07 Sep एसजीबी 2020-21 सीरीज VI का premature redemption मूल्य ₹15,384 प्रति यूनिट
✎ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना भौतिक सोने की मांग को कम करने, घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलने और निवेशकों को सोने की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ निश्चित ब्याज आय का लाभ प्रदान करने के लिए भारत सरकार की एक पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय | GS Paper III — सरकारी बजटिंग
- Prelims: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारत सरकार, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA), सोने की शुद्धता, समयपूर्व मोचन, राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति
- Essay: भारत में वित्तीय समावेशन और बचत को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाओं की भूमिका, सोने के आयात पर निर्भरता कम करने के उपाय और उनके आर्थिक प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना भौतिक सोने की मांग को कम करने, घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलने और निवेशकों को सोने की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ निश्चित ब्याज आय का लाभ प्रदान करने के लिए भारत सरकार की एक पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना 2020-21 सीरीज़ VI के समयपूर्व मोचन (premature redemption) के लिए मोचन मूल्य (redemption price) की घोषणा की है, जो 8 सितंबर, 2026 को देय होगा। यह घोषणा SGB योजना के तहत निवेश किए गए बॉन्डों के समयपूर्व निकासी के नियमों और प्रक्रिया को स्पष्ट करती है, जिससे निवेशकों को अपने निवेश की वापसी का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।
पृष्ठभूमि
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना भारत सरकार द्वारा नवंबर 2015 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य भौतिक सोने की मांग को कम करना और घरेलू बचत का एक हिस्सा वित्तीय बचत में बदलना था।
- यह योजना RBI द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी की जाती है।
- बॉन्ड भारतीय रुपये में मूल्यवर्गित होते हैं और सोने के ग्राम में अंकित होते हैं।
- SGB की परिपक्वता अवधि आठ वर्ष होती है, लेकिन पांचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तारीखों पर समयपूर्व मोचन की अनुमति होती है।
- मोचन मूल्य इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन व्यावसायिक दिनों के समापन मूल्य के साधारण औसत पर आधारित होता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना क्या है?
- SGB योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक निवेश योजना है, जो निवेशकों को भौतिक सोना खरीदने के बजाय ‘कागजी सोना’ खरीदने का अवसर प्रदान करती है।
- ये बॉन्ड भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सरकार की ओर से जारी किए जाते हैं और इन्हें स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों (NSE और BSE) के माध्यम से बेचा जाता है।
- निवेशक न्यूनतम 1 ग्राम सोने और अधिकतम 4 किलोग्राम (व्यक्तियों के लिए) या 20 किलोग्राम (ट्रस्ट और समान संस्थाओं के लिए) सोने के बराबर निवेश कर सकते हैं।
- SGB में निवेश करने का मुख्य लाभ यह है कि यह सोने की कीमतों में वृद्धि का लाभ प्रदान करता है, साथ ही एक निश्चित ब्याज आय भी देता है।
- इन बॉन्डों को डीमैट (demat) रूप में रखा जा सकता है, जिससे चोरी या नुकसान का जोखिम कम होता है।
- SGB पर अर्जित ब्याज आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार कर योग्य है, लेकिन परिपक्वता पर पूंजीगत लाभ कर (capital gains tax) से छूट प्राप्त है।
- यह योजना भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को कम करने में भी मदद करती है, क्योंकि यह सोने के आयात पर निर्भरता को कम करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रारंभिक विमोचन | निवेशकों को परिपक्वता से पहले अपने बॉन्ड भुनाने की अनुमति देता है, जिससे तरलता (liquidity) बढ़ती है। |
| विमोचन मूल्य का निर्धारण | इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा प्रकाशित पिछले तीन व्यावसायिक दिनों के सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित होता है। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। |
