गुजरात दंपति ने जीता आईवीएफ का कानूनी युद्ध, जानिए क्या है पूरा मामला

After losing doctor son to suicide, Gujarat couple in 50s wins High Court battle for IVF — labelled illustration

गुजरात दंपति ने जीता आईवीएफ का कानूनी युद्ध, जानिए क्या है पूरा मामला

✎ गुजरात उच्च न्यायालय का यह निर्णय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमाओं की न्यायिक व्याख्या और व्यक्तिगत परिस्थितियों में कानून के लचीलेपन के महत्व को रेखांकित करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, कल्याण योजनाएँ  |  GS Paper II — न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली
  • Prelims: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता, न्यायिक समीक्षा, अनुच्छेद 226, जीवन का अधिकार
  • Essay: कानून और नैतिकता के बीच संतुलन, बदलते सामाजिक मानदंड और न्यायिक हस्तक्षेप

त्वरित पुनरावृत्ति: गुजरात उच्च न्यायालय का यह निर्णय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमाओं की न्यायिक व्याख्या और व्यक्तिगत परिस्थितियों में कानून के लचीलेपन के महत्व को रेखांकित करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, गुजरात उच्च न्यायालय ने एक युगल को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (Assisted Reproductive Technology – ART) सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति दी है, भले ही पत्नी ने अधिनियम में निर्धारित ऊपरी आयु सीमा पार कर ली थी। यह निर्णय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021) के प्रावधानों और न्यायिक व्याख्या के महत्व पर प्रकाश डालता है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहाँ व्यक्तिगत परिस्थितियों और मानवीय भावनाओं का प्रश्न शामिल हो।

पृष्ठभूमि

  • एक गुजराती युगल ने अपने 25 वर्षीय बेटे को आत्महत्या में खोने के बाद IVF के माध्यम से परिवार को फिर से बनाने का फैसला किया।
  • महिला की आयु 50 वर्ष से अधिक थी, जबकि उनके पति की आयु 54 वर्ष थी, जो ART अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमा के विपरीत था।
  • ART अधिनियम, 2021 की धारा 21(g) महिलाओं के लिए 21 से 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 से 55 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित करती है।
  • मेहसाणा के एक क्लिनिक ने आयु सीमा के कारण युगल को IVF उपचार प्रदान करने से इनकार कर दिया।
  • युगल ने इस निर्णय को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि कानून को इस तरह से नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि केवल एक जीवनसाथी की आयु सीमा पार करने के कारण पूरे युगल को अयोग्य घोषित कर दिया जाए।
  • उच्च न्यायालय ने युगल की याचिका को स्वीकार कर लिया और उनके IVF उपचार के अनुरोध को अस्वीकार करने वाले निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया कि यह मामला उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों की एक श्रृंखला के अंतर्गत आता है।

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 क्या है?

  • यह अधिनियम भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी क्लीनिकों और बैंकों के विनियमन और पर्यवेक्षण का प्रावधान करता है।
  • इसका उद्देश्य ART प्रक्रियाओं के नैतिक और सुरक्षित अभ्यास को सुनिश्चित करना है, साथ ही इसमें शामिल व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।
  • यह अधिनियम ART सेवाओं का लाभ उठाने के लिए कुछ पात्रता मानदंड निर्धारित करता है, जिसमें आयु सीमा भी शामिल है।
  • अधिनियम के अनुसार, एक ‘कमीशनिंग युगल’ (Commissioning couple) एक बांझ विवाहित युगल को संदर्भित करता है जो उपचार के लिए एक अधिकृत ART क्लिनिक या बैंक से संपर्क करता है।
  • यह अधिनियम ART सेवाओं के दुरुपयोग को रोकने और इन प्रक्रियाओं से जुड़े नैतिक मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास करता है।
  • अधिनियम में राष्ट्रीय सहायक प्रजनन और सरोगेसी बोर्ड (National Assisted Reproductive and Surrogacy Board) और राज्य बोर्डों की स्थापना का भी प्रावधान है।
  • यह अधिनियम दाता और प्राप्तकर्ता दोनों के अधिकारों और गोपनीयता की रक्षा के लिए विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 यह अधिनियम भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) सेवाओं को विनियमित करता है, जिसमें IVF भी शामिल है। इसका उद्देश्य इन सेवाओं का मानकीकरण और दुरुपयोग रोकना है।
आयु सीमा प्रावधान (धारा 21(g)) अधिनियम महिलाओं के लिए 21 से 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 से 55 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित करता है। यह प्रावधान ART सेवाओं तक पहुँच को नियंत्रित करता है।
कमीशनिंग कपल की परिभाषा यह एक बांझ विवाहित जोड़े को संदर्भित करता है जो ART क्लिनिक या बैंक से उपचार के लिए संपर्क करता है। यह परिभाषा जोड़े की पात्रता के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण है।
गुजरात उच्च न्यायालय का निर्णय उच्च न्यायालय ने अधिनियम की व्याख्या करते हुए एक विवाहित जोड़े को ART सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति दी, भले ही पत्नी ने निर्धारित आयु सीमा पार कर ली थी, क्योंकि पति अभी भी पात्र था।
न्यायिक मिसालें न्यायालय ने ऐसे कई पूर्व निर्णयों का हवाला दिया जिनमें इसी तरह का दृष्टिकोण अपनाया गया था, जो कानून की व्याख्या में निरंतरता और पूर्ववर्ती निर्णयों के महत्व को दर्शाता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह निर्णय उन जोड़ों के लिए आशा की किरण है जो संतान खोने के बाद या अन्य कारणों से प्रजनन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और ART के माध्यम से परिवार शुरू करना चाहते हैं।
  • यह समाज में प्रजनन अधिकारों और परिवार नियोजन के विकल्पों पर व्यापक चर्चा को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से बदलती सामाजिक परिस्थितियों में।

