गुजरात में हुआ विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026 का उद्घाटन, जानिए मुख्य बिंदु

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री ने गांधीनगर में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (डब्ल्यूसीईएफ) 2026 का उ — diagram

गुजरात में हुआ विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026 का उद्घाटन, जानिए मुख्य बिंदु

चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रक्रियाअत्यधिक दोहनसंसाधनअपशिष्ट उत्पादननियंत्रणमरम्मत पुन:उपयोगपुनर्चक्रणदक्षता वृद्धिआर्थिक मूल्यपर्यावरण प्रभावकमीटिकाऊ विकासहरित अर्थव्यवस्था
चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रक्रिया

✎ चक्रीय अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जो संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करके और अपशिष्ट को न्यूनतम करके सतत विकास को बढ़ावा देती है, जिसमें 'मरम्मत करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें' के सिद्धांत निहित हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
  • Prelims: चक्रीय अर्थव्यवस्था, WCEF 2026, मिशन लाइफ, वसुधैव कुटुंबकम, अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन दक्षता
  • Essay: सतत विकास और चक्रीय अर्थव्यवस्था: भविष्य की राह, भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ और आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रीय अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जो संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करके और अपशिष्ट को न्यूनतम करके सतत विकास को बढ़ावा देती है, जिसमें ‘मरम्मत करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ के सिद्धांत निहित हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव तथा गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल ने गांधीनगर में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 का उद्घाटन किया। यह मंच ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था: आम लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन’ विषय पर 15 से 18 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है, जो दक्षिण एशिया में पहली बार हो रहा है और भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 का आयोजन गांधीनगर, गुजरात में किया जा रहा है, जो दक्षिण एशिया में इस तरह का पहला आयोजन है।
  • इस मंच का विषय ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था: आम लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन’ है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर केंद्रित है।
  • भारत में चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांत पारंपरिक रूप से ‘मरम्मत करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ की अवधारणा में निहित हैं, जैसा कि केंद्रीय मंत्री ने बताया।
  • गुजरात के मुख्यमंत्री ने ‘मिशन लाइफ’ (LiFE – Lifestyle for Environment) को वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था की नींव के रूप में रेखांकित किया।
  • भारत सरकार ने नियामक सुधारों और डिजिटल अनुपालन प्रणालियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को मजबूत करके चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
  • इस मंच में फिनलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को दर्शाता है।

चक्रीय अर्थव्यवस्था क्या है?

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) एक आर्थिक प्रणाली है जिसका उद्देश्य संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करना और अपशिष्ट को न्यूनतम करना है।
  • यह ‘लेना-बनाना-निपटाना’ (take-make-dispose) के पारंपरिक रैखिक मॉडल के विपरीत है, जहाँ उत्पादों को उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था के मुख्य सिद्धांत हैं: अपशिष्ट और प्रदूषण को डिजाइन से ही समाप्त करना, उत्पादों और सामग्रियों को उपयोग में बनाए रखना, और प्राकृतिक प्रणालियों को पुनर्जीवित करना।
  • इसमें मरम्मत (repair), पुन: उपयोग (reuse), पुनर्चक्रण (recycle) और नवीनीकरण (refurbish) जैसी रणनीतियाँ शामिल हैं ताकि उत्पादों और सामग्रियों का जीवनचक्र बढ़ाया जा सके।
  • यह संसाधनों की कमी, पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में मदद करती है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था नवाचार, नई व्यावसायिक मॉडल और रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (economic growth) और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों प्राप्त होती हैं।
  • भारत में, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘कचरे को कंचन में परिवर्तित करने’ की अवधारणाएँ चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
  • यह सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है, विशेष रूप से SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) से संबंधित है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
डब्ल्यूसीईएफ 2026 की मेजबानी यह दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित हो रहा है, जो वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते नेतृत्व और चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विषय ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था: आम लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन’ – यह विषय चक्रीय अर्थव्यवस्था के सामाजिक और आर्थिक लाभों पर केंद्रित है।
भारतीय लोकाचार भारत की पारंपरिक ‘मरम्मत, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण’ की संस्कृति को आधुनिक नीतिगत संदर्भ में प्रस्तुत करना, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप है।
मिशन LiFE इसे वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था की नींव के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली को बढ़ावा देता है।
सहयोगात्मक दृष्टिकोण ज्ञान, प्रौद्योगिकी, वित्त और उत्तरदायित्व के आदान-प्रदान के माध्यम से देशों और क्षेत्रों के बीच सहयोग पर बल दिया गया।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • संसाधनों का कुशल उपयोग करके अपशिष्ट को कम करना और नए मूल्यवान उत्पादों का निर्माण करना, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • पुनर्चक्रण और मरम्मत उद्योगों में नए रोजगार के अवसर सृजित करना, जिससे आजीविका के साधन बढ़ते हैं।
  • कच्चे माल पर निर्भरता कम करना, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता आती है और लागत कम होती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को कम करना और पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव को कम करना।
  • अपशिष्ट उत्पादन में कमी और लैंडफिल (Landfill) में जाने वाले कचरे की मात्रा में गिरावट, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलती है।
  • कार्बन उत्सर्जन को कम करने में योगदान, क्योंकि नए उत्पादों के निर्माण की तुलना में पुनर्चक्रण में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

