दूसरी पीढ़ी के जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: मुख्यमंत्री उद्घाटन करेंगे

Two-day seminar on second-generation GST reforms to begin at Gulati Institute of Finance and Taxation on Monday — diagram

दूसरी पीढ़ी के जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: मुख्यमंत्री उद्घाटन करेंगे

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GST system structure

✎ GST भारत में एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है जिसका उद्देश्य 'एक राष्ट्र, एक कर' के सिद्धांत के तहत करों के कैस्केडिंग प्रभाव को समाप्त करना और राजकोषीय संघवाद को मजबूत करना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ।
  • Prelims: वस्तु एवं सेवा कर (GST), GST परिषद (GST Council), राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism), अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax), संविधान संशोधन अधिनियम, राज्यों का वित्त
  • Essay: भारत में राजकोषीय संघवाद: GST के अनुभव और भविष्य की राहें, आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक न्याय के लिए कर सुधारों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: GST भारत में एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है जिसका उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक कर’ के सिद्धांत के तहत करों के कैस्केडिंग प्रभाव को समाप्त करना और राजकोषीय संघवाद को मजबूत करना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) के सहयोग से वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली के द्वितीय पीढ़ी के सुधारों और राज्य वित्त तथा राजकोषीय नीतियों पर इसके प्रभाव पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में GST के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर चर्चा होगी, जिसमें प्रख्यात अर्थशास्त्री और नीति विशेषज्ञ भाग लेंगे।

पृष्ठभूमि

  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत में 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया एक व्यापक, बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित कर है, जिसने केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए गए कई अप्रत्यक्ष करों को प्रतिस्थापित किया।
  • इसका उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार करना, करों के कैस्केडिंग प्रभाव (cascading effect) को समाप्त करना और भारतीय अर्थव्यवस्था को एकीकृत करना था।
  • GST को 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के माध्यम से भारतीय संविधान में शामिल किया गया था, जिसने अनुच्छेद 279A के तहत GST परिषद की स्थापना का प्रावधान किया।
  • GST परिषद एक संवैधानिक निकाय है जो GST से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेता है, जिसमें केंद्र और राज्यों दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • GST के कार्यान्वयन के बाद से, राजस्व प्रदर्शन, कर दरों में परिवर्तन और राजकोषीय संघवाद पर इसके प्रभावों को लेकर निरंतर चर्चा और मूल्यांकन होता रहा है।
  • द्वितीय पीढ़ी के सुधारों का तात्पर्य GST प्रणाली में उन आगामी परिवर्तनों और संशोधनों से है जो इसके कार्यान्वयन के अनुभवों के आधार पर आवश्यक समझे जाते हैं, ताकि इसे और अधिक कुशल, सरल और राज्यों के लिए राजस्व-अनुकूल बनाया जा सके।

वस्तु एवं सेवा कर (GST) क्या है?

  • GST एक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है। यह उत्पादन के बजाय उपभोग के बिंदु पर लगाया जाता है।
  • यह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए विभिन्न अप्रत्यक्ष करों जैसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट (VAT), मनोरंजन कर आदि को समाहित करता है।
  • GST के तहत चार प्रमुख दरें हैं: 5%, 12%, 18% और 28%। कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर शून्य दर या विशेष दरें भी लागू होती हैं।
  • यह इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit – ITC) की अवधारणा पर आधारित है, जो करों के कैस्केडिंग प्रभाव को समाप्त करता है, जिससे अंतिम उपभोक्ता पर कर का बोझ कम होता है।
  • GST प्रणाली को GST नेटवर्क (GSTN) नामक एक मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अवसंरचना द्वारा समर्थित किया गया है, जो पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग और भुगतान जैसी प्रक्रियाओं को सुगम बनाता है।
  • GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें राज्यों के वित्त मंत्री या उनके नामित प्रतिनिधि सदस्य होते हैं। यह परिषद GST से संबंधित सभी विधायी और प्रशासनिक मामलों पर सिफारिशें करती है।
  • GST ने भारत के राजकोषीय संघवाद को एक नया आयाम दिया है, जहाँ केंद्र और राज्य दोनों एक ही कर आधार पर कर लगाते हैं और राजस्व साझा करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
GST की दूसरी पीढ़ी के सुधार यह GST प्रणाली के कार्यान्वयन में सामने आई चुनौतियों का समाधान करने और इसे और अधिक कुशल बनाने का प्रयास है।
राज्य वित्त पर प्रभाव राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व संग्रह पर GST के दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन।
राजकोषीय नीतियां GST के तहत राज्यों की राजकोषीय नीतियों के अनुकूलन और प्रभावशीलता पर चर्चा।
राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों पर GST के प्रभावों का विश्लेषण, विशेष रूप से राजस्व साझाकरण और कराधान शक्तियों के संदर्भ में।
राजस्व प्रदर्शन GST संग्रह में वृद्धि या कमी के कारणों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • GST प्रणाली के संभावित सुधारों की पहचान करना, जिससे कर आधार का विस्तार हो सके और कर अनुपालन में सुधार हो सके।
  • राज्यों के राजस्व संग्रह पर GST के प्रभावों का मूल्यांकन करना, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता और विकास क्षमता प्रभावित होती है।
  • कर दरों में संभावित परिवर्तनों पर चर्चा करना, जिसका उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों पर सीधा आर्थिक प्रभाव पड़ेगा।

