01 Sep सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए नई सिफारिश की
✎ सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली भारत में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार है, जिसका विकास न्यायिक निर्णयों के माध्यम से हुआ है और यह संविधान में प्रत्यक्ष रूप से…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – महत्वपूर्ण प्रावधान, कार्यप्रणाली, संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली
- Prelims: सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों की नियुक्ति, न्यायाधीशों का स्थानांतरण, भारत का संविधान, अनुच्छेद 217, अनुच्छेद 222
- Essay: भारत में न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही, न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और प्रभावशीलता
त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली भारत में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार है, जिसका विकास न्यायिक निर्णयों के माध्यम से हुआ है और यह संविधान में प्रत्यक्ष रूप से उल्लिखित नहीं है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश की है। यह कदम एक सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा पर संदेह व्यक्त करने वाले पत्रों और वकीलों के विरोध के बीच आया है। कॉलेजियम ने राजस्थान उच्च न्यायालय के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय में स्थानांतरण का भी निर्णय लिया है। यह घटनाक्रम उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की प्रक्रिया को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।
पृष्ठभूमि
- भारत में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से होती है।
- कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरणों के लिए न्यायाधीशों का एक समूह है, जिसका विकास सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के माध्यम से हुआ है।
- संविधान का अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 222 एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के स्थानांतरण का प्रावधान करता है।
- हालिया घटनाक्रम में, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ कुछ गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और एक सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने उनकी सत्यनिष्ठा पर संदेह व्यक्त करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखे थे।
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली क्या है?
- सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए भारत में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों का एक समूह है।
- यह प्रणाली संविधान में वर्णित नहीं है, बल्कि ‘थ्री जजेज केस’ (Three Judges Cases) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों द्वारा विकसित हुई है।
- सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- यह प्रणाली उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश करती है।
- कॉलेजियम की सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजी जाती हैं, जो आमतौर पर इन सिफारिशों को स्वीकार करती है, हालांकि कुछ मामलों में सरकार पुनर्विचार के लिए सिफारिशें वापस भेज सकती है।
- इस प्रणाली की अक्सर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को लेकर आलोचना की जाती रही है, जिसके परिणामस्वरूप न्यायिक नियुक्तियों में सुधार की मांग उठती रही है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति | यह न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की भूमिका को दर्शाता है। |
| न्यायाधीशों का स्थानांतरण | न्यायपालिका की अखंडता बनाए रखने और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीशों के स्थानांतरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। |
| कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका | यह स्थायी नियुक्ति होने तक उच्च न्यायालय के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अस्थायी भूमिका को उजागर करता है। |
| वकीलों का विरोध और न्यायाधीशों के पत्र | यह न्यायपालिका के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को दर्शाता है, साथ ही न्यायिक नियुक्तियों और प्रशासन में बाहरी दबावों और आंतरिक चिंताओं की भूमिका को भी दर्शाता है। |
| रोस्टर का निर्धारण | यह मुख्य न्यायाधीश या कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक विवेक को दर्शाता है, जो मामलों के आवंटन और न्यायालय के कामकाज को प्रभावित करता है। |
महत्व
न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही
- यह घटना न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरणों में कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका को रेखांकित करती है, जो न्यायिक स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण है।
- न्यायाधीशों के खिलाफ आरोपों और वकीलों के विरोध से न्यायपालिका के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल मिलता है।
शासन और प्रशासन
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राज्य में न्याय प्रशासन को प्रभावित करती है।
- रोस्टर में बदलाव और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के अवकाश पर जाने से उच्च न्यायालय के प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ता है।
संस्थागत अखंडता
- न्यायाधीशों की अखंडता पर सवाल उठाने वाले पत्र और वकीलों के विरोध से न्यायपालिका की संस्थागत अखंडता को बनाए रखने की चुनौती सामने आती है।
- कॉलेजियम द्वारा त्वरित कार्रवाई (स्थानांतरण और नई नियुक्ति की सिफारिश) न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता
- कॉलेजियम की सिफारिशों और निर्णयों में पारदर्शिता की कमी पर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं।
- न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरणों के पीछे के कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया जाता है, जिससे अटकलें और संदेह पैदा होते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान-न्यायपालिका
2. न्यायिक जवाबदेही
- न्यायाधीशों के खिलाफ कदाचार या अखंडता के मुद्दों से निपटने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी तंत्र की कमी है।
- न्यायिक समीक्षा और आंतरिक जांच की प्रक्रियाएं अक्सर धीमी और अपारदर्शी होती हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान-न्यायपालिका
3. न्यायिक रिक्तियाँ और विलंब
- मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्तियों में देरी से उच्च न्यायालयों के कामकाज पर असर पड़ता है और मामलों के निपटान में विलंब होता है।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति एक अस्थायी समाधान है और इससे दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान-न्यायपालिका
