31 Aug भारत के लिए चिंता: इजराइल-ग्रीस का 3.5 अरब डॉलर का रक्षा समझौता
✎ इज़राइल और ग्रीस के बीच 'अकिलीज़ शील्ड' रक्षा समझौता भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और आधुनिक रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: इज़राइल-ग्रीस रक्षा समझौता, अकिलीज़ शील्ड, डेविड स्लिंग, SPYDER, ड्रोन डोम, पूर्वी भूमध्य सागर, NATO
- Essay: बदलती वैश्विक भू-राजनीति और रक्षा सहयोग का महत्व, तकनीकी प्रगति और आधुनिक युद्ध की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: इज़राइल और ग्रीस के बीच ‘अकिलीज़ शील्ड’ रक्षा समझौता भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और आधुनिक रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इज़राइल और ग्रीस ने अब तक के अपने सबसे बड़े द्विपक्षीय हथियार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मूल्य लगभग 3 अरब यूरो (3.5 अरब अमेरिकी डॉलर) है। इस समझौते को ‘अकिलीज़ शील्ड’ नाम दिया गया है और इसमें ग्रीस के लिए इज़राइली तकनीक का उपयोग करके एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली शामिल है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इज़राइल का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है और दोनों देश साझा रणनीतिक हितों तथा क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
- इज़राइल और ग्रीस ने पिछले एक दशक में अपने रक्षा संबंधों को गहरा किया है, जिसमें यह नवीनतम समझौता सबसे महत्वपूर्ण है।
- ग्रीस अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है ताकि पूर्वी भूमध्य सागर में अपने पड़ोसी और साथी NATO सदस्य तुर्किये के साथ लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सीमा विवादों के बीच तालमेल बिठा सके।
- पिछले समझौतों में इज़राइली रक्षा ठेकेदार एल्बिट के साथ दक्षिणी ग्रीस में एक उड़ान प्रशिक्षण स्कूल बनाने के लिए 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता और इज़राइली रॉकेट लॉन्चर, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों तथा ड्रोन की बिक्री की योजना शामिल थी।
- इज़राइल का रक्षा निर्यात पिछले वर्ष 19 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो 2024 से 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
- आधुनिक संघर्षों ने सैन्य रक्षा और प्रतिरोध के मापदंडों को बदल दिया है, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलें, उपग्रह संचार, मानवरहित प्रणालियाँ, साइबर खतरे और हाइब्रिड युद्ध के रूप शामिल हैं।
रक्षा समझौते और भू-राजनीतिक महत्व
- यह समझौता इज़राइल द्वारा ग्रीस को बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक विभिन्न खतरों के खिलाफ रक्षा हथियारों की एक पूरी श्रृंखला प्रदान करने का पहला अवसर है।
- इसमें डेविड स्लिंग (David Sling) और SPYDER जैसी कई इज़राइली प्रणालियाँ, साथ ही एक नई राष्ट्रीय कमांड और नियंत्रण प्रणाली शामिल है।
- इस समझौते के अतिरिक्त, राफेल के ड्रोन डोम (Drone Dome) सिस्टम की बिक्री के लिए 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर (26 मिलियन यूरो) का एक पूरक समझौता भी किया गया है।
- यह समझौता इज़राइल और ग्रीस के बीच साझा रणनीतिक हितों तथा क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- पूर्वी भूमध्य सागर में भू-राजनीतिक तनावों के बीच, यह समझौता ग्रीस की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- यह समझौता वैश्विक रक्षा बाजार में इज़राइल की बढ़ती भूमिका और उसकी ‘युद्ध-परीक्षित’ रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती मांग को भी उजागर करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सबसे बड़ा द्विपक्षीय रक्षा सौदा | इजरायल और ग्रीस के बीच अब तक का सबसे बड़ा रक्षा समझौता, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है। |
| अकिलीज़ शील्ड (Achilles Shield) | लगभग 3 अरब यूरो (3.5 अरब अमेरिकी डॉलर) का यह सौदा ग्रीस के लिए एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली प्रदान करेगा, जिसमें इजरायली तकनीक का उपयोग किया जाएगा। |
| बहुआयामी रक्षा प्रणाली | इसमें बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक विभिन्न खतरों के खिलाफ रक्षा के लिए डेविड स्लिंग (David Sling) और स्पाइडर (SPYDER) जैसे कई इजरायली सिस्टम शामिल हैं। |
| राष्ट्रीय कमांड और नियंत्रण प्रणाली | समझौते में एक नई राष्ट्रीय कमांड और नियंत्रण प्रणाली का प्रावधान भी है, जो ग्रीस की रक्षा क्षमताओं को एकीकृत और मजबूत करेगा। |
| ड्रोन डोम (Drone Dome) सिस्टम | एक पूरक समझौते के तहत राफेल के ड्रोन डोम सिस्टम की बिक्री के लिए 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर का सौदा भी शामिल है, जो ड्रोन खतरों से निपटने में सहायक होगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- इजरायल के रक्षा निर्यात में वृद्धि: यह सौदा इजरायल के रक्षा निर्यात को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाता है, जो पिछले वर्ष 19 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक था, जो 2024 से 30 प्रतिशत अधिक है।
