मिशन जीरो: देपालपुर ने विरासत अपशिष्ट निवारण में हासिल की बड़ी सफलता

मिशन जीरो: देपालपुर ने विरासत अपशिष्ट के निवारण में सफलता हासिल की — diagram

मिशन जीरो: देपालपुर ने विरासत अपशिष्ट निवारण में हासिल की बड़ी सफलता

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विरासत अपशिष्ट निवारण प्रक्रिया

✎ देपालपुर की 'शून्य विरासत अपशिष्ट' उपलब्धि स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 और 'स्वच्छ शहर जोड़ी' पहल की सफलता का प्रतीक है, जो वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से शहरों को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में एक…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, प्रशासन और चुनौतियाँ  |  GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन, शहरीकरण की चुनौतियाँ
  • Prelims: स्वच्छ भारत मिशन शहरी (SBM-U), स्वच्छ शहर जोड़ी पहल, विरासत अपशिष्ट (Legacy Waste), अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM), शून्य विरासत अपशिष्ट
  • Essay: शहरीकरण और अपशिष्ट प्रबंधन: चुनौतियाँ और समाधान, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास में उसकी भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: देपालपुर की ‘शून्य विरासत अपशिष्ट’ उपलब्धि स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 और ‘स्वच्छ शहर जोड़ी’ पहल की सफलता का प्रतीक है, जो वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से शहरों को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, देपालपुर, इंदौर ने ‘मिशन ज़ीरो’ के तहत विरासत अपशिष्ट (Legacy Waste) के निवारण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) की ‘स्वच्छ शहर जोड़ी’ पहल के तहत हासिल की गई है, जहाँ इंदौर ने देपालपुर का मार्गदर्शन किया।

पृष्ठभूमि

  • भारत में तेजी से शहरीकरण के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management – SWM) एक बड़ी चुनौती बन गया है। पुराने डंपसाइट्स पर जमा ‘विरासत अपशिष्ट’ पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
  • इस चुनौती से निपटने के लिए, भारत सरकार ने 2014 में स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य देश को स्वच्छ बनाना था। इसके शहरी घटक को स्वच्छ भारत मिशन शहरी (SBM-U) कहा गया।
  • SBM-U 2.0 को 2021 में लॉन्च किया गया, जिसका मुख्य फोकस ‘कचरा मुक्त शहर’ (Garbage Free Cities) बनाने और विरासत अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर है।
  • ‘स्वच्छ शहर जोड़ी’ पहल SBM-U के तहत एक अनूठी पहल है, जहाँ अनुभवी ‘मार्गदर्शक शहर’ (Mentor Cities) कम अनुभवी ‘प्रशिक्षु शहरों’ (Mentee Cities) को अपशिष्ट प्रबंधन में सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह ‘एक सिखाए एक’ मॉडल पर आधारित है।
  • इस पहल के तहत, मार्गदर्शक और प्रशिक्षु शहर ज्ञान हस्तांतरण, सह-शिक्षण और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुकरण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करते हैं।
  • देपालपुर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सामूहिक इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से विरासत अपशिष्ट की समस्या का समाधान संभव है।

स्वच्छ भारत मिशन शहरी (SBM-U) 2.0 और विरासत अपशिष्ट

  • स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) को 1 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया था, जिसका लक्ष्य सभी शहरों को ‘कचरा मुक्त’ बनाना और जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • इसका एक प्रमुख उद्देश्य पुराने डंपसाइट्स पर जमा ‘विरासत अपशिष्ट’ का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना और उन्हें हरित क्षेत्र में बदलना है।
  • विरासत अपशिष्ट उस पुराने कचरे को संदर्भित करता है जो वर्षों से डंपसाइट्स पर जमा होता रहा है और बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के पड़ा रहता है। इसमें प्लास्टिक, धातु, कांच, जैविक पदार्थ और अन्य अपशिष्ट शामिल होते हैं।
  • विरासत अपशिष्ट से भूजल, मिट्टी और वायु प्रदूषण होता है, साथ ही मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी होता है।
  • SBM-U 2.0 के तहत, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन में घर-घर जाकर अपशिष्ट संग्रह, चार श्रेणियों में पृथक्करण (गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक, सेनेटरी), पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की वसूली, अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (Refuse Derived Fuel – RDF) का उत्पादन और सह-प्रसंस्करण शामिल है।
  • अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF) ठोस अपशिष्ट से प्राप्त एक ईंधन है जिसे सीमेंट कारखानों और अन्य उद्योगों में ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलने का एक प्रभावी तरीका है।
  • देपालपुर में, 1,250 मीट्रिक टन विरासत अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया, जिसमें पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग किया गया और RDF को सीमेंट कारखानों में भेजा गया।
  • इस पहल से न केवल पर्यावरण में सुधार हुआ है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए नए सार्वजनिक स्थान और हरित क्षेत्र भी विकसित हुए हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्वच्छ शहर जोड़ी पहल क्षमता निर्माण और सह-शिक्षण को बढ़ावा देने वाली 100 दिवसीय पहल, ‘एक सिखाए एक’ मॉडल पर आधारित।
मिशन जीरो: विरासत अपशिष्ट देपालपुर द्वारा 1,250 टन पुराने जमा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, ‘शून्य विरासत अपशिष्ट’ लक्ष्य की प्राप्ति।
चार-बिन अपशिष्ट पृथक्करण प्रणाली अपशिष्ट को चार श्रेणियों में अलग करने की प्रणाली, घर-घर संग्रह में 100 प्रतिशत कवरेज।
वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की पुनर्प्राप्ति (प्लास्टिक, धातु, कांच) और अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF) का सीमेंट कारखानों में सह-प्रसंस्करण।
सामुदायिक सहभागिता वृक्षारोपण अभियान, ‘पोहा पार्टी’ और ‘टिफिन पार्टी’ जैसे आयोजनों के माध्यम से जन-भागीदारी और स्वामित्व की भावना।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • विरासत अपशिष्ट (Legacy Waste) का वैज्ञानिक निस्तारण भूमि प्रदूषण को कम करता है और भूजल तथा मृदा की गुणवत्ता में सुधार करता है।
  • पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की पुनर्प्राप्ति से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होता है और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) को बढ़ावा मिलता है।
  • अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF) का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में करके लैंडफिल (Landfill) पर निर्भरता कम होती है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है।

