ओडिशा में सीएम-किसान योजना की पांचवी किस्त: 833 करोड़ रुपये का वितरण

Odisha CM disburses Rs 833 crore under CM-KISAN scheme — diagram

ओडिशा में सीएम-किसान योजना की पांचवी किस्त: 833 करोड़ रुपये का वितरण

ओडिशा में सीएम-किसान योजना की पांचवी किस्त: 833 करोड़ रुपये का वितरण — ओडिशा सीएम-किसान योजना के तहत वितरित राशि
आरेख: ओडिशा सीएम-किसान योजना के तहत वितरित राशि

✎ CM-KISAN योजना ओडिशा सरकार की एक पहल है जो छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों तथा PVTGs को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उनकी आय में वृद्धि करना और कृषि संकट को कम करना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय; कृषि
  • Prelims: CM-KISAN योजना, PM-KISAN योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), लघु और सीमांत किसान, विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTGs), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
  • Essay: भारत में कृषि संकट और किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ, ग्रामीण विकास में सरकारी योजनाओं की भूमिका और प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: CM-KISAN योजना ओडिशा सरकार की एक पहल है जो छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों तथा PVTGs को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उनकी आय में वृद्धि करना और कृषि संकट को कम करना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने CM-KISAN योजना के तहत 41 लाख से अधिक किसानों को 833 करोड़ रुपये से अधिक की पाँचवीं किस्त वितरित की है। यह वित्तीय सहायता रबी सीज़न के लिए प्रत्येक पात्र लाभार्थी को 2,000 रुपये के रूप में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान की गई है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के साथ-साथ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) से संबंधित लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण आधार है, जो बड़ी आबादी को आजीविका प्रदान करता है।
  • किसानों को अक्सर जलवायु परिवर्तन, बाज़ार में उतार-चढ़ाव और ऋणग्रस्तता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • इन चुनौतियों का समाधान करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न योजनाएँ चला रही हैं।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) एक ऐसी प्रणाली है जिसके तहत सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और लीकेज कम होता है।
  • ओडिशा सरकार धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी प्रदान करती है, जो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में मदद करता है।
  • PM-KISAN योजना केंद्र सरकार की एक समान पहल है जो किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। CM-KISAN योजना इसी तरह की राज्य-विशिष्ट पहल है।
  • किसानों की आत्महत्या एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्या है, और सरकारें ऐसी योजनाओं के माध्यम से इसे कम करने का प्रयास करती हैं जो किसानों की वित्तीय स्थिरता में सुधार करती हैं।
  • विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTGs) देश के सबसे वंचित समुदायों में से हैं और उन्हें विशेष सरकारी सहायता की आवश्यकता होती है।
  • रबी सीज़न भारत में एक महत्त्वपूर्ण कृषि अवधि है, जिसमें गेहूँ, जौ, चना और सरसों जैसी फसलें उगाई जाती हैं।

CM-KISAN योजना क्या है?

  • CM-KISAN योजना ओडिशा सरकार द्वारा शुरू की गई एक राज्य-विशिष्ट पहल है जिसका उद्देश्य राज्य के किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • यह योजना मुख्य रूप से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के साथ-साथ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) से संबंधित लोगों पर केंद्रित है।
  • यह वित्तीय सहायता किसानों को कृषि इनपुट खरीदने, ऋण चुकाने और अपनी आजीविका में सुधार करने में मदद करती है।
  • यह योजना केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना के पूरक के रूप में कार्य करती है, जिससे किसानों को कुल मिलाकर अधिक वित्तीय सहायता मिल पाती है।
  • योजना का लक्ष्य किसानों की आय को बढ़ाना और उन्हें कृषि संकट से निपटने में मदद करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता आ सके।
  • यह योजना किसानों की आत्महत्याओं को कम करने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने के व्यापक सरकारी प्रयासों का हिस्सा है।
  • वित्तीय सहायता का वितरण विभिन्न कृषि सीज़न (जैसे रबी) के लिए किया जाता है ताकि किसानों को समय पर सहायता मिल सके।
  • इस योजना के माध्यम से, सरकार कृषि समुदाय के सबसे कमज़ोर वर्गों को लक्षित करती है ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
CM-KISAN योजना ओडिशा सरकार द्वारा किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की एक पहल।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) बिचौलियों को समाप्त कर सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में सहायता राशि का हस्तांतरण, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करता है।
लक्षित लाभार्थी छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसान तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) शामिल हैं, जो सबसे अधिक जरूरतमंद हैं।
रबी फसल के लिए सहायता रबी फसल की बुवाई और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए किसानों को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
PM-KISAN के साथ पूरकता केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना के साथ मिलकर किसानों की आय को दोगुना करने और उनकी वित्तीय स्थिरता बढ़ाने में मदद करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • किसानों की आय में वृद्धि: CM-KISAN और PM-KISAN जैसी योजनाएं किसानों को प्रति वर्ष ₹10,000 की वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है और वे कृषि निवेश कर पाते हैं।
  • कृषि उत्पादकता में सुधार: वित्तीय सहायता किसानों को बेहतर बीज, उर्वरक और कृषि उपकरण खरीदने में सक्षम बनाती है, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़ती है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन: किसानों के पास अधिक क्रय शक्ति होने से ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

