असम से मीनाक्षी मंदिर पहुंचेगी युवा हाथी दुर्गा, कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

Young elephant ‘Durga’ from Assam to reach Madurai Meenakshi temple; activists raise concerns over transfer — diagram

असम से मीनाक्षी मंदिर पहुंचेगी युवा हाथी दुर्गा, कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

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Elephant transfer process

✎ बंदी हाथियों का स्थानांतरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और संबंधित राज्य नियमों द्वारा विनियमित होता है, जिसमें मुख्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति और हाथी के कल्याण संबंधी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता  |  GS Paper II — शासन और न्यायिक हस्तक्षेप
  • Prelims: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, बंदी हाथी प्रबंधन नियम, 2011, वन्यजीव वार्डन, एनओसी (NOC), हाथी गलियारे, मद्रास उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय
  • Essay: मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और नैतिक मुद्दे, विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण: संतुलन की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: बंदी हाथियों का स्थानांतरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और संबंधित राज्य नियमों द्वारा विनियमित होता है, जिसमें मुख्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति और हाथी के कल्याण संबंधी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

असम से एक युवा हथिनी ‘दुर्गा’ को तमिलनाडु के मदुरै स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, असम से तमिलनाडु के विभिन्न मंदिरों में पाँच हाथियों के स्थानांतरण का प्रस्ताव है। इस स्थानांतरण पर वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है, जिसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में भी मामले विचाराधीन हैं। तमिलनाडु वन विभाग ने इस स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया है, लेकिन यह मुद्दा बंदी हाथियों के प्रबंधन और कल्याण से संबंधित व्यापक चिंताओं को उजागर करता।

पृष्ठभूमि

  • हाल ही में, मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य में मंदिरों द्वारा बंदी हाथियों के अधिग्रहण को रोकने वाले राज्यव्यापी निर्देशों को रद्द कर दिया था।
  • वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने असम से तमिलनाडु में हाथियों के स्थानांतरण पर चिंता जताई है, विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा और नए वातावरण में उनके अनुकूलन को लेकर।
  • स्थानांतरण से पहले, जिला बंदी हाथी प्रबंधन समिति ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और मिट्टी स्नान, जल स्नान और चलने की जगह जैसी सुविधाओं की उपलब्धता की जाँच की।
  • सर्वोच्च न्यायालय पैनल से भी असम के हाथियों को तमिलनाडु में स्थानांतरित करने पर रोक लगाने का आग्रह किया गया है।
  • यह मामला बंदी हाथियों के कल्याण, उनके प्राकृतिक आवास से अलगाव और धार्मिक उद्देश्यों के लिए उनके उपयोग से संबंधित नैतिक प्रश्नों को उठाता है।

भारत में बंदी हाथियों का प्रबंधन और संबंधित कानून

  • भारत में हाथियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) की अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है, जो उन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है।
  • इस अधिनियम के तहत, हाथियों सहित अनुसूची I के जानवरों का शिकार, व्यापार या स्थानांतरण सख्त रूप से विनियमित है और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।
  • किसी भी हाथी के स्थानांतरण के लिए संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • NOC जारी करने से पहले, एक समिति द्वारा प्राप्तकर्ता स्थान पर सुविधाओं और हाथी के कल्याण के लिए उपयुक्तता का निरीक्षण किया जाता है।
  • वन्यजीव संरक्षण संगठन अक्सर धार्मिक या मनोरंजन उद्देश्यों के लिए हाथियों के स्थानांतरण और उपयोग का विरोध करते हैं, यह तर्क देते हुए कि यह उनके प्राकृतिक व्यवहार और कल्याण को प्रभावित करता है।
  • न्यायिक हस्तक्षेप, जैसे कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, बंदी हाथियों के अधिकारों और उनके प्रबंधन में कानूनी ढांचे की भूमिका को रेखांकित करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
हाथियों का स्थानांतरण असम से तमिलनाडु के मंदिरों में हाथियों का स्थानांतरण, जिसमें मदुरै मीनाक्षी मंदिर को ‘दुर्गा’ नामक हथिनी का हस्तांतरण शामिल है।
नियामक अनुमोदन तमिलनाडु वन विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया, जिसमें जिला बंदी हाथी प्रबंधन समिति द्वारा निरीक्षण शामिल था।
न्यायिक हस्तक्षेप मद्रास उच्च न्यायालय में बंदी हाथियों के स्थानांतरण को लेकर याचिकाएँ दायर की गईं, जिसमें कुछ मामलों में न्यायालय के निर्देश शामिल थे।
पशु कल्याण संबंधी चिंताएँ कार्यकर्ताओं द्वारा हाथियों के स्थानांतरण और उनके कल्याण पर चिंताएँ व्यक्त की गईं।
तमिलनाडु बंदी हाथी (प्रबंधन और रखरखाव) नियम, 2011 ये नियम मंदिरों को दान में मिले हाथियों को प्राप्त करने की अनुमति देते हैं, बशर्ते पूर्व अनुमति और सुरक्षा उपाय किए गए हों।