4. न्यायपालिका में जनता का विश्वास
- न्यायाधीशों की अखंडता पर सवाल उठने और वकीलों के विरोध से न्यायपालिका में जनता का विश्वास कम हो सकता है।
- न्यायपालिका की निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
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चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कॉलेजियम की कार्यप्रणाली | नियुक्ति और स्थानांतरण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की कमी। |
| न्यायिक कदाचार के आरोप | न्यायाधीशों की अखंडता पर सवाल उठने से न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव। |
| कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों की भूमिका | स्थायी नेतृत्व की कमी से प्रशासनिक निर्णय लेने और दीर्घकालिक नीतियों पर असर। |
| वकीलों का विरोध | न्यायिक प्रशासन में बाहरी दबावों का संकेत और न्यायालय के सामान्य कामकाज में व्यवधान। |
| न्यायिक रिक्तियाँ | मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्तियों में देरी से न्याय वितरण प्रणाली पर बोझ। |
आगे की राह
- कॉलेजियम प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाई जाए, जिसमें नियुक्तियों और स्थानांतरणों के लिए स्पष्ट मानदंड और कारणों का सार्वजनिक प्रकटीकरण शामिल हो।
- न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी और समयबद्ध शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए।
- उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की रिक्तियों को शीघ्रता से भरा जाए ताकि प्रशासनिक स्थिरता और न्याय वितरण सुनिश्चित हो सके।
- न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरणों में वस्तुनिष्ठता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए ताकि न्यायपालिका की अखंडता बनी रहे।
- न्यायपालिका के भीतर आंतरिक जांच और समीक्षा प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए ताकि कदाचार के आरोपों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
- न्यायिक प्रशासन में सुधार किए जाएं ताकि रोस्टर निर्धारण और मामलों के आवंटन में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कॉलेजियम प्रणाली · उच्च न्यायालय · मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति · न्यायाधीशों का स्थानांतरण · न्यायिक स्वतंत्रता · न्यायिक जवाबदेही · भारत का संविधान · अनुच्छेद 217 · अनुच्छेद 222 · न्यायिक नियुक्तियाँ · कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश · न्यायिक प्रशासन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 124: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
- अनुच्छेद 217: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
- अनुच्छेद 222: एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों का स्थानांतरण
- अनुच्छेद 223: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
अवधारणा प्रवाह
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अखंडता पर सवाल उठाना। → वकीलों द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन। → सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश। → कॉलेजियम द्वारा एक अन्य न्यायाधीश के स्थानांतरण का निर्णय। → न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरणों के माध्यम से न्यायपालिका की अखंडता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. कॉलेजियम प्रणाली एक संवैधानिक निकाय है जिसका उल्लेख भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है।
3. एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का स्थानांतरण भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा किया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। कथन 2 गलत है। कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई है, इसका संविधान में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कथन 3 सही है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण अनुच्छेद 222 के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
Q2. अभिकथन (A): कॉलेजियम प्रणाली भारत में उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार है।
कारण (R): यह प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और कार्यपालिका के हस्तक्षेप को सीमित करने के लिए विकसित की गई थी।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि कॉलेजियम प्रणाली ही उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करती है। कारण (R) भी सही है क्योंकि इस प्रणाली का विकास न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने और कार्यपालिका के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से हुआ था। साथ ही, कारण (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण भी है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण में कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने में सफल रही है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: परिचय में कॉलेजियम प्रणाली का संक्षिप्त परिचय और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति/स्थानांतरण में इसकी भूमिका। मुख्य भाग में कॉलेजियम प्रणाली के कार्यप्रणाली, संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 217, 222) और संबंधित न्यायिक निर्णयों (प्रथम, द्वितीय, तृतीय न्यायाधीश मामला) का उल्लेख। न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में इसकी सफलता के तर्क (कार्यपालिका के हस्तक्षेप से बचाव)। न्यायिक जवाबदेही के संदर्भ में इसकी सीमाओं और आलोचनाओं (पारदर्शिता की कमी, भाई-भतीजावाद के आरोप, आंतरिक कामकाज में विवाद) पर चर्चा। निष्कर्ष में न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने में इसकी वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन और संभावित सुधारों पर संक्षिप्त टिप्पणी।
स्रोत: The Indian Express
Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर किसकी अनुशंसा की गई है?
- न्यायमूर्ति मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव
- न्यायमूर्ति संजय करोल
- न्यायमूर्ति अरुण भंसाली
- न्यायमूर्ति ए.के. मिश्रा
उत्तर: न्यायमूर्ति मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव — सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा 12 मार्च, 2024 को न्यायमूर्ति मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव को राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की गई।
Mains: राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इस प्रक्रिया में राज्यपाल एवं राज्य सरकार की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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