छत्तीसगढ़: क्रिटिकल मिनरल्स नीति से भारत के खनन क्षेत्र में बढ़ा योगदान

छत्तीसगढ़ ने भारत के क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम में अपनी भूमिका को मजबूत किया, मुख्यमंत्री श्री श्री विष्णु देव साय ने मिन — labelled illustration

छत्तीसगढ़: क्रिटिकल मिनरल्स नीति से भारत के खनन क्षेत्र में बढ़ा योगदान

✎ क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स भारत की आर्थिक वृद्धि, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हैं, जिनके घरेलू अन्वेषण और खनन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया अपना रही है, जिसमें…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल)  |  GS Paper II — शासन व्यवस्था (केंद्र-राज्य संबंध)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (खनिज संसाधन, औद्योगिक नीति, आधारभूत संरचना, आत्मनिर्भर भारत)
  • Prelims: क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals), रणनीतिक खनिज (Strategic Minerals), खनिज ब्लॉक नीलामी, कंपोजिट लाइसेंस, माइनिंग लीज, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET), आत्मनिर्भर भारत, छत्तीसगढ़ खनिज संसाधन
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में खनिज संसाधनों की भूमिका और सतत खनन का महत्व।, केंद्र-राज्य सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय विकास को गति देना।

त्वरित पुनरावृत्ति: क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स भारत की आर्थिक वृद्धि, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हैं, जिनके घरेलू अन्वेषण और खनन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया अपना रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ जैसे खनिज-समृद्ध राज्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

खान मंत्रालय ने रायपुर, छत्तीसगढ़ में क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी के आठवें चरण के लिए एक रोड शो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सहित विभिन्न हितधारक उपस्थित थे। इस चरण में नौ राज्यों के 20 ब्लॉक्स शामिल किए गए हैं, जिनमें से पांच छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। इस आयोजन ने भारत के क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका और खनिज विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स (Critical and Strategic Minerals) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
  • इन खनिजों की घरेलू क्षमता को मजबूत करना भारत की खनिज सुरक्षा को सशक्त बनाने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • खान मंत्रालय ने नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी और तेजी से संचालन के माध्यम से भारत के क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
  • अब तक 88 क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स पेश किए गए हैं, जिनमें से 56 की सफल नीलामी हो चुकी है, जो इस क्षेत्र में बढ़ती रुचि और निवेश को दर्शाता है।
  • आठवें चरण में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements – REE), रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लौकोनाइट जैसे खनिजों से संबंधित ब्लॉक्स शामिल हैं।
  • छत्तीसगढ़ अपने समृद्ध खनिज संसाधनों और मजबूत खनन व औद्योगिक आधार के कारण भारत के खनन तथा औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स क्या हैं?

  • क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं जो आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के लिए आवश्यक हैं और जिनकी आपूर्ति में व्यवधान का उच्च जोखिम होता है।
  • इन खनिजों का उपयोग उच्च-तकनीकी उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों (जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, पवन टर्बाइन) और रक्षा अनुप्रयोगों में होता है।
  • रणनीतिक खनिज (Strategic Minerals) वे खनिज होते हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, और जिनकी आपूर्ति सुनिश्चित करना देश के लिए आवश्यक होता है।
  • भारत में, खान मंत्रालय इन खनिजों की पहचान और उनके अन्वेषण तथा खनन को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाता है।
  • इन खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना आयात पर निर्भरता कम करने और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) आदि शामिल हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • सरकार पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं के माध्यम से इन खनिजों के अन्वेषण (Exploration) और खनन (Mining) को बढ़ावा दे रही है, जिसमें कंपोजिट लाइसेंस (Composite License) और माइनिंग लीज (Mining Lease) शामिल हैं।
  • कंपोजिट लाइसेंस अन्वेषण और खनन दोनों के अधिकार प्रदान करता है, जबकि माइनिंग लीज केवल खनन के अधिकार देती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का आठवां चरण भारत की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाने में सहायक।
छत्तीसगढ़ के पांच मिनरल ब्लॉक्स शामिल राज्य की समृद्ध खनिज क्षमता का उपयोग और राष्ट्रीय विकास में योगदान।
नीलामी में 20 ब्लॉक्स (9 राज्यों से) देश भर में महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
विभिन्न खनिजों का समावेश (ग्रेफाइट, REE, वैनेडियम आदि) स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक आपूर्ति।
पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया निवेशकों का विश्वास बढ़ाना और भ्रष्टाचार कम करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) भारत की आर्थिक वृद्धि और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, विशेषकर स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) की ओर बदलाव और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए।
  • घरेलू खनन और प्रसंस्करण क्षमताएं खनिज मूल्य श्रृंखला (Mineral Value Chain) में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • इन खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्र बनेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा होंगे।