कानूनी और संवैधानिक महत्व

  • यह सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है, विशेष रूप से आयु सीमा के प्रावधानों के संबंध में।
  • यह निर्णय न्यायिक सक्रियता और अदालतों की भूमिका को दर्शाता है कि वे कानूनों की व्याख्या इस तरह से करें जिससे व्यक्तिगत अधिकारों और मानवीय परिस्थितियों का सम्मान हो, खासकर जब कानून की कठोर व्याख्या अन्यायपूर्ण परिणाम दे सकती है।

नैतिक और मानवीय पहलू

  • यह उन जोड़ों की भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को स्वीकार करता है जो गंभीर व्यक्तिगत क्षति से उबरने की कोशिश कर रहे हैं और परिवार के पुनर्निर्माण के लिए ART का सहारा लेना चाहते हैं।
  • यह प्रजनन नैतिकता और ART के उपयोग से जुड़े नैतिक विचारों पर प्रकाश डालता है, जैसे कि आयु, स्वास्थ्य और बच्चे के सर्वोत्तम हित।

चुनौतियाँ

1. सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की व्याख्या

  • अधिनियम में निर्धारित आयु सीमा (महिलाओं के लिए 50 वर्ष, पुरुषों के लिए 55 वर्ष) की कठोर व्याख्या कुछ जोड़ों के लिए ART सेवाओं तक पहुँच को बाधित कर सकती है, खासकर जब एक साथी आयु सीमा के भीतर हो।
  • कमीशनिंग कपल की परिभाषा और व्यक्तिगत बनाम युगल की पात्रता के मूल्यांकन के बीच संतुलन स्थापित करना एक चुनौती है।

2. प्रजनन अधिकार और व्यक्तिगत स्वायत्तता

  • व्यक्तियों और जोड़ों के प्रजनन अधिकारों और परिवार शुरू करने के उनके निर्णय की स्वायत्तता को कानूनी सीमाओं के साथ संतुलित करना एक जटिल मुद्दा है।
  • आयु सीमा जैसे प्रतिबंधों का औचित्य और क्या वे व्यक्तिगत अधिकारों का अनुचित उल्लंघन करते हैं, यह बहस का विषय हो सकता है।

3. नैतिक और सामाजिक विचार

  • अधिक उम्र में माता-पिता बनने के नैतिक निहितार्थ, बच्चे के पालन-पोषण की क्षमता और बच्चे के सर्वोत्तम हित से संबंधित चिंताएँ मौजूद हैं।
  • समाज में ART के बढ़ते उपयोग के साथ जुड़े सामाजिक मानदंडों और अपेक्षाओं को समझना और संबोधित करना आवश्यक है।

