मुल्लापेरियार बाँध की सुरक्षा रिपोर्ट दो सप्ताह में सौंपेगा विशेषज्ञ पैनल

Panel to submit safety report on Mullaperiyar dam in two weeks — diagram

मुल्लापेरियार बाँध की सुरक्षा रिपोर्ट दो सप्ताह में सौंपेगा विशेषज्ञ पैनल

Mullaperiyar Dam StructureSpillwayFlood controlOverflow channelGravity WallMasonry construction1895 builtReservoirPeriyar RiverWater storageFoundationBedrock supportSeismic stability
Mullaperiyar Dam Structure

✎ मुल्लापेरियार बांध विवाद भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों और बांध सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, जिसके समाधान में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत का भूगोल), भारतीय समाज  |  GS Paper II — भारतीय संविधान (संघवाद), केंद्र-राज्य संबंध, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन, पर्यावरण (पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन)
  • Prelims: मुल्लापेरियार बांध, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA), अंतर-राज्यीय जल विवाद, पेरियार नदी, केरल और तमिलनाडु
  • Essay: भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान: चुनौतियाँ और आगे की राह, विकास बनाम पर्यावरण: बांध परियोजनाओं का सामाजिक-आर्थिक और पारिस्थितिक प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: मुल्लापेरियार बांध विवाद भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों और बांध सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, जिसके समाधान में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar Dam) की सुरक्षा का आकलन करने के लिए गठित एक विशेषज्ञ पैनल दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। यह पैनल बांध की संरचनात्मक अखंडता, भूकंपीय लचीलापन और आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप इसकी स्थिति का मूल्यांकन कर रहा है। यह घटना केरल और तमिलनाडु के बीच दशकों से चले आ रहे अंतर-राज्यीय जल विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहाँ केरल बांध की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उठाता रहा है।

पृष्ठभूमि

  • मुल्लापेरियार बांध केरल के इडुक्की जिले में पेरियार नदी पर स्थित एक चिनाई वाला गुरुत्वाकर्षण बांध है। इसका निर्माण 1895 में ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था।
  • यह बांध केरल में स्थित है, लेकिन इसका संचालन और रखरखाव तमिलनाडु सरकार द्वारा किया जाता है, जो इससे निकलने वाले पानी का उपयोग अपने कृषि और पेयजल आवश्यकताओं के लिए करता है।
  • बांध के पुराने होने के कारण इसकी सुरक्षा को लेकर केरल लगातार चिंता व्यक्त करता रहा है, खासकर 1979 के बाद जब बांध में कुछ दरारें पाई गईं थीं। केरल बांध को गिराकर एक नया बांध बनाने की वकालत करता रहा है।
  • तमिलनाडु का तर्क है कि बांध संरचनात्मक रूप से सुरक्षित है और इसकी मरम्मत और सुदृढीकरण का काम किया गया है। वह बांध के जल स्तर को बढ़ाने की मांग करता रहा है ताकि अधिक पानी का उपयोग किया जा सके।
  • यह विवाद कई बार सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) तक पहुँच चुका है, जिसने विभिन्न समितियों और पैनलों को बांध की सुरक्षा का आकलन करने का निर्देश दिया है।
  • हाल ही में, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act, 2021) लागू होने के बाद, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (National Dam Safety Authority – NDSA) को बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA)

  • बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 भारत में निर्दिष्ट बांधों की सुरक्षित कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए एक समान प्रक्रिया प्रदान करता है। इसका उद्देश्य बांधों से संबंधित आपदाओं की रोकथाम करना है।
  • यह अधिनियम केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बांध सुरक्षा के लिए एक संस्थागत ढाँचा स्थापित करता है।
  • अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) की स्थापना की गई है, जो बांध सुरक्षा के लिए एक नियामक निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • NDSA का मुख्य कार्य बांध सुरक्षा नीतियों और मानकों को लागू करना, तकनीकी सहायता प्रदान करना, बांधों का निरीक्षण करना और बांध सुरक्षा से संबंधित विवादों को हल करना है।
  • यह अधिनियम प्रत्येक राज्य में राज्य बांध सुरक्षा संगठन (State Dam Safety Organization – SDSO) की स्थापना का भी प्रावधान करता है।
  • अधिनियम बांध मालिकों के लिए बांधों के नियमित निरीक्षण, आपातकालीन कार्य योजना (Emergency Action Plan) तैयार करने और सुरक्षा समीक्षा करने जैसे दायित्व निर्धारित करता है।
  • इसका उद्देश्य बांधों की संरचनात्मक अखंडता, परिचालन सुरक्षा और निगरानी प्रणालियों को मजबूत करना है ताकि संभावित खतरों को कम किया जा सके।
  • यह अधिनियम अंतर-राज्यीय बांधों के मामलों में NDSA को महत्वपूर्ण भूमिका देता है, जहाँ एक राज्य में स्थित बांध का संचालन दूसरे राज्य द्वारा किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बहु-विषयक विशेषज्ञ पैनल बांध सुरक्षा का व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करता है।
आधुनिक इंजीनियरिंग प्रतिमानों का मूल्यांकन पुराने बांधों की वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुरूप जांच करता है।
भूकंपीय लचीलापन और उपकरण भूकंपीय गतिविधियों के प्रति बांध की क्षमता और निगरानी प्रणालियों का आकलन करता है।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) को रिपोर्ट बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय नियामक ढांचे के तहत जवाबदेही और मानकीकरण सुनिश्चित करता है।
अंतर-राज्यीय जल विवाद केरल और तमिलनाडु के बीच जल-साझाकरण और बांध सुरक्षा से संबंधित दीर्घकालिक मुद्दों को दर्शाता है।

