03 Sep कर्नाटक में तीन दिवसीय विशेष सत्र: सूखा और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा

✎ कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र सूखे की गंभीर स्थिति और पश्चिमी घाट के संरक्षण से संबंधित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा करेगा, जिसमें 1,439 गाँवों को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper III — आपदा एवं आपदा प्रबंधन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
- Prelims: कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, पश्चिमी घाट, पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Areas – ESA), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF), सूखा प्रबंधन मैनुअल 2020, विधानसभा का विशेष सत्र
- Essay: भारत में पर्यावरणीय संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन: भारत के लिए भविष्य की राह
त्वरित पुनरावृत्ति: कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र सूखे की गंभीर स्थिति और पश्चिमी घाट के संरक्षण से संबंधित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा करेगा, जिसमें 1,439 गाँवों को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक सरकार ने राज्य में सूखे की स्थिति और कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए 21 से 23 सितंबर तक तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र बुलाया है। राज्य इस समय गंभीर सूखे का सामना कर रहा है और जल्द ही दूसरे चरण के सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, केंद्र द्वारा जारी एक मसौदे में कर्नाटक के 1,439 गाँवों को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Areas – ESA) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिस पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संदर्भ में चर्चा की जाएगी।
पृष्ठभूमि
- कर्नाटक राज्य गंभीर सूखे की चपेट में है, और यदि सितंबर के दूसरे सप्ताह तक अच्छी बारिश नहीं होती है, तो यह हाल के वर्षों के सबसे खराब सूखे में से एक हो सकता है।
- राज्य सरकार केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल 2020 (Drought Management Manual 2020) का पालन कर रही है, जिसके तहत पहले ही 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF) के तहत ₹1,229 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। हालांकि, राज्य ने सूखे से राहत पर ₹187 करोड़ खर्च किए हैं।
- कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण से संबंधित है, और इसके कार्यान्वयन से क्षेत्र के विकास और पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
- केंद्र सरकार द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना में कर्नाटक के 1,439 गाँवों को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे स्थानीय समुदायों और राज्य सरकार के बीच चिंताएँ बढ़ गई हैं।
- विधानसभा का विशेष सत्र इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा और समाधान खोजने के लिए बुलाया गया है, जो राज्य के पर्यावरण, कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और पश्चिमी घाट
- कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, जिसे औपचारिक रूप से ‘उच्च स्तरीय कार्य समूह की रिपोर्ट’ (High-Level Working Group Report) कहा जाता है, पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
- यह रिपोर्ट माधव गाडगिल समिति (Madhav Gadgil Committee) की सिफारिशों की समीक्षा के लिए गठित की गई थी, जिसे पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (Western Ghats Ecology Expert Panel – WGEEP) के नाम से भी जाना जाता है।
- रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखते हुए सतत विकास को बढ़ावा देना है।
- इसने पश्चिमी घाट के लगभग 37% क्षेत्र को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में नामित करने का प्रस्ताव दिया, जहाँ खनन, थर्मल पावर प्लांट और अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी।
- रिपोर्ट में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखने पर भी जोर दिया गया है।
- पश्चिमी घाट भारत के छह राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु) में फैला हुआ एक जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जो अपनी अनूठी वनस्पतियों और जीवों के लिए जाना जाता है।
- इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने को लेकर विभिन्न राज्यों और स्थानीय समुदायों के बीच चिंताएँ और विरोध रहे हैं, क्योंकि इससे विकास परियोजनाओं और आजीविका पर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेष सत्र का आयोजन | राज्य में सूखे की स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा हेतु विधायी मंच |
| सूखे की स्थिति | राज्य के कई तालुकों में गंभीर सूखे की आशंका, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव |
| कस्तूरीरंगन रिपोर्ट | पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) के संरक्षण से संबंधित सिफारिशें |
| केंद्र का सूखा मैनुअल 2020 | सूखा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देश |
| राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) | आपदाओं से निपटने और राहत कार्यों के लिए राज्यों को उपलब्ध कराया जाने वाला वित्तीय संसाधन |
महत्व
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण से संबंधित है, जो भारत के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है। इस रिपोर्ट पर चर्चा से क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता और सतत विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने आएगी।
- पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) का सीमांकन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका पर इसके प्रभावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
शासन एवं नीति
- विशेष सत्र का आयोजन राज्य सरकार को सूखे जैसी गंभीर चुनौती पर व्यापक विचार-विमर्श करने और प्रभावी नीतिगत प्रतिक्रियाएँ तैयार करने का अवसर प्रदान करता है।
- केंद्र के सूखा मैनुअल 2020 का पालन यह सुनिश्चित करता है कि सूखा प्रबंधन के लिए एक मानकीकृत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिससे राहत कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता आए।
सामाजिक एवं आर्थिक
- सूखा कृषि क्षेत्र पर सीधा प्रभाव डालता है, जिससे फसल उत्पादन में कमी, किसानों की आय में गिरावट और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा की चिंताएँ बढ़ जाती हैं।
- सूखे से प्रभावित तालुकों की घोषणा और केंद्र से मुआवजे की मांग से प्रभावित किसानों और समुदायों को आवश्यक वित्तीय सहायता मिल सकेगी, जिससे उनकी आजीविका को सहारा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. सूखा प्रबंधन
- सूखे की गंभीरता का सटीक आकलन और समय पर सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा करना ताकि राहत कार्य शुरू किए जा सकें।
- केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करना और राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) का प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, कृषि
2. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का कार्यान्वयन
- पर्यावरण संरक्षण और विकास आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना, विशेष रूप से पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।
