भारत में ब्लू इकॉनमी: आरएएस और बायोफ्लॉक से मत्स्य पालन में क्रांति, जानें UPSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारत में आधुनिक मत्स्य पालन और जलीय खेती: आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दृष्टि के लिए ब्लू इकॉनमी में आर ए एस और बाय — diagram

भारत में ब्लू इकॉनमी: आरएएस और बायोफ्लॉक से मत्स्य पालन में क्रांति, जानें UPSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

आधुनिक मत्स्य पालन प्रणालीRAS तकनीकपुनर्चक्रिय जलनियंत्रित वातावरणबायोफ्लॉकजैविक फिल्टरउच्च घनत्वमछली उत्पादन198 लाख टन2024-25निर्यात₹73,890 करोड़2025-26निवेश₹39,272 करोड़2015 से
आधुनिक मत्स्य पालन प्रणाली

✎ पुनर्चक्रिय जलीय कृषि प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में क्रांति ला रही हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि, निर्यात में वृद्धि और ब्लू इकॉनमी के माध्यम से ग्रामीण समृद्धि को…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • Prelims: मत्स्य पालन, जलीय कृषि (Aquaculture), ब्लू इकॉनमी (Blue Economy), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), पुनर्चक्रिय जलीय कृषि प्रणाली (Recirculatory Aquaculture System – RAS), बायोफ्लॉक तकनीक, समुद्री खाद्य निर्यात, आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत
  • Essay: भारत की ब्लू इकॉनमी: आर्थिक संवृद्धि, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता का मार्ग, तकनीकी नवाचार और सतत विकास: मत्स्य पालन क्षेत्र का एक अध्ययन

त्वरित पुनरावृत्ति: पुनर्चक्रिय जलीय कृषि प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में क्रांति ला रही हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि, निर्यात में वृद्धि और ब्लू इकॉनमी के माध्यम से ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा मिल रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने हाल ही में भारत में आधुनिक मत्स्य पालन और जलीय कृषि के महत्व पर प्रकाश डाला है, विशेष रूप से पुनर्चक्रिय जलीय कृषि प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया है। ये प्रौद्योगिकियां आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए ब्लू इकॉनमी में मत्स्य पालन क्षेत्र की क्षमता का दोहन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मंत्रालय ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व सार्वजनिक निवेश और नीतिगत समर्थन के कारण हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर भी प्रकाश डाला है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है, जो वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देता है।
  • यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा जलीय कृषि उत्पादक होने के साथ-साथ झींगा का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक भी है।
  • मत्स्य पालन क्षेत्र देश के लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका का समर्थन करता है तथा विशाल मूल्य श्रृंखला में रोज़गार सृजित करता है।
  • वर्ष 2015 के बाद से, भारत सरकार ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के समग्र विकास के लिए ₹39,272 करोड़ से अधिक का संचयी निवेश किया है।
  • देश का वार्षिक मछली उत्पादन 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन तक पहुँच गया है, जो दोगुने से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
  • भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 2013-14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹73,890 करोड़ तक पहुँच गया है।

पुनर्चक्रिय जलीय कृषि प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक क्या हैं?

