08 Sep हिमाचल विधानसभा ने उठाए बजट निर्माण में आंकड़ों के दुरुपयोग के सवाल, जानिए क्या है पूरा मामला?
✎ प्राक्कलन समिति संसद की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है, जो सरकारी व्यय में मितव्ययिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए बजट अनुमानों की जांच करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संसद और राज्य विधानमंडल—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय | GS Paper III — सरकारी बजट
- Prelims: प्राक्कलन समिति, बजट अनुमान, वित्तीय अनुशासन, राज्य विधानमंडल, लोक लेखा समिति, सरकारी व्यय, महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना
- Essay: लोकतांत्रिक शासन में वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता का महत्व, नीति निर्माण और क्रियान्वयन में जमीनी हकीकत की अनदेखी के परिणाम
त्वरित पुनरावृत्ति: प्राक्कलन समिति संसद की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है, जो सरकारी व्यय में मितव्ययिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए बजट अनुमानों की जांच करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) ने महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के क्रियान्वयन में कई खामियां उजागर की हैं। समिति ने पाया कि विभाग वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करने के बजाय पिछले वर्षों के खर्च को आधार बनाकर बजट अनुमान तैयार करता रहा, जिससे बजट प्रावधान और वास्तविक व्यय में बड़ा अंतर रहा। समिति ने जमीनी जरूरतों की अनदेखी और वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में व्यय बढ़ने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की है।
पृष्ठभूमि
- प्राक्कलन समिति भारतीय संसदीय प्रणाली और राज्य विधानमंडलों में एक महत्वपूर्ण वित्तीय समिति है, जिसका मुख्य कार्य सरकारी व्यय में दक्षता और मितव्ययिता सुनिश्चित करना है।
- यह समिति बजट अनुमानों की जांच करती है और यह सुनिश्चित करने के लिए सिफारिशें करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग प्रभावी ढंग से और विवेकपूर्ण तरीके से किया जाए।
- बजट निर्माण प्रक्रिया में, विभाग अक्सर पिछले वर्षों के व्यय को आधार बनाते हैं, जिससे नई या बदलती आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया जा पाता।
- वित्तीय वर्ष के अंत में व्यय में वृद्धि (जिसे ‘मार्च रश’ भी कहा जाता है) वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाती है और अक्सर धन के अनुचित या जल्दबाजी में उपयोग की ओर ले जाती है।
- महिला एवं बाल विकास विभाग जैसी सामाजिक क्षेत्रों से संबंधित योजनाओं का सीधा प्रभाव समाज के संवेदनशील वर्गों पर पड़ता है, इसलिए इनके प्रभावी क्रियान्वयन में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- रिक्त पदों का लंबे समय तक बने रहना न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन को बाधित करता है, बल्कि बजटीय प्रावधानों के औचित्य पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
- आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण में नियमों का पालन न करना और तकनीकी विसंगतियाँ सार्वजनिक निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और अक्षमता का संकेत देती हैं।
प्राक्कलन समिति क्या है?
- प्राक्कलन समिति संसद की सबसे बड़ी वित्तीय समितियों में से एक है, जिसमें लोकसभा के 30 सदस्य होते हैं। राज्यसभा के सदस्यों को इसमें प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
- इसके सदस्यों का चुनाव लोकसभा द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से किया जाता है, जिससे सभी दलों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
- समिति के सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है और कोई भी मंत्री समिति का सदस्य नहीं बन सकता।
- इसका मुख्य कार्य सरकारी व्यय में ‘मितव्ययिता’ (economy) लाना है। यह बजट अनुमानों की जांच करती है और सार्वजनिक व्यय में सुधार के लिए सुझाव देती है।
- समिति यह जांच करती है कि क्या अनुमानों में निहित नीति के भीतर धन को अच्छी तरह से विनियोजित किया गया है और क्या धन का उपयोग दक्षता के साथ किया गया है।
- यह समिति ‘सतत मितव्ययिता समिति’ के रूप में भी जानी जाती है, क्योंकि यह पूरे वर्ष सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की जांच करती है।
- प्राक्कलन समिति की सिफारिशें प्रकृति में सलाहकारी होती हैं और सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन इनका नैतिक प्रभाव महत्वपूर्ण होता है।
- यह समिति वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बजट अनुमानों का आधार | वास्तविक आवश्यकताओं के बजाय पिछले वर्षों के व्यय पर आधारित, जिससे बजट प्रावधान और वास्तविक व्यय में अंतर आता है। |
| वित्तीय वर्ष के अंत में व्यय में वृद्धि | वित्तीय अनुशासन के विपरीत, संसाधनों के अक्षम उपयोग का संकेत। |
