प्रवासी बीमा योजना का दूसरा चरण 18 अगस्त से शुरू: UPSC के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

Second phase of Pravasi insurance scheme for expats to begin on August 18 — concept mind map

प्रवासी बीमा योजना का दूसरा चरण 18 अगस्त से शुरू: UPSC के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

प्रवासी बीमा योजना का दूसरा चरण 18 अगस्त से शुरू: UPSC के लिए महत्वपूर्ण जानकारी — नोर्का केयर प्लस योजना का दूसरा चरण: प्रमुख तिथियाँ
आरेख: नोर्का केयर प्लस योजना का दूसरा चरण: प्रमुख तिथियाँ

✎ NORKA केयर प्लस प्रवासी केरलवासियों के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय (प्रवासी भारतीय कल्याण योजनाएँ)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बीमा क्षेत्र, सामाजिक सुरक्षा)
  • Prelims: NORKA केयर प्लस योजना, प्रवासी भारतीय, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, केरल सरकार, NORKA-ROOTS, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी
  • Essay: प्रवासी भारतीयों का कल्याण और भारत का विकास, सामाजिक सुरक्षा जाल और समावेशी विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: NORKA केयर प्लस प्रवासी केरलवासियों के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल सरकार की प्रवासी केरलवासियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना, NORKA केयर प्लस (NoRKA Care Plus) का दूसरा चरण 18 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस अवसर पर योजना के लिए एक नया पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा। यह चरण 18 अगस्त, 2026 से 14 अप्रैल, 2027 तक की शेष आठ महीने की पॉलिसी अवधि को कवर करेगा, जिसके लिए प्रीमियम में कुछ बदलाव किए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत में बड़ी संख्या में लोग बेहतर अवसरों की तलाश में विदेशों में प्रवास करते हैं, जिन्हें प्रवासी भारतीय (Expatriate Indians) कहा जाता है।
  • इन प्रवासियों को अक्सर विदेशों में और भारत लौटने पर भी स्वास्थ्य संबंधी और अन्य आकस्मिकताओं का सामना करना पड़ता है।
  • कई राज्य सरकारों ने अपने प्रवासी नागरिकों के कल्याण के लिए विशेष विभाग और योजनाएँ स्थापित की हैं। केरल इस संबंध में अग्रणी राज्यों में से एक है।
  • NORKA (Non-Resident Keralites Affairs) विभाग केरल सरकार का एक महत्वपूर्ण विभाग है जो प्रवासी केरलवासियों के मामलों को देखता है। NORKA-ROOTS इस विभाग की क्षेत्रीय एजेंसी है।
  • प्रवासी भारतीयों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना भारत सरकार और राज्य सरकारों दोनों की प्राथमिकता रही है।
  • बीमा योजनाएँ ऐसे प्रवासियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेषकर स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में।
  • NORKA केयर प्लस योजना 15 अप्रैल, 2026 को प्रभावी हुई थी, और इसका उद्देश्य प्रवासी केरलवासियों को व्यापक बीमा कवरेज प्रदान करना है।

NORKA केयर प्लस योजना क्या है?

  • NORKA केयर प्लस प्रवासी केरलवासियों के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना है।
  • यह योजना 18 से 70 वर्ष की आयु के प्रवासी केरलवासियों के लिए है जिनके पास वैध NORKA प्रवासी आईडी, छात्र आईडी या NRK आईडी है।
  • यह योजना 5 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक के सात बीमा कवरेज स्लैब प्रदान करती है।
  • 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक की पॉलिसियों के तहत, पॉलिसीधारक के माता-पिता या पति/पत्नी (80 वर्ष तक की आयु तक) को भी शामिल किया जा सकता है।
  • पंजीकरण NORKA-ROOTS वेबसाइट (www.norkaroots.kerala.gov.in) या NORKA केयर प्लस मोबाइल एप्लिकेशन (Apple App Store और Google Play Store पर उपलब्ध) के माध्यम से किया जा सकता है।
  • यह योजना देश भर के लगभग 24,000 अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्रदान करती है, जिसमें केरल के 688 से अधिक अस्पताल शामिल हैं।
  • यह योजना यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (United India Insurance Company) के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है, जो एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
  • योजना ने अब तक 99.38% की दावा निपटान दर हासिल की है, जो इसकी प्रभावशीलता को दर्शाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा प्रवासी भारतीयों को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों और दुर्घटनाओं से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
आयु पात्रता 18 से 70 वर्ष की आयु के प्रवासी केरलवासी पात्र हैं, जिससे एक बड़े वर्ग को लाभ मिलता है।
पॉलिसीधारक के माता-पिता/जीवनसाथी का समावेशन ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक की पॉलिसियों में 80 वर्ष तक के माता-पिता या जीवनसाथी को शामिल करने की अनुमति, जिससे परिवार को व्यापक कवरेज मिलता है।
कैशलेस उपचार सुविधा देश भर के 24,000 अस्पतालों में कैशलेस उपचार, जिसमें केरल के 688 से अधिक अस्पताल शामिल हैं, जिससे चिकित्सा खर्चों का प्रबंधन आसान होता है।
उच्च दावा निपटान दर 99.38% की दावा निपटान दर योजना की विश्वसनीयता और दक्षता को दर्शाती है।
डिजिटल नामांकन NoRKA-ROOTS वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आसान ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह योजना प्रवासी भारतीयों, विशेषकर केरल के प्रवासियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधी अनिश्चितताओं से बचाव मिलता है।
  • यह प्रवासी परिवारों के कल्याण को सुनिश्चित करता है, क्योंकि यह न केवल पॉलिसीधारक बल्कि उनके माता-पिता और जीवनसाथी को भी कवर करता है।