महत्व

शासन और नियामक

  • यह रिपोर्ट राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के तहत बांध सुरक्षा के नियामक ढांचे को मजबूत करेगी।
  • यह अंतर-राज्यीय जल विवादों के प्रबंधन में केंद्र सरकार की भूमिका को रेखांकित करता है, विशेष रूप से जब सार्वजनिक सुरक्षा दांव पर हो।

आपदा प्रबंधन

  • बांध की सुरक्षा का आकलन संभावित आपदाओं को रोकने और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह भूकंपीय विश्लेषण और बाढ़ प्रबंधन क्षमता अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रमुख घटक हैं।

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • बांधों की सुरक्षा का मूल्यांकन उनके पारिस्थितिक प्रभाव और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए आवश्यक है।
  • पुराने बांधों के आधुनिकीकरण और रखरखाव से जल-जनित पारिस्थितिकी प्रणालियों पर उनके प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

चुनौतियाँ

1. अंतर-राज्यीय विवाद

  • मुल्लापेरियार बांध केरल और तमिलनाडु के बीच एक दीर्घकालिक विवाद का विषय रहा है, जिसमें सुरक्षा और जल-साझाकरण प्रमुख मुद्दे हैं।
  • केरल बांध की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करता रहा है, जबकि तमिलनाडु बांध से पानी के अपने अधिकारों पर जोर देता है।

2. तकनीकी मूल्यांकन की जटिलता

  • पुराने बांधों का मूल्यांकन आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों, भूकंपीय लचीलेपन और हाइड्रोलॉजी को ध्यान में रखते हुए जटिल है।
  • विशेषज्ञों के बीच भी मूल्यांकन के तरीकों और निष्कर्षों पर असहमति हो सकती है, जैसा कि केरल की ‘एकल-दिवसीय दृश्य निरीक्षण अपर्याप्त’ टिप्पणी से स्पष्ट है।

3. सार्वजनिक सुरक्षा और विश्वास

  • बांध की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के बीच चिंता पैदा करती है।
  • निष्पक्ष और व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करना सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने और सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है।

4. नियामक अनुपालन और प्रवर्तन

  • राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) द्वारा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना और सिफारिशों को लागू करना एक चुनौती हो सकती है।
  • राज्यों के बीच सहयोग और केंद्र सरकार की निगरानी नियामक ढांचे की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बांध की आयु और संरचनात्मक अखंडता यह एक बहुत पुराना बांध है, और इसकी संरचनात्मक अखंडता आधुनिक इंजीनियरिंग प्रतिमानों के अनुरूप होनी चाहिए।
भूकंपीय लचीलापन बांध की भूकंपीय गतिविधियों का सामना करने की क्षमता का मूल्यांकन महत्वपूर्ण है, खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में।
जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण बांध की बाढ़ के पानी को प्रबंधित करने की क्षमता और जल-साझाकरण के निहितार्थ महत्वपूर्ण चिंताएं हैं।
अंतर-राज्यीय समन्वय केरल और तमिलनाडु के बीच बांध के संचालन और सुरक्षा पर समन्वय की कमी विवादों को जन्म देती है।
तकनीकी मूल्यांकन की गहराई केरल का तर्क है कि ‘एकल-दिवसीय दृश्य निरीक्षण’ अपर्याप्त है और गहन तकनीकी आकलन की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • पैनल को एक व्यापक और निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए जो सभी तकनीकी पहलुओं, जिसमें भूकंपीय विश्लेषण और बाढ़ प्रबंधन क्षमता शामिल है, को कवर करे।
  • NDSA को पैनल की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप विकसित करना चाहिए और राज्यों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
  • केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय जल विवादों को हल करने के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें बांध सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
  • आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञता का उपयोग करके बांध की संरचनात्मक अखंडता की नियमित और गहन निगरानी की जानी चाहिए।
  • निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए एक प्रभावी आपदा प्रबंधन योजना और जागरूकता कार्यक्रम विकसित किया जाना चाहिए।
  • राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी संवाद तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मुलपेरियार बांध · बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 · राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) · अंतर-राज्यीय जल विवाद · संघवाद · न्यायिक समीक्षा · आपदा प्रबंधन · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन · जल संसाधन प्रबंधन · संरचनात्मक अखंडता · तकनीकी मूल्यांकन · राज्य सूची

