31 Aug रक्षा क्षेत्र में एफडीआई नियमों में ढील पर विचार: सरकार ने दिया संकेत, जानिए पूरा मामला
✎ सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों को उदार बनाने पर विचार कर रही है, जिससे आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच और विनिर्माण क्षमता में वृद्धि की उम्मीद है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे। | GS Paper III — सुरक्षा: भारत के सुरक्षा हित, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता।
- Prelims: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), रक्षा क्षेत्र में FDI नीति, स्वचालित मार्ग (Automatic Route), सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route), रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात, मेक इन इंडिया
- Essay: भारत की आर्थिक संवृद्धि और सुरक्षा में रक्षा क्षेत्र का योगदान।, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में FDI की भूमिका।
त्वरित पुनरावृत्ति: सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों को उदार बनाने पर विचार कर रही है, जिससे आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच और विनिर्माण क्षमता में वृद्धि की उम्मीद है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सरकार रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेशकों को और अधिक आकर्षित करने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों को उदार बनाने पर विचार कर रही है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) इस विषय पर हितधारकों के साथ परामर्श कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप नीति में कुछ छूट मिलने की संभावना है। यह कदम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और निर्यात को बढ़ावा देने के व्यापक सरकारी लक्ष्यों के अनुरूप है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें FDI नीति का उदारीकरण भी शामिल है।
- वर्तमान में, रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक FDI स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के माध्यम से अनुमत है।
- 74 प्रतिशत से अधिक FDI सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route) के माध्यम से उन मामलों में अनुमत है जहाँ इससे आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच प्राप्त होने की संभावना है।
- रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा सुरक्षा मंजूरी और रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के दिशानिर्देशों के अधीन है।
- अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत ने रक्षा उद्योगों में 32.29 मिलियन अमेरिकी डॉलर का FDI आकर्षित किया है।
- भारत का रक्षा बजट वित्तीय वर्ष 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
- रक्षा क्षेत्र से निर्यात वित्तीय वर्ष 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया है।
- सरकार ने 2029 तक वार्षिक रक्षा उत्पादन में 3 लाख करोड़ रुपये और निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र ने कुल रक्षा निर्यात में 45.16 प्रतिशत (17,353 करोड़ रुपये) का योगदान दिया, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 54.84 प्रतिशत (21,071 करोड़ रुपये) का योगदान दिया।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्या है?
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment – FDI) एक देश से दूसरे देश में किसी व्यवसाय में किया गया निवेश है, जिसमें एक विदेशी निवेशक किसी कंपनी में स्थायी हित स्थापित करता है।
- यह निवेश आमतौर पर किसी विदेशी कंपनी में स्वामित्व हिस्सेदारी हासिल करने या किसी विदेशी देश में व्यवसाय संचालन स्थापित करने के माध्यम से होता है।
- FDI को दो मुख्य मार्गों से भारत में अनुमति दी जाती है: स्वचालित मार्ग (Automatic Route) और सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route)।
- स्वचालित मार्ग में, विदेशी निवेशक को सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से किसी पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।
- सरकारी अनुमोदन मार्ग में, विदेशी निवेशक को निवेश करने से पहले सरकार से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होता है।
- FDI का उद्देश्य मेजबान देश में पूंजी, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन विशेषज्ञता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है।
- यह देश के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को सुधारने और आर्थिक संवृद्धि को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- रक्षा क्षेत्र में FDI का उदारीकरण स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने, आधुनिक तकनीक तक पहुँच सुनिश्चित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| FDI मानदंडों में ढील | रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने का प्रयास। |
| वर्तमान FDI नीति | 74% तक स्वचालित मार्ग (Automatic Route) से, उससे अधिक सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route) से, यदि आधुनिक तकनीक तक पहुँच होती है। |
| सुरक्षा मंजूरी | गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) और रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के दिशानिर्देशों के अनुसार अनिवार्य। |
