14 Sep कोयला मंत्रालय ने किया विशेष अभियान 6.0 का शुभारंभ: जानिए प्रमुख लक्ष्य और उपलब्धियां
✎ विशेष अभियान 6.0 सरकारी कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके डिजाइन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय | GS Paper III — पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन, आपदा और आपदा प्रबंधन
- Prelims: विशेष अभियान 6.0, ई-कचरा प्रबंधन, स्वच्छता अभियान, कोयला मंत्रालय, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, अपशिष्ट से धन (Waste to Wealth)
- Essay: स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत: एक सतत विकास की ओर, ई-कचरा प्रबंधन: एक बढ़ती चुनौती और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 सरकारी कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोयला मंत्रालय ने विशेष अभियान 5.0 की उल्लेखनीय सफलता के बाद, ‘ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान’ पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए विशेष अभियान 6.0 के शुभारंभ की घोषणा की है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न ‘विशेष अभियान’ शुरू किए हैं।
- ये अभियान प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances – DARPG) द्वारा निर्देशित होते हैं, जो मंत्रालयों/विभागों के प्रदर्शन की निगरानी करता है।
- कोयला मंत्रालय ने विशेष अभियान 5.0 के दौरान 1.13 करोड़ वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को साफ किया और 14,017 मीट्रिक टन से अधिक कबाड़ का निपटान करके 56.85 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।
- प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, कोयला मंत्रालय विशेष अभियान 5.0 के दौरान मुक्त किए गए स्थान की श्रेणी में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले और राजस्व में तीसरे स्थान पर रहा।
- मंत्रालय ने लोक शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय के संदर्भों का शत-प्रतिशत निपटान भी किया, जो सुशासन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष अभियान 6.0 भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जो सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार पर केंद्रित है।
- इस अभियान का मुख्य जोर ‘ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान’ पर है, जो वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों को संबोधित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
- अभियान का उद्देश्य कार्यालयों में लंबित फाइलों की समीक्षा करना और उनका निपटान करना भी है, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार हो सके।
- यह अभियान ‘अपशिष्ट से धन’ (Waste to Wealth) की अवधारणा को बढ़ावा देता है, जिसके तहत कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान करके राजस्व अर्जित किया जाता है।
- कोयला मंत्रालय और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Public Sector Undertakings – PSUs) इस अभियान को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले सभी कार्यालयों में लागू करेंगे।
- अभियान में वृक्षारोपण, बागवानी गतिविधियों और कार्यालय परिसर के सौंदर्यीकरण जैसी पहलें भी शामिल हैं, जो एक स्वच्छ और हरित कार्य वातावरण को बढ़ावा देती हैं।
- यह अभियान पर्यावरणीय स्थिरता और कुशल संसाधन प्रबंधन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेष अभियान 6.0 का शुभारंभ | यह अभियान 2 से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य जोर ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर है। यह पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| विशेष अभियान 5.0 की सफलता | 2 अक्टूबर, 2025 से 31 अगस्त, 2026 तक चले इस अभियान में कोयला मंत्रालय ने 1.13 करोड़ वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को साफ किया और 14,017 मीट्रिक टन से अधिक कबाड़ का निपटान किया, जिससे 56.85 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह कुशल अपशिष्ट प्रबंधन का एक उदाहरण है। |
| राजस्व सृजन और स्थान मुक्ति | कबाड़ निपटान से भारी राजस्व (56.85 करोड़ रुपये) प्राप्त हुआ और बड़ी मात्रा में स्थान (1.13 करोड़ वर्ग फुट) मुक्त हुआ। कोयला मंत्रालय ने भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों में स्थान मुक्ति में शीर्ष प्रदर्शन किया। |
| लोक शिकायत निवारण | कोयला मंत्रालय ने लोक शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय के संदर्भों का शत-प्रतिशत निपटान किया, जो सुशासन (Good Governance) और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। |
| अभिनव पहलें | कचरे को कला में बदलने की पहल जैसे ‘चार धाम’ मूर्तियों का निर्माण और ‘अंगारा’ शुभंकर का सृजन, अपशिष्ट पदार्थों के पुनर्चक्रण (Recycling) और रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा देता है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- यह अभियान अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management), विशेषकर ई-कचरा (E-waste) के प्रभावी निपटान पर केंद्रित है, जो पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है।
- कबाड़ के निपटान और खाली स्थानों के अनुकूलन से स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
आर्थिक महत्व
- कबाड़ के निपटान से 56.85 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त हुआ, जो संसाधन दक्षता और अपशिष्ट से धन सृजन की क्षमता को दर्शाता है।
- खाली स्थानों का अनुकूलन कार्यालय के बुनियादी ढांचे में सुधार करता है, जिससे कार्यकुशलता बढ़ती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।
प्रशासनिक महत्व
- लोक शिकायतों और प्रधानमंत्री कार्यालय के संदर्भों का शत-प्रतिशत निपटान सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ावा देता है।
- मंत्रालय का शीर्ष प्रदर्शन अन्य मंत्रालयों/विभागों के लिए एक मानक स्थापित करता है और सरकारी कार्यों में दक्षता और प्रभावशीलता को प्रोत्साहित करता है।
सामाजिक महत्व
- अभिनव पहलें जैसे स्क्रैप से कलाकृतियों का निर्माण, अपशिष्ट पदार्थों के प्रति लोगों की धारणा को बदलता है और पुनर्चक्रण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।
- स्वच्छता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति मजबूत संकल्प समाज में नागरिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. ई-कचरा प्रबंधन