सामाजिक महत्व

  • किसानों की आत्महत्याओं में कमी: वित्तीय सहायता से किसानों की आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है, जिससे तनाव कम होता है और आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी आती है।
  • खाद्य सुरक्षा: किसानों को सशक्त बनाने से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है, क्योंकि वे अधिक उत्पादन करने में सक्षम होते हैं।
  • समावेशी विकास: छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों तथा PVTGs को लक्षित करने से समाज के सबसे कमजोर वर्गों का समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।

शासनिक महत्व

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की सफलता: DBT प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाना, भ्रष्टाचार को कम करता है और सरकारी योजनाओं की दक्षता बढ़ाता है।
  • केंद्र-राज्य सहयोग: PM-KISAN (केंद्र) और CM-KISAN (राज्य) जैसी योजनाओं का समन्वय सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण है, जो किसानों के कल्याण के लिए मिलकर काम करने को दर्शाता है।
  • नीतिगत प्रभावशीलता: ऐसी योजनाएं सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं कि वह कृषि क्षेत्र और किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

चुनौतियाँ

1. पात्रता मानदंड और पहचान

  • सही लाभार्थियों की पहचान करना, विशेषकर भूमिहीन किसानों और PVTGs के लिए, एक चुनौती हो सकती है।
  • डेटाबेस को अद्यतन रखना और डुप्लीकेशन से बचना आवश्यक है।

2. वित्तीय स्थिरता और निर्भरता

  • लगातार वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य के वित्त पर दबाव पड़ सकता है।
  • किसानों में केवल वित्तीय सहायता पर निर्भरता बढ़ने का जोखिम हो सकता है, जिससे कृषि नवाचार और विविधीकरण (Diversification) प्रभावित हो सकता है।

3. कृषि संकट के अन्य पहलू

  • वित्तीय सहायता किसानों की समस्याओं का केवल एक हिस्सा है; जलवायु परिवर्तन, बाजार पहुंच, ऋणग्रस्तता और सिंचाई जैसी अन्य समस्याओं का समाधान भी आवश्यक है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद प्रणाली में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।

4. प्रशासनिक चुनौतियां

  • DBT प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
  • शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाना भी महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
लाभार्थी पहचान पात्र छोटे, सीमांत, भूमिहीन किसानों और PVTGs की सटीक पहचान करना।
राजकोषीय भार राज्य के बजट पर वित्तीय सहायता के निरंतर वितरण का दबाव।
कृषि विविधीकरण वित्तीय सहायता पर अत्यधिक निर्भरता से फसल विविधीकरण और नवाचार में कमी का जोखिम।
बाजार पहुंच किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने की कमी।
जलवायु परिवर्तन मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से किसानों की सुरक्षा।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • CM-KISAN योजना
  • PM-KISAN योजना (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना)

आगे की राह

  • पात्रता मानदंडों को सरल और स्पष्ट बनाना तथा लाभार्थियों की पहचान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना।
  • किसानों को केवल वित्तीय सहायता के बजाय कृषि नवाचार, कौशल विकास और बाजार लिंकेज के लिए प्रोत्साहित करना।
  • कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, विशेषकर सिंचाई सुविधाओं, भंडारण और कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे में।
  • किसानों को फसल बीमा और ऋण सुविधाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना, ताकि वे अप्रत्याशित झटकों से बच सकें।
  • कृषि उत्पादों के लिए प्रभावी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद प्रणाली को मजबूत करना।
  • किसानों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करना और DBT प्रणाली की तकनीकी दक्षता में सुधार करना।
  • जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-Smart Agriculture) प्रथाओं को बढ़ावा देना और किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · कृषक कल्याण योजनाएं · कृषि आय · छोटे और सीमांत किसान · भूमिहीन किसान · विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) · राज्य प्रायोजित योजनाएं · केंद्र प्रायोजित योजनाएं · न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) · रबी फसल · वित्तीय समावेशन · ग्रामीण विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।
  • अनुच्छेद 39: राज्य अपनी नीति का विशेषतया इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों।
  • अनुच्छेद 46: राज्य जनता के दुर्बल वर्गों के, विशेषतया अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के, शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा।