  • ये आधुनिक जलीय कृषि प्रथाएं हैं जो मछलियों को नियंत्रित वातावरण में पालने की अनुमति देती हैं, जिससे पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक गहन और संसाधन-कुशल उत्पादन संभव होता है।
  • पुनर्चक्रिय जलीय कृषि प्रणाली (RAS) जल उपचार और पुनःसंचरण प्रणालियों पर निर्भर करती है।
  • RAS प्रणाली इष्टतम विकास स्थितियों को बनाए रखने के लिए पानी की गुणवत्ता को नियंत्रित करती है, जिससे मछली उत्पादन की दक्षता बढ़ती है।
  • बायोफ्लॉक तकनीक जल गुणवत्ता में सुधार और मछली के विकास का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है।
  • यह तकनीक अपशिष्ट उत्पादों को प्रोटीन युक्त बायोमास में परिवर्तित करती है, जिसे मछली भोजन के रूप में उपयोग कर सकती है, जिससे फ़ीड लागत कम होती है।
  • ये तकनीकें विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों और उन स्थानों में मछली पालन को संभव बनाती हैं जहाँ पारंपरिक जलीय कृषि संभव नहीं हो सकती थी।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) इन तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा दे रही है।
  • ये प्रौद्योगिकियां शहरी उपभोग केंद्रों और निर्यात हबों के करीब खेती इकाइयों की स्थापना को सक्षम बनाती हैं, जिससे चक्रीय और टिकाऊ जलीय कृषि को बढ़ावा मिलता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भारत का स्थान विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का लगभग 8%), दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक, झींगा का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक।
आर्थिक योगदान लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका का समर्थन, मूल्य श्रृंखला में रोज़गार सृजन, खाद्य और पोषण सुरक्षा।
उत्पादन वृद्धि वार्षिक मछली उत्पादन 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 198 लाख टन तक पहुँचा।
निर्यात वृद्धि समुद्री खाद्य निर्यात 2013-14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹73,890 करोड़ तक पहुँचा।
तकनीकी प्रगति पुनर्चक्रिय जलीय खेती प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक का उपयोग गहन, संसाधन-कुशल मछली पालन के लिए।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • मत्स्य पालन क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलता है।
  • समुद्री खाद्य निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, जो देश के भुगतान संतुलन को सुधारने में सहायक है।
  • मछली उत्पादन और प्रसंस्करण से लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं।

खाद्य एवं पोषण सुरक्षा

  • मछली प्रोटीन का एक सस्ता और सुलभ स्रोत है, जो बढ़ती आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है।
  • यह कुपोषण से निपटने और आहार विविधता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) का संवर्धन

  • मत्स्य पालन नीली अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख घटक है, जो समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
  • आधुनिक तकनीकों का समावेश समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव कम करते हुए उत्पादन बढ़ाता है।

तकनीकी नवाचार और दक्षता

  • RAS और बायोफ्लॉक जैसी तकनीकें सीमित संसाधनों (जैसे पानी) का अधिकतम उपयोग करके मछली उत्पादन को बढ़ाती हैं।
  • ये तकनीकें पारंपरिक मछली पालन की सीमाओं को पार कर विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में खेती को संभव बनाती हैं।

चुनौतियाँ

1. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

  • समुद्र के बढ़ते तापमान और अम्लीकरण से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मछली के स्टॉक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
  • अप्रत्याशित मौसम की घटनाएँ और प्राकृतिक आपदाएँ मछली पकड़ने और जलीय खेती को बाधित करती हैं।

2. बुनियादी ढाँचे की कमी

  • मछली पकड़ने के बंदरगाहों, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण और विस्तार की आवश्यकता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बाज़ार संपर्क और परिवहन सुविधाओं की कमी से किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

3. तकनीकी ज्ञान और कौशल का अभाव

  • RAS और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को पर्याप्त प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की आवश्यकता है।
  • छोटे और सीमांत किसानों के लिए इन तकनीकों में प्रारंभिक निवेश एक बाधा हो सकता है।

4. सतत मत्स्य पालन प्रथाएँ

  • अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने से समुद्री संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है।
  • जलीय खेती से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों, जैसे जल प्रदूषण और रोग प्रसार को नियंत्रित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
समुद्री संसाधनों का अत्यधिक दोहन अवैध मछली पकड़ने और अपर्याप्त विनियमन से मछली के स्टॉक में कमी आ रही है।
रोग और कीट प्रबंधन जलीय कृषि में सघन खेती के कारण रोगों का प्रसार तेजी से हो सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
बाजार पहुंच और मूल्य श्रृंखला छोटे किसानों के लिए उचित बाज़ार तक पहुंच की कमी और मध्यस्थों की भूमिका से लाभ कम होता है।
पर्यावरण संबंधी चिंताएँ जलीय कृषि से जल प्रदूषण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, यदि सतत प्रथाओं का पालन न किया जाए।
वित्तीय सहायता तक पहुंच छोटे मछुआरों और किसानों के लिए आधुनिक तकनीकों में निवेश हेतु ऋण और सब्सिडी प्राप्त करना कठिन हो सकता है।