- स्थानीय समुदायों, किसानों और अन्य हितधारकों की चिंताओं को दूर करना, जिनकी आजीविका रिपोर्ट की सिफारिशों से प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास
3. राजकोषीय चुनौतियाँ
- सूखा राहत कार्यों पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधनों का आवंटन करना, विशेष रूप से जब राज्य पहले से ही वित्तीय दबाव में हो।
- केंद्र से समय पर धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जैसा कि राज्य आपदा राहत कोष के तहत अनुमोदित राशि के जारी होने में देरी की बात कही गई है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सूखे की गंभीरता | राज्य में हाल के वर्षों के सबसे खराब सूखे की आशंका, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर गंभीर दबाव। |
| कस्तूरीरंगन रिपोर्ट | पश्चिमी घाट में 1,439 गाँवों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में अधिसूचित करने से स्थानीय विकास और आजीविका पर संभावित प्रभाव। |
| वित्तीय सहायता में देरी | राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत ₹1,229 करोड़ की अनुमोदित राशि का अभी तक जारी न होना, जिससे राहत कार्यों में बाधा। |
| केंद्र-राज्य समन्वय | सूखा राहत और मुआवजे के लिए केंद्र सरकार से समय पर और पर्याप्त सहायता प्राप्त करने की आवश्यकता। |
आगे की राह
- सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक और समयबद्ध आकलन सुनिश्चित करने के लिए उन्नत मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम विज्ञान प्रणालियों का उपयोग करना।
- सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को फसल बीमा (जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) और अन्य वित्तीय सहायता योजनाओं के माध्यम से त्वरित राहत प्रदान करना।
- जल संरक्षण और जल संचयन (water harvesting) के प्रयासों को तेज करना, जिसमें चेक डैम, तालाबों का निर्माण और वर्षा जल संचयन संरचनाओं को बढ़ावा देना शामिल है।
- कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर व्यापक जन-चर्चा और हितधारक परामर्श आयोजित करना ताकि सभी पक्षों की चिंताओं को सुना जा सके और एक संतुलित समाधान निकाला जा सके।
- राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत अनुमोदित निधियों को शीघ्र जारी करने के लिए केंद्र सरकार के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
- दीर्घकालिक सूखा शमन रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें फसल विविधीकरण, सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना और कुशल सिंचाई तकनीकों का उपयोग शामिल है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सूखा प्रबंधन · आपदा राहत · पश्चिमी घाट · कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट · पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र · राज्य आपदा राहत कोष · केंद्र-राज्य संबंध · जलवायु परिवर्तन · कृषि संकट · विशेष सत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘राज्य सूची के विषय (कृषि, जल)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा व्यय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
अवधारणा प्रवाह
कम वर्षा और सूखे की आशंका → राज्य सरकार द्वारा विशेष सत्र का आयोजन → सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा → सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा → केंद्र से वित्तीय सहायता और मुआवजा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित है।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है।
3. राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) का उपयोग केवल प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण और पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) की पहचान से संबंधित है। कथन 2 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 3 गलत है। SDRF का उपयोग प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग केवल इसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुनर्वास और अन्य संबंधित कार्यों को भी कवर कर सकता है।
Q2. कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
- भारत में शिक्षा नीति सुधार
- पश्चिमी घाट का संरक्षण
- तटीय विनियमन क्षेत्र
- नदी जोड़ो परियोजनाएँ
उत्तर: पश्चिमी घाट का संरक्षण — कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट विशेष रूप से पश्चिमी घाट के संरक्षण और पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) के सीमांकन से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सूखा भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक आवर्ती चुनौती है। सूखा प्रबंधन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण से संबंधित कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के प्रमुख सुझावों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में सूखे की आवर्ती प्रकृति और इसके व्यापक प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. **सूखा प्रबंधन में केंद्र-राज्य सहयोग का महत्व:**
* **वित्तीय सहायता:** राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के माध्यम से केंद्र की भूमिका।
* **नीति निर्माण और दिशानिर्देश:** केंद्र सरकार द्वारा जारी सूखा मैनुअल (जैसे सूखा मैनुअल 2020) और राज्यों द्वारा उनका कार्यान्वयन।
* **तकनीकी सहायता और विशेषज्ञता:** केंद्र द्वारा मौसम विज्ञान, रिमोट सेंसिंग और जल संसाधन प्रबंधन में तकनीकी सहायता।
* **समन्वित प्रतिक्रिया:** अंतर-राज्यीय जल विवादों और साझा संसाधनों के प्रबंधन में सहयोग।
* **दीर्घकालिक समाधान:** जल संरक्षण, सिंचाई परियोजनाओं और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में संयुक्त प्रयास।
3. **कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट और पश्चिमी घाट:**
* **पृष्ठभूमि:** पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय महत्व और माधव गाडगिल समिति की सिफारिशों का संक्षिप्त संदर्भ।
* **प्रमुख सुझाव:**
* पश्चिमी घाट के लगभग 37% क्षेत्र को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करना।
* ESA में खनन, उत्खनन और अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों पर प्रतिबंध।
* स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ संरक्षण।
* सतत विकास प्रथाओं को बढ़ावा देना।
* **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:** राज्यों की आपत्तियाँ, विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण का द्वंद्व।
4. **निष्कर्ष:** सूखा प्रबंधन और पारिस्थितिकीय संरक्षण दोनों में केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर बल दें, जो देश के सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक में तीन दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. राज्य में बाढ़ की स्थिति पर चर्चा करना
- B. राज्य में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा करना
- C. राज्य में नई शिक्षा नीति लागू करने पर विचार करना
- D. राज्य में औद्योगिक विकास पर नीति तैयार करना
उत्तर: B. राज्य में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा करना — कर्नाटक सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य राज्य में सूखे की स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा करना है।
Mains: कर्नाटक में सूखे की स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए आयोजित विशेष सत्र के महत्व और इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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