- ई-कचरे का बढ़ता उत्पादन और उसके वैज्ञानिक निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- ई-कचरे में मौजूद खतरनाक पदार्थों के कारण पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना मुश्किल है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, प्रदूषण
2. जन जागरूकता और भागीदारी
- अपशिष्ट पृथक्करण और निपटान के महत्व के बारे में आम जनता और कर्मचारियों के बीच जागरूकता की कमी।
- अभियानों की सफलता के लिए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना एक निरंतर चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक मुद्दे
3. प्रौद्योगिकी और नवाचार
- अपशिष्ट को कला में बदलने जैसी अभिनव पहलों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- अपशिष्ट प्रबंधन में नई और कुशल प्रौद्योगिकियों को अपनाना और उनका उपयोग करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अवसंरचना
4. सतत वित्तपोषण और संसाधन
- अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता अभियानों के लिए दीर्घकालिक और स्थायी वित्तपोषण सुनिश्चित करना।
- मानव संसाधन और उपकरण जैसे आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और उनका कुशल उपयोग।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ई-कचरे का बढ़ता ढेर | भारत में ई-कचरे का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, जिसके प्रभावी संग्रह और निपटान के लिए मजबूत नीतिगत ढांचा और क्रियान्वयन आवश्यक है। |
| अपशिष्ट पृथक्करण का अभाव | स्रोत पर अपशिष्ट के उचित पृथक्करण की कमी से पुनर्चक्रण प्रक्रिया बाधित होती है और निपटान लागत बढ़ती है। |
| बुनियादी ढांचे की कमी | ई-कचरा प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के लिए पर्याप्त और आधुनिक बुनियादी ढांचे का अभाव, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में। |
| अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका | ई-कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र की प्रमुख भूमिका, जिससे पर्यावरण और श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न होते हैं। |
| अभियानों की निरंतरता | विशेष अभियानों की सफलता को दीर्घकालिक नीतियों और नियमित प्रथाओं में बदलना ताकि निरंतर प्रभाव सुनिश्चित हो सके। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)
आगे की राह
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित करना, जिसमें संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और निपटान के सभी पहलुओं को शामिल किया जाए।
- ई-कचरा प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना।
- जन जागरूकता अभियानों को तेज करना ताकि नागरिकों को अपशिष्ट पृथक्करण और ई-कचरे के उचित निपटान के महत्व के बारे में शिक्षित किया जा सके।
- अपशिष्ट से धन (Waste to Wealth) की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए अभिनव पहलों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना।
- लोक शिकायतों के निवारण तंत्र को और मजबूत करना ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- विशेष अभियानों की सफलता को स्थायी प्रथाओं में बदलने के लिए मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियमित निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
- ई-कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाना और उन्हें सुरक्षित कार्य वातावरण तथा प्रशिक्षण प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विशेष अभियान · स्वच्छता · अपशिष्ट प्रबंधन · पर्यावरणीय जिम्मेदारी · ई-कचरा निपटान · राजस्व सृजन · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · प्रशासनिक सुधार · लोक शिकायत निवारण · संसाधन प्रबंधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
विशेष अभियान 5.0 की सफलता → प्रेरणा और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझाकरण → विशेष अभियान 6.0 की तैयारी → ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष जोर → पर्यावरणीय स्थिरता और संसाधन दक्षता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विशेष अभियान 5.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान कोयला मंत्रालय के निर्देशन में लागू किया गया था।
2. अभियान के दौरान 1.13 करोड़ वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को साफ किया गया।
3. स्क्रैप निपटान से 56.85 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विशेष अभियान 5.0 कोयला मंत्रालय के निर्देशन में लागू किया गया था। कथन 2 सही है क्योंकि अभियान के दौरान 1.13 करोड़ वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को साफ किया गया। कथन 3 सही है क्योंकि स्क्रैप निपटान से 56.85 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘विशेष अभियान 6.0’ का प्राथमिक उद्देश्य है?
- कोयला उत्पादन में वृद्धि करना।
- ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष जोर देना।
- कोयला खदानों में सुरक्षा मानकों में सुधार करना।
- कोयला मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
उत्तर: ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष जोर देना। — विशेष अभियान 6.0 का प्राथमिक उद्देश्य ‘ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान’ पर विशेष जोर देना है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में अपशिष्ट प्रबंधन, विशेषकर ई-कचरा प्रबंधन, एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है। इस संदर्भ में, विशेष अभियानों जैसे सरकारी प्रयासों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) की वर्तमान स्थिति और ई-कचरे (E-Waste) से उत्पन्न चुनौतियों का संक्षिप्त विवरण। (लगभग 20-30 शब्द)
2. विशेष अभियानों की भूमिका: विशेष अभियान 5.0 और 6.0 जैसे अभियानों के उद्देश्यों और कार्यान्वयन पर प्रकाश डालें। (लगभग 50-60 शब्द)
3. सफलताएँ और उपलब्धियाँ: कोयला मंत्रालय के विशेष अभियान 5.0 के तहत प्राप्त प्रमुख परिणामों का उल्लेख करें (जैसे साफ किया गया क्षेत्र, राजस्व सृजन, लोक शिकायत निवारण)। (लगभग 50-60 शब्द)
4. चुनौतियाँ और सीमाएँ: ऐसे अभियानों के सामने आने वाली चुनौतियों और दीर्घकालिक स्थिरता की सीमाओं पर चर्चा करें। (लगभग 40-50 शब्द)
5. आगे की राह/सुझाव: प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नीतिगत उपायों, जन जागरूकता, प्रौद्योगिकी के उपयोग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) जैसे सुझाव दें। (लगभग 30-40 शब्द)
6. निष्कर्ष: पर्यावरणीय स्थिरता और संसाधन प्रबंधन में ऐसे अभियानों के महत्व पर बल देते हुए सकारात्मक निष्कर्ष। (लगभग 10-20 शब्द)
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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