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छता में सुधार से सार्वजनिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है।
  • सामुदायिक सहभागिता और स्वामित्व की भावना से नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़ती है।
  • पुराने डंपसाइटों का कायाकल्प कर उन्हें सार्वजनिक स्थानों में बदलना जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देता है।

आर्थिक महत्व

  • अपशिष्ट प्रबंधन में वैज्ञानिक विधियों का उपयोग संसाधनों की बर्बादी को कम करता है और मूल्यवान सामग्री को पुनः प्राप्त करता है।
  • अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) परियोजनाओं के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलता है और नए रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।
  • स्वच्छता पर्यटन को बढ़ावा दे सकती है और शहरों की ब्रांडिंग में सुधार कर सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • स्वच्छ शहर जोड़ी पहल जैसे कार्यक्रम अंतर-शहरी सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं।
  • स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (Swachh Bharat Mission-Urban 2.0) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में ऐसे मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के कार्यान्वयन में सहायता मिलती है।

चुनौतियाँ

1. अपशिष्ट पृथक्करण का अभाव

  • घरों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में अपशिष्ट को स्रोत पर अलग करने की आदत का अभाव।
  • प्रभावी पृथक्करण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और जागरूकता की कमी।

2. विरासत अपशिष्ट का प्रबंधन

  • वर्षों से जमा हुए विशालकाय कचरे के ढेरों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण एक बड़ी चुनौती।
  • बायो-माइनिंग (Bio-mining) और बायो-रेमेडिएशन (Bio-remediation) जैसी तकनीकों के लिए उच्च लागत और विशेषज्ञता की आवश्यकता।

3. बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी की कमी

  • अपशिष्ट संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे का अभाव।
  • अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों और पुनर्चक्रण सुविधाओं जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों तक सीमित पहुंच।

4. सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन

  • नागरिकों में स्वच्छता के प्रति स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाना एक सतत चुनौती।
  • अपशिष्ट प्रबंधन में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान और प्रोत्साहन की आवश्यकता।

5. वित्तीय और संस्थागत बाधाएँ

  • अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता।
  • स्थानीय निकायों की सीमित क्षमता और अंतर-विभागीय समन्वय की कमी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अवैज्ञानिक डंपिंग पर्यावरण प्रदूषण, भूजल संदूषण और स्वास्थ्य जोखिम।
अपशिष्ट से संसाधन की हानि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग न हो पाना और आर्थिक मूल्य का नुकसान।
सीमित प्रसंस्करण क्षमता बढ़ते शहरीकरण के साथ अपशिष्ट की मात्रा में वृद्धि और प्रसंस्करण सुविधाओं पर दबाव।
जन जागरूकता की कमी अपशिष्ट पृथक्करण और जिम्मेदार निपटान के महत्व को न समझना।
भूमि की कमी नए लैंडफिल साइटों के लिए उपयुक्त भूमि की अनुपलब्धता और मौजूदा साइटों का अतिभारित होना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U)
  • स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0)
  • स्वच्छ शहर जोड़ी पहल

