17 Sep AI नियमों के लिए UN की पहल: क्या है वैश्विक दृष्टिकोण?
✎ संयुक्त राष्ट्र AI के सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करने तथा इसके वैश्विक जोखिमों का प्रबंधन करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एक नियम-आधारित ढाँचा स्थापित करने हेतु 'ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट' के तहत…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र (UN), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट (Global Digital Compact), भविष्य के लिए समझौता (Pact for the Future), स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल (Independent International Scientific Panel), AI शासन पर वैश्विक संवाद (Global Dialogue on AI Governance)
- Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर, चुनौतियाँ और मानव भविष्य पर प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक शासन की आवश्यकताएँ: उभरती प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में
त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र AI के सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करने तथा इसके वैश्विक जोखिमों का प्रबंधन करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एक नियम-आधारित ढाँचा स्थापित करने हेतु ‘ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट’ के तहत ‘स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल’ और ‘AI शासन पर वैश्विक संवाद’ जैसी पहलें कर रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से हो रहे विकास और इससे उत्पन्न होने वाले वैश्विक जोखिमों को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र (UN) AI शासन के लिए साझा सिद्धांतों और प्रतिबद्धताओं को अपनाने हेतु देशों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने AI के सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया है, क्योंकि AI के जोखिम अक्सर राष्ट्रीय सीमाओं से परे होते हैं।
पृष्ठभूमि
- AI प्रौद्योगिकियाँ तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे समाज और सरकारों के लिए इसके लाभों को प्राप्त करने के साथ-साथ इसके जोखिमों का प्रबंधन करने के बारे में प्रश्न उठ रहे हैं।
- एक पूर्व AI शोधकर्ता ने चेतावनी दी है कि AI मानवता के लिए एक अस्तित्वगत खतरा पैदा कर सकता है, जिससे इन चिंताओं में वृद्धि हुई है।
- संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि AI के वैश्विक जोखिमों को संबोधित करने का सबसे अच्छा तरीका देशों को एक साथ लाकर AI शासन पर साझा सिद्धांतों और प्रतिबद्धताओं को अपनाना है।
- राष्ट्रीय कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन वैश्विक समन्वय अपरिहार्य है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने रेखांकित किया है।
- AI शासन पर संयुक्त राष्ट्र का वर्तमान कार्य 2024 में सदस्य देशों द्वारा अपनाए गए ‘ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट’ से उपजा है, जो ‘भविष्य के लिए समझौता’ (Pact for the Future) का हिस्सा है।
AI शासन पर संयुक्त राष्ट्र की पहलें क्या हैं?
- संयुक्त राष्ट्र कई वर्षों से एक ऐसा मंच प्रदान करने के लिए काम कर रहा है जहाँ देश AI प्रौद्योगिकियों की साझा समझ विकसित कर सकें और सुरक्षा, मानवाधिकार और पहुँच में असमानताओं जैसे मुद्दों पर सहयोग और नियामक ढाँचा प्रदान करने पर चर्चा कर सकें।
- ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट (Global Digital Compact): यह 2024 में संयुक्त राष्ट्र के ‘भविष्य के लिए समझौता’ (Pact for the Future) के हिस्से के रूप में सदस्य देशों द्वारा अपनाया गया था। इसने AI पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया और दो नए तंत्र प्रस्तावित किए।
- स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल (Independent International Scientific Panel on AI): इसका उद्देश्य सरकारों को तेजी से विकसित हो रही AI प्रौद्योगिकी के बारे में ज्ञात और अज्ञात तथ्यों का एक स्वतंत्र मूल्यांकन प्रदान करना है।
- AI शासन पर वैश्विक संवाद (Global Dialogue on AI Governance): यह सरकारों और अन्य हितधारकों को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा करने, अनुभव साझा करने और AI शासन के विभिन्न दृष्टिकोणों के बीच अधिक अनुकूलता की दिशा में काम करने के लिए एक साथ लाता है।
- ये दोनों संस्थाएँ एक-दूसरे के पूरक के रूप में डिज़ाइन की गई हैं: वैज्ञानिक पैनल साक्ष्य प्रदान करता है, और देश वैश्विक संवाद में तय करते हैं कि प्रतिक्रिया में क्या करना है।
- वैज्ञानिक पैनल की पहली प्रारंभिक रिपोर्ट (1 जुलाई को जारी) ने AI की क्षमताओं में तेजी से प्रगति (विशेषकर तर्क, कोडिंग और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में) का निष्कर्ष निकाला, जिससे महत्वपूर्ण अवसर पैदा हुए।
- रिपोर्ट में गलत सूचना, भेदभाव, गोपनीयता उल्लंघन, साइबर हमले और तथाकथित ‘सुपरइंटेलिजेंस’ जैसे जोखिमों की भी पहचान की गई, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट (Global Digital Compact) | संयुक्त राष्ट्र के ‘भविष्य के लिए समझौता’ (Pact for the Future) का हिस्सा, AI पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आधार। |