आर्थिक महत्व

  • स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रवासी भारतीयों पर अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों के वित्तीय बोझ को कम करता है।
  • यह प्रवासियों को अपने गृह राज्य और देश के साथ जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे उनके द्वारा भेजे गए धन (remittances) का प्रवाह बना रहता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह योजना राज्य सरकारों द्वारा अपने प्रवासी नागरिकों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक उदाहरण है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी (यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी) के साथ साझेदारी सार्वजनिक-निजी सहयोग का एक सफल मॉडल दर्शाती है।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और पहुँच

  • सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले या डिजिटल साक्षरता की कमी वाले प्रवासियों तक योजना की जानकारी पहुँचाना एक चुनौती हो सकती है।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी पात्र प्रवासी, विशेषकर कम आय वाले वर्ग, योजना का लाभ उठा सकें।

2. प्रीमियम सामर्थ्य

  • प्रीमियम में संभावित बदलाव और विभिन्न आय स्तरों के प्रवासियों के लिए इसकी सामर्थ्य सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • उच्च कवरेज स्लैब के लिए प्रीमियम का प्रबंधन, खासकर उन प्रवासियों के लिए जिनकी आय कम है।

3. दावा प्रक्रिया में जटिलताएँ

  • दावा निपटान दर उच्च होने के बावजूद, कुछ मामलों में प्रक्रियात्मक जटिलताएँ या दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकताएँ प्रवासियों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
  • विभिन्न देशों से दावों का समन्वय और समय पर निपटान सुनिश्चित करना।

4. योजना का स्थायित्व

  • दीर्घकाल में योजना की वित्तीय स्थिरता और कवरेज को बनाए रखना, विशेष रूप से दावों की बढ़ती संख्या के साथ।
  • बदलती वैश्विक परिस्थितियों और प्रवासन पैटर्न के अनुकूल होना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमित नामांकन अवधि एक महीने की नामांकन अवधि कुछ प्रवासियों के लिए अपर्याप्त हो सकती है, खासकर जो दूरदराज के इलाकों में हैं या जिनके पास इंटरनेट की पहुँच कम है।
प्रीमियम में बदलाव प्रीमियम में बदलाव से कुछ प्रवासियों के लिए योजना की लागत अप्रत्याशित हो सकती है, जिससे उनकी भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
आयु सीमा 70 वर्ष से अधिक आयु के प्रवासी, जिन्हें स्वास्थ्य बीमा की सबसे अधिक आवश्यकता हो सकती है, वे इस योजना के दायरे से बाहर हैं।
विभिन्न देशों में जागरूकता 138 देशों में फैले प्रवासियों के बीच योजना के बारे में समान रूप से जागरूकता फैलाना एक बड़ी चुनौती है।
तकनीकी पहुँच कुछ प्रवासियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करना मुश्किल हो सकता है, जिससे नामांकन में बाधा आ सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • NoRKA Care Plus
  • NoRKA Care

आगे की राह

  • योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए लक्षित प्रचार अभियान चलाए जाने चाहिए, विशेषकर उन देशों में जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं।
  • नामांकन प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जाना चाहिए और डिजिटल पहुँच से वंचित प्रवासियों के लिए वैकल्पिक ऑफलाइन नामांकन विकल्प प्रदान किए जाने चाहिए।
  • प्रीमियम संरचना की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह विभिन्न आय वर्गों के प्रवासियों के लिए सस्ती बनी रहे।
  • दावा निपटान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया जाना चाहिए, जिसमें प्रवासियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए।
  • योजना के कवरेज और लाभों का विस्तार करने की संभावनाओं का पता लगाया जाना चाहिए, जैसे कि आयु सीमा में छूट या अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं का समावेश।
  • प्रवासी भारतीयों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए ताकि व्यापक और एकीकृत नीतियां बनाई जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रवासी भारतीय · सामाजिक सुरक्षा · स्वास्थ्य बीमा · कल्याण योजनाएँ · राज्य सरकार की पहल · अप्रवासी भारतीय · वित्तीय समावेशन · नोरका केयर प्लस · सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियाँ · प्रवासी कल्याण निधि