| रिक्त पदों का मुद्दा | मानव संसाधन की कमी से योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुँच प्रभावित होती है। |
| आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण | स्वीकृति, निर्माण और तकनीकी प्रक्रियाओं में विसंगतियाँ, पारदर्शिता और नियमों के पालन की कमी। |
| संवेदनशील वर्गों से जुड़ी योजनाएँ | महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएँ सीधे महिलाओं, बच्चों और जरूरतमंदों को प्रभावित करती हैं, इसलिए प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। |
महत्व
शासन और वित्तीय प्रबंधन
- यह रिपोर्ट सरकारी विभागों में बजट निर्माण और वित्तीय प्रबंधन की कमियों को उजागर करती है, जो सुशासन के लिए चुनौती है।
- बजट प्रावधानों और वास्तविक व्यय के बीच अंतर से संसाधनों का अक्षम आवंटन होता है, जिससे विकास परियोजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सामाजिक न्याय
- महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का सीधा संबंध समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों, जैसे महिलाओं, बच्चों और अनाथों से है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी से इन वर्गों को मिलने वाले लाभ प्रभावित होते हैं।
- रिक्त पदों के कारण मानव संसाधन की कमी से इन महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुँच और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।
जवाबदेही और पारदर्शिता
- विधानसभा की प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) की रिपोर्ट सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने और सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में व्यय में वृद्धि की प्रवृत्ति वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाती है और भ्रष्टाचार की संभावना को बढ़ा सकती है।
चुनौतियाँ
1. अवास्तविक बजट अनुमान
- विभागों द्वारा वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन किए बिना पिछले वर्षों के व्यय के आधार पर बजट तैयार करना।
- इससे बजट प्रावधान और वास्तविक व्यय में बड़ा अंतर आता है, जिससे संसाधनों का उचित आवंटन नहीं हो पाता।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. वित्तीय अनुशासन की कमी
- वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में व्यय में अचानक वृद्धि की प्रवृत्ति, जिसे ‘मार्च रश’ भी कहा जाता है।
- यह धन के अक्षम उपयोग और गुणवत्ता से समझौता करने का संकेत हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: सरकारी बजट
3. मानव संसाधन की कमी
- विभागों में विभिन्न श्रेणियों के बड़ी संख्या में पदों का लंबे समय से रिक्त रहना।
- इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आती है और लाभार्थियों को समय पर सेवाएँ नहीं मिल पातीं।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: सामाजिक न्याय
4. योजना क्रियान्वयन में विसंगतियाँ
- आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण जैसी परियोजनाओं में स्वीकृति, तकनीकी मानकों और प्रक्रियाओं का पालन न होना।
- यह सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बजट निर्माण प्रक्रिया | वास्तविक आवश्यकताओं के बजाय पिछले व्यय पर निर्भरता, जिससे बजट और जमीनी हकीकत में अंतर। |
| वित्तीय वर्ष के अंत में व्यय | अंतिम महीनों में खर्च बढ़ने की प्रवृत्ति, जो वित्तीय अनुशासन के विपरीत और धन के दुरुपयोग का संकेत। |
| विभागों में रिक्त पद | मानव संसाधन की कमी से योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित। |
| निर्माण कार्यों में अनियमितता | आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण में नियमों और तकनीकी मानकों का उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी। |
| संवेदनशील वर्गों की उपेक्षा | महिलाओं, बच्चों और अनाथों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, जिससे सामाजिक सुरक्षा प्रभावित। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना
आगे की राह
- बजट निर्माण प्रक्रिया को अधिक यथार्थवादी बनाना, जिसमें जमीनी आवश्यकताओं, योजनाओं की प्रगति और उपलब्ध संसाधनों का सटीक आकलन शामिल हो।
- वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना और वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में अनावश्यक व्यय की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना।
- विभागों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाना ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- सार्वजनिक परियोजनाओं, विशेषकर निर्माण कार्यों में निर्धारित नियमों, तकनीकी मानकों और स्वीकृत प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना।
- योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, विशेषकर संवेदनशील वर्गों से जुड़ी योजनाओं में।