सामाजिक महत्व

  • स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना, विशेषकर अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण क्षेत्रों में।
  • उपभोक्ताओं को टिकाऊ उत्पादों और सेवाओं की ओर प्रोत्साहित करना, जिससे एक जिम्मेदार उपभोग संस्कृति का विकास होता है।
  • भारत की पारंपरिक ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना और ‘कचरे को कंचन में परिवर्तित करने’ के लोकाचार को आधुनिक संदर्भ में मजबूत करना।

सामरिक महत्व

  • वैश्विक मंच पर भारत की पर्यावरण नेतृत्व की भूमिका को मजबूत करना, विशेषकर दक्षिण एशिया में डब्ल्यूसीईएफ की मेजबानी के माध्यम से।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए ज्ञान, प्रौद्योगिकी और वित्त का आदान-प्रदान संभव हो सके।
  • मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) को वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • उपभोक्ताओं और उद्योगों के बीच चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों और लाभों के बारे में जागरूकता की कमी।
  • एकल-उपयोग (Single-Use) उत्पादों पर निर्भरता और ‘उपयोग करो और फेंको’ (Use and Throw) की मानसिकता को बदलना एक बड़ी चुनौती है।

2. बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी

  • अपशिष्ट संग्रह, छँटाई, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे और उन्नत प्रौद्योगिकियों की कमी।
  • विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के प्रभावी प्रसंस्करण के लिए नवीन और लागत प्रभावी समाधानों की आवश्यकता।

3. नियामक और नीतिगत ढाँचा

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और सुसंगत नियामक ढाँचे की आवश्यकता।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) जैसी नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ।

4. वित्तपोषण

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था परियोजनाओं, विशेषकर अनुसंधान और विकास तथा बुनियादी ढाँचे के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की उपलब्धता।
  • पारंपरिक ‘रेखीय’ (Linear) अर्थव्यवस्था से ‘चक्रीय’ अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के लिए निवेश को आकर्षित करना।

5. आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण

  • उत्पाद डिजाइन से लेकर अपशिष्ट प्रबंधन तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला में चक्रीयता सिद्धांतों को एकीकृत करना।
  • विभिन्न हितधारकों, जैसे निर्माताओं, उपभोक्ताओं और पुनर्चक्रणकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अपशिष्ट पृथक्करण घरों और उद्योगों में स्रोत पर प्रभावी अपशिष्ट पृथक्करण की कमी, जिससे पुनर्चक्रण प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
अनौपचारिक क्षेत्र भारत में अपशिष्ट प्रबंधन का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा संभाला जाता है, जिसमें सुरक्षा और मानकीकरण की कमी होती है।
तकनीकी अंतराल कुछ विशिष्ट अपशिष्ट धाराओं (जैसे ई-अपशिष्ट, प्लास्टिक अपशिष्ट) के पुनर्चक्रण के लिए उन्नत और कुशल प्रौद्योगिकियों का अभाव।
उपभोक्तावाद तेजी से बढ़ते उपभोक्तावाद और डिस्पोजेबल संस्कृति के कारण अपशिष्ट उत्पादन में लगातार वृद्धि।
नीति कार्यान्वयन मौजूदा अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ।