अवधारणा प्रवाह

किसानों को वित्तीय सहायता की आवश्यकता महसूस हुई।  →  राज्य सरकार ने CM-KISAN योजना शुरू की।  →  प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से राशि वितरित की गई।  →  किसानों की आय में वृद्धि हुई और वित्तीय स्थिरता मिली।  →  कृषि उत्पादकता बढ़ी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिला।  →  किसानों की आत्महत्याओं में कमी आई और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित हुआ।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सब्सिडी और लाभ पहुंचाना है।
2. DBT योजना को वर्ष 2013 में लॉन्च किया गया था।
3. PM-KISAN योजना के तहत, सभी भूमिहीन किसान भी वित्तीय सहायता के पात्र हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। DBT का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और पारदर्शिता बढ़ाना है। कथन 2 सही है। DBT योजना 1 जनवरी 2013 को शुरू की गई थी। कथन 3 गलत है। PM-KISAN योजना मुख्य रूप से भूमिधारक किसानों के लिए है, जबकि CM-KISAN जैसी राज्य योजनाएं भूमिहीन किसानों को भी कवर कर सकती हैं।

Q2. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह योजना केवल बड़े किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  2. इसके तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
  3. यह एक राज्य प्रायोजित योजना है और इसका वित्तपोषण संबंधित राज्य सरकारें करती हैं।
  4. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि उपकरणों की खरीद के लिए ऋण प्रदान करना है।

उत्तर: इसके तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। — PM-KISAN योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि क्षेत्र के समक्ष चुनौतियों का समाधान करने में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) आधारित योजनाओं की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ये योजनाएं किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में पर्याप्त हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत DBT आधारित कृषि योजनाओं (जैसे PM-KISAN, CM-KISAN) का संक्षिप्त परिचय देकर करें।

**DBT आधारित योजनाओं की भूमिका:**
* **सकारात्मक पहलू:**
* **पारदर्शिता और दक्षता:** बिचौलियों को समाप्त करना, भ्रष्टाचार कम करना।
* **वित्तीय समावेशन:** बैंक खातों के माध्यम से सीधे लाभ पहुंचाना।
* **तत्काल सहायता:** प्राकृतिक आपदाओं या फसल खराब होने की स्थिति में त्वरित वित्तीय सहायता।
* **छोटे और सीमांत किसानों को लाभ:** विशेष रूप से कमजोर वर्गों तक पहुंच।
* **ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:** क्रय शक्ति में वृद्धि।

* **चुनौतियाँ और सीमाएँ:**
* **पात्रता मानदंड:** भूमिहीन किसानों, बटाईदारों और महिला किसानों के समावेशन में चुनौतियाँ।
* **डिजिटल डिवाइड:** ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी।
* **आधार और बैंक खाता संबंधी मुद्दे:** तकनीकी त्रुटियाँ, आधार सीडिंग की समस्याएँ।
* **पर्याप्तता का प्रश्न:** प्रदान की गई राशि छोटे और सीमांत किसानों की व्यापक वित्तीय जरूरतों के लिए अक्सर अपर्याप्त होती है।
* **बाजार की अस्थिरता:** केवल आय सहायता बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव या इनपुट लागत में वृद्धि का समाधान नहीं करती।

**किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में पर्याप्तता:**
* DBT योजनाएं आय सहायता का एक महत्वपूर्ण घटक हैं, लेकिन वे स्वयं में पर्याप्त नहीं हैं।
* आय दोगुनी करने के लिए अन्य उपायों की आवश्यकता: कृषि उत्पादकता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधीकरण, बेहतर भंडारण और विपणन अवसंरचना, कृषि-प्रसंस्करण को बढ़ावा, संस्थागत ऋण तक पहुंच, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रभावी कार्यान्वयन, कृषि अनुसंधान और विस्तार सेवाओं में सुधार।
* DBT योजनाएं एक सहायक तंत्र हैं, न कि एकमात्र समाधान।

**निष्कर्ष:** DBT योजनाएं कृषि क्षेत्र में वित्तीय सहायता वितरण में क्रांति लाई हैं, लेकिन किसानों की आय दोगुनी करने के व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन्हें एक समग्र नीतिगत ढांचे के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए जिसमें संरचनात्मक सुधार और अन्य सहायक उपाय शामिल हों।

स्रोत: orissapost.com

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: ओडिशा के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में सीएम-किसान योजना के अंतर्गत कितने करोड़ रुपए का वितरण किया गया?

  1. 833 करोड़ रुपए
  2. 750 करोड़ रुपए
  3. 900 करोड़ रुपए
  4. 1000 करोड़ रुपए

उत्तर: 833 करोड़ रुपए — ओडिशा के मुख्यमंत्री ने सीएम-किसान योजना के अंतर्गत 833 करोड़ रुपए का वितरण किया।

Mains: सीएम-किसान योजना के माध्यम से ओडिशा सरकार द्वारा किसानों को प्रदान किए जाने वाले लाभों तथा राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का वर्णन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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