| पाँच वर्ष की अवधि | प्रारंभिक विमोचन केवल बॉन्ड जारी होने की तारीख से पाँच वर्ष के बाद ही अनुमत है, जिससे दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिलता है। |
| ब्याज भुगतान की तारीख | प्रारंभिक विमोचन केवल उस तारीख को किया जा सकता है जिस दिन ब्याज देय होता है, जिससे प्रशासनिक सुविधा बनी रहती है। |
| सरकारी अधिसूचना | भारत सरकार की अधिसूचना के तहत संचालित, जो योजना की वैधानिकता और विश्वसनीयता को रेखांकित करता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना भौतिक सोने की मांग को कम करके चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने में मदद करती है, क्योंकि यह सोने में निवेश का एक कागजी विकल्प प्रदान करती है।
- निवेशकों को सोने की कीमतों में वृद्धि से लाभ उठाने का अवसर मिलता है, साथ ही बॉन्ड पर निश्चित ब्याज (Fixed Interest) भी मिलता है, जिससे यह एक आकर्षक निवेश विकल्प बन जाता है।
- सोने के आयात पर निर्भरता कम होने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर दबाव कम होता है, जिससे आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
निवेशकों के लिए महत्व
- यह योजना निवेशकों को सोने में निवेश का एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका प्रदान करती है, जिसमें भौतिक सोने को रखने की लागत और जोखिम (जैसे चोरी) नहीं होते हैं।
- प्रारंभिक विमोचन की सुविधा निवेशकों को आवश्यकता पड़ने पर अपनी पूंजी तक पहुँचने की अनुमति देती है, जिससे निवेश में लचीलापन आता है।
- सोने के मूल्य में वृद्धि के साथ-साथ वार्षिक ब्याज आय निवेशकों के लिए दोहरी लाभप्रदता सुनिश्चित करती है।
नीतिगत महत्व
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जो सोने के मौद्रीकरण (Monetisation) और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देती है।
- यह योजना भारतीय अर्थव्यवस्था को सोने के प्रति सांस्कृतिक झुकाव को उत्पादक वित्तीय बचत में बदलने में मदद करती है, जिससे पूंजी निर्माण (Capital Formation) को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
1. सोने की कीमतों में अस्थिरता
- सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर यदि विमोचन के समय कीमतें कम हों।
- भू-राजनीतिक घटनाएँ और वैश्विक आर्थिक स्थितियाँ सोने की कीमतों को अप्रत्याशित रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
2. जागरूकता और पहुँच की कमी
- विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निवेशकों के बीच योजना के बारे में जागरूकता की कमी हो सकती है।
- डिजिटल साक्षरता की कमी कुछ निवेशकों के लिए ऑनलाइन आवेदन और विमोचन प्रक्रिया को जटिल बना सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग
3. भौतिक सोने का आकर्षण
- भारतीय संस्कृति में भौतिक सोने को एक पारंपरिक निवेश और सुरक्षा के रूप में देखा जाता है, जिससे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे कागजी विकल्पों को अपनाने में बाधा आ सकती है।
- कुछ निवेशक भौतिक सोने के भावनात्मक और सामाजिक महत्व को प्राथमिकता देते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना
4. तरलता संबंधी चिंताएँ
- हालांकि प्रारंभिक विमोचन की अनुमति है, लेकिन यह केवल ब्याज भुगतान की तारीखों पर ही संभव है, जिससे तत्काल तरलता की आवश्यकता वाले निवेशकों के लिए चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं।
- द्वितीयक बाजार (Secondary Market) में बॉन्ड की तरलता हमेशा उतनी मजबूत नहीं हो सकती जितनी कि भौतिक सोने की होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव | वैश्विक कारकों के कारण विमोचन मूल्य पर नकारात्मक प्रभाव का जोखिम। |
| सीमित प्रारंभिक विमोचन विंडो | केवल ब्याज भुगतान की तारीखों पर ही विमोचन संभव, जिससे तरलता की आवश्यकता वाले निवेशकों के लिए असुविधा। |
| भौतिक सोने की प्राथमिकता | सांस्कृतिक और पारंपरिक कारणों से भौतिक सोने के प्रति भारतीयों का झुकाव, योजना की स्वीकार्यता में बाधा। |
| जागरूकता का अभाव | विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के लाभों और प्रक्रिया के बारे में जानकारी की कमी। |
