे सकता है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का संक्षिप्त परिचय, इसके पारित होने का संदर्भ।
2. **प्रमुख प्रावधान:**
* लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण।
* अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई उप-आरक्षण।
* यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए होगा, जिसे संसद द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
* लागू होने की प्रक्रिया: अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही यह लागू होगा।
* रोटेशन का प्रावधान: आरक्षित सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद रोटेशन के माध्यम से आवंटित की जाएंगी।
3. **लैंगिक समानता और राजनीतिक सशक्तिकरण को बढ़ावा:**
* **सकारात्मक प्रभाव:**
* निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि।
* महिलाओं से संबंधित मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलना (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा)।
* राजनीतिक दलों में महिलाओं को टिकट देने का दबाव।
* पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की सफलता का उदाहरण (जैसे महिला सरपंचों का उदय)।
* सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को स्वीकार्यता।
* **चुनौतियाँ/सीमाएँ:**
* तत्काल लागू न होना: जनगणना और परिसीमन की अनिश्चितता।
* राज्यसभा और राज्य विधान परिषदों में आरक्षण का अभाव।
* ‘रबर स्टाम्प’ प्रतिनिधियों की संभावना (पुरुष रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित)।
* आरक्षण से योग्यता पर प्रभाव की बहस।
* वास्तविक सशक्तिकरण के लिए सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता।
4. **निष्कर्ष:** विधेयक के महत्व को रेखांकित करते हुए, इसके प्रभावी कार्यान्वयन और व्यापक सामाजिक सुधारों की आवश्यकता पर बल देना।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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