अवधारणा प्रवाह

प्रवासी भारतीय (Non-Resident Indians) विदेशों में कार्यरत होते हैं।  →  उन्हें स्वास्थ्य और दुर्घटना संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ता है।  →  राज्य सरकारें (जैसे केरल) उनके कल्याण के लिए योजनाएं शुरू करती हैं।  →  NoRKA Care Plus जैसी बीमा योजनाएं वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं।  →  इससे प्रवासियों और उनके परिवारों को लाभ मिलता है तथा वे देश से जुड़े रहते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. नोरका केयर प्लस (NoRKA Care Plus) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल 18 से 60 वर्ष की आयु के अप्रवासी भारतीयों के लिए है।
2. यह एक व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना है।
3. इसमें पॉलिसीधारक के माता-पिता या पति/पत्नी को भी शामिल किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना 18 से 70 वर्ष की आयु के अप्रवासी भारतीयों के लिए है। कथन 2 सही है क्योंकि यह एक व्यापक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना है। कथन 3 सही है क्योंकि ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक की पॉलिसियों के तहत, पॉलिसीधारक के माता-पिता या पति/पत्नी को 80 वर्ष की आयु तक शामिल किया जा सकता है। इसलिए, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘प्रवासी भारतीय’ की सबसे सटीक परिभाषा प्रस्तुत करता है?

  1. वह भारतीय नागरिक जो किसी अन्य देश में स्थायी रूप से निवास करता है।
  2. वह व्यक्ति जो भारतीय मूल का है लेकिन उसने किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है।
  3. वह भारतीय नागरिक जो रोजगार, शिक्षा या किसी अन्य उद्देश्य से अस्थायी रूप से विदेश में रहता है।
  4. वह व्यक्ति जो भारत में जन्मा था लेकिन अब किसी अन्य देश में रहता है, चाहे उसकी नागरिकता कुछ भी हो।

उत्तर: वह भारतीय नागरिक जो रोजगार, शिक्षा या किसी अन्य उद्देश्य से अस्थायी रूप से विदेश में रहता है। — प्रवासी भारतीय (Non-Resident Indian – NRI) वह भारतीय नागरिक होता है जो रोजगार, शिक्षा या किसी अन्य उद्देश्य से अस्थायी रूप से विदेश में रहता है। विकल्प A, B और D अन्य श्रेणियों (जैसे OCI या PIO) को संदर्भित कर सकते हैं या परिभाषा को अधूरा छोड़ सकते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के आर्थिक विकास में प्रवासी भारतीयों के योगदान पर चर्चा कीजिए। साथ ही, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य सरकारों की भूमिका का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** प्रवासी भारतीयों की संक्षिप्त परिभाषा और भारतीय अर्थव्यवस्था में उनके महत्व का उल्लेख।
2. **आर्थिक विकास में योगदान:**
* **प्रेषण (Remittances):** भारत को प्राप्त होने वाले प्रेषणों का महत्व और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति।
* **निवेश:** प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), पोर्टफोलियो निवेश और अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से निवेश।
* **कौशल और ज्ञान हस्तांतरण:** विदेशों में अर्जित विशेषज्ञता और तकनीकी ज्ञान को भारत में वापस लाना।
* **व्यापार और पर्यटन:** अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों को बढ़ावा देना और पर्यटन को आकर्षित करना।
* **सॉफ्ट पावर:** भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक सॉफ्ट पावर को बढ़ाना।
3. **राज्य सरकारों की भूमिका (कल्याण और सामाजिक सुरक्षा):**
* **कल्याण योजनाएँ:** नोरका केयर प्लस जैसी बीमा योजनाएँ (उदाहरण के तौर पर उल्लेख)।
* **पंजीकरण और पहचान:** प्रवासी आईडी कार्ड या समान पहचान पत्र जारी करना।
* **शिकायत निवारण:** विदेशों में रहने वाले नागरिकों की समस्याओं का समाधान।
* **पुनर्वास और पुनर्एकीकरण:** स्वदेश लौटने वाले प्रवासियों के लिए सहायता।
* **कौशल विकास:** विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
* **वित्तीय सहायता:** संकटग्रस्त प्रवासियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
4. **चुनौतियाँ और सुझाव:** प्रवासियों के सामने आने वाली चुनौतियाँ और इन योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव।
5. **निष्कर्ष:** प्रवासी भारतीयों के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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