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों से संबंधित विवादों का न्यायनिर्णयन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 256’, ‘note’: ‘राज्यों पर संघ का नियंत्रण’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ और राज्य के बीच शक्तियों का वितरण’}

अवधारणा प्रवाह

मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा पर चिंताएँ उठाई गईं।  →  एक बहु-विषयक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया गया।  →  पैनल बांध का व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन करता है।  →  पैनल अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) को प्रस्तुत करेगा।  →  NDSA रिपोर्ट की समीक्षा करेगा और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करेगा।  →  सिफारिशों का कार्यान्वयन बांध की सुरक्षा और अंतर-राज्यीय विवादों को प्रभावित करेगा।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) का गठन किया गया है।
2. NDSA का मुख्य कार्य बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अंतर-राज्यीय बांध सुरक्षा मुद्दों को हल करना है।
3. जल संसाधन, नदियों का विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय NDSA का प्रशासनिक मंत्रालय है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत NDSA का गठन किया गया है, जिसका मुख्य कार्य बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अंतर-राज्यीय बांध सुरक्षा मुद्दों को हल करना है। कथन 3 गलत है। NDSA जल शक्ति मंत्रालय के अधीन आता है, न कि जल संसाधन, नदियों का विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीन।

Q2. मुलपेरियार बांध के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. बांध का स्थान: केरल
2. बांध का संचालन: तमिलनाडु
3. बांध की आयु: 125 वर्ष से अधिक
उपरोक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — युग्म 1 और 2 सही सुमेलित हैं। मुलपेरियार बांध केरल में स्थित है, लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु द्वारा किया जाता है। युग्म 3 गलत है। मुलपेरियार बांध 1895 में पूरा हुआ था, इस प्रकार इसकी आयु 125 वर्ष से अधिक है।

Q3. भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए कौन सा संवैधानिक प्रावधान मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है?

  1. अनुच्छेद 262
  2. अनुच्छेद 263
  3. अनुच्छेद 246
  4. अनुच्छेद 280

उत्तर: अनुच्छेद 262 — अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल से संबंधित किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन के लिए कानून द्वारा प्रावधान करने का अधिकार देता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मुलपेरियार बांध जैसे पुराने बांधों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मुलपेरियार बांध विवाद का संक्षिप्त संदर्भ और बांध सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालना।
2. बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की भूमिका: अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख, जैसे राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) और राज्य बांध सुरक्षा संगठनों का गठन, बांधों के नियमित निरीक्षण, आपातकालीन कार्य योजनाएं और सुरक्षा मानकों का निर्धारण। मुलपेरियार जैसे पुराने बांधों की सुरक्षा चिंताओं (संरचनात्मक अखंडता, भूकंपीय लचीलापन, आधुनिक इंजीनियरिंग मानदंड) को दूर करने में अधिनियम की क्षमता का विश्लेषण।
3. समालोचनात्मक परीक्षण: अधिनियम की सीमाओं और चुनौतियों पर चर्चा, जैसे राज्यों के बीच सहमति का अभाव, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी, धन की उपलब्धता, और अंतर-राज्यीय विवादों में इसकी प्रभावशीलता। केरल और तमिलनाडु के बीच मुलपेरियार विवाद के संदर्भ में अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली संभावित बाधाओं का उल्लेख।
4. अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में सहयोग का महत्व: अनुच्छेद 262 और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 का उल्लेख। संघवाद के सिद्धांत, सहकारी संघवाद की आवश्यकता, और केंद्र तथा राज्यों के बीच संवाद, विश्वास निर्माण और तकनीकी समाधानों पर आधारित सहयोग के महत्व पर जोर। सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका और उसके निर्णयों का संदर्भ।
5. निष्कर्ष: बांध सुरक्षा और अंतर-राज्यीय जल प्रबंधन के लिए एक समग्र, सहयोगात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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