- रक्षा उद्योग का संवर्धन: इस तरह के बड़े सौदे इजरायल के रक्षा उद्योग को बढ़ावा देते हैं, जिससे रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंध: यह सौदा इजरायल और ग्रीस के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करता है और भविष्य में अन्य व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलता है।
सामरिक महत्व
- क्षेत्रीय स्थिरता: इजरायल और ग्रीस के साझा रणनीतिक हित और क्षेत्रीय चुनौतियाँ इस सौदे का आधार हैं, जिसका उद्देश्य भूमध्यसागरीय क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।
- ग्रीस की सैन्य आधुनिकीकरण: ग्रीस अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है ताकि वह पूर्वी भूमध्यसागर में तुर्किये के साथ लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सीमा विवादों के बीच अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सके।
- इजरायल की भू-राजनीतिक स्थिति: यह सौदा इजरायल को एक प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करता है, जिससे उसकी भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होती है और मध्य पूर्व में उसका प्रभाव बढ़ता है।
तकनीकी महत्व
- उन्नत वायु रक्षा प्रणाली: ग्रीस को इजरायल की अत्याधुनिक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली प्राप्त होगी, जो उसे बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगी।
- युद्ध-परीक्षणित प्रौद्योगिकियाँ: इजरायली हथियार प्रणालियाँ युद्ध-परीक्षणित हैं, जो उनकी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती हैं, जैसा कि विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है।
- आधुनिक युद्ध की चुनौतियाँ: यह सौदा आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को पहचानता है, जहाँ प्रौद्योगिकी, बैलिस्टिक मिसाइलें, मानवरहित सिस्टम और साइबर खतरे पारंपरिक रक्षा सिद्धांतों को अप्रचलित कर रहे हैं।
चुनौतियाँ
1. क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव
- पूर्वी भूमध्यसागर में तुर्किये के साथ ग्रीस के समुद्री सीमा विवाद इस सौदे को और जटिल बना सकते हैं।
- इजरायल के रक्षा निर्यात में वृद्धि के बावजूद गाजा, हिजबुल्लाह और ईरान के साथ उसके संघर्षों को लेकर आलोचनाएँ जारी हैं, जो क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भू-राजनीति
2. रक्षा व्यय और राजकोषीय दबाव
- ग्रीस के लिए 3 अरब यूरो का यह बड़ा रक्षा सौदा उसके राजकोषीय स्वास्थ्य पर दबाव डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएँ चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
- रक्षा आधुनिकीकरण की आवश्यकता और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, राजकोषीय नीति
3. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आत्मनिर्भरता
- हालांकि यह सौदा उन्नत इजरायली तकनीक प्रदान करता है, ग्रीस के लिए दीर्घकालिक चुनौती प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अपनी स्वयं की रक्षा विनिर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना होगा।
- विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता को प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा विनिर्माण
4. अंतर्राष्ट्रीय हथियार नियंत्रण
- वैश्विक हथियार व्यापार में वृद्धि अंतर्राष्ट्रीय हथियार नियंत्रण प्रयासों के लिए चिंताएँ पैदा करती है, खासकर जब संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में हथियारों का प्रसार होता है।
- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल का वैश्विक हथियार निर्यात में सातवां सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनना इस मुद्दे को रेखांकित करता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संगठन, सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पूर्वी भूमध्यसागर में तनाव | ग्रीस और तुर्किये के बीच समुद्री सीमा विवादों के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता में वृद्धि की संभावना। |
| इजरायल के युद्धों की आलोचना | गाजा, हिजबुल्लाह और ईरान के साथ इजरायल के संघर्षों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय आलोचना, जो उसके रक्षा निर्यात पर नैतिक प्रश्न उठाती है। |
| रक्षा व्यय का बोझ | ग्रीस पर भारी रक्षा सौदे का वित्तीय बोझ, जो उसकी अर्थव्यवस्था और अन्य विकास प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकता है। |
| प्रौद्योगिकी निर्भरता | ग्रीस की विदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी पर निर्भरता, जो उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और घरेलू रक्षा उद्योग के विकास को सीमित कर सकती है। |
| वैश्विक हथियार प्रसार | अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार में वृद्धि से हथियार नियंत्रण और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए व्यापक चिंताएँ। |
आगे की राह
- भारत को अपने रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के लिए युद्ध-परीक्षणित प्रौद्योगिकियों और बहुस्तरीय रक्षा प्रणालियों के महत्व का आकलन करना चाहिए।
- घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना चाहिए।
- अंतर्राष्ट्रीय रक्षा सौदों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन पर अधिक जोर देना चाहिए ताकि आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।