- योजनाओं की प्रगति और वित्तीय प्रबंधन की नियमित समीक्षा करना तथा कमियों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्राक्कलन समिति · वित्तीय प्रबंधन · बजट निर्माण · वित्तीय अनुशासन · जमीनी आवश्यकताएं · योजना क्रियान्वयन · मानव संसाधन · आंगनबाड़ी भवन · संसदीय समितियाँ · उत्तरदायित्व
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) का प्रावधान
- अनुच्छेद 202: राज्य के वार्षिक वित्तीय विवरण का प्रावधान
- अनुच्छेद 266: भारत की संचित निधि और लोक लेखा
अवधारणा प्रवाह
प्राक्कलन समिति की रिपोर्ट → बजट निर्माण में खामियाँ → वित्तीय अनुशासन की कमी → योजना क्रियान्वयन में बाधा → संवेदनशील वर्गों को लाभ से वंचित
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) संसद की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है।
2. इसके सभी सदस्य लोकसभा से चुने जाते हैं।
3. इसका मुख्य कार्य सरकारी खर्च में मितव्ययिता लाने के तरीकों पर सुझाव देना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि प्राक्कलन समिति में 30 सदस्य होते हैं और यह संसद की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है। कथन 2 भी सही है क्योंकि इसके सभी 30 सदस्य लोकसभा से चुने जाते हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्च में दक्षता और मितव्ययिता सुनिश्चित करना है।
Q2. अभिकथन (A): विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने विभागों द्वारा वास्तविक जरूरतों का आकलन किए बिना बजट अनुमान तैयार करने पर चिंता व्यक्त की है।
कारण (R): यह प्रवृत्ति बजट प्रावधानों और वास्तविक व्यय के बीच महत्वपूर्ण अंतर पैदा करती है, जिससे वित्तीय अनुशासन प्रभावित होता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि समाचार रिपोर्ट में हिमाचल विधानसभा की प्राक्कलन समिति द्वारा इस मुद्दे को उजागर करने का उल्लेख है। कारण (R) भी सही है क्योंकि वास्तविक जरूरतों की अनदेखी से बजट प्रावधान और वास्तविक व्यय में अंतर आता है, जो वित्तीय अनुशासन के विपरीत है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संसदीय समितियों, विशेषकर वित्तीय समितियों, का महत्व सुशासन सुनिश्चित करने और कार्यपालिका के उत्तरदायित्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। इस कथन के आलोक में, प्राक्कलन समिति के कार्यों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: संसदीय समितियों, विशेषकर वित्तीय समितियों (जैसे प्राक्कलन समिति, लोक लेखा समिति, सार्वजनिक उपक्रम समिति) का संक्षिप्त परिचय और सुशासन में उनकी भूमिका।
2. प्राक्कलन समिति के कार्य: इसके मुख्य कार्यों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे:
– सरकारी खर्च में मितव्ययिता और दक्षता पर सुझाव देना।
– बजट अनुमानों की जांच करना।
– प्रशासनिक सुधारों पर सिफारिशें देना।
– ‘वर्ष के दौरान’ जांच करना (post-facto नहीं)।
3. प्राक्कलन समिति के समक्ष चुनौतियाँ: समाचार रिपोर्ट के संदर्भ में और सामान्यतः, निम्नलिखित चुनौतियों पर प्रकाश डालें:
– वास्तविक जरूरतों की अनदेखी कर ‘आंकड़ों पर आधारित’ बजट निर्माण।
– बजट प्रावधान और वास्तविक व्यय में अंतर।
– वित्तीय वर्ष के अंत में खर्च बढ़ने की प्रवृत्ति।
– रिक्त पदों और मानव संसाधन की कमी का योजनाओं पर प्रभाव।
– सिफारिशों के क्रियान्वयन में देरी या उदासीनता।
– सलाहकारी प्रकृति (सिफारिशें बाध्यकारी नहीं)।
– लोकसभा तक सीमित सदस्यता।
4. सुधारात्मक उपाय और महत्व: चुनौतियों का समाधान करने के लिए संभावित उपाय और समिति के महत्व को पुनः स्थापित करें।
5. निष्कर्ष: सुशासन और वित्तीय उत्तरदायित्व में समिति की निरंतर प्रासंगिकता पर बल दें।
स्रोत: amarujala.com
Himachal Pradesh PCS (HPPSC (HAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हिमाचल प्रदेश विधानसभा की प्राक्कलन समिति द्वारा उठाए गए सवालों के संदर्भ में, राज्य बजट निर्माण प्रक्रिया में किस प्रकार की कमी को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है?
- राज्य के बजट में आंकड़ों पर अत्यधिक निर्भरता और जमीनी जरूरतों की अनदेखी
- राज्य सरकार द्वारा बजट में कृषि क्षेत्र को पर्याप्त धन आवंटित नहीं करना
- विधानसभा में बजट प्रस्तावों पर पर्याप्त चर्चा का अभाव
- राज्य बजट में केंद्र सरकार से प्राप्त धनराशि का पूर्ण उपयोग न होना
उत्तर: राज्य के बजट में आंकड़ों पर अत्यधिक निर्भरता और जमीनी जरूरतों की अनदेखी — विधानसभा प्राक्कलन समिति ने राज्य बजट निर्माण में आंकड़ों पर अत्यधिक निर्भरता और जमीनी जरूरतों की अनदेखी को प्रमुख कमी बताया है।
Mains: हिमाचल प्रदेश में राज्य बजट निर्माण प्रक्रिया में आंकड़ों पर अत्यधिक निर्भरता और जमीनी जरूरतों की अनदेखी के कारण उत्पन्न चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए, बजट निर्माण प्रक्रिया में सुधार हेतु सुझाव प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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