12 Sep जलवायु परिवर्तन अब आर्थिक जोखिम: KSPCB अध्यक्ष का बड़ा बयान
✎ जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक जोखिम है, जिसके लिए व्यवसायों को ESG सिद्धांतों को अपनाकर जलवायु-लचीलापन और सतत विकास सुनिश्चित करना होगा।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: जलवायु परिवर्तन, आर्थिक जोखिम, ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन), सतत व्यापार, जलवायु लचीलापन, कार्बन उत्सर्जन, हरित अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट गवर्नेंस
- Essay: जलवायु परिवर्तन का आर्थिक प्रभाव और सतत विकास, व्यवसायों के लिए ESG का महत्व और भविष्य की दिशा
त्वरित पुनरावृत्ति: जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक जोखिम है, जिसके लिए व्यवसायों को ESG सिद्धांतों को अपनाकर जलवायु-लचीलापन और सतत विकास सुनिश्चित करना होगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) के अध्यक्ष ने हाल ही में कहा है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय या विकासात्मक चिंता नहीं रह गया है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक और आर्थिक जोखिम बन गया है। उन्होंने जोर दिया कि जलवायु संबंधी विचारों को भूमि, श्रम, पूंजी और वित्त के साथ-साथ बोर्डरूम निर्णयों में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे ‘जलवायु बुद्धिमत्ता’ ‘व्यावसायिक बुद्धिमत्ता’ का हिस्सा बन सके। यह टिप्पणी CII कर्नाटक ESG शिखर सम्मेलन 2026 में की गई, जिसका विषय ‘जलवायु-लचीले और प्रतिस्पर्धी व्यवसायों का निर्माण: ESG प्रतिबद्धता से कार्रवाई तक’ था।
पृष्ठभूमि
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभाव अब वैश्विक स्तर पर महसूस किए जा रहे हैं, जिसमें चरम मौसमी घटनाएँ, समुद्र के स्तर में वृद्धि और जैव विविधता का नुकसान शामिल है।
- पारंपरिक रूप से, जलवायु परिवर्तन को एक पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इसके व्यापक आर्थिक परिणाम सामने आ रहे हैं, जो व्यवसायों और अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
- व्यवसायों को आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, नियामक परिवर्तनों, उपभोक्ता वरीयताओं में बदलाव और भौतिक जोखिमों (जैसे बाढ़ या सूखा) के कारण वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
- ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) मानदंड निवेशकों और हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन गए हैं, जो कंपनियों के सतत और नैतिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हैं।
- कई वैश्विक रिपोर्टों और अध्ययनों ने जलवायु परिवर्तन को एक प्रणालीगत जोखिम के रूप में पहचाना है, जो वित्तीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को खतरा पहुँचा सकता है।
- भारत जैसे विकासशील देशों के लिए, जलवायु परिवर्तन के आर्थिक जोखिम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह कृषि, जल सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालता है।
ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) क्या है?
- ESG एक ढाँचा है जिसका उपयोग निवेशकों द्वारा किसी कंपनी के पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन संबंधी प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।
- पर्यावरण (Environmental) घटक में कंपनी की ऊर्जा खपत, अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रयास शामिल हैं।
- सामाजिक (Social) घटक में कंपनी के कर्मचारी संबंध, श्रम मानक, मानवाधिकार, सामुदायिक संबंध, उत्पाद सुरक्षा और ग्राहक संतुष्टि शामिल हैं।
- शासन (Governance) घटक में कंपनी का नेतृत्व, कार्यकारी वेतन, लेखा परीक्षा, आंतरिक नियंत्रण, शेयरधारक अधिकार और पारदर्शिता शामिल है।
- ESG मानदंड अब केवल नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) से परे विकसित हो रहे हैं और दीर्घकालिक व्यावसायिक स्थिरता, प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास के लिए एक आधार बन रहे हैं।
- यह व्यवसायों को जलवायु जोखिमों, आपूर्ति श्रृंखला पुनर्संरेखण और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को नेविगेट करने में मदद करता है, जिससे लचीलापन (Resilience) दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
- ESG निवेश उन कंपनियों पर केंद्रित होता है जो इन तीन कारकों में उच्च स्कोर करती हैं, यह मानते हुए कि ऐसी कंपनियाँ वित्तीय रूप से अधिक स्थिर और दीर्घकालिक रूप से सफल होंगी।
- यह जोखिम प्रबंधन से अवसर एजेंडा की ओर बढ़ रहा है, नए बाजार, प्रौद्योगिकियां और व्यावसायिक मॉडल बना रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| जलवायु परिवर्तन एक आर्थिक जोखिम | यह अब केवल पर्यावरणीय या विकासात्मक चिंता नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक जोखिम है। |
| जलवायु बुद्धिमत्ता (Climate Intelligence) | इसे व्यावसायिक बुद्धिमत्ता (Business Intelligence) का हिस्सा बनना चाहिए, जिसमें भूमि, श्रम, पूंजी और वित्त के साथ जलवायु संबंधी विचारों को बोर्डरूम निर्णयों में शामिल किया जाए। |
| ESG का विकास | ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) अब केवल अनुपालन आवश्यकता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक व्यावसायिक स्थिरता, प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास का आधार है। |
| लचीलापन (Resilience) का महत्व | जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक बदलाव, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियों के बीच व्यवसायों के लिए अनुकूलन और प्रतिस्पर्धी बने रहने की क्षमता महत्वपूर्ण है। |