4. कानूनी एकरूपता और न्यायिक मिसालें

  • विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा अधिनियम की अलग-अलग व्याख्याएँ कानूनी अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं और देश भर में ART सेवाओं तक पहुँच में असमानता ला सकती हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मुद्दे पर स्पष्टता प्रदान करना महत्वपूर्ण होगा ताकि एक समान कानूनी ढाँचा सुनिश्चित किया जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
ART अधिनियम की आयु सीमा कानून की कठोर व्याख्या उन जोड़ों को ART सेवाओं से वंचित कर सकती है जो भावनात्मक या शारीरिक कारणों से संतान चाहते हैं, भले ही एक साथी पात्र हो।
व्यक्तिगत प्रजनन अधिकार राज्य द्वारा निर्धारित आयु सीमाएँ व्यक्तियों के परिवार शुरू करने के अधिकार और उनकी व्यक्तिगत स्वायत्तता का उल्लंघन कर सकती हैं।
न्यायिक व्याख्या में भिन्नता विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा अधिनियम की अलग-अलग व्याख्याएँ कानूनी अनिश्चितता और ART सेवाओं तक पहुँच में असमानता पैदा कर सकती हैं।
नैतिक और सामाजिक दुविधाएँ अधिक उम्र में माता-पिता बनने से जुड़े नैतिक प्रश्न और बच्चे के सर्वोत्तम हित से संबंधित चिंताएँ समाज में बहस का विषय हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण संतान खोने वाले जोड़ों के लिए भावनात्मक समर्थन और परिवार के पुनर्निर्माण के विकल्पों तक पहुँच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, जिसे कानूनी बाधाओं से रोका नहीं जाना चाहिए।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021

आगे की राह

  • सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के आयु सीमा प्रावधानों की समीक्षा की जाए ताकि मानवीय परिस्थितियों और व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों को बेहतर ढंग से समायोजित किया जा सके।
  • अधिनियम में ‘कमीशनिंग कपल’ की परिभाषा को स्पष्ट किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि युगल की समग्र पात्रता का मूल्यांकन किया जाए, न कि केवल व्यक्तिगत भागीदारों की आयु का।
  • उच्च न्यायालयों द्वारा अधिनियम की व्याख्या में एकरूपता लाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिशानिर्देश या स्पष्टीकरण जारी किए जा सकते हैं।
  • ART सेवाओं तक पहुँच के संबंध में नैतिक दिशानिर्देशों को मजबूत किया जाए, जिसमें बच्चे के सर्वोत्तम हित और अधिक उम्र के माता-पिता की क्षमता पर विचार शामिल हो।
  • उन जोड़ों के लिए व्यापक परामर्श और भावनात्मक सहायता सेवाएँ प्रदान की जाएँ जो संतान खोने के बाद ART का सहारा लेना चाहते हैं।
  • ART क्लीनिकों और बैंकों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रियाएँ स्थापित की जाएँ ताकि आवेदनों का मूल्यांकन निष्पक्ष और मानवीय तरीके से किया जा सके।
  • जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि ART सेवाओं, उनके कानूनी ढाँचे और संबंधित नैतिक विचारों के बारे में समाज को शिक्षित किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2021 · ART अधिनियम · प्रजनन अधिकार · उच्च न्यायालय का निर्णय · संवैधानिक नैतिकता · निर्णय का अधिकार · न्यायिक सक्रियता · स्वास्थ्य का अधिकार · सामाजिक न्याय · महिला सशक्तिकरण · कानूनी व्याख्या · कमीशनिंग युगल

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता

अवधारणा प्रवाह

दंपति द्वारा संतान खोना  →  ART (IVF) के माध्यम से परिवार पुनर्निर्माण का निर्णय  →  ART अधिनियम की आयु सीमा के कारण उपचार से इनकार  →  गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर करना  →  उच्च न्यायालय द्वारा अधिनियम की व्याख्या और उपचार की अनुमति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अधिनियम महिलाओं के लिए सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) सेवाओं का उपयोग करने की ऊपरी आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित करता है।
2. यह अधिनियम पुरुषों के लिए ART सेवाओं का उपयोग करने की ऊपरी आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित करता है।
3. यह अधिनियम ‘कमीशनिंग युगल’ को एक ऐसे बांझ विवाहित जोड़े के रूप में परिभाषित करता है जो उपचार के लिए अधिकृत ART क्लिनिक या बैंक से संपर्क करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। अधिनियम महिलाओं के लिए 21 से 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 से 55 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित करता है। कथन 3 भी सही है, अधिनियम ‘कमीशनिंग युगल’ को इसी प्रकार परिभाषित करता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत के संविधान में ‘जीवन के अधिकार’ की व्याख्या से संबंधित है, जिसमें प्रजनन अधिकार भी शामिल हो सकता है?