महत्व

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण

  • यह घटना बंदी हाथियों के प्रबंधन और कल्याण से संबंधित मुद्दों को उजागर करती है, जो वन्यजीव संरक्षण के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
  • यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत प्रजातियों के संरक्षण और उनके आवास की सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालता है।

प्रशासनिक और कानूनी निहितार्थ

  • यह अंतर-राज्यीय पशु स्थानांतरण के लिए नियामक प्रक्रियाओं और विभिन्न सरकारी विभागों की भूमिका को दर्शाता है।
  • न्यायिक समीक्षा और न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का महत्व, विशेष रूप से पशु कल्याण और संबंधित नियमों के प्रवर्तन में, स्पष्ट होता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम

  • यह मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में हाथियों की पारंपरिक भूमिका और उनके प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों को दर्शाता है।
  • पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और धार्मिक प्रथाओं के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

चुनौतियाँ

1. पशु कल्याण और स्थानांतरण

  • लंबी दूरी तक हाथियों के स्थानांतरण से उनके स्वास्थ्य और कल्याण पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव।
  • नए वातावरण में हाथियों के अनुकूलन और उनके लिए पर्याप्त सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

2. नियामक और कानूनी अस्पष्टता

  • बंदी हाथियों के स्थानांतरण से संबंधित नियमों और दिशानिर्देशों की व्याख्या और प्रवर्तन में संभावित विसंगतियाँ।
  • विभिन्न राज्यों और केंद्रीय कानूनों के बीच समन्वय की कमी, जिससे जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

3. निगरानी और प्रवर्तन

  • स्थानांतरित हाथियों के कल्याण और प्रबंधन के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र की कमी।
  • नियमों का उल्लंघन होने पर उचित प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करना।

4. जन जागरूकता और संवेदनशीलता

  • पशु कल्याण के मुद्दों के बारे में जन जागरूकता की कमी और धार्मिक प्रथाओं के साथ इसके टकराव।
  • हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक व्यवहार की समझ को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
हाथियों का अंतर-राज्यीय स्थानांतरण लंबी यात्रा के दौरान हाथियों के स्वास्थ्य और तनाव का जोखिम।
नए वातावरण में अनुकूलन मंदिरों में उपलब्ध स्थान, भोजन और सामाजिक संरचना का हाथियों पर प्रभाव।
नियामक निरीक्षण की पर्याप्तता क्या जिला समिति द्वारा किया गया निरीक्षण हाथियों के दीर्घकालिक कल्याण के लिए पर्याप्त है।
न्यायिक निर्देशों का अनुपालन न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का राज्यों और संबंधित विभागों द्वारा पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना।
पशु कल्याण कार्यकर्ताओं की आपत्तियाँ स्थानांतरण के पीछे के नैतिक और वैज्ञानिक औचित्य पर सवाल।

आगे की राह

  • बंदी हाथियों के स्थानांतरण के लिए एक मानकीकृत और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल विकसित करना, जिसमें विस्तृत स्वास्थ्य जाँच और अनुकूलन योजनाएँ शामिल हों।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और संबंधित राज्य नियमों के तहत प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना।
  • बंदी हाथियों के लिए पर्याप्त आवास, पोषण, चिकित्सा देखभाल और सामाजिक संपर्क सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू करना।
  • पशु कल्याण संगठनों और विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर स्थानांतरण और प्रबंधन नीतियों को और अधिक समावेशी बनाना।
  • हाथियों के कल्याण और संरक्षण के महत्व के बारे में जनता और धार्मिक संस्थानों के बीच जागरूकता बढ़ाना।
  • अंतर-राज्यीय स्थानांतरण से पहले संबंधित राज्य वन विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण सुनिश्चित करना।
  • न्यायिक निर्देशों का समयबद्ध और प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित करना, विशेष रूप से लंबित आवेदनों के संबंध में।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 · हाथियों का स्थानांतरण · बंदी हाथी प्रबंधन · पशु कल्याण · पर्यावरण नैतिकता · न्यायिक समीक्षा · राज्य वन विभाग · वन्यजीव व्यापार · पर्यावरण संरक्षण · हाथी गलियारे · मानव-वन्यजीव संघर्ष · सांस्कृतिक प्रथाएँ