| AI पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल (Independent International Scientific Panel on AI) | सरकारों को AI के जोखिमों और अवसरों का स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रदान करता है। |
| AI शासन पर वैश्विक संवाद (Global Dialogue on AI Governance) | AI शासन के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और अनुकूलता पर चर्चा के लिए मंच। |
| सुरक्षा, मानवाधिकार और पहुँच में असमानता | AI के वैश्विक जोखिमों को संबोधित करने और एक नियामक ढाँचा प्रदान करने के लिए प्रमुख विचारणीय क्षेत्र। |
| तेजी से विकसित होती AI क्षमताएँ | तर्क, कोडिंग और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में AI की तीव्र प्रगति, महत्वपूर्ण अवसर और जोखिम पैदा करती है। |
महत्व
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शासन
- AI के वैश्विक जोखिमों को प्रबंधित करने और इसके लाभों को प्राप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझा सिद्धांतों का विकास महत्वपूर्ण है।
- संयुक्त राष्ट्र विभिन्न देशों को एक साथ लाकर AI शासन के लिए एक साझा समझ और नियामक ढाँचा विकसित करने का प्रयास कर रहा है।
तकनीकी मूल्यांकन और नीति निर्माण
- स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल AI की क्षमताओं, जोखिमों और अवसरों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन प्रदान करता है, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए आवश्यक है।
- वैश्विक संवाद विभिन्न हितधारकों को AI शासन के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और संगत दृष्टिकोणों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है।
मानवाधिकार और सुरक्षा
- AI से उत्पन्न होने वाले गलत सूचना, भेदभाव, गोपनीयता उल्लंघन और साइबर हमलों जैसे जोखिमों को संबोधित करना मानव अधिकारों की सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- AI के सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों और अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है।
चुनौतियाँ
1. AI के जोखिमों का प्रबंधन
- AI से उत्पन्न होने वाले गलत सूचना, भेदभाव, गोपनीयता उल्लंघन, साइबर हमले और ‘सुपरइंटेलिजेंस’ जैसे जोखिमों को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है।
- ये जोखिम अक्सर राष्ट्रीय सीमाओं से परे होते हैं, जिससे उनके प्रबंधन के लिए वैश्विक समन्वय अनिवार्य हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
2. नियामक ढाँचे का विकास
- AI की तीव्र प्रगति के साथ कदम मिलाकर चलने वाला एक प्रभावी और अनुकूलनीय नियामक ढाँचा विकसित करना कठिन है।
- विभिन्न देशों के बीच AI शासन के दृष्टिकोणों में संगतता सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
3. पहुँच में असमानता
- AI प्रौद्योगिकियों तक पहुँच में असमानताएँ डिजिटल विभाजन को और बढ़ा सकती हैं, जिससे विकासशील देशों को AI के लाभों से वंचित होना पड़ सकता है।
- यह असमानता AI के नैतिक और समावेशी विकास के लिए एक बाधा है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
4. अंतर्राष्ट्रीय समन्वय की कमी
- राष्ट्रीय स्तर पर AI के विकास को धीमा करने के स्वैच्छिक प्रयास यदि अलग-थलग और असत्यापनीय हैं, तो वे पर्याप्त नहीं होंगे।
- AI के सुरक्षित और जिम्मेदार विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रतिबद्धताओं का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| गलत सूचना और दुष्प्रचार | AI-जनित सामग्री से समाज में भ्रम और ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। |
| भेदभाव और पूर्वाग्रह | AI एल्गोरिदम में निहित पूर्वाग्रह सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकते हैं। |
| गोपनीयता का उल्लंघन | AI द्वारा बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह और विश्लेषण व्यक्तिगत गोपनीयता के लिए खतरा पैदा करता है। |
| साइबर हमले और सुरक्षा | AI-सक्षम साइबर हमले अधिक परिष्कृत और विनाशकारी हो सकते हैं। |
| नियंत्रण से बाहर ‘सुपरइंटेलिजेंस’ | भविष्य में अत्यधिक शक्तिशाली AI प्रणालियों को नियंत्रित करने की क्षमता पर चिंताएँ। |
आगे की राह
- AI के सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास के लिए एक मजबूत अंतर्राष्ट्रीय नियामक ढाँचा विकसित किया जाना चाहिए।
- संयुक्त राष्ट्र के मंचों जैसे AI पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल और AI शासन पर वैश्विक संवाद का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
- AI के नैतिक सिद्धांतों और मानवाधिकारों के सम्मान को AI के विकास और तैनाती के केंद्र में रखा जाना चाहिए।
- AI प्रौद्योगिकियों तक पहुँच में असमानताओं को कम करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएँ।
- AI के जोखिमों और अवसरों का निरंतर वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी की जाए ताकि नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में मदद मिल सके।