शासन और नीतिगत महत्व

  • GST परिषद (GST Council) के कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव देना।
  • राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों को मजबूत करना और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में संतुलन बनाए रखना।
  • GST के तहत विभिन्न राज्यों की विशिष्ट वित्तीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए नीतिगत सिफारिशें विकसित करना।

संस्थागत महत्व

  • गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (Gulati Institute of Finance and Taxation – GIFT) जैसे संस्थानों को कर नीति अनुसंधान और विश्लेषण में उनकी भूमिका के लिए मान्यता देना।
  • शैक्षणिक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और पूर्व वित्त मंत्रियों को एक मंच पर लाना ताकि GST के भविष्य पर व्यापक चर्चा हो सके।

चुनौतियाँ

1. राजस्व संग्रह में अस्थिरता

  • कुछ राज्यों को GST लागू होने के बाद राजस्व संग्रह में अस्थिरता का सामना करना पड़ा है, जिससे उनकी वित्तीय योजना प्रभावित हुई है।
  • राजस्व क्षतिपूर्ति (Revenue Compensation) की अवधि समाप्त होने के बाद राज्यों के लिए राजस्व घाटे को पूरा करना एक चुनौती बन गया है।

2. राजकोषीय संघवाद पर प्रभाव

  • राज्यों की कर लगाने की स्वायत्तता में कमी आई है, जिससे उन्हें अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार राजस्व जुटाने में कठिनाई हो रही है।
  • GST परिषद में राज्यों के प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चिंताएं उठाई गई हैं।

3. जटिल कर संरचना

  • GST में कई कर दरें (Tax Slabs) और उपकर (Cesses) शामिल हैं, जिससे यह प्रणाली कुछ हद तक जटिल बनी हुई है।
  • छोटे व्यवसायों और MSMEs के लिए GST अनुपालन एक बोझिल प्रक्रिया हो सकती है।

4. तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियाँ

  • GST नेटवर्क (GSTN) की तकनीकी स्थिरता और दक्षता को लेकर समय-समय पर मुद्दे सामने आते रहे हैं।
  • कर अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में अभी भी सुधार की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
GST परिषद में निर्णय लेने की प्रक्रिया राज्यों की स्वायत्तता और सर्वसम्मति पर आधारित निर्णय लेने में चुनौतियाँ।
विभिन्न कर दरें और उपकर प्रणाली की जटिलता और व्यवसायों पर अनुपालन बोझ।
राज्यों के लिए राजस्व की निश्चितता राजस्व क्षतिपूर्ति के बाद राज्यों की वित्तीय स्थिरता पर चिंता।
ईंधन, शराब और बिजली को GST के दायरे से बाहर रखना इन वस्तुओं पर राज्यों की राजस्व निर्भरता और GST के पूर्ण एकीकरण में बाधा।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) का दुरुपयोग राजस्व रिसाव और धोखाधड़ी को रोकने की आवश्यकता।