| जोखिम प्रबंधन से अवसर एजेंडा | ESG जोखिम प्रबंधन से आगे बढ़कर नए बाजार, प्रौद्योगिकियां और व्यावसायिक मॉडल बनाने का अवसर बन रहा है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- जलवायु परिवर्तन को आर्थिक जोखिम के रूप में पहचानना व्यवसायों को अपनी रणनीतियों में जलवायु संबंधी विचारों को एकीकृत करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता और लाभप्रदता सुनिश्चित होगी।
- ESG सिद्धांतों को अपनाने से कंपनियों की बाजार में प्रतिष्ठा बढ़ेगी, निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा और पूंजी तक पहुंच में सुधार होगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
- जलवायु-लचीले व्यवसायों का निर्माण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा और अप्रत्याशित पर्यावरणीय घटनाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करेगा।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह दृष्टिकोण सरकारों को जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीतियों और विनियमों को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे एक अनुकूल व्यावसायिक वातावरण बनेगा जो स्थिरता को बढ़ावा देता है।
- जलवायु बुद्धिमत्ता को व्यावसायिक निर्णयों में शामिल करने से कॉर्पोरेट प्रशासन में सुधार होगा, जिससे अधिक पारदर्शी और जवाबदेह व्यावसायिक प्रथाएं सुनिश्चित होंगी।
- यह निजी क्षेत्र को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे व्यापक आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी।
सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व
- व्यवसायों द्वारा जलवायु जोखिमों को गंभीरता से लेने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और प्राकृतिक संसाधनों का अधिक टिकाऊ उपयोग होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
- यह दृष्टिकोण नवाचार को बढ़ावा देगा, जिससे नई हरित प्रौद्योगिकियों और समाधानों का विकास होगा जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक होंगे।
- दीर्घकालिक व्यावसायिक स्थिरता से रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के माध्यम से सामाजिक कल्याण में वृद्धि होगी, जिससे समाज पर जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकेगा।
चुनौतियाँ
1. व्यवसायों के लिए पूंजी और निवेश
- जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना एक चुनौती है, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए।
- निवेशकों को ESG-केंद्रित परियोजनाओं की दीर्घकालिक लाभप्रदता के बारे में आश्वस्त करना और पारंपरिक निवेश प्रतिमानों से हटकर सोचना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल
2. नीतिगत और नियामक अनिश्चितता
- जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीतियों और विनियमों में निरंतर बदलाव व्यवसायों के लिए अनुपालन और दीर्घकालिक योजना को जटिल बना सकता है।
- विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों में नियमों की एकरूपता का अभाव भी एक चुनौती प्रस्तुत करता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
3. आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्गठन
- जलवायु जोखिमों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे व्यवसायों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने के लिए पुनर्गठित करना पड़ रहा है।
- इसमें स्थानीयकरण, विविधीकरण और नैतिक सोर्सिंग जैसे कारक शामिल हैं, जिनमें लागत और परिचालन संबंधी चुनौतियां आती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति
4. प्रौद्योगिकी और नवाचार
- जलवायु-लचीले समाधानों के लिए नई और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाना, जैसे नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन कैप्चर, महंगा और जटिल हो सकता है।
- अनुसंधान और विकास में निवेश की आवश्यकता है ताकि लागत प्रभावी और स्केलेबल समाधान विकसित किए जा सकें।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: स्वदेशीकरण
5. जागरूकता और क्षमता निर्माण
- व्यवसायों के भीतर जलवायु जोखिमों और ESG सिद्धांतों के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी एक बड़ी बाधा है।
- कर्मचारियों और प्रबंधन के लिए आवश्यक कौशल और क्षमता का निर्माण करना ताकि वे जलवायु संबंधी निर्णयों को प्रभावी ढंग से एकीकृत कर सकें।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जलवायु जोखिमों का मूल्यांकन | व्यवसायों के लिए जलवायु जोखिमों का सटीक मूल्यांकन और उन्हें वित्तीय मॉडल में एकीकृत करना जटिल है। |
| दीर्घकालिक बनाम अल्पकालिक लाभ | जलवायु-लचीलेपन में निवेश अक्सर दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है, जबकि व्यवसायों पर अल्पकालिक वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने का दबाव होता है। |
| छोटे व्यवसायों पर बोझ | छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के पास अक्सर बड़े निगमों की तुलना में ESG अनुपालन और जलवायु अनुकूलन के लिए कम संसाधन होते हैं। |
| डेटा की कमी और गुणवत्ता | जलवायु जोखिमों और ESG प्रदर्शन पर विश्वसनीय और मानकीकृत डेटा की कमी प्रभावी निर्णय लेने में बाधा डालती है। |
| हरित धुलाई (Greenwashing) | कुछ कंपनियां वास्तविक कार्रवाई के बिना केवल ESG प्रतिबद्धताओं का दावा कर सकती हैं, जिससे वास्तविक प्रगति बाधित होती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ (विशेषकर उन क्षेत्रों के लिए जो हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देते हैं)
- जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change – NAPCC)
आगे की राह
- जलवायु जोखिमों को व्यावसायिक रणनीतियों और बोर्डरूम निर्णयों में मुख्यधारा में लाना।
- ESG अनुपालन से आगे बढ़कर इसे व्यावसायिक स्थिरता और विकास के लिए एक अवसर के रूप में देखना।
- जलवायु-लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना और उत्पादों, लोगों तथा साझेदारियों में लचीलेपन को एकीकृत करना।
- हरित प्रौद्योगिकियों और नवाचार में निवेश को बढ़ावा देना, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन न्यूट्रल समाधानों में।
- सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एकीकृत समाधान विकसित किए जा सकें।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को जलवायु अनुकूलन और ESG अपनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- जलवायु जोखिमों और ESG प्रदर्शन पर मानकीकृत डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग तंत्र विकसित करना।
- जागरूकता बढ़ाना और व्यवसायों तथा आम जनता के बीच जलवायु बुद्धिमत्ता का प्रसार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जलवायु परिवर्तन · आर्थिक जोखिम · सतत विकास · पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) · व्यवसायिक लचीलापन · हरित अर्थव्यवस्था · जलवायु वित्त · कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व · नीतिगत हस्तक्षेप · अनुकूलन और शमन · संसाधन दक्षता · चक्रीय अर्थव्यवस्था
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार और स्वच्छ पर्यावरण
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार
- अनुच्छेद 51A (g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन
अवधारणा प्रवाह
जलवायु परिवर्तन एक आर्थिक जोखिम बनता है → व्यवसायों को जलवायु बुद्धिमत्ता की आवश्यकता महसूस होती है → ESG सिद्धांतों को व्यावसायिक निर्णयों में एकीकृत किया जाता है → जलवायु-लचीले व्यवसाय और आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित होती हैं → आर्थिक स्थिरता और संवृद्धि सुनिश्चित होती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक जोखिम भी है।
2. ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) मानदंड किसी व्यवसाय की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
3. जलवायु बुद्धिमत्ता (Climate Intelligence) को व्यावसायिक निर्णयों में एकीकृत करना व्यवसायों के लिए आवश्यक नहीं है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभावों को व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है। कथन 2 भी सही है क्योंकि ESG मानदंड अब केवल अनुपालन से आगे बढ़कर व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जलवायु बुद्धिमत्ता को व्यावसायिक निर्णयों में शामिल करना आवश्यक है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘व्यवसायिक लचीलापन’ (Business Resilience) को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
- यह केवल पर्यावरणीय नियमों का पालन करने की क्षमता है।
- यह केवल वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का सामना करने की क्षमता है।
- यह जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक बदलावों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों जैसे परस्पर जुड़े जोखिमों के अनुकूल होने और प्रतिस्पर्धी बने रहने की व्यवसाय की क्षमता है।
- यह केवल नए बाजारों में विस्तार करने की क्षमता है।
उत्तर: यह जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक बदलावों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों जैसे परस्पर जुड़े जोखिमों के अनुकूल होने और प्रतिस्पर्धी बने रहने की व्यवसाय की क्षमता है। — व्यवसायिक लचीलापन एक व्यापक अवधारणा है जिसमें विभिन्न प्रकार के बाहरी झटकों और परिवर्तनों के अनुकूल होने की क्षमता शामिल है, जैसा कि लेख में वर्णित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जलवायु परिवर्तन को अब एक महत्वपूर्ण आर्थिक जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। इस संदर्भ में, व्यवसायों के लिए पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) मानदंडों को अपनी मुख्य रणनीति में एकीकृत करना क्यों आवश्यक हो गया है? चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: जलवायु परिवर्तन के आर्थिक जोखिम बनने की वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख।
मुख्य भाग 1: जलवायु परिवर्तन के आर्थिक जोखिमों का विवरण – आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान, संसाधन की कमी, बीमा लागत में वृद्धि, नियामक जोखिम, बाजार की मांग में बदलाव आदि।
मुख्य भाग 2: ESG मानदंडों की आवश्यकता और महत्व:
• दीर्घकालिक स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता: व्यवसाय कैसे ESG को अपनाकर दीर्घकालिक मूल्य बना सकते हैं।
• निवेशक संबंध: ESG-केंद्रित निवेशों का बढ़ता चलन।
• नियामक अनुपालन और जोखिम प्रबंधन: भविष्य के नियमों के लिए तैयारी।
• ब्रांड प्रतिष्ठा और उपभोक्ता विश्वास: नैतिक और टिकाऊ प्रथाओं का महत्व।
• नवाचार और नए बाजार के अवसर: हरित प्रौद्योगिकियों और व्यापार मॉडल का विकास।
• व्यवसायिक लचीलापन: जलवायु परिवर्तन और अन्य बाहरी झटकों के प्रति अनुकूलन।
निष्कर्ष: ESG को केवल अनुपालन के बजाय एक रणनीतिक अनिवार्यता के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर बल, जो सतत विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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