16 Sep तमिलनाडु: कामराज नाश्ता योजना विस्तार का शुभारंभ 22 सितंबर तक टला
✎ पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना तमिलनाडु सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक नाश्ता प्रदान करके उनके पोषण और शिक्षा को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय: गरीबी और भूख से संबंधित मुद्दे, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। | GS Paper II — शासन: सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
- Prelims: पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना, तमिलनाडु सरकार की योजनाएँ, मॉडल आचार संहिता (MCC), सामाजिक कल्याण योजनाएँ, कुपोषण, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा का अधिकार
- Essay: भारत में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने में कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका।, बच्चों के पोषण और शिक्षा पर सरकारी हस्तक्षेप का प्रभाव।
त्वरित पुनरावृत्ति: पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना तमिलनाडु सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक नाश्ता प्रदान करके उनके पोषण और शिक्षा को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना (Perunthalaivar Kamarajar Breakfast Scheme) के विस्तार को 22 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह विस्तार मुख्यमंत्री की लंदन यात्रा के कारण टाला गया है। यह योजना अब चेन्नई में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए शुरू की जाएगी और चेंगलपट्टू तथा तिरुप्पुर जिलों को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में लागू की जाएगी, जहाँ उपचुनावों के कारण मॉडल आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है।
पृष्ठभूमि
- भारत में बच्चों के बीच कुपोषण (Malnutrition) और स्कूल छोड़ने की दर (Dropout Rate) एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
- सरकारी योजनाओं, जैसे मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme), का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना और स्कूल में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है।
- तमिलनाडु राज्य ने शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई अग्रणी पहल की हैं, जिनमें बच्चों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की योजनाएँ भी शामिल हैं।
- पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना का नाम तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- मॉडल आचार संहिता (MCC) चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का एक सेट है, जिसे राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव से पहले और उसके दौरान पालन करना होता है, ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किया जा सके।
- इस योजना का विस्तार बच्चों के समग्र विकास और शिक्षा में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना क्या है?
- यह तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू की गई एक सामाजिक कल्याण योजना है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराना है।
- यह योजना विशेष रूप से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, भूख को कम करने और स्कूल में उनकी उपस्थिति बढ़ाने पर केंद्रित है।
- योजना का नाम तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पेरुन्थलाइवर कामराजर के सम्मान में रखा गया है, जो शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।
- वर्तमान विस्तार के तहत, यह योजना कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को कवर करेगी, जिससे अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सकेगा।
- यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू की जाएगी, सिवाय उन क्षेत्रों के जहाँ उपचुनावों के कारण मॉडल आचार संहिता प्रभावी है।
- इसका उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ और सक्रिय रखने के साथ-साथ उन्हें अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है।
- यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और अनुच्छेद 47 (पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य) के सिद्धांतों के अनुरूप है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना | यह योजना तमिलनाडु सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में कक्षा I से V तक के छात्रों को सुबह का नाश्ता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। |
| विस्तार का स्थगन | योजना का विस्तार, जिसमें कक्षा VI से VIII तक के छात्रों को शामिल किया जाना था, मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा के कारण स्थगित कर दिया गया है। |
| नई लॉन्च तिथि | विस्तार अब 22 सितंबर को चेन्नई में मुख्यमंत्री द्वारा लॉन्च किया जाएगा। |
| कवरेज का विस्तार | चेन्नई के अलावा, चेंगलपट्टू और तिरुप्पुर को छोड़कर सभी जिलों में योजना का विस्तार किया जाएगा। |
