11 Aug डीडीयू-जीकेवाई 2.0: ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार से जोड़ने की नई पहल

✎ दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जो ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़कर गरीबी उन्मूलन और आजीविका संवर्धन का लक्ष्य रखती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे | GS Paper III — समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय, रोजगार
- Prelims: दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY), दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), कौशल विकास, ग्रामीण आजीविका, गरीबी उन्मूलन, प्लेसमेंट-आधारित प्रशिक्षण, सेक्टर स्किल काउंसिल
- Essay: ग्रामीण भारत में कौशल विकास और उद्यमिता के माध्यम से समावेशी विकास, जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग: भारत के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जो ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़कर गरीबी उन्मूलन और आजीविका संवर्धन का लक्ष्य रखती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के कार्यान्वयन और प्रगति के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने योजना के तहत प्रशिक्षित और नियोजित ग्रामीण युवाओं की संख्या, विशेष रूप से मध्य प्रदेश राज्य और ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में, तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित बजट का विवरण दिया। यह जानकारी योजना के महत्व और ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास तथा रोजगार सृजन में इसकी भूमिका को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत की ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहा है।
- ग्रामीण युवाओं में कौशल की कमी उन्हें संगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से वंचित करती है।
- सरकार ने ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने और गरीबी को कम करने के लिए विभिन्न पहलों की शुरुआत की है।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण गरीबों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ाने का एक प्रमुख कार्यक्रम है।
- DDU-GKY को DAY-NRLM के एक भाग के रूप में ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रदान करने और उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को अद्यतन करने की आवश्यकता महसूस की गई है।
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) क्या है?
- DDU-GKY दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत एक पहल है, जिसका उद्देश्य आजीविका विविधीकरण और गरीबी उन्मूलन है।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कुशल बनाना और उनके लिए सतत आजीविका को बढ़ावा देना है।
- DDU-GKY 2.0 के तहत संशोधित दिशा-निर्देश वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू किए गए हैं, जो उद्योग-संचालित प्रशिक्षण, सतत रोजगार, नियोजन पश्चात सहायता और कौशल उन्नयन पर केंद्रित हैं।
- यह योजना इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रखरखाव, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, खुदरा और आतिथ्य जैसे उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है।
- प्रशिक्षण के बाद नियोजन को अनिवार्य उद्योग साझेदारियों, नियोक्ता समझौतों, रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट अभियानों के माध्यम से सुगम बनाया जाता है।
- योजना में उद्योगों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कैप्टिव नियोक्ताओं के लिए लक्ष्यों का 20% आवंटन और परियोजना कार्यान्वयन अभिकरणों (PIA) को बैच मोड भुगतान जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
- DDU-GKY 2.0 एक वर्ष की नियोजन पश्चात निगरानी एवं सहायता, परामर्श, प्रवासन सहायता और कौशल उन्नयन के अवसरों के माध्यम से दीर्घकालिक रोजगार परिणामों (न्यूनतम 6 माह के लिए अधिकतम 20% स्वरोजगार या गिग रोजगार सहित न्यूनतम 70% प्लेसमेंट) पर ध्यान केंद्रित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण | ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार क्षमता में वृद्धि और पलायन में कमी। |
| प्लेसमेंट-लिंक्ड कौशल कार्यक्रम | प्रशिक्षण को सीधे रोजगार के अवसरों से जोड़ना, जिससे प्रशिक्षण की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता बढ़ती है। |
| उद्योग-संचालित प्रशिक्षण और सतत रोजगार | उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना और दीर्घकालिक रोजगार सुनिश्चित करना। |
| उभरते क्षेत्रों पर ध्यान | इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में युवाओं को तैयार करना। |
| नियोजन पश्चात सहायता और निगरानी | रोजगार के स्थायित्व और करियर की प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर समर्थन। |
| कैप्टिव नियोक्ताओं के लिए लक्ष्य आवंटन | उद्योगों के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करना और सुनिश्चित प्लेसमेंट को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी को कम करके आर्थिक समावेशिता को बढ़ावा देना।