| रक्षा बजट में वृद्धि | 2013-14 में ₹2.53 लाख करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹7.85 लाख करोड़। |
| रक्षा निर्यात में वृद्धि | 2013-14 में ₹686 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹38,424 करोड़। |
| निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान | 2025-26 में कुल रक्षा निर्यात का 45.16% (₹17,353 करोड़)। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- रक्षा क्षेत्र में FDI बढ़ने से पूंजी निवेश में वृद्धि होगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- यह घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देगा, जिससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Self-Reliant India) के लक्ष्य को बल मिलेगा।
- आधुनिक तकनीकों तक पहुँच से भारतीय रक्षा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जिससे वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
सामरिक महत्व
- उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों (Advanced Defence Technologies) तक पहुँच से भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिकीकरण प्रक्रिया तेज होगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित होगी, जिससे भू-राजनीतिक तनावों के दौरान बाहरी निर्भरता कम होगी।
- रक्षा निर्यात में वृद्धि भारत को एक महत्वपूर्ण रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी, जिससे इसकी सामरिक स्थिति मजबूत होगी।
शासन और नीतिगत महत्व
- FDI मानदंडों में ढील सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य निवेश के अनुकूल माहौल बनाना है।
- यह नीतिगत बदलाव रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार को कम किया जा सकता है और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
- हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultations) की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि नीतिगत निर्णय व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिए जाएं, जिससे उनकी स्वीकार्यता और प्रभावशीलता बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ
- रक्षा क्षेत्र में अधिक विदेशी भागीदारी से संवेदनशील प्रौद्योगिकियों और जानकारी के रिसाव का जोखिम बढ़ सकता है।
- विदेशी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता महत्वपूर्ण समय में आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-3: आंतरिक सुरक्षा
2. घरेलू उद्योग पर प्रभाव
- बढ़े हुए FDI से घरेलू रक्षा निर्माताओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए।
- तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) की शर्तों का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, ताकि घरेलू क्षमता का विकास हो सके।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था
3. नियामक और प्रक्रियात्मक चुनौतियाँ
- FDI प्रस्तावों की सुरक्षा मंजूरी और अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना महत्वपूर्ण है ताकि अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
- विदेशी निवेशकों के लिए स्पष्ट और स्थिर नीतिगत ढाँचा बनाए रखना आवश्यक है ताकि वे भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-2: शासन
4. तकनीकी आत्मनिर्भरता का संतुलन
- FDI के माध्यम से आधुनिक तकनीक प्राप्त करने और साथ ही स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
- यह सुनिश्चित करना कि विदेशी निवेश केवल असेंबली (Assembly) तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीयकरण (Localisation) को बढ़ावा दे।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संवेदनशील प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण | राष्ट्रीय सुरक्षा और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के संभावित रिसाव का जोखिम। |
| घरेलू R&D पर प्रभाव | विदेशी निवेश पर अत्यधिक निर्भरता से स्वदेशी अनुसंधान और विकास पहलों को नुकसान पहुँच सकता है। |
| प्रतिस्पर्धा का स्तर | छोटे और मध्यम घरेलू रक्षा उद्यमों के लिए बड़े विदेशी खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है। |
| स्थिर नीतिगत ढाँचा | निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दीर्घकालिक और अनुमानित नीतिगत स्थिरता की आवश्यकता। |
| सुरक्षा मंजूरी प्रक्रिया | प्रक्रिया में देरी से निवेश परियोजनाओं में बाधा आ सकती है। |
आगे की राह
- FDI नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के साथ संतुलित करते हुए एक स्पष्ट और पारदर्शी नियामक ढाँचा विकसित करना।
- घरेलू रक्षा उद्योग, विशेषकर MSMEs को विदेशी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करना।
- तकनीकी हस्तांतरण समझौतों में ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को प्राथमिकता देना।
- रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को मजबूत करना।
- सुरक्षा मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और समयबद्ध बनाना ताकि निवेश प्रस्तावों में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
- रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना।