आगे की राह

  • GST परिषद की निर्णय लेने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाना, जिससे राज्यों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सके।
  • कर दरों को युक्तिसंगत बनाना और उपकरों की संख्या कम करना ताकि GST प्रणाली को सरल और कुशल बनाया जा सके।
  • पेट्रोलियम उत्पादों, शराब और बिजली को धीरे-धीरे GST के दायरे में लाने के लिए एक रोडमैप तैयार करना, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक कर’ का लक्ष्य प्राप्त हो सके।
  • GST नेटवर्क (GSTN) की तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करना और करदाताओं के लिए अनुपालन को आसान बनाने हेतु डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देना।
  • राज्यों के लिए राजस्व की निश्चितता सुनिश्चित करने हेतु एक दीर्घकालिक तंत्र विकसित करना, विशेष रूप से राजस्व क्षतिपूर्ति अवधि समाप्त होने के बाद।
  • छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए GST अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उन्हें डिजिटल साक्षरता प्रदान करना।
  • GST से संबंधित विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वस्तु एवं सेवा कर (GST) · राजकोषीय संघवाद · राज्यों का वित्त · कर सुधार · GST परिषद · दूसरी पीढ़ी के GST सुधार · राजस्व प्रदर्शन · आर्थिक नीति · प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर · कर आधार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246A’, ‘note’: ‘GST से संबंधित कानून बनाने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 269A’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय व्यापार पर GST’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 279A’, ‘note’: ‘GST परिषद का गठन’}

अवधारणा प्रवाह

GST की वर्तमान प्रणाली में चुनौतियाँ और जटिलताएँ  →  दूसरी पीढ़ी के सुधारों की आवश्यकता पर सेमिनार का आयोजन  →  विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं द्वारा गहन चर्चा और विश्लेषण  →  राजस्व प्रदर्शन, राजकोषीय संघवाद पर प्रभावों का मूल्यांकन  →  सुधारों के लिए नीतिगत सिफारिशों का विकास  →  GST प्रणाली को सरल, कुशल और अधिक न्यायसंगत बनाना  →  राज्यों की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि में योगदान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत में 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था।
2. GST एक प्रत्यक्ष कर है जिसने कई केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष करों का स्थान लिया है।
3. GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि GST 1 जुलाई, 2017 को लागू हुआ था। कथन 2 गलत है क्योंकि GST एक अप्रत्यक्ष कर है। कथन 3 सही है क्योंकि GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। अतः, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. अभिकथन (A): वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने भारत में राजकोषीय संघवाद को मजबूत किया है।
कारण (R): GST परिषद राज्यों और केंद्र के बीच कर दरों और नीतियों पर आम सहमति बनाने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। GST परिषद ने राज्यों को कर नीतियों में अधिक भागीदारी का अवसर देकर राजकोषीय संघवाद को मजबूत किया है, और यह केंद्र-राज्य सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने भारतीय कर प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। ‘दूसरी पीढ़ी के GST सुधारों’ से आप क्या समझते हैं और ये भारतीय अर्थव्यवस्था तथा राजकोषीय संघवाद पर क्या प्रभाव डाल सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** GST का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और भारतीय कर प्रणाली पर इसका प्रारंभिक प्रभाव। (20-30 शब्द)
2. **’दूसरी पीढ़ी के GST सुधार’ की अवधारणा:** इसका अर्थ स्पष्ट करें – वर्तमान GST प्रणाली की कमियों को दूर करने और इसे और अधिक कुशल बनाने के लिए आवश्यक अगले चरण के सुधार। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हो सकते हैं:
* GST दरों का युक्तिकरण (Rationalization of GST rates) और सरलीकरण।
* GST के दायरे में पेट्रोलियम उत्पादों, बिजली और शराब जैसे छूट प्राप्त वस्तुओं को लाना।
* अनुपालन बोझ को कम करना और छोटे व्यवसायों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाना।
* इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्रणाली में सुधार और विसंगतियों को दूर करना।
* विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करना।
* GSTN (GST Network) की कार्यक्षमता में सुधार।
* ई-चालान (e-invoicing) और ई-वे बिल (e-way bill) प्रणाली का और विस्तार।
3. **भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** कर आधार का विस्तार, राजस्व में वृद्धि, व्यापार करने में आसानी में सुधार, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, निवेश को प्रोत्साहन, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि।
* **नकारात्मक (यदि सुधारों को ठीक से लागू न किया जाए):** अल्पकालिक व्यवधान, कुछ क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव।
4. **राजकोषीय संघवाद पर संभावित प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** राज्यों के राजस्व में स्थिरता, केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता, GST परिषद के माध्यम से सहयोग का सुदृढ़ीकरण।
* **चुनौतियाँ:** राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रभाव, राजस्व बंटवारे को लेकर संभावित विवाद, राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने की चुनौती।
5. **निष्कर्ष:** इन सुधारों की आवश्यकता और इनके सफल कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर सहयोग और आम सहमति के महत्व पर बल। (20-30 शब्द)

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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