आगे की राह

  • मत्स्य पालन क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेषकर नई प्रजातियों और रोग प्रतिरोधी स्टॉकों के लिए।
  • मछुआरों और मछली किसानों को आधुनिक तकनीकों (जैसे RAS, बायोफ्लॉक) में व्यापक प्रशिक्षण और कौशल विकास प्रदान करना।
  • मछली पकड़ने के बंदरगाहों, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयों और परिवहन नेटवर्क सहित बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण और विस्तार करना।
  • समुद्री और आंतरिक मत्स्य पालन दोनों के लिए सतत प्रबंधन प्रथाओं को लागू करना और अवैध मछली पकड़ने पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना।
  • छोटे और सीमांत किसानों के लिए संस्थागत ऋण और बीमा योजनाओं तक पहुंच को आसान बनाना ताकि वे आधुनिक तकनीकों में निवेश कर सकें।
  • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंच में सुधार के लिए मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और अनुकूलन के लिए लचीली मत्स्य पालन प्रणालियों को विकसित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

नीतिगत समर्थन और सार्वजनिक निवेश  →  मत्स्य उत्पादन प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण  →  आधुनिक तकनीकों (RAS, बायोफ्लॉक) का समावेश  →  उत्पादन और निर्यात में वृद्धि  →  खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और नीली अर्थव्यवस्था का संवर्धन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है।
2. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र का समग्र विकास करना है।
3. पुनर्चक्रिय जलीय खेती प्रणाली (RAS) जल का 90-95% तक पुनर्चक्रण करती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है। कथन 2 सही है। PMMSY मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। कथन 3 सही है। RAS प्रणाली जल का 90-95% तक पुनर्चक्रण करके संसाधन-कुशल मछली उत्पादन का समर्थन करती है।

Q2. बायोफ्लॉक तकनीक के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह मछली पालन के लिए केवल समुद्री जल का उपयोग करती है।
  2. यह जल गुणवत्ता में सुधार और मछली विकास का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है।
  3. यह पारंपरिक मछली पालन की तुलना में अधिक भूमि की आवश्यकता होती है।
  4. यह केवल ठंडे पानी की मछलियों के लिए उपयुक्त है।

उत्तर: यह जल गुणवत्ता में सुधार और मछली विकास का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है। — बायोफ्लॉक तकनीक जल गुणवत्ता में सुधार और मछली विकास का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है, जिससे यह एक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल विधि बन जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, पुनर्चक्रिय जलीय खेती प्रणाली (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियाँ इस क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में कैसे सहायता कर रही हैं, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
1. **परिचय:** भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र का महत्व और इसकी वर्तमान स्थिति (विश्व में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, निर्यात आदि)।
2. **PMMSY की भूमिका:**
* योजना का उद्देश्य और लक्ष्य (समग्र विकास, बुनियादी ढाँचा, प्रौद्योगिकी, बाज़ार पहुँच)।
* योजना के तहत किए गए निवेश और उनके परिणाम (उत्पादन वृद्धि, निर्यात में वृद्धि)।
* खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और निर्यात आय में योगदान।
3. **आधुनिक प्रौद्योगिकियों का योगदान (RAS और बायोफ्लॉक):**
* RAS और बायोफ्लॉक तकनीकों का संक्षिप्त परिचय और कार्यप्रणाली।
* इन तकनीकों के लाभ (संसाधन दक्षता, जल पुनर्चक्रण, नियंत्रित वातावरण, विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों में खेती की संभावना)।
* उत्पादकता में वृद्धि और गुणवत्ता सुधार।
4. **आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्यों में सहायता:**
* घरेलू मांग की पूर्ति और आयात पर निर्भरता कम करना (आत्मनिर्भरता)।
* निर्यात क्षमता में वृद्धि और वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मकता (विकसित भारत)।
* रोज़गार सृजन और ग्रामीण आय में वृद्धि।
* सतत और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
5. **निष्कर्ष:** मत्स्य पालन क्षेत्र के भविष्य की संभावनाएँ और सतत विकास के लिए इन प्रौद्योगिकियों का महत्व।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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