- क्षेत्रीय भू-राजनीतिक गतिशीलता का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए और अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप रक्षा साझेदारी विकसित करनी चाहिए।
- रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करना चाहिए और वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर तलाशने चाहिए।
- राजकोषीय स्थिरता बनाए रखते हुए रक्षा व्यय का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रक्षा निर्यात · भू-राजनीतिक प्रभाव · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · सामरिक साझेदारी · हथियारों का व्यापार · वायु रक्षा प्रणाली · क्षेत्रीय स्थिरता · सैन्य आधुनिकीकरण · द्विपक्षीय समझौते · सुरक्षा सहयोग
अवधारणा प्रवाह
इजरायल और ग्रीस के बीच साझा रणनीतिक हित और क्षेत्रीय चुनौतियाँ। → ग्रीस द्वारा अपनी सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण की आवश्यकता। → इजरायल और ग्रीस के बीच सबसे बड़े द्विपक्षीय रक्षा सौदे ‘अकिलीज़ शील्ड’ पर हस्ताक्षर। → ग्रीस को बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली और उन्नत इजरायली तकनीक की आपूर्ति। → इजरायल के रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि और वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी स्थिति का सुदृढीकरण। → पूर्वी भूमध्यसागर में शक्ति संतुलन पर संभावित प्रभाव और क्षेत्रीय स्थिरता के निहितार्थ।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की मार्च रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल वैश्विक हथियार निर्यात में यूनाइटेड किंगडम से आगे निकल गया है।
2. ‘अकिलीज़ शील्ड’ (Achilles Shield) इज़राइल और ग्रीस के बीच हस्ताक्षरित एक बहु-अरब डॉलर का रक्षा समझौता है।
3. डेविड स्लिंग (David Sling) और SPYDER इज़राइल द्वारा विकसित मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल ने वैश्विक हथियार निर्यात में यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ दिया है। कथन 2 सही है। ‘अकिलीज़ शील्ड’ इज़राइल और ग्रीस के बीच एक बड़ा रक्षा सौदा है। कथन 3 सही है। डेविड स्लिंग और SPYDER इज़राइली वायु रक्षा प्रणालियाँ हैं।
Q2. इज़राइल और ग्रीस के बीच हालिया रक्षा समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह समझौता ग्रीस के सैन्य आधुनिकीकरण के प्रयासों का हिस्सा है।
2. इस सौदे में इज़राइली तकनीक का उपयोग करके ग्रीस के लिए एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली शामिल है।
3. यह समझौता पूर्वी भूमध्य सागर में समुद्री सीमाओं पर तुर्की के साथ ग्रीस के लंबे समय से चले आ रहे विवादों के बीच हुआ है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी तीनों कथन सही हैं। यह समझौता ग्रीस के सैन्य आधुनिकीकरण का हिस्सा है, इसमें इज़राइली वायु रक्षा प्रणाली शामिल है, और यह पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की के साथ ग्रीस के विवादों की पृष्ठभूमि में हुआ है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल ही में इज़राइल और ग्रीस के बीच हुए सबसे बड़े द्विपक्षीय हथियार सौदे के आलोक में, वैश्विक रक्षा निर्यात के बढ़ते भू-राजनीतिक निहितार्थों का परीक्षण करें। साथ ही, भारत के लिए ऐसे रक्षा समझौतों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** इज़राइल-ग्रीस रक्षा सौदे का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए वैश्विक रक्षा निर्यात के बढ़ते चलन को रेखांकित करें।
2. **वैश्विक रक्षा निर्यात के भू-राजनीतिक निहितार्थ:**
* **क्षेत्रीय शक्ति संतुलन:** हथियार सौदे कैसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करते हैं (जैसे तुर्की-ग्रीस संबंध)।
* **सामरिक साझेदारी का सुदृढ़ीकरण:** समान रणनीतिक हितों वाले देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना।
* **तकनीकी हस्तांतरण और आत्मनिर्भरता:** रक्षा प्रौद्योगिकी के आयात-निर्यात से देशों की रक्षा क्षमताओं पर प्रभाव।
* **आर्थिक पहलू:** रक्षा निर्यात का निर्यातक देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (जैसे इज़राइल के लिए)।
* **संघर्षों का बढ़ना:** कुछ मामलों में हथियारों की उपलब्धता से क्षेत्रीय तनाव या संघर्षों के बढ़ने की संभावना।
3. **भारत के लिए रणनीतिक महत्व:**
* **रक्षा आधुनिकीकरण:** भारत की अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने और सैन्य आधुनिकीकरण के लिए ऐसे समझौतों का महत्व।
* **विविधतापूर्ण स्रोत:** रक्षा उपकरणों के लिए विभिन्न देशों पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने हेतु महत्व।
* **तकनीकी अधिग्रहण:** अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों तक पहुँच प्राप्त करना (जैसे वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन)।
* **भू-राजनीतिक संतुलन:** भारत के सामरिक हितों को साधने और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में भूमिका।
* **’मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत:** इन समझौतों के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की क्षमता।
4. **निष्कर्ष:** वैश्विक रक्षा व्यापार के जटिल परिदृश्य और भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के साथ इसके सामंजस्य पर एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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