आगे की राह

  • अपशिष्ट पृथक्करण को अनिवार्य बनाने और इसके लिए प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने पर जोर देना।
  • विरासत अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए बायो-माइनिंग और बायो-रेमेडिएशन जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) संयंत्रों और पुनर्चक्रण इकाइयों की स्थापना में निवेश बढ़ाना।
  • स्थानीय निकायों की तकनीकी और वित्तीय क्षमता को मजबूत करना ताकि वे प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन कर सकें।
  • सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने और व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाना।
  • अपशिष्ट प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और नवाचारों को बढ़ावा देना।
  • स्वच्छ शहर जोड़ी जैसी पहलों के माध्यम से शहरों के बीच ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 · विरासत अपशिष्ट · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन · स्वच्छ शहर जोड़ी पहल · अपशिष्ट पृथक्करण · वैज्ञानिक अपशिष्ट निस्तारण · चक्रीय अर्थव्यवस्था · शहरी स्वच्छता · क्षमता निर्माण · सह-शिक्षण मॉडल

अवधारणा प्रवाह

स्वच्छ शहर जोड़ी पहल का शुभारंभ  →  इंदौर द्वारा देपालपुर का मार्गदर्शन  →  चार-बिन अपशिष्ट पृथक्करण प्रणाली का कार्यान्वयन  →  1,250 टन विरासत अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण  →  पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की पुनर्प्राप्ति और RDF का उपयोग  →  डंपसाइट का कायाकल्प और वृक्षारोपण  →  देपालपुर का ‘शून्य विरासत अपशिष्ट’ शहर बनना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका मुख्य उद्देश्य भारत के सभी शहरों को ‘कचरा मुक्त’ बनाना है।
2. यह मिशन केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को शामिल नहीं करता है।
3. स्वच्छ शहर जोड़ी पहल SBM-U 2.0 के तहत क्षमता निर्माण और सह-शिक्षण को बढ़ावा देने का एक कार्यक्रम है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि SBM-U 2.0 का एक प्रमुख लक्ष्य शहरों को ‘कचरा मुक्त’ बनाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि SBM-U 2.0 में ठोस और तरल दोनों अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि स्वच्छ शहर जोड़ी पहल SBM-U 2.0 के तहत शहरों के बीच ज्ञान साझाकरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देती है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘विरासत अपशिष्ट’ (Legacy Waste) का सबसे सटीक वर्णन करता है?

  1. वह कचरा जो घरों से दैनिक आधार पर उत्पन्न होता है।
  2. वह कचरा जो औद्योगिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न होता है और तुरंत निपटाया जाता है।
  3. वह कचरा जो दशकों से डंपसाइट्स पर जमा होता रहा है और बिना वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया गया है।
  4. वह कचरा जिसे पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए अलग किया गया है।

उत्तर: वह कचरा जो दशकों से डंपसाइट्स पर जमा होता रहा है और बिना वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया गया है। — विरासत अपशिष्ट वह कचरा है जो लंबे समय से डंपसाइट्स पर जमा होता रहा है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं। इसका वैज्ञानिक निस्तारण आवश्यक है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत ‘शून्य विरासत अपशिष्ट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में ‘स्वच्छ शहर जोड़ी पहल’ की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस पहल की सफलता के लिए आवश्यक प्रमुख कारकों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 और ‘शून्य विरासत अपशिष्ट’ के लक्ष्य का संक्षिप्त परिचय। ‘विरासत अपशिष्ट’ की परिभाषा।
2. स्वच्छ शहर जोड़ी पहल की भूमिका: देपालपुर-इंदौर मॉडल का उदाहरण देते हुए पहल की कार्यप्रणाली (मार्गदर्शक-प्रशिक्षु मॉडल, क्षमता निर्माण, सह-शिक्षण, MoU) का विस्तार से वर्णन। यह कैसे ‘शून्य विरासत अपशिष्ट’ लक्ष्य में योगदान करती है।
3. आलोचनात्मक परीक्षण: पहल की सफलताओं (ज्ञान हस्तांतरण, सर्वोत्तम प्रथाओं का अनुकरण, वैज्ञानिक निस्तारण) और संभावित चुनौतियों (संसाधन की कमी, राजनीतिक इच्छाशक्ति, जनभागीदारी की निरंतरता) का विश्लेषण।
4. सफलता के प्रमुख कारक:
क. मजबूत नेतृत्व और राजनीतिक इच्छाशक्ति (जैसे इंदौर और देपालपुर में)
ख. वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकें (पृथक्करण, प्रसंस्करण, RDF)
ग. जनभागीदारी और सामुदायिक जुड़ाव (जैसे ‘पोहा पार्टी’, वृक्षारोपण)
घ. क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण (स्वच्छ शहर जोड़ी पहल का मूल)
ङ. वित्तीय और तकनीकी सहायता
5. निष्कर्ष: स्थायी शहरी स्वच्छता और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के लक्ष्य को प्राप्त करने में ऐसी पहलों का महत्व।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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