रणनीतिक महत्व

  • क्रिटिकल मिनरल्स की मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) भारत की खनिज सुरक्षा (Mineral Security) को सशक्त करेगी और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करेगी।
  • ये खनिज रक्षा, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रणनीतिक उद्योगों के लिए आवश्यक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत (Self-Reliant India) के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण (Exploration) और विकास आवश्यक है।

पर्यावरण और ऊर्जा संक्रमण महत्व

  • लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), बैटरी भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) प्रौद्योगिकियों के लिए अनिवार्य हैं।
  • इन खनिजों का सतत विकास भारत के जलवायु परिवर्तन (Climate Change) लक्ष्यों और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में योगदान देगा।
  • पर्यावरण के अनुकूल खनन प्रथाओं को अपनाने से पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

चुनौतियाँ

1. अन्वेषण और निष्कर्षण

  • भारत में कई क्रिटिकल मिनरल्स के लिए अन्वेषण का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
  • खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में चुनौतियाँ।
  • गहन खनन के लिए आवश्यक उन्नत प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता की कमी।

2. प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन

  • खनन के बाद खनिजों के प्रसंस्करण और शोधन के लिए पर्याप्त घरेलू क्षमता का अभाव।
  • मूल्य संवर्धन (Value Addition) गतिविधियों में निवेश की कमी, जिससे कच्चे माल का निर्यात होता है।
  • प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास की धीमी गति।

3. नियामक और नीतिगत बाधाएँ

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी, जिससे परियोजनाओं में देरी होती है।
  • खनन कानूनों और नियमों की जटिलता और बार-बार बदलाव।
  • स्थानीय समुदायों के साथ संघर्ष और सामाजिक स्वीकृति (Social Acceptance) प्राप्त करने में चुनौतियाँ।

4. पूंजी और निवेश

  • क्रिटिकल मिनरल परियोजनाओं में उच्च प्रारंभिक पूंजी निवेश की आवश्यकता।
  • निजी क्षेत्र से पर्याप्त निवेश आकर्षित करने में चुनौतियाँ।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता और मूल्य जोखिम।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अन्वेषण की कमी कई महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भूवैज्ञानिक डेटा और अन्वेषण का निम्न स्तर।
प्रौद्योगिकी का अभाव उन्नत खनन, प्रसंस्करण और शोधन प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की कमी।
पर्यावरणीय प्रभाव खनन गतिविधियों से पारिस्थितिक तंत्र और स्थानीय समुदायों पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
नियामक जटिलता खनन लाइसेंसिंग और मंजूरी प्रक्रियाओं में नौकरशाही बाधाएं और देरी।
आधारभूत संरचना खनन क्षेत्रों से प्रसंस्करण इकाइयों तक खनिजों के परिवहन के लिए अपर्याप्त आधारभूत संरचना।