- कौशल विकास (Skill Development) और क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों में निवेश करना ताकि रक्षा विनिर्माण के लिए कुशल कार्यबल उपलब्ध हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रक्षा क्षेत्र में FDI · प्रत्यक्ष विदेशी निवेश · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा उत्पादन · रक्षा निर्यात · औद्योगिक नीति · आधुनिकीकरण · सुरक्षा मंजूरी · प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा FDI मानदंडों में ढील पर विचार → रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश में वृद्धि → आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच और पूंजी प्रवाह → घरेलू रक्षा विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा → राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संवृद्धि में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) केवल सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route) के माध्यम से ही अनुमत है।
2. रक्षा क्षेत्र में FDI के लिए गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) से सुरक्षा मंजूरी आवश्यक है।
3. भारत सरकार ने रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। वर्तमान नीति के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में 74% तक FDI स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के माध्यम से अनुमत है, जबकि इससे अधिक के लिए सरकारी अनुमोदन मार्ग की आवश्यकता होती है। कथन 2 सही है। रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी और रक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन आवश्यक है। कथन 3 सही है। सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी कई पहलें की हैं, जिससे उत्पादन और निर्यात में वृद्धि हुई है।
Q2. रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- वर्तमान में, रक्षा क्षेत्र में 100% FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत है।
- FDI नीति के तहत, रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए केवल रक्षा मंत्रालय की मंजूरी आवश्यक है।
- यदि FDI से आधुनिक तकनीक तक पहुँच मिलने की संभावना हो, तो 74% से अधिक FDI सरकारी अनुमोदन मार्ग से अनुमत है।
- भारत ने अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच रक्षा उद्योगों में कोई FDI आकर्षित नहीं किया है।
उत्तर: यदि FDI से आधुनिक तकनीक तक पहुँच मिलने की संभावना हो, तो 74% से अधिक FDI सरकारी अनुमोदन मार्ग से अनुमत है। — विकल्प A गलत है क्योंकि 74% तक FDI स्वचालित मार्ग से है, 100% नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी भी आवश्यक है। विकल्प C सही है, वर्तमान नीति के अनुसार, 74% से अधिक FDI सरकारी अनुमोदन मार्ग से अनुमत है, खासकर जब इससे आधुनिक तकनीक तक पहुँच मिलती हो। विकल्प D गलत है क्योंकि भारत ने अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच 32.29 मिलियन अमेरिकी डॉलर का FDI आकर्षित किया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों को उदार बनाने के सरकार के विचार का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यह भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: रक्षा क्षेत्र में FDI मानदंडों को उदार बनाने के सरकार के हालिया विचार का उल्लेख करें और इसके संदर्भ (आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया) को बताएं।
2. वर्तमान FDI नीति: रक्षा क्षेत्र में मौजूदा FDI नीति (स्वचालित मार्ग, सरकारी अनुमोदन मार्ग, सुरक्षा मंजूरी) का संक्षिप्त विवरण दें।
3. उदार बनाने के संभावित कारण/लाभ:
क. आधुनिक तकनीक तक पहुँच: विदेशी कंपनियों के माध्यम से उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण।
ख. घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत उत्पादन क्षमता में वृद्धि।
ग. रोजगार सृजन: रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसर।
घ. निर्यात संवर्धन: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण और निर्यात क्षमता में वृद्धि।
ङ. प्रतिस्पर्धात्मकता: घरेलू रक्षा उद्योग में प्रतिस्पर्धा और दक्षता में सुधार।
च. आयात पर निर्भरता कम करना: स्वदेशी उत्पादन से आयात बिल में कमी।
4. चुनौतियाँ/चिंताएँ (समालोचनात्मक पक्ष):
क. राष्ट्रीय सुरक्षा: संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण और विदेशी नियंत्रण से जुड़े जोखिम।
ख. घरेलू उद्योग पर प्रभाव: छोटे और मध्यम घरेलू रक्षा निर्माताओं पर प्रतिस्पर्धा का दबाव।
ग. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की वास्तविक सीमा: क्या विदेशी कंपनियाँ वास्तव में अत्याधुनिक तकनीक साझा करेंगी?
घ. आत्मनिर्भरता बनाम विदेशी निर्भरता: आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर संभावित प्रभाव।
5. रक्षा उत्पादन और निर्यात लक्ष्यों में सहायता:
क. सरकार के लक्ष्य: 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात के लक्ष्य का उल्लेख करें।
ख. FDI की भूमिका: FDI कैसे इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूंजी, प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता प्रदान कर सकता है।
ग. निजी क्षेत्र की भूमिका: निजी क्षेत्र के योगदान (जैसे 2025-26 में 45.16% निर्यात) और FDI के माध्यम से इसे और कैसे बढ़ाया जा सकता है।
6. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें FDI के लाभों को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू उद्योग के हितों की सुरक्षा के लिए उचित नियामक उपायों की आवश्यकता पर बल दिया जाए।
स्रोत: orissapost.com
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