  1. अनुच्छेद 14
  2. अनुच्छेद 19
  3. अनुच्छेद 21
  4. अनुच्छेद 32

उत्तर: अनुच्छेद 21 — अनुच्छेद 21 ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण’ से संबंधित है, जिसकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा व्यापक व्याख्या की गई है जिसमें गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार और प्रजनन अधिकार जैसे विभिन्न पहलू शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमाओं के संबंध में हाल के उच्च न्यायालय के निर्णय का आलोचनात्मक परीक्षण करें। क्या यह निर्णय प्रजनन अधिकारों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को सुदृढ़ करता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021) का संक्षिप्त परिचय और अधिनियम के तहत निर्धारित आयु सीमाएँ (महिला 50 वर्ष, पुरुष 55 वर्ष)। गुजरात उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का संदर्भ दें जिसमें एक युगल को आयु सीमा के बावजूद IVF उपचार की अनुमति दी गई।
2. **उच्च न्यायालय के निर्णय का विश्लेषण:**
* न्यायालय ने किस आधार पर निर्णय दिया (जैसे ‘कमीशनिंग युगल’ की परिभाषा, पूर्ववर्ती न्यायिक निर्णय, कानून की व्याख्या)।
* निर्णय के पीछे की तर्कसंगतता: क्या यह कानून की शाब्दिक व्याख्या के बजाय उसके उद्देश्य और भावना पर आधारित था।
* न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) या न्यायिक संयम (Judicial Restraint) के संदर्भ में निर्णय की स्थिति।
3. **प्रजनन अधिकारों का सुदृढीकरण:**
* संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत प्रजनन अधिकारों का महत्व।
* निर्णय कैसे व्यक्तियों के बच्चे पैदा करने के अधिकार को मान्यता देता है, विशेषकर उन परिस्थितियों में जहाँ प्राकृतिक प्रजनन संभव नहीं है।
* ‘गरिमा के साथ जीवन’ के अधिकार पर निर्णय का प्रभाव।
4. **सामाजिक न्याय के सिद्धांत:**
* निर्णय कैसे उन जोड़ों को अवसर प्रदान करता है जो सामाजिक और भावनात्मक कारणों से संतान चाहते हैं, भले ही वे पारंपरिक आयु मानदंडों को पूरा न करते हों।
* सामाजिक रूढ़ियों और अपेक्षाओं को चुनौती देना।
* महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) के संदर्भ में निर्णय का महत्व, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जो देर से मातृत्व की इच्छा रखती हैं।
5. **चुनौतियाँ और चिंताएँ (यदि कोई हों):**
* क्या ऐसे निर्णयों से कानून की स्पष्टता प्रभावित होती है?
* क्या आयु सीमा निर्धारित करने के पीछे के वैज्ञानिक या नैतिक तर्कों को अनदेखा किया गया है?
* कानून के व्यापक अनुप्रयोग और संभावित दुरुपयोग पर विचार।
6. **निष्कर्ष:** निर्णय का समग्र महत्व, प्रजनन अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रति इसका योगदान, और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए निहितार्थ।

स्रोत: The Indian Express

Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: गुजरात के एक जोड़े ने अपने बेटे (जो एक डॉक्टर थे) की आत्महत्या के बाद IVF उपचार से संबंधित कानूनी लड़ाई जीती। इस मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने कौन सा महत्वपूर्ण निर्णय दिया?

  1. IVF के लिए महिला की आयु सीमा 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  2. IVF उपचार के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति आवश्यक है।
  3. विधवा महिला भी IVF उपचार के लिए पात्र है, भले ही उसका पति जीवित न हो।
  4. IVF उपचार केवल विवाहित जोड़ों के लिए ही उपलब्ध है।

उत्तर: विधवा महिला भी IVF उपचार के लिए पात्र है, भले ही उसका पति जीवित न हो। — गुजरात उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि विधवा महिला भी IVF उपचार के लिए पात्र है, भले ही उसका पति जीवित न हो, जिससे उनके मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कल्याण को ध्यान में रखा गया।

Mains: गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा IVF उपचार से संबंधित हालिया निर्णय के संदर्भ में, ‘मानवाधिकार और चिकित्सा नैतिकता’ के दृष्टिकोण से इस मामले की विवेचना कीजिए। साथ ही, गुजरात राज्य में IVF उपचार से संबंधित कानूनी ढांचे में सुधार के लिए सुझाव प्रस्तुत कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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