आगे की राह

  • क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण को तेज करने के लिए उन्नत भूभौतिकीय सर्वेक्षणों और ड्रिलिंग तकनीकों में निवेश करना।
  • घरेलू प्रसंस्करण, शोधन और मूल्य संवर्धन क्षमताओं को विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि खनन परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
  • खनन क्षेत्रों में सतत प्रथाओं को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सख्त नियामक ढाँचा लागू करना।
  • क्रिटिकल मिनरल्स से संबंधित अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना, विशेषकर नई निष्कर्षण और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों में।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना।
  • स्थानीय समुदायों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ना और उनके हितों की रक्षा करना ताकि खनन परियोजनाओं के लिए सामाजिक स्वीकृति प्राप्त हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान और महत्व  →  नीलामी प्रक्रिया और ब्लॉक्स का आवंटन  →  खनन और अन्वेषण में वृद्धि  →  घरेलू प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन  →  आत्मनिर्भरता और खनिज सुरक्षा  →  आर्थिक वृद्धि और औद्योगिक विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) वे खनिज होते हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति बाधित होने का उच्च जोखिम होता है।
2. भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी प्रक्रिया खान मंत्रालय द्वारा आयोजित की जाती है।
3. रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) महत्वपूर्ण खनिजों की श्रेणी में नहीं आते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। महत्वपूर्ण खनिज वे होते हैं जो अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति में व्यवधान का खतरा होता है। कथन 2 सही है। भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी खान मंत्रालय द्वारा की जाती है। कथन 3 गलत है। रेयर अर्थ एलिमेंट्स महत्वपूर्ण खनिजों की श्रेणी में आते हैं और इनका उपयोग उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में होता है।

Q2. अभिकथन (A): भारत में महत्वपूर्ण खनिजों का घरेलू अन्वेषण और विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): महत्वपूर्ण खनिज भारत की आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए आवश्यक हैं।
सही विकल्प चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं। महत्वपूर्ण खनिजों का घरेलू अन्वेषण और विकास भारत को इन खनिजों की आपूर्ति के लिए बाहरी निर्भरता कम करने में मदद करेगा, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए आवश्यक है। कारण (R) इस आवश्यकता का मूल कारण बताता है, क्योंकि ये खनिज देश की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की आर्थिक संवृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व पर चर्चा कीजिए। साथ ही, इन खनिजों के सतत विकास और अन्वेषण में केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय की भूमिका का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत महत्वपूर्ण खनिजों की परिभाषा और उनके आर्थिक व रणनीतिक महत्व से करें। भारत की आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और रक्षा क्षेत्र में इनकी भूमिका को स्पष्ट करें। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और खनिज सुरक्षा के संदर्भ में इनकी प्रासंगिकता पर बल दें। दूसरे भाग में, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डालें। इसमें नीति निर्माण, नीलामी प्रक्रिया, पर्यावरण मंजूरी, राजस्व साझाकरण और स्थानीय समुदायों के लाभ सुनिश्चित करने जैसे पहलुओं को शामिल करें। छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए रोड शो और नीलामी के आठवें चरण का उदाहरण देते हुए समन्वय के महत्व को रेखांकित करें। निष्कर्ष में, एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और सतत विकास के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की अनिवार्यता पर जोर दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में ‘क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम’ में राज्य की भूमिका को मजबूत करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल है?

  1. A. राज्य में लिथियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ मेटल्स के खनन के लिए नई नीति की घोषणा
  2. B. केंद्र सरकार के साथ मिलकर ‘मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ की स्थापना
  3. C. राज्य के सभी जिलों में खनिज आधारित उद्योगों को 50% सब्सिडी प्रदान करना
  4. D. अंतर्राष्ट्रीय खनिज सम्मेलन का आयोजन कर राज्य की खनिज संपदा का वैश्विक प्रदर्शन

उत्तर: A. राज्य में लिथियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ मेटल्स के खनन के लिए नई नीति की घोषणा — छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में लिथियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ मेटल्स जैसे क्रिटिकल मिनरल्स के खनन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में एक नई नीति की घोषणा की है।

Mains: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम’ में राज्य की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए अपनाई गई रणनीतियों का विश्लेषण करते हुए, राज्य की आर्थिक संभावनाओं और पर्यावरणीय प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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