आगे की राह

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना।
  • अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण के लिए आधुनिक बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकियों में निवेश को बढ़ाना।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) जैसे नियामक ढाँचे को मजबूत करना और उसका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और निवेश को आकर्षित करने हेतु नवीन वित्तपोषण मॉडल विकसित करना।
  • उत्पाद डिजाइन से लेकर उपभोग तक पूरी मूल्य श्रृंखला में चक्रीयता सिद्धांतों को एकीकृत करने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित करना।
  • अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में बदलने के लिए नई प्रौद्योगिकियाँ विकसित की जा सकें।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

चक्रीय अर्थव्यवस्था · संसाधन दक्षता · अपशिष्ट प्रबंधन · सतत विकास · मिशन लाइफ · पुनर्चक्रण · पुनः उपयोग · वसुधैव कुटुंबकम · पर्यावरण संरक्षण · नीतिगत सुधार

अवधारणा प्रवाह

संसाधनों का अत्यधिक दोहन और अपशिष्ट उत्पादन  →  चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों का अनुप्रयोग (मरम्मत, पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण)  →  संसाधन दक्षता में वृद्धि और अपशिष्ट में कमी  →  पर्यावरणीय प्रभाव में कमी और आर्थिक मूल्य का सृजन  →  टिकाऊ विकास और हरित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 का आयोजन गांधीनगर, गुजरात में किया जा रहा है।
2. चक्रीय अर्थव्यवस्था का सिद्धांत ‘उपयोग करो और फेंको’ (use and throw) की अवधारणा पर आधारित है।
3. भारत की पारंपरिक संस्कृति में संसाधनों के पुन: उपयोग और मरम्मत के सिद्धांत निहित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि WCEF 2026 का उद्घाटन गांधीनगर में हुआ है। कथन 2 गलत है क्योंकि चक्रीय अर्थव्यवस्था ‘उपयोग करो और फेंको’ के विपरीत, संसाधनों के पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और मरम्मत पर केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत की परंपरा में संसाधनों के पुन: उपयोग और मरम्मत के सिद्धांत गहराई से समाए हुए हैं।

Q2. अभिकथन (A): चक्रीय अर्थव्यवस्था सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कारण (R): यह संसाधनों के कुशल उपयोग, अपशिष्ट न्यूनीकरण और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने पर केंद्रित है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि चक्रीय अर्थव्यवस्था सतत विकास के लिए आवश्यक है। कारण (R) भी सही है और A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि चक्रीय अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धांत संसाधनों का कुशल उपयोग, अपशिष्ट को कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करना है, जो सीधे सतत विकास से जुड़ा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए, सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की प्राप्ति में इसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। भारत में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों और चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: चक्रीय अर्थव्यवस्था की परिभाषा (संसाधनों का पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग, मरम्मत) और ‘उपयोग करो और फेंको’ मॉडल से इसका अंतर।
2. सतत विकास लक्ष्यों में भूमिका: SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन), SDG 8 (अच्छा काम और आर्थिक विकास), SDG 9 (उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा), SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) आदि के साथ इसका संबंध। संसाधन दक्षता, अपशिष्ट न्यूनीकरण, प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान।
3. भारत में प्रयास: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) नियम, विभिन्न क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन नियम, मिशन लाइफ (LiFE) का महत्व, पारंपरिक भारतीय लोकाचार (मरम्मत, पुन: उपयोग) का उल्लेख।
4. चुनौतियाँ: जागरूकता की कमी, तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, अनौपचारिक क्षेत्र का वर्चस्व, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव की आवश्यकता।
5. निष्कर्ष: चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत समर्थन, नवाचार और जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: गुजरात में आयोजित होने वाले ‘विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (डब्ल्यूसीईएफ) 2026’ के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए प्रमुख केंद्रीय मंत्री कौन हैं?

  1. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री
  2. केंद्रीय वित्त मंत्री
  3. केंद्रीय गृह मंत्री
  4. केंद्रीय रक्षा मंत्री

उत्तर: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री — गुजरात के गांधीनगर में आयोजित डब्ल्यूसीईएफ 2026 के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री शामिल हुए थे।

Mains: गुजरात सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (डब्ल्यूसीईएफ) 2026’ के महत्व और इसके माध्यम से राज्य में अपनाई जाने वाली संभावित पर्यावरणीय एवं आर्थिक नीतियों पर चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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