- कुशल कार्यबल का निर्माण कर देश की समग्र उत्पादकता और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान देना।
- ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार (Self-employment) और गिग रोजगार (Gig Employment) के अवसरों के लिए तैयार करना, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण युवाओं, विशेषकर वंचित वर्गों के लिए आजीविका के अवसर प्रदान कर सामाजिक समानता को बढ़ावा देना।
- ग्रामीण-शहरी पलायन को कम करने में सहायता करना, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव कम होता है।
- महिलाओं और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों को सशक्त बनाना, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होता है।
शासन और नीतिगत महत्व
- कौशल विकास कार्यक्रमों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (National Rural Livelihoods Mission) के व्यापक गरीबी उन्मूलन लक्ष्यों के साथ एकीकृत करना।
- उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के प्रति सरकारी कौशल विकास पहलों की अनुकूलनशीलता को प्रदर्शित करना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के माध्यम से प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन का उदाहरण प्रस्तुत करना।
चुनौतियाँ
1. प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता
- यह सुनिश्चित करना कि प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग की वास्तविक मांगों और उभरते रोजगार के अवसरों के अनुरूप हों।
- प्रशिक्षण सामग्री, प्रशिक्षकों की योग्यता और बुनियादी ढांचे में निरंतर सुधार की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
2. सतत नियोजन और प्रतिधारण
- प्रशिक्षित युवाओं के लिए दीर्घकालिक और सम्मानजनक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना।
- नियोजन पश्चात सहायता और निगरानी तंत्र को मजबूत करना ताकि रोजगार छोड़ने की दर (Attrition Rate) को कम किया जा सके।
यूपीएससी लिंक: बेरोजगारी, गरीबी उन्मूलन
3. ग्रामीण-शहरी विभाजन और पहुंच
- दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं तक योजना की पहुंच सुनिश्चित करना।
- डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की कमी को दूर करना, विशेषकर उभरते क्षेत्रों के प्रशिक्षण में।
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास, क्षेत्रीय असमानताएं
4. निगरानी और मूल्यांकन
- योजना के परिणामों, विशेषकर रोजगार के स्थायित्व और आय वृद्धि पर प्रभावी ढंग से नज़र रखना।
- डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणालियों को मजबूत करना ताकि नीतिगत सुधार किए जा सकें।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उद्योग की बदलती आवश्यकताएँ | प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को तेजी से बदलते बाजार की मांगों के अनुरूप अपडेट करने की चुनौती। |
| प्लेसमेंट के बाद की स्थिरता | प्रशिक्षित युवाओं के लिए न्यूनतम 6 महीने के रोजगार को सुनिश्चित करना और नौकरी छोड़ने की दर को कम करना। |
| ग्रामीण युवाओं तक पहुंच | दूरस्थ और वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का लाभ पहुंचाने में आने वाली बाधाएँ। |
| फंड का प्रभावी उपयोग | आवंटित बजट का समय पर और कुशल तरीके से व्यय सुनिश्चित करना। |
| गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों की उपलब्धता | उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए पर्याप्त और योग्य प्रशिक्षकों की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY)
- दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
आगे की राह
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योग की उभरती मांगों के साथ निरंतर संरेखित करने के लिए नियमित बाजार अनुसंधान और पाठ्यक्रम अद्यतन करना।
- प्लेसमेंट के बाद की निगरानी और सहायता प्रणाली को और मजबूत करना, जिसमें परामर्श, प्रवासन सहायता और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हों।
- दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल उपकरणों और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों का लाभ उठाना।
- निजी क्षेत्र और सेक्टर स्किल काउंसिलों (Sector Skill Councils) के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करना ताकि उद्योग-संचालित प्रशिक्षण और प्लेसमेंट को बढ़ावा मिल सके।
- प्रशिक्षण प्रदाताओं और परियोजना कार्यान्वयन अभिकरणों (Project Implementing Agencies) के प्रदर्शन का कठोर मूल्यांकन करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- स्वरोजगार और गिग अर्थव्यवस्था के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए उद्यमिता कौशल और वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण को एकीकृत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना · ग्रामीण विकास मंत्रालय · राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन · कौशल विकास · गरीबी उन्मूलन · सतत आजीविका · ग्रामीण युवा · प्लेसमेंट-आधारित प्रशिक्षण · उद्योग भागीदारी · रोजगार सृजन · डीडीयू-जीकेवाई 2.0 · सामाजिक-आर्थिक विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि करेगा।’}