| आदर्श आचार संहिता | चेंगलपट्टू और तिरुप्पुर में उपचुनावों के कारण आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है, इसलिए वहां विस्तार नहीं किया जाएगा। |
| थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम | नवजात शिशुओं को एक ग्राम सोने की अंगूठी प्रदान करने वाली इस योजना का लॉन्च भी मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा के कारण स्थगित कर दिया गया है। |
महत्व
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- सरकारी स्कूलों में छात्रों को पौष्टिक नाश्ता प्रदान करने से उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार होता है, जिससे सीखने की क्षमता बढ़ती है।
- यह योजना विशेष रूप से वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए स्कूल में उपस्थिति और ठहराव दर बढ़ाने में मदद करती है, जिससे शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित होती है।
- पोषण संबंधी सहायता प्रदान करके, यह योजना बाल कुपोषण (child malnutrition) को कम करने और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देने में योगदान करती है।
शासन और नीतिगत निहितार्थ
- योजनाओं के विस्तार का स्थगन प्रशासनिक लचीलेपन और अप्रत्याशित परिस्थितियों के अनुकूल होने की आवश्यकता को दर्शाता है।
- आदर्श आचार संहिता के कारण कुछ जिलों में योजना के विस्तार को रोकने का निर्णय चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अखंडता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है।
- ऐसी योजनाओं का कार्यान्वयन राज्य सरकारों की सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के उनके प्रयासों को दर्शाता है।
शैक्षिक महत्व
- कक्षा VI से VIII तक के छात्रों को शामिल करने से यह सुनिश्चित होता है कि माध्यमिक शिक्षा के प्रारंभिक चरणों में भी छात्रों को पोषण संबंधी सहायता मिलती रहे, जो उनकी शैक्षणिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्वस्थ और पोषित छात्र बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और अकादमिक रूप से अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं, जिससे समग्र शैक्षिक परिणाम बेहतर होते हैं।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में देरी
- योजनाओं के लॉन्च या विस्तार में देरी से लाभार्थियों तक लाभ पहुंचने में विलंब होता है, जिससे उनके जीवन पर संभावित नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- बार-बार होने वाली देरी से सार्वजनिक विश्वास कम हो सकता है और सरकार की दक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं और विकास उद्योग
2. आदर्श आचार संहिता का प्रभाव
- आदर्श आचार संहिता के कारण कुछ क्षेत्रों में कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को रोकना उन क्षेत्रों के नागरिकों को तत्काल लाभ से वंचित कर सकता है।
- यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है कि आचार संहिता के दौरान आवश्यक कल्याणकारी सेवाएं बाधित न हों, जबकि चुनावी निष्पक्षता भी बनी रहे।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था
3. वित्तीय और तार्किक चुनौतियाँ
- बड़े पैमाने पर नाश्ता योजना के विस्तार के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (supply chain management) की आवश्यकता होती है, जिसमें खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और वितरण शामिल है।
- गुणवत्ता नियंत्रण और स्वच्छता मानकों को बनाए रखना, विशेष रूप से खाद्य-आधारित योजनाओं में, एक महत्वपूर्ण तार्किक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, योजना और संसाधन जुटाना
4. योजना का सतत संचालन
- यह सुनिश्चित करना कि योजनाएं दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हों और राजनीतिक परिवर्तनों या वित्तीय बाधाओं से प्रभावित न हों, एक सतत चुनौती है।
- योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार समायोजन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| योजना विस्तार का स्थगन | लाभार्थियों तक लाभ पहुंचने में विलंब, विशेषकर छात्रों के पोषण और शिक्षा पर प्रभाव। |
| आदर्श आचार संहिता का प्रभाव | उपचुनाव वाले क्षेत्रों में नागरिकों को कल्याणकारी लाभों से अस्थायी रूप से वंचित करना। |
| वित्तीय और तार्किक प्रबंधन | बड़े पैमाने पर योजना के लिए पर्याप्त धन, खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और वितरण सुनिश्चित करना। |
| गुणवत्ता और स्वच्छता | खाद्य-आधारित योजनाओं में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों को बनाए रखना। |
| दीर्घकालिक स्थिरता | योजना के सतत संचालन और भविष्य में राजनीतिक या वित्तीय बाधाओं के बावजूद इसकी निरंतरता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना (Perunthalaivar Kamarajar Breakfast Scheme)
आगे की राह
- योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
- आदर्श आचार संहिता के दौरान भी आवश्यक कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के लिए चुनाव आयोग के परामर्श से मानक संचालन प्रक्रियाएं (Standard Operating Procedures) विकसित की जानी चाहिए।
- योजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तीय आवंटन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि उनके दीर्घकालिक संचालन में कोई बाधा न आए।
- खाद्य-आधारित योजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और स्वच्छता मानकों को बनाए रखने के लिए सख्त प्रोटोकॉल और नियमित निरीक्षण लागू किए जाने चाहिए।
- लाभार्थियों की आवश्यकताओं और योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए नियमित मूल्यांकन और प्रतिक्रिया तंत्र (feedback mechanism) स्थापित किए जाने चाहिए।
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रभावी संचार रणनीतियाँ अपनाई जानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 21A’: ‘शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है।’}
- {‘अनुच्छेद 47’: ‘राज्य का कर्तव्य है कि वह पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाए।’}
अवधारणा प्रवाह
मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा → योजनाओं के लॉन्च/विस्तार में देरी → आदर्श आचार संहिता का प्रभाव → कुछ जिलों में योजना का स्थगन → संशोधित लॉन्च तिथि की घोषणा → लाभार्थियों तक कल्याणकारी लाभों का पहुंचना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 21A शिक्षा के अधिकार से संबंधित है।
2. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) में बच्चों के लिए पोषण और जीवन स्तर में सुधार का प्रावधान है।
3. मॉडल आचार संहिता (MCC) केवल लोकसभा चुनावों के दौरान लागू होती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 21A 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने का कर्तव्य सौंपता है। कथन 3 गलत है। मॉडल आचार संहिता लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों के दौरान लागू होती है।
Q2. अभिकथन (A): पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना जैसी योजनाएँ भारत में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कारण (R): भारत के संविधान के अनुच्छेद 47 में राज्य को पोषण स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने का निर्देश दिया गया है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि ऐसी योजनाएँ बच्चों के पोषण और शिक्षा में सुधार करती हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि अनुच्छेद 47 राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का हिस्सा है जो पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार का निर्देश देता है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि अनुच्छेद 47 में निहित संवैधानिक जनादेश ऐसी योजनाओं के महत्व को रेखांकित करता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का उद्देश्य नहीं है?
- एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना।
- सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र सुनिश्चित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना।
- न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना।
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना। — अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना (अनुच्छेद 51) DPSP का एक उद्देश्य है। बाकी सभी भी DPSP के उद्देश्य हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना जैसे कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: DPSP का संक्षिप्त परिचय और बच्चों के पोषण व शिक्षा से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख। (अनुच्छेद 39(f), 45, 47)
2. DPSP की भूमिका: बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए DPSP के महत्व पर चर्चा करें। यह बताएं कि कैसे DPSP एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करते हैं और कैसे अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) जैसे मौलिक अधिकारों को DPSP से प्रेरणा मिली है।
3. पेरुन्थलाइवर कामराजर नाश्ता योजना का संदर्भ: योजना का संक्षिप्त विवरण और यह कैसे DPSP के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है (उदाहरण के लिए, स्कूल में उपस्थिति बढ़ाना, पोषण में सुधार)।
4. चुनौतियों का सामना: योजना की सफलता सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करें। इसमें शामिल हो सकते हैं:
क. वित्तीय बाधाएँ और संसाधनों की कमी।
ख. कार्यान्वयन में अक्षमता और भ्रष्टाचार।
ग. निगरानी और मूल्यांकन की कमी।
घ. सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ और जागरूकता का अभाव।
ङ. राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतरता की कमी।
च. मॉडल आचार संहिता जैसी स्थितियाँ जो कार्यान्वयन में देरी का कारण बनती हैं।
5. आगे का रास्ता/सुझाव: इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए उपाय सुझाएँ, जैसे कि मजबूत निगरानी प्रणाली, सामुदायिक भागीदारी, पर्याप्त धन आवंटन, और अंतर-विभागीय समन्वय।
6. निष्कर्ष: बच्चों के समग्र विकास के लिए DPSP-आधारित योजनाओं के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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