| द्वितीयक बाजार की तरलता | स्टॉक एक्सचेंजों पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की ट्रेडिंग में कभी-कभी कम तरलता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme)
आगे की राह
- योजना के लाभों और विमोचन प्रक्रिया के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
- निवेशकों के लिए प्रारंभिक विमोचन की प्रक्रिया को और अधिक सुगम और लचीला बनाया जाए, संभवतः अधिक विमोचन विंडो प्रदान करके।
- वित्तीय सलाहकारों और बैंकों को योजना के बारे में शिक्षित किया जाए ताकि वे संभावित निवेशकों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।
- द्वितीयक बाजार में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की तरलता बढ़ाने के लिए उपाय किए जाएँ, जिससे निवेशकों को अधिक लचीलापन मिल सके।
- सोने की कीमतों में अस्थिरता के जोखिम को कम करने के लिए निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश के महत्व पर जोर दिया जाए।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए ताकि अधिक निवेशक आसानी से योजना में भाग ले सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना · RBI · भारत सरकार · मुद्रास्फीति बचाव · भौतिक सोने की मांग · राजकोषीय घाटा · निवेश विकल्प · पूंजीगत लाभ कर · इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) · सरकारी प्रतिभूतियाँ
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करना → निवेशकों द्वारा बॉन्ड की खरीद → पाँच वर्ष की न्यूनतम होल्डिंग अवधि → ब्याज भुगतान की तारीख पर प्रारंभिक विमोचन का विकल्प → IBJA द्वारा प्रकाशित पिछले तीन व्यावसायिक दिनों के सोने के बंद भाव के औसत पर विमोचन मूल्य का निर्धारण → निवेशकों को विमोचन मूल्य का भुगतान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. SGB भारत सरकार द्वारा RBI के परामर्श से जारी किए जाते हैं।
2. SGB में निवेश करने वाले निवेशकों को बॉन्ड की परिपक्वता पर सोने के बाजार मूल्य के साथ-साथ एक निश्चित ब्याज भी मिलता है।
3. SGB को स्टॉक एक्सचेंजों पर व्यापार नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि SGB भारत सरकार द्वारा RBI के परामर्श से जारी किए जाते हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि निवेशकों को सोने के बाजार मूल्य के साथ-साथ एक निश्चित ब्याज भी मिलता है। कथन 3 गलत है क्योंकि SGB को स्टॉक एक्सचेंजों पर व्यापार किया जा सकता है, जिससे तरलता मिलती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा/से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना का/के उद्देश्य है/हैं?
1. भौतिक सोने की मांग को कम करना।
2. घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलना।
3. भारत के चालू खाता घाटे को कम करना।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — SGB योजना का मुख्य उद्देश्य भौतिक सोने की मांग को कम करना है, जिससे सोने के आयात में कमी आती है और चालू खाता घाटे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलने में भी मदद करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना क्या है? भारत में भौतिक सोने की मांग को कम करने और चालू खाता घाटे (CAD) को प्रबंधित करने में यह योजना कितनी सफल रही है, समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की परिभाषा और इसके मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख करें। योजना की प्रमुख विशेषताओं (जैसे जारीकर्ता, पात्रता, ब्याज दर, परिपक्वता अवधि, कर लाभ, मोचन मूल्य निर्धारण) का संक्षिप्त विवरण दें। योजना की सफलता का मूल्यांकन भौतिक सोने की मांग में कमी, सोने के आयात पर प्रभाव और चालू खाता घाटे पर इसके प्रभाव के संदर्भ में करें। इसमें योजना के तहत जुटाए गए धन, बाजार में इसकी स्वीकार्यता और निवेशकों के लिए इसके आकर्षण जैसे पहलुओं को शामिल करें। इसकी सीमाओं और चुनौतियों (जैसे जागरूकता की कमी, तरलता संबंधी चिंताएं, सोने की कीमतों में अस्थिरता का जोखिम) पर भी प्रकाश डालें। निष्कर्ष में योजना के महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: RBI
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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