- {‘अनुच्छेद 39’: ‘राज्य आजीविका के पर्याप्त साधन सुनिश्चित करेगा।’}
- {‘अनुच्छेद 41’: ‘राज्य काम पाने के अधिकार को सुनिश्चित करेगा।’}
- {‘अनुच्छेद 46’: ‘राज्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा देगा।’}
अवधारणा प्रवाह
ग्रामीण युवाओं में कौशल की कमी → दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना का कार्यान्वयन → उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना → प्लेसमेंट-लिंक्ड रोजगार के अवसर → नियोजन पश्चात सहायता और निगरानी → ग्रामीण आजीविका में सुधार और गरीबी उन्मूलन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का एक घटक है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित करना है।
3. DDU-GKY 2.0 के तहत, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रखरखाव और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि DDU-GKY, DAY-NRLM के अंतर्गत एक पहल है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार योग्य बनाना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि DDU-GKY 2.0 में उभरते क्षेत्रों जैसे EV रखरखाव और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
Q2. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के कार्यान्वयन से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. योजना का उद्देश्य: ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना
2. DDU-GKY 2.0 की विशेषता: प्रशिक्षण वितरण में अधिक लचीलापन
3. योजना के तहत अनिवार्य नियोजन अवधि: न्यूनतम 6 माह
उपरोक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — युग्म 1 गलत है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कुशल बनाना और सतत आजीविका को बढ़ावा देना है, जिसमें स्वरोजगार एक पहलू हो सकता है लेकिन मुख्य उद्देश्य नहीं। युग्म 2 सही है क्योंकि DDU-GKY 2.0 में प्रशिक्षण वितरण में अधिक लचीलेपन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। युग्म 3 गलत है क्योंकि योजना में परियोजना कार्यान्वयन अभिकरणों (PIAs) को बैच मोड भुगतान के लिए 6 महीने की सफल अनिवार्य नियोजन अवधि से जुड़ी शर्त है, न कि अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य नियोजन अवधि।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और सतत आजीविका को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक है? DDU-GKY 2.0 के तहत किए गए प्रमुख संशोधनों और उनके संभावित प्रभावों की भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के साथ इसके संबंध का उल्लेख।
2. **सहायता का स्वरूप (DDU-GKY की भूमिका):**
* **प्लेसमेंट-आधारित कौशल प्रशिक्षण:** ग्रामीण युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रदान करना।
* **गरीबी उन्मूलन और आजीविका विविधीकरण:** ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि और आर्थिक स्थिरता।
* **रोजगार सृजन:** लगभग 12.35 लाख अभ्यर्थियों को रोजगार मिलने जैसे आँकड़ों का उल्लेख।
* **उद्योग भागीदारी:** अनिवार्य उद्योग साझेदारियों, नियोक्ता समझौतों, रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट अभियानों के माध्यम से नियोजन की सुविधा।
* **विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण:** परिधान, ऑटोमोटिव, स्वास्थ्य सेवा, IT-ITES, लॉजिस्टिक्स आदि जैसे क्षेत्रों का उल्लेख।
3. **DDU-GKY 2.0 के प्रमुख संशोधन:**
* **उद्योग-संचालित प्रशिक्षण:** उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम।
* **सतत रोजगार और नियोजन पश्चात सहायता:** एक वर्ष की निगरानी, परामर्श, प्रवासन सहायता, शिकायत निवारण तंत्र।
* **कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन:** करियर की प्रगति के अवसर।
* **प्रशिक्षण वितरण में लचीलापन:** अधिक अनुकूलित और प्रभावी प्रशिक्षण मॉडल।
* **उभरते क्षेत्रों पर ध्यान:** इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रखरखाव, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता।
* **कैप्टिव नियोक्ताओं के लिए लक्ष्य:** उद्योगों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने हेतु 20% लक्ष्य आवंटन।
* **दीर्घकालिक रोजगार परिणाम:** न्यूनतम 6 माह के लिए अधिकतम 20% स्वरोजगार/गिग रोजगार सहित न्यूनतम 70% प्लेसमेंट का लक्ष्य।
4. **संभावित प्रभाव:**
* **रोजगार की गुणवत्ता में सुधार:** दीर्घकालिक और टिकाऊ रोजगार के अवसर।
* **ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण:** ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी और स्थानीय विकास।
* **उद्योग-कौशल अंतर को पाटना:** उद्योगों की मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता।
* **सामाजिक-आर्थिक समावेशन:** हाशिए पर पड़े ग्रामीण युवाओं को मुख्यधारा में लाना।
5. **निष्कर्ष:** योजना की निरंतर प्रासंगिकता और ग्रामीण भारत के समावेशी विकास में इसकी भूमिका पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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