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों के प्रति दया का भाव’}

अवधारणा प्रवाह

असम से तमिलनाडु के मंदिरों में हाथियों के स्थानांतरण का प्रस्ताव।  →  तमिलनाडु वन विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करना।  →  पशु कल्याण कार्यकर्ताओं द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर करना।  →  मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा स्थानांतरण पर सुनवाई और निर्देश जारी करना।  →  तमिलनाडु बंदी हाथी (प्रबंधन और रखरखाव) नियम, 2011 की भूमिका।  →  हाथियों के कल्याण और संरक्षण पर व्यापक बहस का उभरना।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध जानवरों का स्थानांतरण केवल राज्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति से किया जा सकता है।
2. बंदी हाथियों के प्रबंधन और रखरखाव के लिए नियम केंद्र सरकार द्वारा बनाए जाते हैं।
3. मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में मंदिरों को बंदी हाथी प्राप्त करने से रोकने वाले राज्यव्यापी निर्देशों को रद्द कर दिया।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध जानवरों के स्थानांतरण के लिए राज्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति आवश्यक है। कथन 2 गलत है। बंदी हाथियों के प्रबंधन और रखरखाव के नियम राज्य सरकारों द्वारा बनाए जाते हैं, जैसे तमिलनाडु बंदी हाथी (प्रबंधन और रखरखाव) नियम, 2011। कथन 3 सही है। मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में मंदिरों को बंदी हाथी प्राप्त करने से रोकने वाले राज्यव्यापी निर्देशों को रद्द कर दिया, यह मानते हुए कि मौजूदा नियम अनुमति और सुरक्षा उपायों के अधीन दान किए गए हाथियों को प्राप्त करने का प्रावधान करते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम भारत में बंदी हाथियों के स्थानांतरण और प्रबंधन को नियंत्रित करता है?

  1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  2. पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960
  3. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  4. जैविक विविधता अधिनियम, 2002

उत्तर: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 — वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों के संरक्षण, शिकार और व्यापार को नियंत्रित करता है, जिसमें बंदी हाथी भी शामिल हैं। इस अधिनियम की अनुसूची I में हाथी शामिल हैं, जिसका अर्थ है कि उनके स्थानांतरण के लिए सख्त नियम और अनुमति की आवश्यकता होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बंदी हाथियों के स्थानांतरण से जुड़े कानूनी और नैतिक मुद्दों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की भूमिका और न्यायिक हस्तक्षेप के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: बंदी हाथियों के स्थानांतरण की वर्तमान स्थिति और इससे जुड़े विवादों का संक्षिप्त परिचय।
2. कानूनी मुद्दे: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों का उल्लेख, विशेष रूप से अनुसूची I में हाथियों का वर्गीकरण और स्थानांतरण के लिए आवश्यक अनुमतियाँ (राज्य वन्यजीव वार्डन की NOC)। तमिलनाडु बंदी हाथी (प्रबंधन और रखरखाव) नियम, 2011 जैसे राज्य-विशिष्ट नियमों का उल्लेख।
3. नैतिक मुद्दे: पशु कल्याण, हाथियों के प्राकृतिक आवास से अलगाव, सामाजिक संरचना पर प्रभाव, परिवहन के दौरान तनाव, और मंदिरों या निजी स्वामित्व में उनकी देखभाल की गुणवत्ता से संबंधित चिंताओं पर चर्चा।
4. न्यायिक हस्तक्षेप का महत्व: मद्रास उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया निर्णयों और निर्देशों का उल्लेख। यह बताएं कि कैसे न्यायपालिका इन मामलों में संतुलन बनाने और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
5. चुनौतियाँ और आगे का रास्ता: मानव-वन्यजीव संघर्ष, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं का सम्मान, वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता और हाथियों के दीर्घकालिक कल्याण के लिए एक व्यापक नीति की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
6. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जो संरक्षण, पशु कल्याण और कानूनी ढांचे के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देता हो।

स्रोत: The Hindu

Assam PCS (APSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: असम से मीनाक्षी मंदिर (मदुरै) भेजे जा रहे युवा हाथी ‘दुर्गा’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. असम सरकार ने ‘दुर्गा’ को मंदिर के लिए उपहार स्वरूप भेजने का निर्णय लिया है
  2. पर्यावरणविदों ने इसके स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें पशु कल्याण और कानूनी मुद्दों का हवाला दिया गया है
  3. ‘दुर्गा’ को मंदिर में पूजा के लिए भेजा जा रहा है, जिसमें उसकी आयु और स्वास्थ्य संबंधी मानकों का पूर्ण पालन किया गया है
  4. मीनाक्षी मंदिर प्रबंधन ने असम सरकार से ‘दुर्गा’ को वापस भेजने की मांग की है

उत्तर: पर्यावरणविदों ने इसके स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें पशु कल्याण और कानूनी मुद्दों का हवाला दिया गया है — पर्यावरणविदों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने ‘दुर्गा’ के स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें पशु कल्याण, कानूनी प्रक्रिया और पारिस्थितिकी तंत्र संबंधी मुद्दों को उठाया गया है।

Mains: असम सरकार द्वारा युवा हाथी ‘दुर्गा’ के मंदिर स्थानांतरण के निर्णय के पीछे के संभावित कारणों और इससे उत्पन्न होने वाले पशु कल्याण तथा पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, ऐसे स्थानांतरणों में शामिल कानूनी और नैतिक पहलुओं का भी विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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