- सरकारों, निजी क्षेत्र, शिक्षाविदों और नागरिक समाज सहित सभी हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- AI के संभावित ‘अस्तित्वगत खतरों’ का आकलन करने और उनसे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस रणनीतियाँ बनाई जाएँ।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन · संयुक्त राष्ट्र · वैश्विक डिजिटल समझौता · भविष्य के लिए समझौता · स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल · AI जोखिम · AI अवसर · गलत सूचना · साइबर हमले · मानवाधिकार
अवधारणा प्रवाह
AI का तीव्र विकास → वैश्विक जोखिमों और अवसरों का उदय → संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट का प्रस्ताव → AI पर वैज्ञानिक पैनल और वैश्विक संवाद की स्थापना → साझा सिद्धांतों और नियामक ढाँचे का विकास → AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2025 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की स्थापना की।
2. वैश्विक डिजिटल समझौता 2024 में संयुक्त राष्ट्र के ‘भविष्य के लिए समझौता’ के हिस्से के रूप में अपनाया गया था।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल का उद्देश्य सरकारों को AI के जोखिमों और अवसरों का स्वतंत्र मूल्यांकन प्रदान करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अगस्त 2025 में स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की औपचारिक रूप से स्थापना की थी। कथन 2 सही है क्योंकि वैश्विक डिजिटल समझौता 2024 में ‘भविष्य के लिए समझौता’ के हिस्से के रूप में अपनाया गया था। कथन 3 भी सही है क्योंकि पैनल का मुख्य उद्देश्य AI के जोखिमों और अवसरों का स्वतंत्र मूल्यांकन प्रदान करना है।
Q2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. AI के विकास में वैश्विक समन्वय राष्ट्रीय कार्रवाई की तुलना में कम महत्वपूर्ण है।
2. AI से जुड़े जोखिमों में गलत सूचना, भेदभाव और गोपनीयता का उल्लंघन शामिल हो सकते हैं।
सही उत्तर का चयन करें:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि ‘राष्ट्रीय कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन वैश्विक समन्वय अपरिहार्य है।’ कथन 2 सही है क्योंकि पैनल की रिपोर्ट में गलत सूचना, भेदभाव, गोपनीयता उल्लंघन और साइबर हमले जैसे जोखिमों की पहचान की गई है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बढ़ते परिदृश्य में, संयुक्त राष्ट्र AI शासन के लिए साझा सिद्धांतों और प्रतिबद्धताओं को अपनाने हेतु देशों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है। इस संदर्भ में, AI से जुड़े प्रमुख जोखिमों और अवसरों पर चर्चा करें तथा AI के सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करने में वैश्विक सहयोग के महत्व का मूल्यांकन करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की तीव्र प्रगति और इसके वैश्विक प्रभावों का संक्षिप्त परिचय। संयुक्त राष्ट्र की AI शासन पहल का उल्लेख।
2. **AI से जुड़े प्रमुख अवसर:**
* आर्थिक संवृद्धि और नवाचार।
* स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सुधार।
* तर्क, कोडिंग और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में क्षमताओं का विस्तार।
* सामाजिक चुनौतियों का समाधान (जैसे जलवायु परिवर्तन)।
3. **AI से जुड़े प्रमुख जोखिम:**
* गलत सूचना (misinformation) और दुष्प्रचार (disinformation)।
* भेदभाव (discrimination) और पूर्वाग्रह (bias)।
* गोपनीयता का उल्लंघन (privacy violations)।
* साइबर हमले (cyberattacks) और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
* ‘सुपरइंटेलिजेंस’ का उदय और नियंत्रण खोने का जोखिम।
* रोजगार पर प्रभाव।
4. **वैश्विक सहयोग का महत्व:**
* AI जोखिमों की सीमा-पार प्रकृति।
* मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
* पहुँच में असमानताओं को कम करना।
* एक साझा नियामक ढाँचा (regulatory framework) विकसित करना।
* संयुक्त राष्ट्र की पहलें: वैश्विक डिजिटल समझौता (Global Digital Compact), स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल (Independent International Scientific Panel) और AI शासन पर वैश्विक संवाद (Global Dialogue on AI Governance) का उल्लेख।
* सुरक्षित, संरक्षित और जिम्मेदार विकास सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों और दिशानिर्देशों की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** AI के लाभों को अधिकतम करने और जोखिमों को कम करने के लिए वैश्विक, बहु-हितधारक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best PSIR optional coaching for upsc
- Best PSIR optional teacher for upsc
- Best teacher of PSIR optional for upsc
- Best PSIR optional coaching in delhi for UPSC
- AI नियमों के लिए UN की पहल: क्या है वैश्विक दृष्टिकोण? - September 17, 2026
- UN’s AI Governance Push: Can Global Rules Prevent Existential Risks? - September 17, 2026
- अल्लाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म और जीवनसाथी चुनने का अधिकार - September 17, 2026

No Comments